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नई दिल्ली। दीपावली का त्योहार नजदीक आते ही देश की राजधानी दिल्ली में बाजारों की रौनक बढ़ने लगी है। इसी बीच दिल्ली का लोकप्रिय ‘ब्लाइंड स्कूल दिवाली मेला’ एक बार फिर लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया है। रोशनी, रंगों, हस्तशिल्प और उत्सवी खरीदारी से सजे इस मेले में इस बार भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। खास बात यह है कि यह आयोजन केवल दीपावली की खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों की प्रतिभा, हुनर, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बना हुआ है।
द ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन, दिल्ली की ओर से आयोजित यह लोकप्रिय दिवाली बाजार 5 नवंबर तक संस्था परिसर में लगाया जा रहा है। होटल ओबेरॉय के समीप लाल बहादुर शास्त्री मार्ग स्थित इस परिसर में प्रतिदिन सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक आगंतुक खरीदारी कर सकते हैं। मेले में 250 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं, जहां देश के विभिन्न हिस्सों से आए विक्रेता अपने उत्पादों की आकर्षक श्रृंखला लेकर पहुंचे हैं। सबसे खास बात यह है कि मेले में प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है, जिससे अधिक से अधिक लोग इस आयोजन का हिस्सा बन सकें।
यह मेला पिछले 45 वर्षों से अधिक समय से दिल्ली की दीपावली परंपरा का हिस्सा बना हुआ है। वर्ष 1980 में दृष्टिबाधित कारीगरों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित मोमबत्तियों और दीयों की बिक्री से शुरू हुआ यह आयोजन आज राजधानी के प्रमुख उत्सवी बाजारों में अपनी अलग पहचान बना चुका है। समय के साथ इस मेले का स्वरूप विस्तृत हुआ है और अब यहां खरीदारी के साथ सामाजिक जागरूकता, कौशल विकास, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी अनूठा संगम देखने को मिलता है।
ब्लाइंड स्कूल दिवाली मेले की शुरुआत एक छोटे से प्रयास के रूप में हुई थी। इसका मूल उद्देश्य दृष्टिबाधित कारीगरों को उनके द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री के लिए उचित मंच उपलब्ध कराना था। उस समय हस्तनिर्मित मोमबत्तियां और दीये इस आयोजन का मुख्य आकर्षण हुआ करते थे। धीरे-धीरे लोगों का जुड़ाव बढ़ता गया और यह आयोजन दिल्लीवासियों की दीपावली खरीदारी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
इस मेले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आने वाला प्रत्येक व्यक्ति अपनी खरीदारी के माध्यम से एक सामाजिक उद्देश्य से भी जुड़ता है। यहां से खरीदे जाने वाले उत्पादों की बिक्री से दृष्टिबाधित व्यक्तियों के कौशल और उनके श्रम को प्रोत्साहन मिलता है। साथ ही संस्था के शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास कार्यक्रमों को भी सहयोग प्राप्त होता है।
आज यह मेला केवल बाजार नहीं, बल्कि ऐसा मंच बन गया है जहां समाज के विभिन्न वर्ग एक साथ आते हैं और दिवाली के त्योहार को समानता, सम्मान और आत्मनिर्भरता के संदेश के साथ मनाते हैं।
इस वर्ष मेले में 250 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों से आए विक्रेता अपने उत्पादों की विविधता प्रस्तुत कर रहे हैं। यहां पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प से लेकर आधुनिक डिजाइनर उत्पादों तक खरीदारी के अनेक विकल्प उपलब्ध हैं।
आगंतुकों को यहां हस्तनिर्मित एवं डिजाइनर परिधान, आकर्षक फुटवियर, आभूषण, हैंडबैग, होम डेकोर, दीपावली उपहार, कॉस्मेटिक्स, खिलौने, बागवानी से जुड़ी सामग्री, हर्बल उत्पाद और विभिन्न प्रकार के पैकेज्ड खाद्य पदार्थ देखने और खरीदने का अवसर मिल रहा है।
त्योहार के मौसम में घरों को सजाने, रिश्तेदारों और मित्रों को उपहार देने तथा व्यक्तिगत खरीदारी के लिए यहां कई तरह के विकल्प उपलब्ध हैं। एक ही परिसर में इतनी बड़ी संख्या में स्टॉल होने के कारण आगंतुकों को अलग-अलग बाजारों में जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
मेले में पारंपरिक और आधुनिक उत्पादों का मेल भी देखने को मिल रहा है। एक तरफ हस्तनिर्मित वस्तुएं लोगों को भारतीय शिल्पकला की याद दिलाती हैं, तो दूसरी ओर आधुनिक जीवनशैली से जुड़े उत्पाद युवा खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं।
इस आयोजन की एक और विशेषता यह है कि इसमें 100 से अधिक गैर-सरकारी संगठनों यानी एनजीओ को अपने उत्पादों और सामाजिक गतिविधियों को प्रदर्शित करने का अवसर दिया गया है।
ये संस्थाएं देश के अलग-अलग हिस्सों में वंचित समुदायों, जरूरतमंद परिवारों, स्थानीय कारीगरों और दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए काम कर रही हैं। मेले में उन्हें अपने उत्पादों की बिक्री और अपने कार्यों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने का मंच मिलता है।
इस व्यवस्था से छोटे सामाजिक संगठनों और स्थानीय उत्पाद निर्माताओं को भी अपनी पहचान बनाने का अवसर मिलता है। कई ऐसे कारीगर और समूह हैं जिनके उत्पादों की गुणवत्ता अच्छी होती है, लेकिन बाजार तक उनकी पहुंच सीमित रहती है। इस प्रकार के आयोजनों से उन्हें सीधे ग्राहकों से जुड़ने और अपने काम को आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
मेले का सबसे विशेष आकर्षण द ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन के दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पाद हैं। संस्था के प्रशिक्षुओं ने 80 से अधिक प्रकार की मोमबत्तियां और दीये तैयार किए हैं।
इन उत्पादों में अलग-अलग डिजाइन, आकार, रंग और सजावटी स्वरूप देखने को मिलते हैं। दीपावली की सजावट के लिए आकर्षक दीये और मोमबत्तियां खरीदने वाले लोगों के लिए ये विशेष विकल्प हैं।
इन उत्पादों के पीछे केवल कलात्मकता ही नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, मेहनत, लगन और आत्मनिर्भर बनने की इच्छा भी जुड़ी हुई है। दृष्टिबाधित प्रशिक्षु अपने कौशल के माध्यम से यह प्रदर्शित कर रहे हैं कि उचित प्रशिक्षण और अवसर मिलने पर वे भी उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर सकते हैं।
यह पहल समाज में दिव्यांगजनों को लेकर प्रचलित धारणाओं को बदलने की दिशा में भी महत्वपूर्ण संदेश देती है। व्यक्ति की क्षमता का मूल्यांकन उसकी शारीरिक स्थिति के आधार पर नहीं, बल्कि उसके कौशल, प्रतिभा और कार्य के आधार पर होना चाहिए।
इस बार मेले में पर्यावरण संरक्षण को भी विशेष महत्व दिया गया है। संस्था द्वारा उत्पादों की पैकेजिंग के लिए पुरानी ब्रेल शीट और पुनर्चक्रित कपड़ों का उपयोग किया जा रहा है।
पुरानी सामग्री को दोबारा उपयोग में लाने की यह पहल संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और कचरे को कम करने की सोच को प्रोत्साहित करती है। इसके माध्यम से संस्था यह संदेश देने का प्रयास कर रही है कि त्योहारों की खुशियां मनाने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है।
हस्तनिर्मित उत्पादों और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग का संयोजन इस मेले को एक अलग पहचान देता है। इससे लोगों को स्थानीय उत्पादों, पुनर्चक्रण और टिकाऊ जीवनशैली के महत्व के बारे में जागरूक होने का अवसर मिलता है।
ब्लाइंड स्कूल दिवाली मेले का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य संस्था के शिक्षा एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सहयोग प्रदान करना है।
मेले से प्राप्त राशि में उत्पादों की बिक्री और स्टॉल किराये से होने वाली आय शामिल होती है। इस राशि से संस्था के निःशुल्क शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन में सहायता मिलती है।
इस तरह मेले में आने वाले लोग केवल अपनी जरूरत का सामान नहीं खरीदते, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षा और प्रशिक्षण की सुविधाओं को भी सहयोग प्रदान करते हैं।
संस्था का प्रयास है कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के लिए जरूरी कौशल उपलब्ध कराया जाए। उन्हें इस योग्य बनाया जाए कि वे आत्मविश्वास के साथ अपने जीवन के निर्णय ले सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
मेले में गेट नंबर एक के सामने स्थित ‘कैफे मस्त’ आगंतुकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र है। इस कैफे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका संचालन पूरी तरह संस्था के मल्टी-स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम से जुड़े दृष्टिबाधित प्रशिक्षु करते हैं।
यहां बेकरी उत्पाद, सैंडविच, बर्गर, कुकीज और विभिन्न प्रकार के पेय पदार्थ उपलब्ध हैं। प्रशिक्षु केवल ग्राहकों को भोजन परोसने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खाद्य सामग्री तैयार करने, ग्राहकों से बातचीत करने, ऑर्डर लेने और लेन-देन की जिम्मेदारी भी स्वयं संभालते हैं।
इस तरह कैफे उनके लिए वास्तविक कार्यस्थल का अनुभव प्राप्त करने का माध्यम बनता है। यहां उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण के साथ ग्राहकों के साथ संवाद करने, टीम में काम करने, समय प्रबंधन और सेवा संबंधी कौशल विकसित करने का अवसर मिलता है।
कैफे मस्त यह भी दिखाता है कि दृष्टिबाधित युवा आतिथ्य और खाद्य सेवा जैसे क्षेत्रों में भी अपनी भूमिका निभा सकते हैं। उचित प्रशिक्षण और कार्यस्थल पर आवश्यक सहयोग मिलने से वे विभिन्न व्यवसायों का सफलतापूर्वक संचालन कर सकते हैं।
मेले में आगंतुकों के लिए दो विशेष मसाज केंद्र भी बनाए गए हैं। यहां संस्था से प्रशिक्षित और प्रमाणित दृष्टिबाधित विशेषज्ञों द्वारा सिर, कंधे और पैरों की मसाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
यह व्यवस्था व्यावसायिक प्रशिक्षण के माध्यम से रोजगार के अवसर विकसित करने का एक और उदाहरण है। मसाज सेवाओं में प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले दृष्टिबाधित व्यक्तियों को अपनी विशेषज्ञता प्रदर्शित करने और व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का अवसर मिलता है।
इससे यह संदेश भी सामने आता है कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए कौशल आधारित रोजगार के अनेक क्षेत्र उपलब्ध हो सकते हैं। जरूरत केवल उचित प्रशिक्षण, अवसर और सामाजिक स्वीकार्यता की है।
खरीदारी के साथ खानपान का आनंद लेने के लिए मेले में गेट नंबर तीन के सामने विशेष फूड कोर्ट भी बनाया गया है।
यहां थाई व्यंजनों से लेकर दक्षिण भारतीय पकवानों तक विभिन्न प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन और जलपान उपलब्ध हैं। परिवार और दोस्तों के साथ मेले में आने वाले लोग खरीदारी के बाद यहां अलग-अलग स्वाद का आनंद ले सकते हैं।
फूड कोर्ट में विभिन्न प्रकार के खाद्य विकल्प होने से यह आयोजन केवल बाजार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के साथ समय बिताने और त्योहार की खुशियां साझा करने का भी अच्छा अवसर बन जाता है।
इस वर्ष मेले में सांस्कृतिक गतिविधियों को भी विशेष स्थान दिया गया है। शाम छह बजे आयोजित होने वाली डांडिया संध्या इसका प्रमुख आकर्षण है।
इस कार्यक्रम में दृष्टिबाधित युवा डांडिया नृत्य की विशेष प्रस्तुति देंगे। उनके द्वारा नृत्य और सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी यह संदेश देती है कि प्रतिभा और कला के प्रदर्शन के लिए दृष्टि ही एकमात्र आधार नहीं है।
संगीत, ताल, अभ्यास और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से ये युवा अपनी रचनात्मकता और आत्मविश्वास का प्रदर्शन करेंगे।
यह आयोजन आगंतुकों के लिए मनोरंजन के साथ प्रेरणा का अवसर भी बनेगा। डांडिया संध्या के माध्यम से दीपावली से पहले मेले का उत्सवी माहौल और अधिक जीवंत होने की उम्मीद है।
मेले का एक अन्य प्रमुख आकर्षण फैशन शो है। वर्ष 2022 और 2024 में आयोजित सफल प्रस्तुतियों के बाद इस वर्ष फिर से फैशन शो आयोजित किया जा रहा है।
इसमें दृष्टिबाधित युवा रैंप पर उतरकर अपनी प्रतिभा, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व का प्रदर्शन करेंगे। यह आयोजन पारंपरिक फैशन शो की अवधारणा से आगे बढ़कर समावेशी समाज का संदेश देता है।
आमतौर पर फैशन और मॉडलिंग को बाहरी रूप-रंग और दृश्य प्रस्तुति से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इस आयोजन में दृष्टिबाधित युवाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और अपनी पहचान को अभिव्यक्त करने के लिए किसी भी व्यक्ति को समान अवसर मिलना चाहिए।
फैशन शो का उद्देश्य समाज में समावेशिता की भावना को मजबूत करना और दिव्यांगजनों की प्रतिभा को व्यापक मंच प्रदान करना है।
संस्था के विशेष शिक्षा प्रशिक्षु मेले में नुक्कड़ नाटक के माध्यम से सामाजिक जागरूकता का संदेश भी देंगे।
इस प्रस्तुति में दिव्यांगता के प्रति समाज में मौजूद धारणाओं, समान अवसरों और रोजगार की संभावनाओं जैसे विषयों को उठाया जाएगा।
नुक्कड़ नाटक का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि दिव्यांगजनों को केवल सहानुभूति की नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, सम्मान और समान भागीदारी के अवसरों की आवश्यकता है।
समाज में कई बार दिव्यांग व्यक्तियों की क्षमताओं को लेकर सीमित धारणाएं बना ली जाती हैं। ऐसे में जागरूकता कार्यक्रम लोगों को अपनी सोच बदलने और अधिक संवेदनशील तथा समावेशी वातावरण बनाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
मेले में 15 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए विशेष पेंटिंग प्रतियोगिता भी आयोजित की जा रही है। इस प्रतियोगिता में संस्था के दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार मिट्टी और पापियर-माशे के गमलों पर बच्चे अपनी रचनात्मकता के रंग भरेंगे।
यह प्रतियोगिता बच्चों को कला, रंगों और रचनात्मक अभिव्यक्ति से जोड़ने का अवसर प्रदान करेगी। मेले की अवधि के दौरान आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता की सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों की घोषणा 4 नवंबर को शाम छह बजे की जाएगी और विजेताओं को पुरस्कृत किया जाएगा।
इस गतिविधि का एक खास पक्ष यह है कि इसमें दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार की गई कलाकृतियों को बच्चों की रचनात्मकता के लिए आधार बनाया गया है। इस प्रकार यह कार्यक्रम अलग-अलग क्षमताओं वाले लोगों को एक साझा मंच पर जोड़ने का काम करता है।
द ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन, दिल्ली पिछले आठ दशकों से अधिक समय से दृष्टिबाधित व्यक्तियों की शिक्षा, कौशल विकास, पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए काम कर रही एक गैर-लाभकारी संस्था है।
संस्था के अंतर्गत जे.पी.एम. सीनियर सेकेंडरी स्कूल फॉर द ब्लाइंड, दुर्गाबाई देशमुख कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन (विजुअल इम्पेयरमेंट), कंप्यूटर एवं व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र, जापानी भाषा कक्षाएं, एक्सेसिबल रिसोर्स सेंटर, पुनर्वास सेवाएं और आवासीय सुविधाएं संचालित की जाती हैं।
इन संस्थागत व्यवस्थाओं का उद्देश्य दृष्टिबाधित विद्यार्थियों और युवाओं को शिक्षा से लेकर रोजगार तक आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना है।
संस्था का प्रयास है कि विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान न दिया जाए, बल्कि उन्हें आधुनिक तकनीक, व्यावसायिक कौशल और दैनिक जीवन में आत्मनिर्भर बनने के लिए भी तैयार किया जाए।
द ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन को वर्ष 2012 में भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा दिव्यांगजनों के कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली सर्वश्रेष्ठ संस्था के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
यह सम्मान संस्था द्वारा शिक्षा, प्रशिक्षण और दृष्टिबाधित व्यक्तियों के सशक्तीकरण के क्षेत्र में किए गए प्रयासों की महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
संस्था लंबे समय से इस दिशा में काम कर रही है कि दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए जरूरी संसाधन और अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस मेले में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी पहुंचकर संस्था के स्टॉलों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार किए गए हस्तनिर्मित उत्पादों को देखा और उनकी कलात्मकता, रचनात्मकता तथा गुणवत्ता की सराहना की।
मुख्यमंत्री ने उत्पादों को तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने प्रशिक्षुओं की मेहनत, कौशल और समर्पण को सराहा तथा उनके द्वारा तैयार की गई वस्तुओं में दिखाई देने वाली रचनात्मकता पर ध्यान दिया।
मुख्यमंत्री का यह दौरा संस्था के प्रशिक्षुओं और वहां कार्यरत लोगों के लिए उत्साहवर्धक रहा। इस अवसर पर उन्होंने दृष्टिबाधित व्यक्तियों की प्रतिभा और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने वाले प्रयासों के बारे में भी जानकारी ली।
मेले के स्टॉलों का अवलोकन करने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता संस्था के व्यावसायिक प्रशिक्षण केंद्र भी पहुंचीं। यहां उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं से बातचीत की और उनके अनुभवों को जाना।
मुख्यमंत्री ने संस्था में संचालित विभिन्न व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने यह समझने का प्रयास किया कि दृष्टिबाधित युवाओं को किन-किन क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है और प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए किस प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों के साथ समय बिताया और उनके साथ बैठकर भोजन भी किया। उनका यह आत्मीय व्यवहार प्रशिक्षुओं के लिए विशेष और यादगार अनुभव बना।
उन्होंने संस्था के सदस्यों से भी बातचीत की तथा दृष्टिबाधित व्यक्तियों के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली।
ब्लाइंड स्कूल दिवाली मेले का मूल संदेश यही है कि दृष्टिबाधित व्यक्तियों को केवल सहानुभूति का पात्र समझने के बजाय उनकी प्रतिभा और क्षमता को पहचानने की आवश्यकता है।
किसी भी व्यक्ति की शारीरिक स्थिति उसकी पूरी पहचान नहीं होती। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर अपनी अलग प्रतिभा, कौशल और क्षमता होती है। उचित प्रशिक्षण और अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो दिव्यांगजन भी शिक्षा, रोजगार, कला, व्यवसाय और सामाजिक जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
यह मेला इसी विचार को व्यवहार में प्रस्तुत करता है। यहां दृष्टिबाधित प्रशिक्षु अपने हाथों से उत्पाद तैयार कर रहे हैं, कैफे का संचालन कर रहे हैं, व्यावसायिक सेवाएं दे रहे हैं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
इससे समाज को यह समझने का अवसर मिलता है कि समावेशी विकास केवल नीतियों और घोषणाओं से नहीं, बल्कि व्यवहार में समान अवसर उपलब्ध कराने से संभव होता है।
दीपावली को रोशनी, खुशियों और आपसी सद्भाव का त्योहार माना जाता है। ऐसे में ब्लाइंड स्कूल दिवाली मेला इस उत्सव को सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाने का अवसर भी प्रदान करता है।
यहां से हस्तनिर्मित उत्पाद खरीदने वाले लोग स्थानीय कारीगरों और दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं के कौशल को प्रोत्साहित करते हैं। साथ ही संस्था के शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सहयोग देने में भी भागीदार बनते हैं।
त्योहारों के अवसर पर अक्सर लोग अपने घरों की सजावट, उपहार और अन्य जरूरतों के लिए खरीदारी करते हैं। यदि इस खरीदारी में ऐसे उत्पादों को प्राथमिकता दी जाए जो किसी जरूरतमंद व्यक्ति या सामाजिक संस्था के रोजगार और प्रशिक्षण से जुड़े हों, तो त्योहार का आनंद और भी सार्थक बन सकता है।
इस मेले में खरीदारी करने का अनुभव लोगों को यही संदेश देता है कि खुशियां बांटने का सबसे अच्छा तरीका दूसरों की प्रतिभा को सम्मान देना और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है।
ब्लाइंड स्कूल दिवाली मेला दिल्ली के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन में अपनी अलग पहचान रखता है। यह आयोजन पिछले 45 वर्षों से अधिक समय से लोगों को उत्सवी खरीदारी के साथ सामाजिक सरोकारों से जोड़ रहा है।
250 से अधिक स्टॉल, 100 से अधिक एनजीओ की भागीदारी, दृष्टिबाधित प्रशिक्षुओं के हस्तनिर्मित उत्पाद, कैफे मस्त, मसाज केंद्र, फूड कोर्ट और सांस्कृतिक कार्यक्रम इस आयोजन को व्यापक स्वरूप प्रदान करते हैं।
इसके माध्यम से एक ऐसा वातावरण तैयार किया जा रहा है जहां दृष्टिबाधित व्यक्ति केवल कार्यक्रम के लाभार्थी नहीं, बल्कि आयोजन के सक्रिय भागीदार और अपनी प्रतिभा के प्रदर्शनकर्ता हैं।
संस्था का मानना है कि समाज में बदलाव तभी आएगा, जब दिव्यांगजनों को शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों में समान अवसर प्राप्त होंगे।
कुल मिलाकर, दिल्ली का ब्लाइंड स्कूल दिवाली मेला इस वर्ष भी खरीदारी, संस्कृति, हुनर, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेशिता का अनूठा संगम बनकर सामने आया है। यहां हर स्टॉल के पीछे किसी न किसी व्यक्ति की मेहनत, रचनात्मकता और आगे बढ़ने का सपना जुड़ा हुआ है। दीपावली के इस उत्सव में यह आयोजन लोगों को केवल रोशनी और खुशियों का संदेश नहीं दे रहा, बल्कि यह भी बता रहा है कि असली रोशनी तब फैलती है, जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति सम्मान, समान अवसर और आत्मनिर्भरता के साथ जीवन जी सके।
मेले की प्रमुख जानकारी
आयोजन: ब्लाइंड स्कूल दिवाली मेला
आयोजक: द ब्लाइंड रिलीफ एसोसिएशन, दिल्ली
अंतिम तिथि: 5 नवंबर
समय: सुबह 10:30 बजे से रात 8 बजे तक
स्थान: संस्था परिसर, लाल बहादुर शास्त्री मार्ग, होटल ओबेरॉय के समीप, नई दिल्ली
स्टॉल: 250 से अधिक
प्रवेश शुल्क: निःशुल्क
विशेष आकर्षण: हस्तनिर्मित दीये एवं मोमबत्तियां, कैफे मस्त, डांडिया संध्या, फैशन शो, नुक्कड़ नाटक, फूड कोर्ट और पेंटिंग प्रतियोगिता।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


