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- 12h ago
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित वोट चोरी के मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी दलों का विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व में इंडिया ब्लॉक के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार शाम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात करने राष्ट्रपति भवन पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य राष्ट्रपति के समक्ष मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं, एसआईआर की प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों को उठाना था।
इससे पहले विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर से राष्ट्रपति भवन की ओर 'लोकतंत्र बचाओ' मार्च निकालने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने विजय चौक पर उन्हें रोक दिया। इसके बाद विपक्षी दलों के नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति से मुलाकात के लिए आगे जाने की अनुमति मिली। राष्ट्रपति भवन को प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों के नाम पहले ही भेज दिए गए थे।
विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनका कहना है कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने या बदलाव किए जाने से पात्र मतदाताओं के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्ष ने इन आशंकाओं को लोकतांत्रिक व्यवस्था और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय बताया है।
इंडिया ब्लॉक के नेताओं का मानना है कि चुनाव प्रक्रिया में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना और उसे बिना किसी बाधा के मतदान का अवसर मिलना आवश्यक है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष राष्ट्रपति के सामने अपनी चिंताएं रखना चाहता था। प्रतिनिधिमंडल ने कथित वोट चोरी और एसआईआर से जुड़े मामलों पर ज्ञापन सौंपने के लिए मुलाकात की।
विपक्ष की मांग है कि मतदाता सूची की पुनरीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाए और जिन पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उनकी शिकायतों का उचित समाधान किया जाए। हालांकि, मतदाता सूची में अनियमितताओं और नाम हटाए जाने को लेकर विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।
राष्ट्रपति से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के अलावा विभिन्न विपक्षी दलों के प्रमुख नेता शामिल थे। इनमें जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज झा, वीसीके प्रमुख थोल. थिरुमावलवन, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर, माकपा महासचिव एमए बेबी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के डी राजा के नाम शामिल हैं।
विपक्षी दलों के इतने वरिष्ठ नेताओं का एक साथ राष्ट्रपति से मुलाकात करना इस मुद्दे पर इंडिया ब्लॉक की साझा रणनीति और राजनीतिक एकजुटता को दर्शाता है। अलग-अलग राज्यों और राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं ने मतदाता सूची तथा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से संबंधित विषयों को सामूहिक रूप से उठाने का फैसला किया है।
विपक्ष का प्रयास है कि एसआईआर से जुड़े सवाल केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें संवैधानिक संस्थाओं के समक्ष भी उठाया जाए। राष्ट्रपति से मुलाकात को इसी रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने से पहले इंडिया ब्लॉक के सांसद संसद परिसर स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में एकत्र हुए। यहां विपक्षी नेताओं ने कथित वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन को आगे बढ़ाने, एसआईआर की प्रक्रिया पर अपना विरोध दर्ज कराने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में विपक्षी सांसदों ने अपने आंदोलन को व्यापक बनाने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को जनता तक पहुंचाने पर जोर दिया। नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकताएं हैं। इसलिए इन विषयों पर उठने वाले सवालों का जवाब पारदर्शी तरीके से दिया जाना चाहिए।
विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की मौजूदा प्रक्रिया को लेकर उठाई गई चिंताओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसी कारण सांसदों ने संसद परिसर से लेकर सड़कों तक विरोध प्रदर्शन जारी रखने का निर्णय लिया है।
शुक्रवार को दिल्ली में विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई और आवाजाही पर कथित प्रतिबंधों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस महासचिव एवं सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि विपक्ष अपना आंदोलन जारी रखेगा और आगे के कार्यक्रमों की जानकारी समय आने पर दी जाएगी।
वेणुगोपाल ने सरकार पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष अपने लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत विरोध कर रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में सार्वजनिक परिवहन और लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाए जाने का भी दावा किया।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति है और सरकार विपक्ष के आंदोलन से घबराई हुई है। हालांकि, सार्वजनिक परिवहन और मेट्रो सेवाओं को लेकर लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का अहम हिस्सा है और राजनीतिक दलों को अपनी असहमति दर्ज कराने का अधिकार मिलना चाहिए। दूसरी ओर, सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में इस पूरे घटनाक्रम में विरोध के अधिकार और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने गया है और उनका शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक विपक्ष अपनी मांगों को लेकर लक्ष्य हासिल नहीं कर लेता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।
पवन खेड़ा के अनुसार, विपक्ष की प्रमुख मांगों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, एसआईआर की प्रक्रिया पर रोक और मतदाता सूची से हटाए गए बताए जा रहे 13.8 करोड़ लोगों के नाम बहाल करना शामिल है। विपक्ष ने चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी उठाई है।
इसके अलावा विपक्षी नेताओं ने संसद में पारित उस कानूनी प्रावधान को रद्द करने की मांग की, जिसके बारे में उनका आरोप है कि इससे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को आजीवन कानूनी संरक्षण प्राप्त हुआ है।
इन मांगों के जरिए विपक्ष चुनाव आयोग की जवाबदेही, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि चुनाव संबंधी विवादों का समाधान निष्पक्ष जांच और स्पष्ट जवाबदेही के माध्यम से किया जाना चाहिए।
हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे, एसआईआर पर रोक और बैलेट पेपर से चुनाव कराने जैसी मांगों पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद बने हुए हैं। इन मांगों पर आगे क्या निर्णय होता है, यह आने वाले दिनों में राजनीतिक घटनाक्रम और संबंधित संस्थाओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल के मुताबिक, विपक्षी नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात के लिए पहला अनुरोध दो अक्टूबर को भेजा था। विपक्ष की ओर से 15 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के लिए समय मांगा गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राष्ट्रपति से मिलने के लिए 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को समय दिए जाने की बात सामने आई थी।
विपक्षी दल राष्ट्रपति के समक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, एसआईआर और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं से जुड़े सवाल उठाना चाहते थे। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर संवैधानिक स्तर पर ध्यान दिया जाना जरूरी है।
राष्ट्रपति से मुलाकात की मांग के पीछे विपक्ष की मंशा इन विषयों को औपचारिक रूप से उठाने और अपनी चिंताओं को ज्ञापन के माध्यम से दर्ज कराने की थी। विपक्षी नेताओं को उम्मीद है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।
एसआईआर यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची की जांच और अद्यतन करना होता है, ताकि पात्र मतदाताओं के नाम सही तरीके से दर्ज रहें और सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर किया जा सके।
हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने कई सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि यदि पुनरीक्षण के दौरान पर्याप्त सावधानी, पारदर्शिता और शिकायतों के निवारण की व्यवस्था नहीं रखी गई, तो पात्र नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटने का खतरा पैदा हो सकता है।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में नाम दर्ज होना मतदान के अधिकार के इस्तेमाल के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए पुनरीक्षण की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिसमें किसी भी पात्र नागरिक को अनावश्यक परेशानी न उठानी पड़े।
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए पुनरीक्षण आवश्यक हो सकता है, लेकिन उसकी प्रक्रिया में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है। राजनीतिक विवाद के बीच वास्तविक स्थिति का आकलन संबंधित आंकड़ों, आधिकारिक दिशा-निर्देशों और शिकायतों के निस्तारण की जानकारी के आधार पर किया जाना चाहिए।
इंडिया ब्लॉक का विरोध प्रदर्शन छह अक्टूबर को उस समय तेज हुआ, जब विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने राहुल गांधी सहित कई विपक्षी सांसदों को हिरासत में लिया था।
इसके बाद सात अक्टूबर को भी विपक्षी सांसदों ने अपना विरोध जारी रखा और जंतर-मंतर की ओर जाने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। लगातार हो रही पुलिस कार्रवाई और मार्च को रोके जाने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार तथा प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
आठ अक्टूबर को विपक्षी नेताओं ने महात्मा गांधी के स्मारक राजघाट पर धरना दिया। इस दौरान उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों, मतदाता सूची की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा उठाया।
लगातार कई दिनों से चल रहे इन प्रदर्शनों से साफ है कि विपक्ष एसआईआर के मुद्दे को राजनीतिक और सार्वजनिक बहस के केंद्र में बनाए रखना चाहता है। राष्ट्रपति से मुलाकात इसी सिलसिले का अगला कदम है।
विपक्षी दलों के नेताओं ने संकेत दिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेंगे। उनका कहना है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से संबंधित सवालों का समाधान होने तक वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।
विपक्ष की रणनीति में संसद के भीतर मुद्दा उठाने, राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपने, सार्वजनिक स्थानों पर शांतिपूर्ण विरोध करने और जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने जैसे कदम शामिल हैं। विपक्षी नेताओं का मानना है कि मतदाता सूची की निष्पक्षता का विषय केवल किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चुनाव आयोग इन आरोपों और मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है तथा एसआईआर से जुड़े विवादों को लेकर कोई नई पहल होती है या नहीं। विपक्ष के आंदोलन का अगला चरण भी इसी घटनाक्रम से प्रभावित हो सकता है।
इंडिया ब्लॉक के इस आंदोलन ने एक बार फिर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही को लेकर बहस तेज कर दी है। विपक्ष इसे लोकतंत्र की रक्षा और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि इस विषय पर आगे की स्थिति संबंधित संस्थाओं के जवाब और उपलब्ध तथ्यों से स्पष्ट होगी।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव की निष्पक्षता के साथ-साथ मतदाताओं का भरोसा बनाए रखना भी महत्वपूर्ण है। मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने, गलत प्रविष्टियों को सुधारने और शिकायतों का समय पर निपटारा करने की व्यवस्था नागरिकों के लिए सुलभ होनी चाहिए।
फिलहाल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात और ज्ञापन सौंपने के बाद विपक्ष ने आंदोलन जारी रखने का संदेश दिया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े मुद्दों पर आगे क्या राजनीतिक और संस्थागत कदम उठाए जाते हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


