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- 12h ago
नई दिल्ली। भारत की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और भाषाई विविधता की गूंज इस बार फ्रैंकफर्ट बुक फेयर में सुनाई दी। दुनिया के प्रमुख पुस्तक मेलों में शामिल फ्रैंकफर्ट बुक फेयर 2026 में भारत ने अपने साहित्य, भाषाओं, लेखकों और प्रकाशन परंपराओं को अंतरराष्ट्रीय पाठकों के सामने व्यापक रूप से प्रस्तुत किया। इस अवसर पर नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया (एनबीटी) की चर्चित ‘मॉडर्न इंडियन क्लासिक स्टोरीज फॉर चिल्ड्रन’ श्रृंखला की चुनिंदा कहानियों के जर्मन और स्पेनिश अनुवाद जारी किए गए।
इन अनुवादों में हिंदी साहित्य के ऐसे महत्वपूर्ण रचनाकारों की कहानियां शामिल हैं, जिनकी रचनाएं भारतीय समाज, मानवीय संवेदनाओं, बाल मनोविज्ञान, सामाजिक मूल्यों और जीवन के विविध अनुभवों को सरल लेकिन प्रभावशाली ढंग से सामने रखती हैं। प्रेमचंद, भीष्म साहनी, सुदर्शन, अमरकांत, विष्णु प्रभाकर और आचार्य शिवपूजन सहाय जैसे साहित्यकारों की रचनाओं को नई भाषाओं में प्रस्तुत किए जाने से भारतीय क्लासिक साहित्य को अंतरराष्ट्रीय पाठकों, विशेष रूप से बच्चों और युवा वर्ग तक पहुंचाने का नया रास्ता खुला है।
फ्रैंकफर्ट बुक फेयर में इंडिया नेशनल स्टैंड का भी उद्घाटन किया गया। इसका उद्घाटन कार्यवाहक भारतीय महावाणिज्यदूत दीपक बंसल और लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता सुंदीप भूटोरिया ने किया। समारोह में फ्रैंकफर्ट बुक फेयर की उपाध्यक्ष क्लॉडिया कैसर सहित साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और प्रकाशन जगत से जुड़े अनेक प्रतिनिधि मौजूद रहे।
एनबीटी के निदेशक युवराज मलिक ने अपने स्वागत भाषण में स्पष्ट किया कि इंडिया नेशनल स्टैंड किसी एक प्रकाशक अथवा किसी एक संस्था की प्रस्तुति नहीं है। यह भारत के व्यापक प्रकाशन जगत और देश की विभिन्न भाषाओं एवं साहित्यिक परंपराओं की सामूहिक साहित्यिक उपस्थिति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का प्रयास है।
उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग भाषाओं में लिखे जा रहे साहित्य की अपनी विशिष्ट परंपराएं हैं। ऐसे में एक साझा राष्ट्रीय मंच के माध्यम से भारतीय पुस्तकों, लेखकों, भाषाओं और प्रकाशन संस्थानों को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना महत्वपूर्ण है। इंडिया नेशनल स्टैंड का उद्देश्य भारतीय पुस्तकों और साहित्य को अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान दिलाने के साथ-साथ दूसरे देशों के पाठकों और प्रकाशकों के साथ संवाद के अवसर पैदा करना भी है।
इंडिया नेशनल स्टैंड में भारतीय साहित्य के प्रमुख रचनाकारों और उनकी कृतियों को विशेष स्थान दिया गया है। विशेष रूप से मुंशी प्रेमचंद और सुमित्रानंदन पंत जैसे साहित्यकारों की रचनाओं को प्रमुखता के साथ प्रदर्शित किया गया।
प्रेमचंद का साहित्य भारतीय ग्रामीण जीवन, सामाजिक विषमताओं, मानवीय संबंधों और आम आदमी के संघर्षों को जिस संवेदनशीलता के साथ सामने रखता है, वह आज भी पाठकों को प्रभावित करता है। वहीं सुमित्रानंदन पंत की काव्य परंपरा भारतीय प्रकृति, सौंदर्य और मानवीय संवेदनाओं की विशिष्ट अभिव्यक्ति के रूप में हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।
नेशनल स्टैंड में इन रचनाकारों को प्रमुखता देने का उद्देश्य केवल भारतीय साहित्य का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को उन रचनाओं से जोड़ना भी है, जिनकी प्रासंगिकता समय के साथ बनी हुई है।
फ्रैंकफर्ट बुक फेयर में सबसे महत्वपूर्ण आकर्षणों में से एक ‘मॉडर्न इंडियन क्लासिक स्टोरीज फॉर चिल्ड्रन’ श्रृंखला के जर्मन और स्पेनिश संस्करणों का लोकार्पण रहा। इस श्रृंखला में भारतीय साहित्य की चुनिंदा क्लासिक कहानियों को बच्चों और युवा पाठकों के लिए प्रस्तुत किया गया है।
अनुवादित पुस्तकों में—
प्रेमचंद की ‘मिठ्ठू’
भीष्म साहनी की ‘दो गौरैया’
भीष्म साहनी की ‘चमगादड़ का रस’
सुदर्शन की ‘साइकिल की सवारी’
अमरकांत की ‘बहादुर’
विष्णु प्रभाकर की ‘सबसे सुंदर लड़की’
आचार्य शिवपूजन सहाय की ‘कुंजी’
शामिल हैं।
इन कहानियों का जर्मन और स्पेनिश में उपलब्ध होना भारतीय साहित्य के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे हिंदी की क्लासिक रचनाएं उन पाठकों तक पहुंच सकेंगी, जो हिंदी नहीं पढ़ते लेकिन भारतीय समाज और संस्कृति को साहित्य के माध्यम से समझना चाहते हैं।
भारतीय साहित्य को दूसरी भाषाओं में ले जाने की प्रक्रिया केवल शब्दों को एक भाषा से दूसरी भाषा में बदलने तक सीमित नहीं है। साहित्य के अनुवाद के माध्यम से किसी समाज की जीवनशैली, सामाजिक संबंध, पारिवारिक संरचना, नैतिक मूल्य, संघर्ष, संवेदनाएं और सांस्कृतिक दृष्टिकोण भी दूसरी सभ्यताओं के पाठकों तक पहुंचते हैं।
भारतीय क्लासिक कहानियों के जर्मन और स्पेनिश अनुवाद इसी व्यापक सांस्कृतिक संवाद का हिस्सा हैं। खासकर बच्चों के लिए तैयार की गई कहानियां कम उम्र के पाठकों को भारतीय जीवन के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराने का माध्यम बन सकती हैं।
कहानियों के पात्र, उनके संघर्ष, परिवारों के बीच संबंध, पशु-पक्षियों के माध्यम से कही गई बातें और सरल जीवन प्रसंग अलग-अलग देशों के बच्चों के लिए भारतीय समाज को समझने का एक सहज माध्यम बन सकते हैं।
कार्यवाहक भारतीय महावाणिज्यदूत दीपक बंसल ने कहा कि भारत की इस वर्ष फ्रैंकफर्ट बुक फेयर में मौजूदगी इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि भारत और जर्मनी के संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं। उन्होंने साहित्य और पुस्तकों को दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संवाद को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बताया।
साहित्य के माध्यम से दो देशों के बीच संवाद राजनीतिक और आर्थिक संबंधों से आगे बढ़कर सामाजिक और सांस्कृतिक स्तर तक पहुंचता है। किसी देश के इतिहास या संस्कृति को समझने के लिए उसकी किताबों और लेखकों को पढ़ना एक महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
ऐसे में फ्रैंकफर्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में भारतीय साहित्य की सामूहिक प्रस्तुति भारत-जर्मनी सांस्कृतिक संबंधों के व्यापक आयाम को सामने रखने का अवसर भी बनती है।
लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता सुंदीप भूटोरिया ने पढ़ने की संस्कृति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि किताबें भारत के जीवन, इतिहास और संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को समझने का अवसर देती हैं।
उन्होंने भारतीय संस्कृति की विविधता को उसकी प्रमुख विशेषता बताते हुए कहा कि अनुवाद इस विविधता को दुनिया के पाठकों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। भारत में सैकड़ों भाषाओं और बोलियों में साहित्यिक अभिव्यक्ति की लंबी परंपरा रही है। ऐसे में भारतीय साहित्य को वैश्विक मंच तक ले जाने के लिए अनुवाद की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
एनबीटी के मुख्य संपादक एवं संयुक्त निदेशक कुमार विक्रम ने इंडिया नेशनल स्टैंड की संकल्पना और उसकी प्रमुख विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि स्टैंड में भारतीय साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाकारों और उनकी कृतियों को विशेष स्थान दिया गया है।
इस प्रस्तुति के पीछे एक महत्वपूर्ण उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय साहित्य की उस विरासत से जोड़ना है, जिसने दशकों से भारतीय समाज और विचारधारा को प्रभावित किया है।
आज डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच बच्चों और युवाओं में पढ़ने की आदत को मजबूत करना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। ऐसे में क्लासिक कहानियों को सरल प्रस्तुति और दूसरी भाषाओं के माध्यम से नई पीढ़ी तक पहुंचाने की पहल साहित्य और शिक्षा, दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
प्रेमचंद से लेकर अमरकांत और भीष्म साहनी तक की कहानियों में भारतीय समाज के अलग-अलग रूप दिखाई देते हैं। इन रचनाओं में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक अनुभव, मानवीय संबंध और जीवन के मूल्य भी मौजूद हैं।
बाल पाठकों के लिए तैयार की गई कहानियां जटिल सामाजिक मुद्दों को भी सहज और कहानी के माध्यम से समझने का अवसर देती हैं। यही कारण है कि इन रचनाओं का विदेशी भाषाओं में अनुवाद भारतीय साहित्य के अंतरराष्ट्रीय विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
जर्मन और स्पेनिश भाषाओं में उपलब्ध होने के बाद इन कहानियों की पहुंच यूरोप और अन्य क्षेत्रों के उन पाठकों तक भी बढ़ सकती है, जो भारतीय साहित्य को मूल हिंदी में नहीं पढ़ सकते।
इंडिया नेशनल स्टैंड की अवधारणा केवल हिंदी साहित्य तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य भारत की अलग-अलग भाषाओं में प्रकाशित पुस्तकों और साहित्यिक परंपराओं को एक साझा मंच प्रदान करना है।
भारत की भाषाई विविधता उसकी साहित्यिक शक्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिंदी, तमिल, बंगाली, मराठी, मलयालम, कन्नड़, तेलुगु, असमिया, उड़िया, पंजाबी, गुजराती और अन्य भारतीय भाषाओं में साहित्य की समृद्ध परंपरा रही है। अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में इन परंपराओं की मौजूदगी विदेशी प्रकाशकों और पाठकों के लिए भारत के साहित्यिक संसार को व्यापक रूप में समझने का अवसर देती है।
फ्रैंकफर्ट बुक फेयर दुनिया के प्रमुख प्रकाशन मंचों में से एक है। ऐसे मंच पर भारतीय पुस्तकों की मौजूदगी से केवल साहित्यिक संवाद ही नहीं, बल्कि अनुवाद अधिकार, प्रकाशन साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय पाठक बाजार तक पहुंच के नए अवसर भी बन सकते हैं।
भारतीय प्रकाशकों के लिए यह मंच विदेशी प्रकाशकों के साथ संवाद स्थापित करने और भारतीय लेखकों की रचनाओं को दूसरी भाषाओं में प्रकाशित कराने की संभावनाओं को बढ़ाता है। इसी तरह विदेशी पाठकों के लिए भी भारतीय साहित्य के नए क्षेत्रों से परिचित होने का रास्ता खुलता है।
इस पूरे आयोजन में साहित्य को शिक्षा और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास भी दिखाई देता है। विशेष रूप से बच्चों के लिए क्लासिक कहानियों का चयन यह संकेत देता है कि भारतीय साहित्यिक विरासत को केवल संग्रहालयों या पुस्तकालयों तक सीमित रखने के बजाय नई पीढ़ी के जीवंत पाठकीय अनुभव का हिस्सा बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
जर्मन और स्पेनिश अनुवाद इस दिशा में एक और कदम हैं। इससे भारतीय कहानियां स्थानीय पाठकों की भाषाई सीमाओं से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय पाठक समुदाय का हिस्सा बन सकती हैं।
उद्घाटन समारोह में फ्रैंकफर्ट बुक फेयर की उपाध्यक्ष क्लॉडिया कैसर, आईसीएसएसआर के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह, साहित्य अकादमी के सचिव वरुण गुलाटी, केंद्रीय हिंदी निदेशालय के निदेशक हितेंद्र मिश्रा, केंद्रीय शास्त्रीय तमिल संस्थान के निदेशक प्रो. आर. चंद्रशेखरन सहित साहित्य, शिक्षा और संस्कृति से जुड़े अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इन संस्थाओं और प्रतिनिधियों की भागीदारी ने आयोजन को व्यापक संस्थागत स्वरूप दिया। इससे भारतीय साहित्य के अलग-अलग पक्षों—भाषा, शोध, शिक्षा, प्रकाशन, अनुवाद और सांस्कृतिक विरासत—को एक ही मंच पर सामने रखने का अवसर मिला।
इंडिया नेशनल स्टैंड का आयोजन शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में किया गया है। नेशनल बुक ट्रस्ट, इंडिया ने इसमें नोडल एजेंसी की भूमिका निभाई, जबकि विदेश मंत्रालय के अंतर्गत फ्रैंकफर्ट स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास का सहयोग भी आयोजन को मिला।
इस प्रकार आयोजन में प्रकाशन और साहित्य के साथ सरकारी संस्थाओं तथा सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व का समन्वय देखने को मिला। इसका लक्ष्य भारतीय पुस्तकों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर व्यापक पहचान दिलाने के साथ देश की भाषाई और साहित्यिक विरासत को वैश्विक पाठकों से जोड़ना है।
फ्रैंकफर्ट बुक फेयर में भारतीय क्लासिक कहानियों के जर्मन और स्पेनिश संस्करणों का लोकार्पण इस बात का संकेत है कि भारतीय साहित्य की वैश्विक पहुंच बढ़ाने के लिए अनुवाद को महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में देखा जा रहा है।
प्रेमचंद, भीष्म साहनी, सुदर्शन, अमरकांत, विष्णु प्रभाकर और आचार्य शिवपूजन सहाय जैसे रचनाकारों की कहानियों को नई भाषाओं में पढ़े जाने से भारतीय साहित्य की पुरानी पीढ़ियों और दुनिया के नए पाठकों के बीच संवाद स्थापित हो सकता है।
यह पहल भारतीय साहित्य को केवल अतीत की विरासत के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उसे वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रासंगिक बनाने का प्रयास भी है। खासकर बच्चों के लिए तैयार की गई कहानियां आने वाले समय में भारतीय साहित्य और वैश्विक पाठक समुदाय के बीच एक स्थायी सांस्कृतिक पुल का काम कर सकती हैं।
फ्रैंकफर्ट में सजा इंडिया नेशनल स्टैंड इस लिहाज से केवल पुस्तकों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारत की भाषाई विविधता, साहित्यिक परंपरा, सांस्कृतिक स्मृति और आधुनिक प्रकाशन जगत की सामूहिक प्रस्तुति बनकर सामने आया है। भारतीय क्लासिक कहानियों के जर्मन और स्पेनिश अनुवाद इस साहित्यिक उपस्थिति को और व्यापक बनाते हुए भारतीय कहानी को अंतरराष्ट्रीय पाठकों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकते हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


