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- 12h ago
नई दिल्ली। दशहरा पर्व के अवसर पर इस बार लालकिला मैदान में आस्था, भक्ति और भारतीय संस्कृति का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिलेगा, जो श्रद्धालुओं के लिए लंबे समय तक यादगार बना रहेगा। लवकुश रामलीला कमेटी की ओर से इस वर्ष रामलीला मंचन के दौरान एक लाख दीपों से भगवान श्रीराम का विशाल और भव्य चित्र तैयार किया जाएगा। हजारों दीपों की रोशनी के बीच प्रभु श्रीराम की विराट आकृति श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी।
आयोजकों के अनुसार, एक लाख दीपों को विशेष तरीके से सजाकर भगवान श्रीराम की आकृति को आकार दिया जाएगा। जैसे-जैसे दीप प्रज्ज्वलित होंगे, वैसे-वैसे श्रीराम का भव्य स्वरूप प्रकाशमान होता दिखाई देगा। इस पूरे दृश्य को अत्यंत आकर्षक और व्यवस्थित बनाने के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन स्थल पर दीपों की सजावट से लेकर उनकी सुरक्षा और प्रज्ज्वलन तक के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
लवकुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि भगवान श्रीराम केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों, मर्यादा, सत्य, त्याग, न्याय और कर्तव्य के भी प्रतीक हैं। एक लाख दीपों के माध्यम से भगवान राम का चित्र बनाकर उनके आदर्शों और जीवन संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन श्रद्धालुओं के लिए केवल देखने का अवसर नहीं होगा, बल्कि राम के आदर्शों को आत्मसात करने का भी संदेश देगा।
दशहरा पर्व के दिन जब रामलीला मैदान में हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद होंगे और एक साथ एक लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे, तो पूरा लालकिला परिसर दीपों की रोशनी से जगमगा उठेगा। चारों ओर दीपों की कतारें और बीच में भगवान श्रीराम की विशाल आकृति का दृश्य बेहद मनोहारी दिखाई देगा। आयोजन समिति को उम्मीद है कि इस विशेष प्रस्तुति को देखने के लिए बड़ी संख्या में रामभक्त लालकिला मैदान पहुंचेंगे।
लवकुश रामलीला कमेटी की ओर से इस वर्ष रामलीला मंचन को और अधिक आकर्षक एवं प्रभावशाली बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था, ध्वनि प्रभाव और विशेष तकनीकी प्रस्तुतियों के माध्यम से रामायण के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत रूप देने की तैयारी है।
भगवान श्रीराम के वनगमन, सीता हरण, हनुमान जी की लंका यात्रा, लंका दहन, राम-रावण युद्ध और विजयदशमी जैसे प्रमुख प्रसंगों को भव्य रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। मंच पर कलाकारों की प्रस्तुति के साथ विशेष प्रकाश और ध्वनि प्रभाव दर्शकों को घटनाओं से जोड़ने का प्रयास करेंगे।
आयोजकों का कहना है कि रामलीला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। इसके माध्यम से नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, परंपरा और भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े आदर्शों से परिचित कराने का प्रयास किया जाता है। आज के बदलते दौर में रामलीला के पारंपरिक स्वरूप को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर युवाओं और बच्चों के बीच भी इसके प्रति आकर्षण बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
एक लाख दीपों से भगवान राम की आकृति बनाने के आयोजन को सामाजिक एकता और सद्भाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। आयोजन समिति के अनुसार, दीप प्रकाश का प्रतीक है और अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का संदेश देता है। भगवान श्रीराम का जीवन भी सत्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
रामलीला कमेटी का प्रयास है कि दीपोत्सव के इस विशेष आयोजन के माध्यम से समाज में आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश पहुंचे। अलग-अलग वर्गों और क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होकर एक साथ दीप प्रज्ज्वलित करेंगे।
लालकिला मैदान में आयोजित होने वाली रामलीला दिल्ली ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। दशहरा पर्व पर बड़ी संख्या में लोग परिवार के साथ रामलीला देखने पहुंचते हैं। ऐसे में एक लाख दीपों से तैयार किया जाने वाला भगवान श्रीराम का चित्र इस वर्ष कार्यक्रम में नया आकर्षण जोड़ने जा रहा है।
विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के लिए यह आयोजन भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर बनेगा। आयोजकों की योजना है कि दीपों की सजावट और भगवान श्रीराम की आकृति को इस तरह तैयार किया जाए कि दूर से भी इसका भव्य स्वरूप स्पष्ट दिखाई दे।
इतने बड़े स्तर पर दीप प्रज्ज्वलन को देखते हुए आयोजन स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दीपों की स्थापना, उनके प्रज्ज्वलन और कार्यक्रम के दौरान भीड़ के आवागमन को व्यवस्थित रखने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। आयोजन समिति से जुड़े स्वयंसेवकों को भी विभिन्न व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
रामलीला के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रवेश, निकास, बैठने की व्यवस्था और मंच के आसपास सुरक्षा जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है। आयोजकों का प्रयास है कि श्रद्धालुओं को कार्यक्रम का आनंद लेने के साथ-साथ सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण भी मिल सके।
भगवान श्रीराम को भारतीय संस्कृति में मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में जाना जाता है। उनके जीवन में सत्य, कर्तव्य, त्याग, अनुशासन, करुणा और धर्म जैसे मूल्यों को प्रमुख स्थान दिया गया है। रामलीला के माध्यम से इन्हीं मूल्यों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
आयोजकों का कहना है कि आज की पीढ़ी के सामने अनेक सामाजिक चुनौतियां हैं। ऐसे समय में भगवान राम का जीवन लोगों को अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक रहने, सत्य का साथ देने और समाज में सद्भाव बनाए रखने की प्रेरणा देता है। एक लाख दीपों से बनने वाला श्रीराम का चित्र इसी संदेश का प्रतीकात्मक रूप होगा।
दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के साथ रामलीला कमेटी द्वारा इस वर्ष के आयोजन को विशेष बनाने की तैयारी की जा रही है। रावण दहन के साथ एक लाख दीपों से भगवान श्रीराम की भव्य आकृति का प्रकाशमान होना कार्यक्रम को और विशेष बनाएगा।
जब लालकिला मैदान में रामलीला के पात्र मंच पर भगवान श्रीराम की कथा का मंचन कर रहे होंगे और दूसरी ओर हजारों दीपों से उनका विशाल चित्र चमक रहा होगा, तब पूरा वातावरण धार्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आएगा। श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण आस्था और उत्साह से भर देने वाला होगा।
आयोजन समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इस विशेष कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारियां लगातार चल रही हैं। दीपों की व्यवस्था, मंच सज्जा, प्रकाश व्यवस्था और अन्य तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। समिति का प्रयास है कि इस वर्ष की रामलीला और दशहरा आयोजन राजधानी की सांस्कृतिक गतिविधियों में एक विशेष पहचान बनाए।
एक लाख दीपों से बनने वाला भगवान श्रीराम का भव्य चित्र केवल रोशनी का प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि यह सत्य, धर्म, मर्यादा और प्रकाश की ओर आगे बढ़ने का प्रतीकात्मक संदेश भी देगा। दशहरा पर्व पर लालकिला मैदान में बनने वाला यह अद्भुत दृश्य श्रद्धालुओं के लिए आस्था, संस्कृति और परंपरा का यादगार अनुभव बनने की उम्मीद है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


