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- 12h ago
मथुरा। राजकीय सम्प्रेक्षण गृह (किशोर), मथुरा में 24 सितंबर 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, मथुरा श्री विकास कुमार ने सम्प्रेक्षण गृह में निवासित किशोरों को टी-शर्ट, लोवर एवं इनर गार्मेन्ट्स वितरित किए। वस्त्र पाकर किशोरों में उत्साह देखने को मिला।
इस अवसर पर जनपद न्यायाधीश ने किशोरों से संवाद करते हुए उन्हें जीवन में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और सही मार्ग चुनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जीवन में किसी एक क्षेत्र का चयन कर उसमें निरंतर मेहनत की जाए तो सफलता हासिल की जा सकती है। किशोरों को अपने भविष्य को लेकर गंभीरता से सोचने और उपलब्ध अवसरों का सदुपयोग करने का संदेश दिया गया।
जनपद न्यायाधीश ने किशोरों से कहा कि वे अपने साथ हुई घटना को पीछे छोड़कर आगे के जीवन पर ध्यान केंद्रित करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय उनके जीवन को नई दिशा देने का अवसर है और इस अवसर का सकारात्मक उपयोग किया जाना चाहिए।
उन्होंने किशोरों को समझाया कि सम्प्रेक्षण गृह में बिताए जा रहे समय को केवल समय व्यतीत करने के रूप में न देखें, बल्कि इसे शिक्षा, ज्ञान और कौशल हासिल करने के अवसर के रूप में उपयोग करें। उन्होंने कहा कि यहां से जाने के समय प्रत्येक किशोर अपने साथ कोई न कोई उपयोगी कौशल लेकर जाए, जिससे भविष्य में वह अपने पैरों पर खड़ा हो सके और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सके।
जनपद न्यायाधीश ने सम्प्रेक्षण गृह में उपस्थित अध्यापक को किशोरों को नियमित रूप से शिक्षा प्रदान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किशोरों के ज्ञान में वृद्धि के लिए उन्हें सामान्य ज्ञान की जानकारी भी नियमित रूप से दी जाए।
उन्होंने शिक्षा को किशोरों के व्यक्तित्व विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि पढ़ाई के साथ सामान्य ज्ञान और विभिन्न विषयों की जानकारी से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है। इससे उन्हें भविष्य में बेहतर निर्णय लेने और समाज में अपनी सकारात्मक भूमिका निभाने में मदद मिल सकती है।
कार्यक्रम के दौरान किशोरों के समग्र विकास पर भी जोर दिया गया। जनपद न्यायाधीश ने कहा कि किशोरों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जिसमें वे अपनी प्रतिभा और रुचि को पहचान सकें तथा उसे विकसित करने का प्रयास कर सकें।
उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से भी अपेक्षा की कि किशोरों के साथ संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाए और उन्हें शिक्षा तथा उपयोगी गतिविधियों से जोड़ा जाए। किशोरों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में शिक्षा के साथ कौशल विकास की भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
जनपद न्यायाधीश ने किशोरों को किसी एक उपयोगी क्षेत्र में कौशल हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ यदि कोई व्यावहारिक हुनर भी सीख लिया जाए तो आगे चलकर रोजगार और आत्मनिर्भरता के अवसर बढ़ सकते हैं।
उन्होंने किशोरों से अपनी रुचि के अनुसार किसी क्षेत्र का चयन करने और उसमें नियमित रूप से अभ्यास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मेहनत, अनुशासन और सीखने की इच्छा के साथ व्यक्ति अपने भविष्य को नई दिशा दे सकता है।
कार्यक्रम के दौरान जनपद न्यायाधीश ने किशोरों से बातचीत कर उनकी बात भी सुनी। संवाद के माध्यम से उन्हें अपने भविष्य के बारे में सोचने और सकारात्मक लक्ष्य निर्धारित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
उन्होंने किशोरों को यह संदेश दिया कि वर्तमान परिस्थितियां उनके पूरे जीवन का निर्धारण नहीं करतीं। निरंतर प्रयास, शिक्षा और सही मार्गदर्शन के माध्यम से वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
कार्यक्रम के अंत में जनपद न्यायाधीश द्वारा सम्प्रेक्षण गृह में निवासित किशोरों को मिठाई भी वितरित की गई। वस्त्र और मिठाई वितरण के माध्यम से किशोरों के बीच अपनत्व और उत्साह का वातावरण बना।
कार्यक्रम का उद्देश्य किशोरों को आवश्यक वस्त्र उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा, सकारात्मक सोच, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना रहा। अधिकारियों ने भी किशोरों के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री परविन्दर सिंह, सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण मथुरा श्रीमती अनीता सिंह, सिविल जज जूनियर डिविजन श्री प्रत्युष आनन्द मिश्रा तथा जिला प्रोवेशन अधिकारी मथुरा श्री विकास चन्द्र सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने किशोरों के बीच शिक्षा, अनुशासन, कौशल विकास और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। कार्यक्रम के समापन पर किशोरों को मिठाई वितरित की गई और उन्हें भविष्य में बेहतर जीवन के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया गया।
मथुरा-रिपोटर, (पीयूष पुरोहित)।


