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नई दिल्ली। भारत में तेजी से विकसित हो रहे टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप इकोसिस्टम में हो रहे नए प्रयोगों और तकनीकी नवाचारों को एक बड़ा मंच देते हुए होरिबा इंडिया ने राजधानी नई दिल्ली में अपने पहले 'होरिबा इनोवेशन कनेक्ट' का आयोजन किया। एयरोसिटी स्थित होटल हॉलिडे इन में आयोजित इस कार्यक्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से चुने गए 15 उभरते टेक्नोलॉजी स्टार्टअप्स ने अपनी अत्याधुनिक तकनीकों और संभावित औद्योगिक समाधानों का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में सेंसर, फ्लो कंट्रोल, स्पेक्ट्रोस्कोपी, ऑप्टिक्स एवं फोटोनिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, डिपोजिशन टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर एप्लीकेशन के लिए लैब-ग्रोन डायमंड और ऑटोमेशन जैसे तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स शामिल हुए। इन कंपनियों ने विशेषज्ञ जूरी के सामने अपनी तकनीक, उसके व्यावहारिक उपयोग, तकनीकी तैयारी और भविष्य में बड़े स्तर पर कमर्शियलाइजेशन की संभावनाओं को प्रस्तुत किया।
होरिबा इनोवेशन कनेक्ट के लिए पूरे भारत से लगभग 100 रजिस्ट्रेशन प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों में से तकनीकी क्षमता, नवीनता, विशिष्टता और रणनीतिक उपयोगिता जैसे विभिन्न मानकों के आधार पर 15 स्टार्टअप्स का चयन किया गया। चयनित कंपनियों को अपने-अपने इनोवेशन को विशेषज्ञों और होरिबा की टेक्निकल एवं लीडरशिप टीमों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिला।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल स्टार्टअप्स को पुरस्कार देना या उनकी तकनीक का प्रदर्शन कराना नहीं था, बल्कि ऐसी उभरती तकनीकों की पहचान करना भी था, जिन्हें भविष्य में माप, विश्लेषण और औद्योगिक तकनीक के क्षेत्र में उपयोगी समाधान के रूप में विकसित किया जा सकता है।
कार्यक्रम की थीम "नई टेक्नोलॉजी खोजें। उनकी क्षमता मापें। भविष्य के लिए इनोवेशन करें" रखी गई थी। यह थीम इस पहल के व्यापक उद्देश्य को दर्शाती है, जिसमें नई तकनीकों की पहचान से लेकर उनके तकनीकी मूल्यांकन और संभावित औद्योगिक इस्तेमाल तक की पूरी प्रक्रिया को शामिल किया गया।
इनोवेशन कनेक्ट में भाग लेने वाले स्टार्टअप्स के लिए यह कार्यक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि उन्हें केवल अपनी तकनीक प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिला, बल्कि वे माप एवं विश्लेषण तकनीक के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहे विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद भी कर सके।
स्टार्टअप प्रतिनिधियों ने अपनी तकनीक की वर्तमान स्थिति, सामने आ रही तकनीकी चुनौतियों, बाजार की संभावनाओं और भविष्य के विस्तार की योजनाओं पर विशेषज्ञों के साथ चर्चा की। होरिबा की तकनीकी टीमों ने भी विभिन्न तकनीकों की व्यावहारिक उपयोगिता और उन्हें औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप विकसित किए जाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया।
ऐसे मंच विशेष रूप से उन स्टार्टअप्स के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं, जिनके पास मजबूत तकनीकी समाधान तो होते हैं, लेकिन उन्हें बड़े औद्योगिक बाजार तक पहुंचाने के लिए विशेषज्ञ मार्गदर्शन, परीक्षण सुविधाओं, तकनीकी साझेदारी और व्यावसायिक नेटवर्क की आवश्यकता होती है।
प्रतिभागी स्टार्टअप्स का मूल्यांकन कई महत्वपूर्ण मानकों पर किया गया। इनमें टेक्निकल रेडीनेस, तकनीक की नवीनता एवं विशिष्टता, पिच की गुणवत्ता, कमर्शियलाइजेशन की संभावना और होरिबा की विशेषज्ञता वाले क्षेत्रों के साथ रणनीतिक तालमेल प्रमुख रहे।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह समझना था कि कौन-सी तकनीक वर्तमान में किस स्तर पर विकसित है और आने वाले समय में उसे किस प्रकार वास्तविक औद्योगिक समाधान में बदला जा सकता है।
विशेषज्ञों ने यह भी देखा कि संबंधित तकनीक बाजार की मौजूदा जरूरतों को किस हद तक पूरा कर सकती है, उसका संभावित ग्राहक आधार कितना बड़ा हो सकता है और उसे बड़े स्तर पर विकसित करने में किन तकनीकी या व्यावसायिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
कार्यक्रम में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले स्टार्टअप्स को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। क्लुइक्स प्राइवेट लिमिटेड को प्लैटिनम पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कार के साथ कंपनी को 2 लाख रुपये की राशि दी गई।
वहीं नियोस्लैब और मैटरवेव टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को संयुक्त रूप से गोल्ड पुरस्कार से सम्मानित किया गया। दोनों गोल्ड पुरस्कार विजेताओं को 1-1 लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।
इन पुरस्कारों के माध्यम से उन तकनीकों को पहचान मिली, जिन्हें जूरी ने नवाचार, तकनीकी क्षमता, संभावित उपयोग और रणनीतिक महत्व के लिहाज से उल्लेखनीय माना।
होरिबा इंडिया के मुताबिक, इनोवेशन कनेक्ट को केवल एक प्रतियोगिता या एक दिन के आयोजन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका बड़ा उद्देश्य कार्यक्रम में भाग लेने वाले स्टार्टअप्स के साथ दीर्घकालिक तकनीकी जुड़ाव स्थापित करना है।
चुनिंदा स्टार्टअप्स को आयोजन के बाद भी होरिबा के विशेषज्ञों से तकनीकी मार्गदर्शन मिलने की संभावना रहेगी। इसके साथ ही अनुसंधान एवं विकास, को-डेवलपमेंट और तकनीकी सहयोग के संभावित अवसरों पर भी काम किया जा सकता है।
इससे स्टार्टअप्स को अपनी तकनीक को और बेहतर बनाने, उसकी विश्वसनीयता जांचने तथा वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों में उसके संभावित इस्तेमाल को समझने में मदद मिल सकती है।
होरिबा इंडिया की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि तकनीक और कारोबारी क्षमता के आधार पर भविष्य में विभिन्न रणनीतिक विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। इनमें निवेश, लाइसेंसिंग और अधिग्रहण जैसे रास्ते शामिल हैं।
इसका अर्थ यह है कि इनोवेशन कनेक्ट में भाग लेने वाले कुछ स्टार्टअप्स के साथ संबंध केवल तकनीकी बातचीत तक सीमित नहीं रहेंगे। यदि किसी तकनीक में पर्याप्त व्यावसायिक और रणनीतिक क्षमता दिखाई देती है, तो उसके साथ लंबे समय की साझेदारी विकसित करने के विकल्पों का मूल्यांकन भी किया जा सकता है।
यह पहल भारत के स्टार्टअप्स और वैश्विक औद्योगिक तकनीकी कंपनियों के बीच सहयोग के लिए एक संभावित पुल के रूप में भी देखी जा सकती है।
कार्यक्रम में स्टार्टअप्स की तकनीकों का मूल्यांकन करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों की जूरी बनाई गई थी। जूरी में आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर डॉ. संदीप सिंह, मैक्स हेल्थकेयर में लेबोरेटरी सर्विसेज के सीनियर डायरेक्टर एवं हेड डॉ. अनिल हंडू, होरिबा के प्रेसिडेंट डॉ. आर.के. मल्होत्रा, हाइड्रोजन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. अश्विनी अग्रवाल और होरिबा जापान के बोर्ड मेंबर एवं प्रेसिडेंट डॉ. मासायुकी अदाची शामिल रहे।
जूरी की विशेषज्ञता अलग-अलग क्षेत्रों में होने के कारण स्टार्टअप्स की तकनीकों को केवल एक तकनीकी दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि उनके संभावित औद्योगिक, व्यावसायिक और रणनीतिक उपयोग के नजरिए से भी परखा गया।
इनोवेशन कनेक्ट में प्रदर्शित तकनीकों की विविधता भारत में विकसित हो रहे डीप-टेक इकोसिस्टम की व्यापकता को भी सामने लाती है।
सेंसर टेक्नोलॉजी आधुनिक उद्योगों में निगरानी और मापन की क्षमता को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी तरह फ्लो कंट्रोल तकनीक औद्योगिक प्रक्रियाओं में सटीकता और दक्षता बढ़ाने में उपयोगी हो सकती है।
स्पेक्ट्रोस्कोपी और ऑप्टिक्स-फोटोनिक्स जैसे क्षेत्र वैज्ञानिक अनुसंधान, हेल्थकेयर, मैन्युफैक्चरिंग और उन्नत मापन प्रणालियों में महत्वपूर्ण हैं। दूसरी ओर क्वांटम टेक्नोलॉजी भविष्य की कंप्यूटिंग, सेंसरिंग और संचार तकनीकों के लिए तेजी से महत्वपूर्ण क्षेत्र बन रही है।
सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए लैब-ग्रोन डायमंड और डिपोजिशन टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले स्टार्टअप्स की भागीदारी इस बात को भी दर्शाती है कि भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम केवल सॉफ्टवेयर या डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि अब अत्यधिक तकनीकी और औद्योगिक क्षेत्रों में भी अपनी क्षमता विकसित कर रहा है।
भारत में स्टार्टअप संस्कृति के विस्तार के साथ अब डीप-टेक कंपनियों की संख्या और उनके द्वारा विकसित किए जा रहे समाधान भी तेजी से चर्चा में हैं। हालांकि डीप-टेक स्टार्टअप्स को सामान्य डिजिटल स्टार्टअप्स की तुलना में अधिक समय, पूंजी, प्रयोगशाला सुविधाओं और विशेषज्ञ तकनीकी सहयोग की जरूरत होती है।
ऐसे में उद्योग जगत की बड़ी कंपनियों और डीप-टेक स्टार्टअप्स के बीच सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इनोवेशन कनेक्ट जैसी पहल इन दोनों पक्षों को एक साझा मंच उपलब्ध कराती हैं, जहां स्टार्टअप्स अपनी तकनीक प्रदर्शित कर सकते हैं और औद्योगिक कंपनियां भविष्य के संभावित तकनीकी समाधान तलाश सकती हैं।
होरिबा के लिए इनोवेशन कनेक्ट का महत्व केवल भारतीय स्टार्टअप्स की खोज तक सीमित नहीं है। यह कंपनी की एक्सटर्नल इनोवेशन पाइपलाइन को मजबूत करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में किसी कंपनी के लिए केवल अपने आंतरिक अनुसंधान एवं विकास पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों के साथ जुड़ाव से नई तकनीकों को शुरुआती चरण में पहचानने और उनके विकास की दिशा को समझने में मदद मिलती है।
इनोवेशन कनेक्ट इसी दिशा में एक व्यवस्थित प्रयास के रूप में सामने आया है।
होरिबा जापान के बोर्ड मेंबर और प्रेसिडेंट डॉ. मासायुकी अदाची ने कहा कि इनोवेशन कनेक्ट ग्लोबल इनोवेशन इकोसिस्टम के साथ जुड़ने और ऐसी तकनीकों की पहचान करने की कंपनी की व्यापक सोच को दर्शाता है, जो माप और विश्लेषण की अगली पीढ़ी में योगदान दे सकती हैं।
उन्होंने कहा कि उभरते इनोवेटर्स के साथ जुड़ने से तकनीकी आदान-प्रदान के साथ-साथ भविष्य में उद्योगों को आकार देने वाली तकनीकों को गहराई से समझने का अवसर मिलता है।
होरिबा इंडिया के प्रेसिडेंट डॉ. राजीव गौतम ने कहा कि इनोवेशन कनेक्ट के पहले संस्करण को मिली प्रतिक्रिया भारत के उभरते टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की गहराई को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि माप, विश्लेषण और औद्योगिक तकनीक के भविष्य से जुड़े क्षेत्रों में देश में व्यापक स्तर पर इनोवेशन हो रहा है।
उनके मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य केवल अच्छी तकनीक की पहचान करना नहीं है, बल्कि ऐसे सार्थक रास्ते तैयार करना है, जिनके माध्यम से स्टार्टअप्स तकनीकी विशेषज्ञता हासिल कर सकें, अपनी क्षमता का परीक्षण कर सकें और रणनीतिक तालमेल होने पर अपनी तकनीक को वास्तविक दुनिया के उपयोग तक ले जा सकें।
इनोवेशन कनेक्ट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक इसका आयोजन के बाद भी जारी रहने वाला सहयोग है। चुनिंदा स्टार्टअप्स के साथ होरिबा की टीमें आगे तकनीकी चर्चाएं कर सकती हैं और उनकी तकनीकों की विकास क्षमता का मूल्यांकन कर सकती हैं।
भविष्य में अनुसंधान एवं विकास, को-डेवलपमेंट और अन्य तकनीकी साझेदारियों की संभावनाएं तलाशने के साथ-साथ आवश्यकता और उपयुक्तता के आधार पर निवेश, लाइसेंसिंग अथवा अधिग्रहण जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है।
इससे स्टार्टअप्स को अपनी प्रयोगशाला या प्रोटोटाइप स्तर की तकनीक को अधिक परिपक्व उत्पाद में बदलने और संभावित औद्योगिक ग्राहकों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है।
इनोवेशन कनेक्ट को भारत में होरिबा के 20 साल के सफर के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन वर्षों में कंपनी की भूमिका केवल तकनीकी उत्पाद और समाधान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि बदलते औद्योगिक और वैज्ञानिक वातावरण के साथ टेक्नोलॉजी पार्टनर के रूप में भी विकसित हुई है।
अब उभरते स्टार्टअप्स के साथ सीधे जुड़कर कंपनी अपनी तकनीकी विशेषज्ञता को नई पीढ़ी की तकनीकों के साथ जोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
किसी भी नई तकनीक के लिए प्रयोगशाला में सफल होना पहला चरण होता है। उसके बाद उसे विश्वसनीय, सुरक्षित, लागत प्रभावी और बड़े पैमाने पर उपयोग योग्य बनाना बड़ी चुनौती होती है। इनोवेशन कनेक्ट इसी अंतर को कम करने की दिशा में एक संभावित मंच उपलब्ध कराता है।
होरिबा की माप एवं विश्लेषण संबंधी विशेषज्ञता और स्टार्टअप्स की नई तकनीकों को एक साथ लाकर ऐसे समाधान विकसित करने की संभावनाएं तलाशना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है।
यदि तकनीकी रूप से सफल समाधान आगे औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप विकसित होते हैं, तो इससे न केवल संबंधित स्टार्टअप्स को लाभ मिल सकता है, बल्कि भारत के उभरते डीप-टेक और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी मजबूती मिल सकती है।
पहले 'होरिबा इनोवेशन कनेक्ट' ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में उद्योग और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग केवल फंडिंग तक सीमित नहीं रहेगा। तकनीकी विशेषज्ञता, परीक्षण, सह-विकास, लाइसेंसिंग और संभावित औद्योगिक उपयोग जैसे क्षेत्र भी साझेदारी के महत्वपूर्ण आधार बनेंगे।
भारत में सेंसर, फोटोनिक्स, क्वांटम, सेमीकंडक्टर, ऑटोमेशन और उन्नत मापन तकनीकों के क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप्स के लिए ऐसे मंच नए अवसर पैदा कर सकते हैं। वहीं औद्योगिक कंपनियों को भी भविष्य की तकनीकों को शुरुआती चरण में पहचानने और उन्हें अपने उत्पाद एवं समाधान विकास से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
इस लिहाज से होरिबा इनोवेशन कनेक्ट का पहला संस्करण भारत के तेजी से बदलते तकनीकी परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया है। इसका वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में तब दिखाई देगा, जब कार्यक्रम में पहचानी गई तकनीकों में से कुछ समाधान अनुसंधान और प्रोटोटाइप के स्तर से आगे बढ़कर वास्तविक औद्योगिक अनुप्रयोगों में इस्तेमाल होने लगेंगे।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


