यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
नई दिल्ली, 03 अक्टूबर 2026 (यूटीएन)। देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और अलग-अलग राज्यों के युवाओं के बीच आपसी संवाद एवं जुड़ाव बढ़ाने के उद्देश्य से शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से चलाए जा रहे ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के तहत ‘युवा संगम’ के सातवें चरण का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में सिक्किम और राजस्थान के बीच युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम शुरू हुआ है।
इस कार्यक्रम के तहत सिक्किम से आए युवा प्रतिनिधिमंडल को राजस्थान की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत से रूबरू कराया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने राजस्थान के इतिहास, स्थापत्य कला, परंपराओं और सांस्कृतिक जीवन को करीब से समझने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
युवा संगम के सातवें चरण के पहले टूर की शुरुआत 25 सितंबर को नोडल संस्थान सिक्किम यूनिवर्सिटी से हुई। इसके साथ ही सिक्किम-राजस्थान एक्सचेंज कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
राजस्थान में इस प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (आईआईटी जोधपुर) की ओर से की जा रही है। कार्यक्रम के तहत सिक्किम से आए युवाओं के लिए राजस्थान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को समझने के साथ-साथ स्थानीय समाज से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
सिक्किम का युवा प्रतिनिधिमंडल 29 सितंबर को जोधपुर पहुंचा। यहां पहुंचने के बाद युवाओं ने राजस्थान की समृद्ध विरासत को करीब से जानने के लिए विभिन्न सांस्कृतिक और शैक्षिक गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया।
प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवाओं के लिए यह यात्रा केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है। कार्यक्रम का उद्देश्य उन्हें राजस्थान के इतिहास, स्थानीय परंपराओं, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक विरासत से प्रत्यक्ष रूप से परिचित कराना है।
युवाओं को अलग राज्य की संस्कृति को नजदीक से देखने और समझने का अवसर मिल रहा है। इससे उन्हें अपने अनुभवों की तुलना अपने गृह राज्य सिक्किम की परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं से करने का भी अवसर मिल रहा है।
राजस्थान यात्रा के दौरान सिक्किम के प्रतिनिधिमंडल ने जोधपुर स्थित मेहरानगढ़ किले का दौरा किया। किले की भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व ने प्रतिनिधिमंडल में शामिल युवाओं का ध्यान आकर्षित किया।
प्रतिनिधियों ने किले के विभिन्न हिस्सों, प्रांगणों और विरासत से जुड़े स्थलों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्हें राजस्थान के इतिहास और स्थापत्य परंपरा के बारे में जानकारी दी गई।
किले की विशाल संरचना, स्थापत्य शैली और ऐतिहासिक परिवेश ने युवाओं को राजस्थान की विरासत को समझने का अवसर दिया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने ऐतिहासिक स्थलों को करीब से देखा और उनके बारे में जानकारी हासिल की।
युवा संगम के तहत आयोजित इस यात्रा में युवाओं को किताबों और कक्षा से बाहर निकलकर इतिहास को प्रत्यक्ष रूप से अनुभव करने का मौका मिल रहा है। ऐतिहासिक इमारतों और विरासत स्थलों का दौरा इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
मेहरानगढ़ किले की यात्रा के दौरान युवाओं ने राजस्थान की ऐतिहासिक यात्रा, राजघरानों से जुड़ी परंपराओं और स्थापत्य विरासत के विभिन्न पहलुओं को समझने की कोशिश की।
प्रतिनिधिमंडल के लिए यह अनुभव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि सिक्किम की भौगोलिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि राजस्थान से काफी अलग है। ऐसे में दोनों क्षेत्रों की संस्कृति और विरासत को प्रत्यक्ष रूप से समझना युवा प्रतिभागियों के लिए सीखने का नया अनुभव बन रहा है।
यात्रा के दौरान सिक्किम के प्रतिनिधिमंडल ने गज सिंह द्वितीय से मुलाकात कर बातचीत की। इस दौरान युवाओं को राजस्थान की विरासत, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर से जुड़े अनुभवों को समझने का अवसर मिला।
बातचीत के दौरान राजस्थान की सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक विरासत से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर संवाद हुआ। प्रतिनिधिमंडल के युवाओं के लिए यह मुलाकात राजस्थान की विरासत को एक अलग दृष्टिकोण से समझने का अवसर बनी।
इस तरह की बातचीत युवा संगम के उस उद्देश्य से भी जुड़ी है, जिसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले युवाओं को स्थानीय समाज और वहां की विरासत से सीधे जुड़ने का अवसर दिया जाता है।
युवा संगम का एक प्रमुख उद्देश्य युवाओं को भारत की विविधता का प्रत्यक्ष अनुभव कराना है। अलग-अलग राज्यों के युवाओं को दूसरे राज्यों की यात्रा कर वहां के लोगों, खान-पान, भाषा, कला, इतिहास, परंपराओं और सामाजिक जीवन से परिचित कराया जाता है।
सिक्किम के युवाओं के राजस्थान पहुंचने से दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक संवाद का अवसर बना है। एक ओर प्रतिनिधिमंडल राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत को देख रहा है, वहीं स्थानीय स्तर पर संवाद के जरिए राजस्थान के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन को भी समझने का मौका मिल रहा है।
सिक्किम और राजस्थान भौगोलिक रूप से देश के अलग-अलग हिस्सों में स्थित हैं। दोनों राज्यों की प्राकृतिक परिस्थितियां, लोक परंपराएं, खान-पान और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां भी अलग-अलग हैं। युवा संगम जैसे कार्यक्रम युवाओं को इन भिन्नताओं को समझने के साथ-साथ उनके बीच मौजूद समानताओं को पहचानने का अवसर देते हैं।
प्रतिनिधिमंडल के युवाओं के लिए यह यात्रा अपने राज्य से बाहर निकलकर देश के दूसरे हिस्से के लोगों के साथ संवाद करने और उनके जीवन को समझने का अनुभव है।
युवा संगम को ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ कार्यक्रम के उद्देश्यों से जोड़कर देखा जा रहा है। इसका जोर देश के विभिन्न हिस्सों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने और एक-दूसरे की संस्कृति को समझने पर है।
युवा जब दूसरे राज्यों की यात्रा करते हैं तो उन्हें वहां की वास्तविक सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों को करीब से देखने का अवसर मिलता है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों के बारे में बनी सामान्य धारणाओं के बजाय प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर समझ विकसित होती है।
सिक्किम-राजस्थान एक्सचेंज कार्यक्रम के दौरान युवाओं को भारत की विविधता के साथ उसकी एकता को समझने का अवसर मिल रहा है। पहाड़ों और पूर्वोत्तर की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से आने वाले युवा जब राजस्थान की मरुस्थलीय और राजपूताना विरासत से परिचित होते हैं, तो उन्हें देश की व्यापक सांस्कृतिक विविधता को करीब से देखने का मौका मिलता है।
यह आदान-प्रदान केवल संस्कृति को देखने तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के बीच संवाद और अनुभव साझा करने की प्रक्रिया भी है।
युवा संगम के कार्यक्रम युवाओं के लिए अनुभव आधारित सीख का अवसर भी उपलब्ध कराते हैं। ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण, स्थानीय लोगों से बातचीत और सांस्कृतिक गतिविधियों में भागीदारी से युवाओं को अपनी पाठ्यपुस्तकों से अलग प्रत्यक्ष अनुभव मिलता है।
सिक्किम के प्रतिनिधिमंडल के लिए राजस्थान यात्रा भी इसी तरह का अनुभव लेकर आई है। मेहरानगढ़ जैसे ऐतिहासिक स्थल का भ्रमण और राजस्थान की विरासत से जुड़े लोगों से संवाद ने यात्रा को शैक्षिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाया।
युवा संगम के माध्यम से अलग-अलग राज्यों के युवाओं के बीच संपर्क स्थापित हो रहा है। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए युवा न केवल नई जगहों को देखते हैं, बल्कि वहां के लोगों और उनकी जीवनशैली को समझते हैं।
सिक्किम-राजस्थान एक्सचेंज भी इसी दिशा में एक पहल है। कार्यक्रम के दौरान बनने वाले संपर्क भविष्य में भी युवाओं के बीच संवाद और सहयोग की संभावनाओं को बढ़ा सकते हैं।
राजस्थान की ऐतिहासिक इमारतों, संस्कृति और परंपराओं को करीब से देखने के बाद सिक्किम के युवा अपने साथ इन अनुभवों को लेकर लौटेंगे। उनके लिए यह यात्रा देश के एक अलग हिस्से को समझने का अवसर होने के साथ-साथ भारत की विविध सांस्कृतिक पहचान को महसूस करने का अनुभव भी है।
युवा संगम का यही मूल उद्देश्य है कि देश के युवा अपने राज्य की सीमाओं से आगे बढ़कर भारत के दूसरे हिस्सों को समझें, वहां के लोगों से संवाद करें और विविधताओं के बीच एकता के भाव को मजबूत करें।
सिक्किम-राजस्थान एक्सचेंज कार्यक्रम इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए युवाओं को जोड़ने, संस्कृतियों को करीब लाने और देश की साझा विरासत को समझने का मंच प्रदान कर रहा है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


