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- 10h ago
मथुरा। लंबित वेतन के भुगतान की मांग को लेकर नगर निगम के कूड़ा उठाने वाले वाहनों के चालक और सफाई कर्मचारियों ने रविवार से कामबंद हड़ताल शुरू कर दी। वेतन नहीं मिलने से नाराज कर्मचारियों ने काम रोककर नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन किया और बकाया भुगतान तत्काल किए जाने की मांग उठाई। कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी लंबित राशि का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
रविवार को उत्तम चंद सहजन के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कचरा वाहन चालक और सफाई कर्मचारी एकत्र हुए। कर्मचारियों ने अपनी समस्याएं रखते हुए कहा कि वे लंबे समय से वेतन भुगतान में देरी का सामना कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया।
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें कई महीनों से नियमित रूप से वेतन नहीं मिल रहा है। वेतन भुगतान के संबंध में कई बार नगर निगम अधिकारियों से संपर्क किया गया। कर्मचारियों के मुताबिक, हर बार जल्द भुगतान कराने का आश्वासन दिया गया, लेकिन इसके बावजूद लंबित वेतन का भुगतान नहीं हो सका।
कर्मचारियों का कहना है कि लगातार आश्वासन मिलने के बाद भी जब उनकी आर्थिक समस्या दूर नहीं हुई तो मजबूर होकर काम बंद करने का निर्णय लेना पड़ा।
कचरा वाहन चालक और सफाई कर्मचारी नगर निगम की सफाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में घर-घर से कूड़ा उठाने, उसे निर्धारित स्थान तक पहुंचाने और सफाई व्यवस्था बनाए रखने में इन कर्मचारियों की प्रमुख भूमिका रहती है।
कर्मचारियों का कहना है कि वे प्रतिदिन अपने निर्धारित रूट पर काम करते हैं और शहरवासियों के घरों से कूड़ा उठाते हैं। सुबह से ही कचरा वाहनों के संचालन और सफाई कार्य में कर्मचारी जुट जाते हैं।
उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए वे अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं, लेकिन बदले में समय पर वेतन नहीं मिलने से उनके परिवार आर्थिक परेशानी से जूझ रहे हैं।
कर्मचारियों ने कहा कि समय पर वेतन नहीं मिलने से घर का बजट पूरी तरह प्रभावित हो गया है। राशन, बच्चों की पढ़ाई, बिजली-पानी के बिल और अन्य जरूरी खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है।
कर्मचारियों का कहना है कि वेतन उनकी नियमित आय का मुख्य साधन है। जब कई महीनों तक भुगतान अटक जाता है तो परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए उधार लेना पड़ता है। लगातार बढ़ती आर्थिक परेशानी के कारण ही उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
कर्मचारियों में सबसे अधिक नाराजगी इस बात को लेकर है कि शिकायत करने के बाद उन्हें भुगतान का भरोसा तो दिया जाता है, लेकिन निर्धारित समय पर राशि नहीं मिलती।
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि अब वे केवल आश्वासन के आधार पर काम पर वापस नहीं लौटेंगे। पहले लंबित वेतन का भुगतान किया जाए, इसके बाद ही काम शुरू करने पर विचार किया जाएगा।
कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित होने के आसार हैं। कूड़ा उठाने वाले वाहनों के नहीं चलने से कई क्षेत्रों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान प्रभावित हो सकता है।
यदि हड़ताल आगे भी जारी रहती है तो घरों और दुकानों से निकलने वाला कूड़ा जमा होने की स्थिति बन सकती है। कूड़ा उठान बाधित होने से मुख्य बाजारों, कॉलोनियों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी सफाई व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।
कूड़ा उठान की व्यवस्था लंबे समय तक बाधित रहने पर इसका सीधा असर शहरवासियों पर पड़ सकता है। रोजाना घरों से निकलने वाले कचरे को निर्धारित समय पर उठाया जाना जरूरी होता है। वाहन नहीं चलने पर लोगों को अपने घरों में कूड़ा रोककर रखना पड़ सकता है।
वहीं, बाजार और व्यावसायिक क्षेत्रों में रोजाना अधिक मात्रा में कचरा निकलने के कारण स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों की मुख्य मांग लंबित वेतन का तत्काल भुगतान है। इसके साथ ही उन्होंने भविष्य में वेतन समय पर दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की है।
कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें हर महीने वेतन को लेकर अधिकारियों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। वे नियमित रूप से काम कर रहे हैं तो उन्हें भी समय पर मेहनताना मिलना चाहिए।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि लंबित वेतन का भुगतान जल्द नहीं किया गया तो कामबंद आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि आर्थिक संकट के बीच बिना वेतन के काम करना उनके लिए संभव नहीं है।
कर्मचारियों ने नगर निगम प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वह शहर की सफाई व्यवस्था को बाधित नहीं करना चाहते, लेकिन अपनी आर्थिक समस्या के समाधान के लिए उनके पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
हड़ताल के बाद नगर निगम प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती खड़ी हो गई है। एक ओर कर्मचारियों की लंबित वेतन की समस्या का समाधान करना है, वहीं दूसरी ओर शहर की सफाई व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाना भी जरूरी है।
यदि जल्द कर्मचारियों और निगम प्रशासन के बीच सहमति नहीं बनती है तो हड़ताल लंबी खिंच सकती है। ऐसी स्थिति में शहर के अलग-अलग हिस्सों में कूड़ा जमा होने की समस्या बढ़ सकती है।
माना जा रहा है कि कर्मचारियों और नगर निगम प्रशासन के बीच बातचीत के जरिए ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। कर्मचारियों की मांग है कि उनके बकाया वेतन को लेकर स्पष्ट समयसीमा तय की जाए और भुगतान की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।
फिलहाल कर्मचारी अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि लंबित वेतन का भुगतान होने तक कामबंद आंदोलन जारी रहेगा।
अब निगाहें नगर निगम प्रशासन के अगले कदम पर हैं। यदि जल्द समाधान निकलता है तो शहर की सफाई व्यवस्था को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है, वहीं देरी होने पर हड़ताल का असर आने वाले दिनों में शहर के कई इलाकों में दिखाई दे सकता है।
कर्मचारियों की मांग है कि उनके बकाया वेतन का तत्काल भुगतान कराया जाए और भविष्य में वेतन भुगतान की व्यवस्था नियमित की जाए, ताकि उन्हें आर्थिक संकट के कारण दोबारा आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े।


