यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि देश के खिलाड़ियों की उपलब्धियां नए भारत की सशक्त तस्वीर पेश करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सपने बड़े हैं और उन्हें पूरा करने का सामर्थ्य भी देश के पास है। खेलों में सफलता हासिल करने के लिए वर्षों का धैर्य, लगातार परिश्रम और दृढ़ संकल्प जरूरी है। प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए और मजबूती से तैयारी करने, नए रिकॉर्ड बनाने तथा हर मैदान पर तिरंगे की शान बढ़ाने का आह्वान किया।
गुरुवार को दिल्ली के मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एशियन गेम्स 2026 के भारतीय दल के खिलाड़ियों, कोच और सपोर्ट स्टाफ से मुलाकात की। इस कार्यक्रम में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया और खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे भी मौजूद रहीं। इस दौरान प्रधानमंत्री ने भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों, महिला एथलीट्स के प्रदर्शन, खेलों में बढ़ते अवसरों और सरकार की खेल योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब जुनून जीत में बदलता है, तो उसका असर सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि खिलाड़ियों के आत्मविश्वास, चेहरे की चमक और पूरे देश के गौरव में भी दिखाई देता है। उन्होंने एशियाई खेलों में भारतीय दल के प्रदर्शन को देश में विकसित हो रही खेल संस्कृति और युवाओं की बढ़ती महत्वाकांक्षा का उदाहरण बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खिलाड़ियों के बीच पहुंचने पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इतने सारे पदक विजेताओं, युवा एथलीट्स, प्रशिक्षकों और सहयोगी स्टाफ के बीच आना अपने आप में सुखद अनुभव है।
उन्होंने कहा, “केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, युवा एथलीट्स, कोच... आप सभी के बीच आना मुझे भी ऊर्जा से भर देता है। इतने सारे पदकवीर और उन सबको एक साथ मिलना ये कोई मामूली बात नहीं है। ये बहुत सुखद अहसास होता है।”
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि जब किसी खिलाड़ी का जुनून जीत में बदलता है, तो वह केवल पदक नहीं जीतता, बल्कि उसके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास में भी बदलाव दिखाई देता है। ऐसी उपलब्धियां पूरे देश को प्रेरित करती हैं और युवाओं के सामने नए लक्ष्य स्थापित करती हैं।
उन्होंने खिलाड़ियों को संदेश दिया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली सफलता को अंतिम पड़ाव नहीं मानना चाहिए। इसके बजाय, हर उपलब्धि को अगले लक्ष्य की शुरुआत के रूप में देखना चाहिए। उनके मुताबिक, देश को खेलों में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए खिलाड़ियों, प्रशिक्षकों और खेल संस्थानों को लगातार प्रयास करते रहना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने एशियन गेम्स में भारतीय हॉकी टीमों की उपलब्धियों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों ने स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने खास तौर पर महिला हॉकी टीम की उपलब्धि को यादगार बताया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, महिला हॉकी टीम ने स्वर्ण पदक जीतकर 44 साल लंबे इंतजार को समाप्त किया। उन्होंने इस सफलता को भारतीय महिला खिलाड़ियों की मेहनत, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प का उदाहरण बताया।
उन्होंने क्रिकेट में भारतीय टीमों की उपलब्धियों का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की दोनों क्रिकेट टीमों ने लगातार दूसरी बार स्वर्ण पदक जीतकर अपना रिकॉर्ड बेहतर किया। कबड्डी में भी भारतीय पुरुष और महिला टीमों ने स्वर्ण पदक हासिल किए।
इसके अलावा, तीरंदाजी में भारत को पांच स्वर्ण पदक मिलने का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अलग-अलग खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता देश की बढ़ती खेल क्षमता को दर्शाती है।
इन उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने खिलाड़ियों से अपील की कि वे अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाने पर ध्यान दें। उनके मुताबिक, एक खेल में मिली सफलता दूसरे खेलों के खिलाड़ियों को भी प्रेरित करती है और देश में प्रतिस्पर्धा की भावना मजबूत बनाती है।
प्रधानमंत्री ने महिला खिलाड़ियों के योगदान की विशेष रूप से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत के कुल 85 पदकों में से 38 पदक महिला एथलीट्स ने जीते, जिनमें 11 स्वर्ण पदक शामिल हैं।
उन्होंने कहा, “ये मेडल केवल एक संख्या नहीं है, ये नए भारत की सशक्त तस्वीर है।”
प्रधानमंत्री ने महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों को देश में बदलते अवसरों और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से जोड़ते हुए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि महिला एथलीट्स ने अपने प्रदर्शन से यह दिखाया है कि मेहनत, आत्मविश्वास और सही अवसर मिलने पर वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार प्रदर्शन कर सकती हैं।
महिला खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि खेलों में सफलता हासिल करने वाली खिलाड़ी नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनती हैं। उनकी उपलब्धियां उन लड़कियों को भी आगे बढ़ने का हौसला दे सकती हैं, जो खेलों में अपना भविष्य बनाना चाहती हैं।
उन्होंने खिलाड़ियों की सफलता को व्यक्तिगत उपलब्धि से आगे बढ़कर देश की सामूहिक उपलब्धि के रूप में देखने की बात कही। प्रधानमंत्री के अनुसार, जब भारतीय खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में तिरंगे के साथ पोडियम पर खड़े होते हैं, तो उससे पूरे देश का आत्मविश्वास बढ़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब उन खेलों में भी पदक जीत रहा है, जिनमें एशियाई खेलों के इतिहास में पहले देश को सफलता नहीं मिली थी।
उन्होंने मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (एमएमए), सॉफ्ट टेनिस और सेलिंग के कुछ इवेंट्स में भारतीय खिलाड़ियों के पदक जीतने का उल्लेख किया। उनके अनुसार, इन खेलों में मिली सफलता यह दिखाती है कि भारत की खेल प्रतिभा अब अधिक विविध क्षेत्रों में सामने आ रही है।
प्रधानमंत्री ने शूटिंग और बॉक्सिंग में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि खेलों में देश की भागीदारी का दायरा बढ़ना महत्वपूर्ण है, क्योंकि जब खिलाड़ी अधिक खेलों में हिस्सा लेते हैं, तो उन्हें पदक जीतने और अंतरराष्ट्रीय अनुभव हासिल करने के नए अवसर मिलते हैं।
उन्होंने कहा कि पहले कई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व सीमित था। अब अधिक खिलाड़ियों को अलग-अलग प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिल रहा है। इससे देश में खेल प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ाने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के साथ मिलकर भविष्य के लिए कुछ संकल्प भी दोहराए। उन्होंने देश की खेल महत्वाकांक्षाओं को छोटे-छोटे नारों के माध्यम से सामने रखा और खिलाड़ियों से उनके समर्थन में ‘वी विल डू इट’ कहने को कहा।
इन संकल्पों में प्रमुख रूप से शामिल थे:
हर मैदान पर तिरंगे की शान बढ़ाना।
खेलों में भारत की नई पहचान बनाना।
हर खेल में नए चैंपियन तैयार करना।
देश के नाम नए रिकॉर्ड स्थापित करना।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय खिलाड़ियों को अपनी उपलब्धियों से संतुष्ट होकर रुकना नहीं चाहिए। उन्हें नए लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करनी चाहिए।
उन्होंने खिलाड़ियों को याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय खेलों में सफलता केवल प्रतिभा के आधार पर नहीं मिलती। इसके लिए अनुशासन, अभ्यास, धैर्य और लंबे समय तक निरंतर प्रयास करना पड़ता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में धैर्य और निरंतर मेहनत को खेलों में सफलता की बुनियाद बताया। उन्होंने कहा, “सपने एक दिन में पूरे नहीं होते। इसमें वर्षों का धैर्य और लगातार परिश्रम अनिवार्य होता है।”
उन्होंने कहा कि भारत ने भी पिछले 12 वर्षों में अपनी खेल संस्कृति को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास किए हैं। पहले कई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की भागीदारी सीमित रहती थी और पदकों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम थी। अब स्थिति बदल रही है और अधिक खेलों में भारत की मौजूदगी दिखाई दे रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि खिलाड़ी प्रतियोगिताओं में हिस्सा ही नहीं लेंगे, तो पदक जीतने के अवसर भी सीमित रहेंगे। इसी सोच के साथ खेलों में भागीदारी बढ़ाने और अधिक से अधिक प्रतिभाओं को अवसर देने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि खेलों में निराशावादी सोच को पीछे छोड़कर लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है। खिलाड़ियों को अपनी कमियों को पहचानना चाहिए, उन्हें दूर करने के लिए मेहनत करनी चाहिए और असफलताओं से सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, बड़े खेल लक्ष्य हासिल करने के लिए लंबे समय तक तैयारी करनी पड़ती है। किसी खिलाड़ी की सफलता के पीछे वर्षों का अभ्यास, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और कठिन परिस्थितियों में भी हार न मानने की क्षमता होती है।
प्रधानमंत्री ने खेलों के विकास के लिए सरकार की योजनाओं का उल्लेख करते हुए टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम (टॉप्स) और खेलो इंडिया को महत्वपूर्ण पहल बताया।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के जरिए खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, प्रतियोगिताओं की तैयारी और आगे बढ़ने के लिए सहायता दी जा रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, खेलो इंडिया के लिए 36 हजार करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए जाने और देश में 1,000 से ज्यादा खेलो इंडिया केंद्र बनाए जाने का उल्लेख किया गया।
उन्होंने कहा कि टॉप्स योजना के तहत खिलाड़ियों को हर महीने 50 हजार रुपये की सहायता मिल रही है। इसके अलावा, यदि किसी खिलाड़ी को बेहतर प्रशिक्षण के लिए विदेश जाने की आवश्यकता होती है, तो सरकार की ओर से आर्थिक मदद उपलब्ध कराने का भी प्रावधान है।
प्रधानमंत्री ने खेलों में बेहतर प्रदर्शन के लिए सुविधाओं और संसाधनों की भूमिका पर जोर दिया। उनके मुताबिक, खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी करने के लिए उचित प्रशिक्षण, प्रशिक्षकों का मार्गदर्शन और आर्थिक सहायता मिलना जरूरी है।
हालांकि, अलग-अलग योजनाओं के तहत सहायता की पात्रता, राशि और उपलब्ध सुविधाएं संबंधित नियमों तथा खिलाड़ी की श्रेणी पर निर्भर करती हैं। योजनाओं के वास्तविक लाभों का आकलन करने के लिए उनके आधिकारिक दिशा-निर्देशों और लागू प्रावधानों को देखना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए विंटर गेम्स और सांसद खेल प्रतियोगिताओं जैसी पहल की गई हैं। उन्होंने दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए बेहतर खेल सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।
प्रधानमंत्री के अनुसार, जब खिलाड़ियों को यह भरोसा होता है कि देश उनके साथ खड़ा है, तो वे अपने प्रदर्शन से बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एशियाई खेलों में 15 से 17 वर्ष की उम्र के खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन करके देश का गौरव बढ़ाया है।
उन्होंने युवाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि सफलता हासिल करने के लिए उम्र हमेशा बाधा नहीं होती। सही मार्गदर्शन, अभ्यास और अवसर मिलने पर कम उम्र के खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में खेलों का आधार जितना व्यापक होगा, उतनी ही अधिक प्रतिभाएं सामने आएंगी। ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों को भी खेलों में आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए।
प्रधानमंत्री मोदी ने खेल प्रतिभाओं की पहचान के लिए जमीनी स्तर पर प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि गांव-गांव जाकर खिलाड़ियों को तलाशने और उन्हें तराशने का काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में खेलो इंडिया के माध्यम से हजारों नए खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। प्रधानमंत्री के अनुसार, भारत के खेल संबंधी लक्ष्य बड़े हैं और उन्हें हासिल करने के लिए प्रतिभाओं को कम उम्र से ही उचित प्रशिक्षण देना जरूरी है।
उन्होंने भविष्य के खेल आयोजनों का उल्लेख करते हुए 2028 के लॉस एंजिलिस ओलंपिक, 2030 में भारत में प्रस्तावित कॉमनवेल्थ गेम्स और 2036 के ओलंपिक की मेजबानी की भारत की आकांक्षा का जिक्र किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में बेहतर प्रदर्शन करने और उनकी मेजबानी की तैयारी के लिए देश को अभी से योजना बनानी होगी। इसके लिए खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार करना, खेल सुविधाओं का विस्तार करना और प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार करना महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि भारत के पास बड़े सपने हैं और उन्हें पूरा करने की क्षमता भी है। इसके लिए खिलाड़ियों, खेल संगठनों और सरकार को मिलकर काम करना होगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेलों का विस्तार केवल मैदान पर खेलने वाले खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। खेल क्षेत्र में कोचिंग, फिजियोथेरेपी और अन्य पेशों में भी नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षकों, फिटनेस विशेषज्ञों, फिजियोथेरेपिस्ट और खेल प्रबंधन से जुड़े लोगों की भूमिका महत्वपूर्ण है। जैसे-जैसे देश में खेलों का दायरा बढ़ेगा, वैसे-वैसे इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित पेशेवरों की मांग भी बढ़ सकती है।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से अपनी व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ नई पीढ़ी को तैयार करने की जिम्मेदारी उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले खिलाड़ियों के अनुभव उन बच्चों के लिए बेहद उपयोगी हो सकते हैं, जो अभी खेलों में अपना सफर शुरू कर रहे हैं।
उन्होंने खिलाड़ियों को सलाह दी कि जब भी समय मिले, वे अपने गांव और शहर के बच्चों से मिलें और उन्हें अपने अनुभव बताएं। प्रधानमंत्री के अनुसार, किसी सफल खिलाड़ी की छोटी-सी सलाह भी किसी बच्चे को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से कहा कि खेलों में मिली सफलता को समाज के साथ साझा करना भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने खिलाड़ियों से अपने अनुभव नई पीढ़ी तक पहुंचाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ी जब अपने क्षेत्र के बच्चों से मिलते हैं, तो वे उन्हें अभ्यास, अनुशासन, असफलताओं से उबरने और लक्ष्य निर्धारित करने के बारे में वास्तविक अनुभव बता सकते हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, कई बच्चे खेलों में आगे बढ़ने का सपना देखते हैं, लेकिन उन्हें सही मार्गदर्शन या अवसर नहीं मिल पाता। अनुभवी खिलाड़ियों का सहयोग ऐसे बच्चों को प्रेरित कर सकता है और उन्हें खेलों में अपना भविष्य बनाने की दिशा दे सकता है।
उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों की जिम्मेदारी केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं है। वे अपने अनुभवों और उपलब्धियों के माध्यम से देश में खेल संस्कृति को मजबूत करने में भी योगदान दे सकते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने खेलों को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि खेल व्यक्ति को अनुशासन, नियमितता और कठिन परिस्थितियों का सामना करना सिखाते हैं।
उन्होंने कहा कि खेलों में हार और जीत दोनों का महत्व है। हार से खिलाड़ी अपनी गलतियों को समझता है, जबकि जीत उसे आगे बढ़ने का आत्मविश्वास देती है। लगातार अभ्यास और लक्ष्य के प्रति समर्पण से खेल जीवन का अभिन्न हिस्सा बन जाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा, “खेल हमें जीवन में अनुशासन सिखाते हैं, हार से जीतने की सीख खेलों से मिलती है।”
उन्होंने खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा, “जो खेलेगा वो खिलेगा। आप भी खेलते रहिए, खिलते रहिए, आने वाली प्रतियोगिताओं के लिए आप सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं।”
प्रधानमंत्री का संदेश था कि खेलों में सफलता के लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है, लेकिन खेल से मिलने वाले जीवन के सबक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। टीम भावना, नेतृत्व, आत्मविश्वास और हार के बाद दोबारा उठ खड़े होने की क्षमता खेलों के जरिए विकसित होती है।
प्रधानमंत्री ने एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की सफलता को देश के युवाओं की क्षमता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल करने की ताकत रखती है।
उन्होंने खिलाड़ियों के उत्साह और आत्मविश्वास को नए भारत की प्रमुख ताकत बताया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, युवाओं को अवसर और सही दिशा मिलने पर वे विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम रोशन कर सकते हैं।
उन्होंने भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का भी उल्लेख किया और कहा कि देश के युवा अपनी तकदीर खुद तय करने की क्षमता रखते हैं। खेलों के साथ-साथ उद्यमिता, तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भी युवा अपनी प्रतिभा दिखा रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से इसी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और भारत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों के सामने विकसित भारत 2047 के व्यापक लक्ष्य का भी उल्लेख किया। इस संकल्प के तहत भारत को दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करना, आत्मनिर्भरता बढ़ाना, वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में मजबूत बनाना और तकनीक के क्षेत्र में नेतृत्व हासिल करना जैसे लक्ष्य शामिल हैं।
इसके साथ ही खेलों में नए पदक जीतना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की पहचान को मजबूत करना भी भविष्य की महत्वाकांक्षाओं का हिस्सा बताया गया।
प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए आत्मविश्वास और मेहनत के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि देश को नई बुलंदियों तक पहुंचाने के लिए युवा शक्ति का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।
उनके अनुसार, खेलों में मिली सफलता केवल पदकों की संख्या से नहीं मापी जानी चाहिए। यह भी जरूरी है कि अधिक बच्चे खेलों से जुड़ें, खेल सुविधाओं तक उनकी पहुंच बढ़े और खिलाड़ियों को अपने हुनर को निखारने के अवसर मिलें।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय महिला और पुरुष हॉकी टीमों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपनी जर्सी भेंट की। भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ओर से भी प्रधानमंत्री को जर्सी दी गई।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर ने भी प्रधानमंत्री को जर्सी भेंट की। इस दौरान खिलाड़ियों और प्रधानमंत्री के बीच मुलाकात कार्यक्रम की प्रमुख गतिविधियों में शामिल रही।
इन मुलाकातों के माध्यम से एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों और खेलों के प्रति उनके समर्पण को रेखांकित किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन में भारतीय खेलों की वर्तमान उपलब्धियों के साथ भविष्य की तैयारियों पर भी जोर रहा। उन्होंने महिला खिलाड़ियों के प्रदर्शन, विभिन्न खेलों में पदक जीतने, युवा प्रतिभाओं की पहचान करने और प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत बनाने की आवश्यकता का उल्लेख किया।
उन्होंने खिलाड़ियों को संदेश दिया कि बड़ी उपलब्धियां हासिल करने के लिए धैर्य, निरंतर मेहनत और अनुशासन अनिवार्य हैं। साथ ही, सफल खिलाड़ियों को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनने और अपने अनुभव साझा करने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।
एशियन गेम्स 2026 के भारतीय दल के साथ मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत के खेल भविष्य को लेकर भरोसा जताया। उनका संदेश स्पष्ट था कि देश को अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर नई पहचान दिलाने के लिए खिलाड़ियों को लगातार बेहतर प्रदर्शन करना होगा और खेल संस्कृति को समाज के हर हिस्से तक पहुंचाना होगा।
प्रधानमंत्री के संबोधन का मुख्य संदेश यही रहा कि पदक जीतना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी बड़ा लक्ष्य ऐसी खेल संस्कृति तैयार करना है, जिसमें देश के हर हिस्से से प्रतिभाएं सामने आएं, उन्हें सही अवसर मिलें और भारत आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में नए कीर्तिमान स्थापित कर सके।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


