यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
बड़ौत। ग्राम अंगदपुर जोहड़ी में पूर्व प्रधान पं. सुरेंद्र शर्मा के आवास पर ब्राह्मण समाज के खाप चौधरियों, समाजसेवियों एवं गणमान्य लोगों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज में बढ़ती विभिन्न सामाजिक कुरीतियों और युवा पीढ़ी के सामने उत्पन्न हो रही चुनौतियों पर गंभीरता से मंथन किया गया। वक्ताओं ने नशाखोरी, ऑनर किलिंग, भ्रूण हत्या सहित अन्य सामाजिक बुराइयों के खिलाफ सामूहिक रूप से आवाज बुलंद करते हुए समाज में जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। बैठक में आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू किए जाने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। इसके साथ ही वक्ताओं ने यूजीसी बिल को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया और इसे वापस लेने की मांग सरकार से की।
बैठक की अध्यक्षता पं. सुभाष शर्मा, चौधरी चौरासी देश खाप ब्राह्मण समाज ने की, जबकि संचालन मा. पंकज शर्मा ककड़ीपुर एवं डॉ. सतीश शास्त्री ने संयुक्त रूप से किया। बैठक में समाज की वर्तमान परिस्थितियों, युवाओं की दिशा एवं सामाजिक एकजुटता को लेकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
पं. सुभाष शर्मा चौधरी चौरासी देश खाप ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी के सामने नशा एक गंभीर चुनौती बनकर उभर रहा है। बड़ी संख्या में युवा नशे की गिरफ्त में आकर अपने भविष्य को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि नशे का दुष्प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे पूरा परिवार प्रभावित होता है।
उन्होंने कहा कि नशे की लत के कारण परिवारों में आर्थिक परेशानी, तनाव और सामाजिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए समाज के जिम्मेदार लोगों को आगे आकर युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूकता अभियान चलाने चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से भी बच्चों की गतिविधियों पर ध्यान देने तथा उन्हें सकारात्मक दिशा देने का आह्वान किया।
वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को खेल, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक सेवा और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने की जरूरत है। यदि युवा अपनी ऊर्जा सकारात्मक कार्यों में लगाएंगे तो परिवार और समाज दोनों मजबूत होंगे।
बैठक में आरक्षण व्यवस्था को लेकर भी वक्ताओं ने अपनी राय रखी। पं. सुभाष शर्मा ने कहा कि उनके मत में आरक्षण का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को मिलना चाहिए, चाहे वह किसी भी जाति अथवा वर्ग से संबंधित हों। उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे जरूरतमंद लोगों को सहायता मिल सके।
उन्होंने कहा कि प्रतिभाशाली युवाओं को शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर मिलने चाहिए। बैठक में वक्ताओं ने अपनी इस मांग को सरकार तक पहुंचाने की बात कही तथा आरक्षण व्यवस्था पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता जताई।
समाजसेवी नीरज पंडित एवं ललित शर्मा ने संयुक्त रूप से कहा कि युवा वर्ग में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि नशे की समस्या को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके सामाजिक और पारिवारिक पहलुओं पर भी ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि नशे के कारण कई परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करते हैं। युवाओं को नशे से बचाने के लिए परिवार, समाज और प्रशासन को मिलकर प्रयास करने की जरूरत है। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों से युवाओं के बीच जागरूकता फैलाने का आह्वान किया।
बैठक में ऑनर किलिंग और भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों पर भी चिंता व्यक्त की गई। वक्ताओं ने कहा कि समाज में किसी भी प्रकार की हिंसा और भेदभाव के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। परिवारों को बच्चों की शिक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि बेटियों को बोझ समझने की मानसिकता को समाप्त करने की आवश्यकता है। समाज में बेटियों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ केवल बैठकें करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर जागरूकता फैलाने और गलत प्रथाओं का विरोध करने की आवश्यकता है।
बैठक में थांबा चौधरी ओंकार शर्मा ने यूजीसी बिल को लेकर विरोध जताते हुए सरकार से इसे वापस लेने की मांग की। उन्होंने इसे अपनी राय में भेदभावपूर्ण नीति बताते हुए कहा कि इससे सामाजिक भाईचारे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से इस विषय पर समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद करने की मांग की।
बैठक में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी यूजीसी बिल को लेकर अपने विचार रखे और सरकार से संबंधित प्रावधानों पर पुनर्विचार करने की मांग की। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े किसी भी बड़े बदलाव को लागू करने से पहले उसके सामाजिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए।
बैठक में वक्ताओं ने समाज में आपसी भाईचारा, सहयोग और एकता बनाए रखने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों और खाप प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे समाज में व्याप्त समस्याओं पर खुलकर चर्चा करें और उनके समाधान के लिए सकारात्मक पहल करें।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को छोटी-छोटी बातों पर विभाजित होने के बजाय शिक्षा, रोजगार, नशामुक्ति, महिला सम्मान और सामाजिक सुधार जैसे मुद्दों पर एकजुट होकर काम करने की जरूरत है।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि सामाजिक पंचायतों और बैठकों का उद्देश्य समाज के लोगों के बीच संवाद स्थापित करना होना चाहिए। आपसी मतभेदों को बातचीत के माध्यम से दूर करने और युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने के लिए लगातार प्रयास किए जाने चाहिए।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि समाज में परिवर्तन केवल कानून बनाने से नहीं आता, बल्कि लोगों की सोच और व्यवहार में बदलाव से आता है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों को संस्कार देने, युवाओं को शिक्षा एवं रोजगार से जोड़ने और समाज के वरिष्ठ लोगों से नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ घर-घर जागरूकता पहुंचाने, भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों का विरोध करने तथा महिलाओं और बेटियों के सम्मान को बढ़ावा देने के लिए सामाजिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए। बैठक में सामाजिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
बैठक में सर्वखाप चौधरी नरेश शर्मा, कृष्णपाल शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, प्रधान प्रहलाद, चौधरी हरिओम शर्मा, थांबा चौधरी बिराल ऋषिपाल शर्मा, राजेंद्र शर्मा, अनिल शर्मा, पंकज शर्मा, पुनीत शर्मा, सचिन पंडित, बिट्टू, रजनीश, सतेंद्र कौशिक, विजयपाल शर्मा, राजपाल शर्मा, रविंद्र भारद्वाज, मुकेश शर्मा सहित समाज के अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
बैठक के अंत में उपस्थित लोगों ने सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने, युवा पीढ़ी को नशे से बचाने तथा समाज में आपसी भाईचारा और एकता मजबूत करने के लिए मिलकर प्रयास करने पर जोर दिया। साथ ही बैठक में उठाए गए विभिन्न मुद्दों को संबंधित स्तर तक पहुंचाने की बात कही गई।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।


