यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
नई दिल्ली। देश की राजधानी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय लंबी दूरी की दौड़ के बड़े आयोजन की मेजबानी करने के लिए तैयार है। वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन के 21वें संस्करण में रविवार को दुनिया के प्रतिष्ठित धावकों और भारत के उभरते एथलीटों के बीच रोमांचक मुकाबला देखने को मिलेगा। प्रतियोगिता से पहले शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय और भारतीय धावकों ने अपनी तैयारियों, प्रशिक्षण, चोट से वापसी और खिताब जीतने की उम्मीदों को साझा किया। इस बार सभी की निगाहें इथियोपिया के बिरहानु लेगेसे पर रहेंगी, जो तीसरी बार दिल्ली हाफ मैराथन का खिताब जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरेंगे। वहीं, महिला वर्ग में वर्ष 2022 की विजेता केन्या की इरीन चेप्टाई अपनी वापसी को यादगार बनाने की कोशिश करेंगी।
वर्ल्ड एथलेटिक्स गोल्ड लेबल रेस के रूप में पहचान रखने वाली इस प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय स्तर के अनुभवी धावकों के साथ भारतीय एलीट वर्ग के खिलाड़ियों की चुनौती भी आकर्षण का केंद्र रहेगी। पुरुष और महिला वर्ग में प्रतिस्पर्धा के साथ भारतीय धावकों के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन, चोट से उबरकर वापसी और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिशों पर भी दर्शकों की निगाहें रहेंगी।
प्रतियोगिता की कुल पुरस्कार राशि 2,75,732 अमेरिकी डॉलर निर्धारित की गई है। पुरुष और महिला वर्ग के विजेताओं को 27-27 हजार अमेरिकी डॉलर प्रदान किए जाएंगे। इसके अलावा, निर्धारित कोर्स रिकॉर्ड तोड़ने वाले धावक के लिए 12 हजार डॉलर की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि रखी गई है। भारतीय एलीट वर्ग में भी शीर्ष स्थान हासिल करने वाले धावकों को आकर्षक पुरस्कार दिए जाएंगे।
इथियोपिया के अनुभवी लंबी दूरी के धावक बिरहानु लेगेसे इस प्रतियोगिता के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। दिल्ली हाफ मैराथन में दो बार खिताब जीत चुके लेगेसे इस बार तीसरी सफलता हासिल करने के इरादे से दौड़ेंगे। पिछले वर्ष वह पोडियम पर जगह बनाने में सफल नहीं रहे थे, लेकिन इस बार वह नई तैयारी और बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद के साथ वापसी कर रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लेगेसे ने अपनी तैयारियों को लेकर सकारात्मक रुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वह अच्छी स्थिति में हैं और उनकी तैयारी भी बेहतर रही है। उनके अनुसार, दिल्ली में दौड़ना उनके लिए केवल एक प्रतियोगिता में हिस्सा लेना नहीं, बल्कि एक परिचित माहौल में लौटने जैसा है।
लेगेसे ने दिल्ली को अपना दूसरा घर बताते हुए यहां के लोगों और आयोजनकर्ताओं के प्रति अपना लगाव जाहिर किया। किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में धावक के लिए परिचित वातावरण, आयोजन व्यवस्था और मानसिक सहजता भी महत्वपूर्ण हो सकती है। लेगेसे के अनुभव में दिल्ली के प्रति जुड़ाव उनकी वापसी को खास बनाता है।
उन्होंने अपनी प्रशिक्षण संबंधी चुनौतियों का जिक्र करते हुए बताया कि अदीस अबाबा में यातायात सहित कई समस्याओं के कारण उन्होंने केन्या के कप्टागाट में प्रशिक्षण लिया। वहां उन्होंने महान मैराथन धावक एलियुड किपचोगे के साथ अभ्यास किया।
कप्टागाट लंबी दूरी के धावकों के प्रशिक्षण के लिए जाना जाता है। ऊंचाई वाले क्षेत्र में अभ्यास, नियमित प्रशिक्षण और गति पर नियंत्रण जैसे पहलू धावकों की तैयारी में अहम भूमिका निभाते हैं। लेगेसे के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती अपनी तैयारी को रेस के दिन प्रभावी प्रदर्शन में बदलना होगा।
तीसरी बार खिताब जीतने का उनका लक्ष्य इस प्रतियोगिता में अंतरराष्ट्रीय पुरुष वर्ग की प्रतिस्पर्धा को और दिलचस्प बनाता है। हालांकि, हाफ मैराथन में परिणाम केवल अनुभव पर निर्भर नहीं करता। दौड़ की गति, ऊर्जा का प्रबंधन, प्रतिद्वंद्वियों की रणनीति और अंतिम किलोमीटरों में प्रदर्शन निर्णायक साबित हो सकते हैं।
केन्या के धावक चार्ल्स माताता भी पुरुष वर्ग में खिताब के प्रबल दावेदारों में शामिल हैं। केन्या पुलिस में कार्यरत माताता ने इस वर्ष लातविया में रीगा हाफ मैराथन जीतकर अपनी क्षमता का परिचय दिया था। उन्होंने यह दौड़ 59 मिनट 15 सेकंड में पूरी की थी, जो उनकी गति और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को दर्शाता है।
माताता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें हाफ मैराथन में दौड़ना पसंद है और गति आधारित अभ्यास उनकी प्रमुख ताकतों में से एक है। उन्होंने मजबूत धावकों के साथ प्रशिक्षण और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की मानसिकता को अपनी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
हाफ मैराथन की 21.0975 किलोमीटर की दूरी में शुरुआती गति बनाए रखना जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही आवश्यक है कि धावक अंतिम चरण के लिए पर्याप्त ऊर्जा बचाकर रखें। तेज शुरुआत करने वाले एथलीटों के लिए दौड़ के मध्य हिस्से में अपनी लय बनाए रखना बड़ी चुनौती हो सकती है।
माताता का 59 मिनट 15 सेकंड का रीगा प्रदर्शन उन्हें इस मुकाबले में गंभीर चुनौती पेश करने वाला धावक बनाता है। वहीं, लेगेसे जैसे अनुभवी प्रतिद्वंद्वी के सामने उन्हें अपनी रणनीति और निरंतरता दोनों पर ध्यान देना होगा।
पुरुष वर्ग में अंतरराष्ट्रीय धावकों के बीच संभावित मुकाबला इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन अपनी सर्वश्रेष्ठ गति को पूरे कोर्स में बनाए रखता है। दिल्ली की दौड़ में खिताब के लिए संघर्ष अंतिम चरण तक रोमांच बनाए रख सकता है।
महिला वर्ग में केन्या की इरीन चेप्टाई की वापसी विशेष आकर्षण का केंद्र है। वर्ष 2022 में दिल्ली हाफ मैराथन का खिताब जीत चुकीं चेप्टाई भारतीय दर्शकों के बीच अपनी पहचान बना चुकी हैं। उन्हें केन्या में ‘क्वीन ऑफ इंडिया’ के नाम से भी जाना जाता है।
चेप्टाई ने इस वर्ष फरवरी में दुबई हाफ मैराथन जीती थी और अगस्त में सिडनी मैराथन में दूसरा स्थान हासिल किया था। इन उपलब्धियों ने उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को रेखांकित किया है। हालांकि, सिडनी मैराथन के बाद वह अभी पूरी तरह उबर नहीं पाई हैं और उन्होंने अपनी मौजूदा फिटनेस को लेकर स्पष्ट रूप से बताया कि वह अभी अपने सर्वश्रेष्ठ स्तर पर नहीं हैं।
उन्होंने बताया कि सिडनी मैराथन के बाद उन्होंने दो सप्ताह का विश्राम लिया और फिर प्रशिक्षण शुरू किया। लंबे अंतराल वाली मैराथन के बाद शरीर को सामान्य प्रशिक्षण और प्रतियोगिता की तीव्रता में लौटने के लिए पर्याप्त समय देना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में चेप्टाई के लिए दिल्ली की हाफ मैराथन में अपनी गति और शारीरिक क्षमता का सही आकलन करना अहम रहेगा।
उन्होंने कहा कि भले ही वह फिलहाल अपनी सर्वश्रेष्ठ फिटनेस में नहीं हैं, लेकिन रविवार को अपना पूरा प्रयास करेंगी। यह बयान उनके प्रतिस्पर्धात्मक रवैये और दौड़ के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
चेप्टाई ने भारत को अपना दूसरा घर बताते हुए यहां लौटने पर खुशी जताई। दिल्ली में उनकी पिछली सफलता और भारतीय दर्शकों के साथ जुड़ाव इस बार की प्रतियोगिता को उनके लिए विशेष बनाते हैं।
हालांकि, महिला वर्ग में उन्हें अन्य अंतरराष्ट्रीय धाविकाओं से कड़ी चुनौती मिल सकती है। चोट या थकान से वापसी करने वाले किसी भी एथलीट के लिए अपनी क्षमता और जोखिम के बीच संतुलन बनाना महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में चेप्टाई की रणनीति और रेस के दौरान उनकी स्थिति परिणाम तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
महिला वर्ग की एक अन्य प्रमुख अंतरराष्ट्रीय धाविका इजरायल की लोनाह चेमताई सालपेटर होंगी। केन्या में जन्मीं सालपेटर ने चार वर्ष पहले विश्व चैंपियनशिप की मैराथन स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत की थी।
सालपेटर का अनुभव लंबी दूरी की दौड़ में उनकी क्षमता को दर्शाता है, लेकिन इस बार उनकी सबसे बड़ी चुनौती चोट से उबरकर प्रतिस्पर्धा में वापसी करना होगी। वह मई में हैमस्ट्रिंग की चोट से प्रभावित हुई थीं और अब अपनी फिटनेस को दोबारा मजबूत करने के प्रयास में जुटी हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने इजरायल का प्रतिनिधित्व करने पर गर्व व्यक्त किया। वह पहली बार भारत आई हैं और दिल्ली में दौड़ने को लेकर उत्साहित हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चोट से वापसी के बाद उनकी वास्तविक स्थिति का आकलन रेस के दिन ही हो पाएगा।
हैमस्ट्रिंग की चोट धावकों के लिए विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि तेज गति से दौड़ने, कदमों की लंबाई बनाए रखने और अंतिम चरण में गति बढ़ाने के दौरान मांसपेशियों पर काफी दबाव पड़ता है। इसलिए ऐसे एथलीटों के लिए प्रशिक्षण के दौरान सावधानी और प्रतियोगिता के समय सही गति चुनना महत्वपूर्ण होता है।
सालपेटर के अनुभव और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों के कारण उन्हें महिला वर्ग में महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धी माना जा सकता है। लेकिन चोट से वापसी की परिस्थितियों को देखते हुए उनकी रणनीति और शारीरिक स्थिति पर भी नजर रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय सितारों के बीच भारतीय एलीट धावक भी अपनी प्रतिभा और तैयारी का प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। पुरुष वर्ग में पिछले वर्ष के उपविजेता किरण मातरे और डॉ. कार्तिक करकेरा प्रमुख भारतीय नामों में शामिल हैं। महिला वर्ग में 2024 की भारतीय एलीट चैंपियन लिली दास और उभरती लंबी दूरी की धाविका अंकिता ध्यानी से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
भारतीय धावकों के लिए यह प्रतियोगिता केवल पदक जीतने का अवसर नहीं है, बल्कि अपने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय में सुधार करने, अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा का अनुभव प्राप्त करने और राष्ट्रीय एलीट वर्ग में अपनी स्थिति मजबूत करने का मंच भी है।
अंतरराष्ट्रीय धावकों की गति और अनुभव के बीच भारतीय एथलीटों को अपनी रणनीति पर विशेष ध्यान देना होगा। दौड़ की शुरुआत में संतुलित गति बनाए रखना, मध्य चरण में प्रतिद्वंद्वियों के साथ तालमेल रखना और अंतिम किलोमीटरों में ऊर्जा का प्रभावी उपयोग करना परिणाम पर असर डाल सकता है।
भारतीय एलीट वर्ग में पुरस्कार राशि भी धावकों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण माध्यम है। शीर्ष तीन स्थानों पर पहुंचने वाले पुरुष और महिला धावकों को क्रमशः 3.50 लाख, 2.50 लाख और 1.50 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, नया भारतीय एलीट रिकॉर्ड बनाने वाले धावक को एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
पिछले वर्ष भारतीय एलीट पुरुष वर्ग में उपविजेता रहे किरण मातरे इस बार बेहतर परिणाम हासिल करने के लक्ष्य के साथ उतरेंगे। उन्होंने पिछले संस्करण में एक घंटा चार मिनट 57 सेकंड का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था।
मातरे के लिए इस बार की तैयारी आसान नहीं रही। इस वर्ष कूल्हे की चोट के कारण उनके प्रशिक्षण पर असर पड़ा था। चोट से वापसी करने वाले धावकों को अक्सर अपनी फिटनेस दोबारा हासिल करने के साथ-साथ प्रशिक्षण की तीव्रता को धीरे-धीरे बढ़ाना पड़ता है।
मातरे ने बताया कि उनकी तैयारी अच्छी रही है और वह अपना सर्वश्रेष्ठ समय हासिल करने की कोशिश करेंगे। उनका लक्ष्य पिछले प्रदर्शन में सुधार करते हुए भारतीय एलीट वर्ग में मजबूत परिणाम दर्ज करना है।
व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय में सुधार करने के लिए केवल तेज गति पर्याप्त नहीं होती। इसके लिए प्रशिक्षण में निरंतरता, शरीर की रिकवरी, दौड़ के दौरान ऊर्जा का प्रबंधन और मानसिक मजबूती भी आवश्यक हैं। कूल्हे की चोट से प्रभावित होने के बाद मातरे की चुनौती यह होगी कि वह अपनी तैयारियों को बिना अनावश्यक जोखिम के प्रतियोगिता में उतार सकें।
पिछले वर्ष के उपविजेता के रूप में उन पर बेहतर प्रदर्शन की उम्मीदें रहेंगी। यदि वह अपनी लय बनाए रखने में सफल रहते हैं, तो भारतीय एलीट पुरुष वर्ग में पदक की दौड़ दिलचस्प हो सकती है।
भारतीय महिला एलीट वर्ग में लिली दास भी महत्वपूर्ण दावेदारों में शामिल हैं। वर्ष 2024 की भारतीय एलीट महिला चैंपियन दास ने पिछले वर्ष दिल्ली हाफ मैराथन में एक घंटा 16 मिनट 27 सेकंड का समय निकाला था और चौथा स्थान हासिल किया था।
उन्होंने अपने पिछले प्रदर्शन की तुलना में लगभग दो मिनट का सुधार किया, लेकिन इसके बावजूद वह पोडियम तक नहीं पहुंच सकीं। इस बार उनका लक्ष्य अपनी गति और प्रदर्शन में आगे सुधार करते हुए शीर्ष तीन स्थानों के लिए चुनौती पेश करना होगा।
दास ने कहा कि महिला वर्ग में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, भारतीय महिला धाविकाओं के बीच बेहतर प्रदर्शन के लिए मुकाबला पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है।
प्रतिस्पर्धा में बढ़ोतरी किसी भी खेल के विकास का महत्वपूर्ण संकेत हो सकती है। जब एक से अधिक एथलीट समान स्तर पर प्रदर्शन करने लगते हैं, तो प्रत्येक धावक को अपने प्रशिक्षण, तकनीक और रेस रणनीति पर अधिक ध्यान देना पड़ता है।
दास ने अंकिता ध्यानी को मजबूत प्रतिद्वंद्वी बताते हुए उम्मीद जताई कि दोनों एक-दूसरे को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेंगी। इस तरह की प्रतिस्पर्धा भारतीय महिला लंबी दूरी की दौड़ में नए मानक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है।
दिल्ली हाफ मैराथन में दास के सामने चुनौती यह होगी कि वह अपने पिछले प्रदर्शन को आधार बनाकर समय में सुधार करें और अंतरराष्ट्रीय धाविकाओं के बीच भारतीय एलीट वर्ग में बेहतर स्थान हासिल करें।
उभरती भारतीय लंबी दूरी की धाविका अंकिता ध्यानी भी महिला एलीट वर्ग में अपनी चुनौती पेश करेंगी। ट्रैक रेसिंग की पृष्ठभूमि रखने वाली ध्यानी ने पिछले वर्ष दिल्ली हाफ मैराथन में पहली बार इस दूरी पर हिस्सा लिया था। उन्होंने एक घंटा 17 मिनट 52 सेकंड का समय निकालकर भारतीय एलीट महिला वर्ग में पांचवां स्थान हासिल किया था।
ट्रैक रेसिंग और हाफ मैराथन की तैयारी में कई समानताएं होने के बावजूद दोनों के बीच महत्वपूर्ण अंतर हैं। हाफ मैराथन में धावक को लंबी अवधि तक अपनी गति बनाए रखनी होती है और ऊर्जा का सही प्रबंधन करना पड़ता है। इसके लिए धीरज, गति नियंत्रण और दौड़ के दौरान रणनीतिक निर्णय महत्वपूर्ण होते हैं।
अंकिता ने स्वीकार किया कि इस दूरी पर उनका अनुभव अभी सीमित है। इसके बावजूद वह रणनीति के साथ दौड़ते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।
उनके लिए इस प्रतियोगिता में भागीदारी अनुभव बढ़ाने और अपनी क्षमता का आकलन करने का अवसर होगी। भारतीय महिला वर्ग में लिली दास जैसी अनुभवी प्रतिद्वंद्वी के साथ प्रतिस्पर्धा उन्हें अपनी गति और रणनीति पर काम करने की प्रेरणा दे सकती है।
यदि अंकिता अपनी शुरुआती गति पर नियंत्रण रखते हुए अंतिम चरण तक लय बनाए रखने में सफल रहती हैं, तो वह पिछले प्रदर्शन में सुधार करने की कोशिश कर सकती हैं। हालांकि, अंतिम परिणाम रेस के दिन उनकी फिटनेस और प्रतिस्पर्धा की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
भारतीय एलीट पुरुष वर्ग में डॉ. कार्तिक करकेरा की प्रगति भी ध्यान आकर्षित कर रही है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में प्रतियोगिता के दौरान अपने प्रदर्शन में लगातार सुधार किया है। पदार्पण के समय भारतीय एलीट धावकों में अंतिम स्थान पर रहने के बाद उन्होंने 2024 में दसवां और 2025 में तीसरा स्थान हासिल किया।
पिछले वर्ष तीसरा स्थान हासिल करना उनके लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। इससे उनके प्रदर्शन में आए सुधार और प्रतियोगिता के साथ बढ़ते अनुभव का संकेत मिलता है।
इस वर्ष एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए अंतरराष्ट्रीय पदार्पण करने वाले करकेरा अब दिल्ली में अपनी प्रगति को आगे बढ़ाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वह पूर्णता के बजाय निरंतर सुधार पर ध्यान देते हैं और हाफ मैराथन उनकी पसंदीदा स्पर्धाओं में से एक है।
खेलों में लगातार सुधार की मानसिकता लंबे समय तक प्रदर्शन बनाए रखने में सहायक हो सकती है। हर प्रतियोगिता से मिलने वाला अनुभव धावकों को अपनी कमजोरियों को समझने, प्रशिक्षण में बदलाव करने और अगली दौड़ के लिए बेहतर तैयारी करने का अवसर देता है।
करकेरा के लिए इस बार की चुनौती पिछले वर्ष के तीसरे स्थान से आगे बढ़ना और भारतीय एलीट वर्ग में अपनी स्थिति मजबूत करना होगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर के धावकों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए वह अपनी गति, धीरज और रेस रणनीति का परीक्षण कर सकेंगे।
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन के इस संस्करण में अंतरराष्ट्रीय और भारतीय धावकों के लिए पुरस्कार राशि भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। प्रतियोगिता की कुल पुरस्कार राशि 2,75,732 अमेरिकी डॉलर रखी गई है।
अंतरराष्ट्रीय पुरुष और महिला वर्ग के विजेताओं को 27-27 हजार डॉलर मिलेंगे। इसके अतिरिक्त निर्धारित कोर्स रिकॉर्ड तोड़ने वाले धावक को 12 हजार डॉलर की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
भारतीय एलीट वर्ग में शीर्ष तीन स्थानों पर रहने वाले धावकों को 3.50 लाख, 2.50 लाख और 1.50 लाख रुपये दिए जाएंगे। नया भारतीय एलीट रिकॉर्ड बनाने वाले धावक को एक लाख रुपये की अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि भी मिलेगी।
इन पुरस्कारों के साथ व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और रिकॉर्ड बनाने की संभावना धावकों को बेहतर परिणाम हासिल करने के लिए प्रेरित कर सकती है। हालांकि, लंबी दूरी की दौड़ में केवल पुरस्कार की प्रेरणा पर्याप्त नहीं होती। सही प्रशिक्षण, शारीरिक तैयारी, रिकवरी और दौड़ के दौरान रणनीति भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।
कोर्स रिकॉर्ड के लिए मिलने वाली अतिरिक्त राशि अंतरराष्ट्रीय धावकों के बीच गति को लेकर उत्सुकता बढ़ाती है। वहीं, भारतीय एलीट वर्ग के लिए रिकॉर्ड प्रोत्साहन घरेलू धावकों को अपने पिछले समय से आगे बढ़ने का लक्ष्य देता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भारतीय धावकों की भागीदारी देश में लंबी दूरी की दौड़ के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसी रेस में विश्वस्तरीय एथलीटों के साथ प्रतिस्पर्धा करने से भारतीय खिलाड़ियों को गति, प्रशिक्षण और रेस प्रबंधन के उच्च स्तर का अनुभव मिलता है।
दिल्ली हाफ मैराथन जैसे आयोजन उभरते धावकों को अपनी क्षमता पहचानने और अनुभवी खिलाड़ियों के प्रदर्शन को करीब से समझने का अवसर प्रदान करते हैं। भारतीय एलीट वर्ग के लिए यह प्रतियोगिता व्यक्तिगत उपलब्धियों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा की गुणवत्ता को परखने का मंच भी है।
लंबी दूरी की दौड़ में सफलता हासिल करने के लिए वर्षों का नियमित प्रशिक्षण, संतुलित पोषण, पर्याप्त आराम और चोट से बचाव की रणनीति जरूरी होती है। अंतरराष्ट्रीय धावकों की तैयारियों में इन सभी पहलुओं का महत्व दिखाई देता है। भारतीय धावकों के लिए भी यही अनुभव भविष्य की प्रतियोगिताओं में उपयोगी साबित हो सकता है।
महिला वर्ग में लिली दास और अंकिता ध्यानी जैसी धाविकाओं की प्रतिस्पर्धा तथा पुरुष वर्ग में किरण मातरे और डॉ. कार्तिक करकेरा की चुनौती भारतीय एथलेटिक्स के लिए उत्साहजनक पहलू हैं। इनके प्रदर्शन से देश में लंबी दूरी की दौड़ के प्रति रुचि बढ़ने और नए खिलाड़ियों को प्रेरणा मिलने की संभावना रहती है।
वेदांता दिल्ली हाफ मैराथन के 21वें संस्करण में पुरुष और महिला दोनों वर्गों में कई दिलचस्प मुकाबले देखने को मिल सकते हैं। पुरुष वर्ग में बिरहानु लेगेसे तीसरी बार खिताब जीतने के इरादे से उतरेंगे, जबकि चार्ल्स माताता अपनी तेज गति और हालिया उपलब्धियों के दम पर उन्हें चुनौती देने की कोशिश करेंगे।
महिला वर्ग में इरीन चेप्टाई की वापसी, लोनाह चेमताई सालपेटर की चोट से उबरने के बाद की चुनौती और भारतीय धाविकाओं की प्रतिस्पर्धा मुकाबले को खास बनाएगी। वहीं, भारतीय पुरुष वर्ग में किरण मातरे और डॉ. कार्तिक करकेरा अपनी पिछली उपलब्धियों से आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में खिलाड़ियों की बातों से स्पष्ट हुआ कि प्रतियोगिता से पहले तैयारी, फिटनेस और रणनीति सभी के लिए महत्वपूर्ण हैं। कुछ धावक पिछले प्रदर्शन को दोहराने या उससे आगे निकलने की कोशिश करेंगे, जबकि कुछ चोट से वापसी के बाद अपनी क्षमता का आकलन करना चाहेंगे।
अब सबकी निगाहें रविवार की दौड़ पर टिकी हैं। अंतरराष्ट्रीय अनुभव, भारतीय खिलाड़ियों की महत्वाकांक्षा, व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन और आकर्षक पुरस्कार राशि के बीच दिल्ली हाफ मैराथन का यह संस्करण रोमांचक प्रतिस्पर्धा का मंच बनने के लिए तैयार है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


