17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 10h ago
मथुरा। छाता तहसील क्षेत्र के लाड़पुर गांव में मुख्य मार्ग की बदहाली ग्रामीणों के लिए लगातार परेशानी का कारण बनी हुई है। सड़क पर जगह-जगह बने गहरे गड्ढे और उनमें जमा बारिश का पानी राहगीरों के लिए मुसीबत बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से सड़क की मरम्मत नहीं होने के कारण अब रास्ते की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि यहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।
बारिश के बाद सड़क की स्थिति और अधिक खराब हो जाती है। जगह-जगह पानी भर जाने से सड़क और गड्ढों के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वाले लोगों को भी काफी सावधानी बरतनी पड़ती है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार विभाग को कई बार समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक सड़क की मरम्मत को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई।
ग्रामीणों के मुताबिक लाड़पुर का यह मार्ग गांव के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसी रास्ते से रोजाना बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने कामकाज के लिए आते-जाते हैं। स्कूली बच्चे भी इसी मार्ग से होकर स्कूल पहुंचते हैं। इसके अलावा किसान अपने खेतों तक जाने और कृषि कार्यों के लिए इस सड़क का इस्तेमाल करते हैं।
सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण वाहनों की रफ्तार धीमी हो जाती है। कई स्थानों पर स्थिति ऐसी है कि वाहन चालक को पहले गड्ढे का अनुमान लगाना पड़ता है और फिर वाहन निकालना पड़ता है। रात के समय परेशानी और बढ़ जाती है, क्योंकि पर्याप्त रोशनी नहीं होने पर गड्ढे दिखाई नहीं देते।
बारिश होते ही सड़क पर बने गड्ढे पानी से भर जाते हैं। पानी भरने के बाद यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि गड्ढा कितना गहरा है। कई बार दोपहिया वाहन चालक अचानक गड्ढे में उतर जाते हैं और संतुलन बिगड़ने से गिर जाते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में बच्चों और बुजुर्गों को इस रास्ते से गुजरने में विशेष परेशानी होती है। पैदल निकलने वाले लोगों को सड़क के किनारे से होकर गुजरना पड़ता है। वहीं, दोपहिया वाहन चालकों को भी गड्ढों से बचने के लिए बार-बार रास्ता बदलना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क की खराब स्थिति के कारण आए दिन छोटे-बड़े हादसों का खतरा बना रहता है। खासकर बाइक और स्कूटी सवारों के लिए यह मार्ग जोखिम भरा हो गया है।
गड्ढों में अचानक पहिया पड़ने से वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है। बारिश के दौरान पानी से भरे गड्ढों में यह खतरा और बढ़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
सड़क की बदहाली का असर स्कूली बच्चों पर भी पड़ रहा है। रोजाना बच्चे इस रास्ते से होकर स्कूल जाते हैं। बारिश के दिनों में सड़क पर पानी और कीचड़ जमा होने के कारण बच्चों को काफी परेशानी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि छोटे बच्चों को सड़क पार कराने और गड्ढों से बचाकर निकालने में अभिभावकों को भी चिंता बनी रहती है। कई बच्चे साइकिल या पैदल स्कूल जाते हैं, ऐसे में सड़क की खराब स्थिति उनके लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर रही है।
गांव के लोगों का कहना है कि सड़क की समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से मार्ग की हालत खराब है और ग्रामीण कई बार संबंधित अधिकारियों तथा प्रशासन के सामने सड़क की मरम्मत की मांग रख चुके हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायत के समय समस्या के समाधान का भरोसा तो दिया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद मामला फिर ठंडे बस्ते में चला जाता है। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत केवल अस्थायी तरीके से करने के बजाय इसका स्थायी समाधान किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि गांवों में विकास कार्यों को लेकर लगातार दावे किए जाते हैं, लेकिन लाड़पुर की सड़क की स्थिति इन दावों की जमीनी हकीकत सामने ला रही है।
लोगों का सवाल है कि यदि गांव के मुख्य मार्ग की ही हालत इतनी खराब है तो ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा कैसे मिलेगी। सड़क केवल आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि गांव के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी बुनियादी सुविधा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं रहता। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों, किसानों, व्यापारियों, मरीजों और रोजाना काम के लिए बाहर जाने वाले लोगों को भी परेशानी होती है।
लाड़पुर में प्रसिद्ध सती माता मंदिर भी स्थित है। यहां हर वर्ष विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें आसपास के गांवों के अलावा दूर-दराज से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
मेले के दौरान मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में काफी भीड़ रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि जब मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं तो सड़क की बदहाली के कारण आवागमन और अधिक मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों के अनुसार मेले में जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी पहुंचते हैं और गांव की स्थिति से परिचित होते हैं। इसके बावजूद मंदिर तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि मंदिर में आयोजित होने वाले वार्षिक मेले को देखते हुए सड़क का विशेष निरीक्षण कराया जाए। यदि समय रहते मार्ग की मरम्मत और आवश्यक निर्माण कार्य करा दिए जाएं तो श्रद्धालुओं के साथ-साथ गांव के लोगों को भी राहत मिल सकती है।
लोगों का कहना है कि मेले के दौरान बढ़ने वाली भीड़ को देखते हुए सड़क की स्थिति में सुधार बेहद जरूरी है। खराब सड़क के कारण किसी तरह की दुर्घटना होने की स्थिति में परेशानी और बढ़ सकती है।
ग्रामीणों का कहना है कि केवल गड्ढों में मिट्टी या मलबा डालकर समस्या का समाधान नहीं होगा। बारिश के बाद ऐसी अस्थायी मरम्मत दोबारा खराब हो जाती है। लोगों ने सड़क की गुणवत्ता के साथ स्थायी मरम्मत कराने की मांग की है।
ग्रामीण चाहते हैं कि संबंधित विभाग मौके पर पहुंचकर सड़क की स्थिति का निरीक्षण करे और यह पता लगाए कि कितने हिस्से में सड़क क्षतिग्रस्त है। इसके बाद आवश्यक बजट और तकनीकी प्रक्रिया पूरी कर सड़क का निर्माण या पुनर्निर्माण कराया जाए।
ग्रामीणों के मुताबिक दिन के समय तो किसी तरह गड्ढों को देखकर वाहन निकाला जा सकता है, लेकिन रात में स्थिति काफी खतरनाक हो जाती है। अंधेरे में पानी से भरे गड्ढे दिखाई नहीं देते और वाहन चालक अचानक उनमें फंस सकते हैं।
ग्रामीणों ने सड़क पर पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और चेतावनी संकेत लगाए जाने की भी जरूरत बताई है, जब तक कि सड़क की स्थायी मरम्मत नहीं हो जाती।
लाड़पुर के ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल सड़क का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही समस्या का समाधान किया जाना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षित सड़क हर गांव की मूलभूत आवश्यकता है। इसके लिए ग्रामीणों को बार-बार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए।
लोगों ने मांग की है कि सड़क की स्थिति का संज्ञान लेकर जल्द से जल्द मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए, ताकि ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, किसानों और मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को राहत मिल सके।
लाड़पुर की सड़क की बदहाली के बीच ग्रामीणों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर उन्हें इस गड्ढों भरे रास्ते से कब छुटकारा मिलेगा? बारिश के हर दौर में सड़क की स्थिति और खराब होती जा रही है। ग्रामीणों को डर है कि यदि जल्द मरम्मत नहीं हुई तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि ग्रामीणों की शिकायतों के बाद संबंधित विभाग कब सड़क का निरीक्षण करता है और कब तक मरम्मत कार्य शुरू होता है। फिलहाल गांव के लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द कोई ठोस कदम उठाएगा।


