यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
नई दिल्ली। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी आने वाली किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ को लेकर एक ऐसा खुलासा किया है, जिसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। सोनिया गांधी ने कहा है कि वह कभी नहीं चाहती थीं कि उनके पति राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बनें। उनके इस बयान ने एक बार फिर गांधी परिवार के निजी जीवन, राजनीतिक परिस्थितियों और देश के इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर को चर्चा में ला दिया है।
सोनिया गांधी की यह किताब 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है। इसके जरिए वह अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों, निजी अनुभवों, राजीव गांधी के साथ अपने रिश्ते और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनुभवों को पाठकों के सामने रखेंगी। सोनिया गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए वीडियो में अपनी किताब के बारे में बात करते हुए कहा कि पिछले कई दशकों से दूसरे लोग उनके जीवन के बारे में लिखते और अपनी-अपनी तरह से उसकी व्याख्या करते रहे हैं। अब वह स्वयं अपनी कहानी बताना चाहती हैं।
उनके मुताबिक, उनके जीवन के बारे में बहुत कुछ लिखा गया, लेकिन उसमें से कई बातें सही नहीं थीं। कुछ घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया, जबकि कुछ बातें ऐसी थीं जिन्हें उन्होंने गढ़ा हुआ माना। इसी वजह से उन्होंने अपनी कहानी खुद लिखने का फैसला किया।
सोनिया गांधी ने अपनी किताब के बारे में चर्चा करते हुए बताया कि जब राजीव गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाया जा रहा था, तब वह इस फैसले के पक्ष में नहीं थीं। उनका यह खुलासा इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि राजीव गांधी का प्रधानमंत्री बनना भारतीय राजनीति के सबसे निर्णायक घटनाक्रमों में से एक था।
31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद देश में राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल पैदा हो गया था। उस समय कांग्रेस के नेतृत्व और सरकार की स्थिरता को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे थे। ऐसे कठिन दौर में राजीव गांधी ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली थी।
सोनिया गांधी का कहना है कि वह नहीं चाहती थीं कि राजीव गांधी प्रधानमंत्री बनें। उनके इस बयान से यह समझने का अवसर मिलता है कि राजनीति के बड़े फैसलों का असर केवल राजनीतिक दलों और सरकारों पर ही नहीं, बल्कि संबंधित परिवारों के निजी जीवन पर भी पड़ता है।
हालांकि, उनके इस खुलासे के पीछे उस समय की निजी परिस्थितियों, चिंताओं और पारिवारिक अनुभवों का पूरा विवरण जानने के लिए किताब के प्रकाशित होने और उसमें दिए गए संबंधित प्रसंगों को पढ़ना महत्वपूर्ण होगा।
सोनिया गांधी ने अपने वीडियो संदेश में बताया कि उन्होंने अपनी कहानी लिखने का फैसला क्यों किया। उन्होंने कहा कि उनके जीवन के बारे में लंबे समय से दूसरे लोग लिखते रहे हैं, लेकिन कई बार घटनाओं को सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया गया।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बहुत-सी बातें या तो गढ़कर लिखी गई थीं या फिर उन्हें बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था। ऐसे में उन्हें लगा कि अब वह खुद उन घटनाओं और तथ्यों को सामने रख सकती हैं, जिन्हें उन्होंने अपने जीवन में अनुभव किया है।
सोनिया गांधी का यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वह भारतीय राजनीति के सबसे प्रभावशाली परिवारों में से एक का हिस्सा रही हैं। राजीव गांधी से विवाह के बाद उनका जीवन केवल निजी दायरे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धीरे-धीरे वह देश की राजनीति और सार्वजनिक जीवन से भी जुड़ गया।
उनके जीवन को लेकर समय-समय पर कई तरह की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में उनकी अपनी कहानी सामने आने से पाठकों को उनके अनुभवों और दृष्टिकोण को समझने का अवसर मिलेगा।
सोनिया गांधी ने अपनी किताब को लेकर एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इसे केवल अपनी तरफ से पेश किया गया कोई ‘वर्जन’ नहीं मानतीं, बल्कि अपनी कहानी के रूप में देखती हैं।
उन्होंने कहा कि लोगों के विचार अलग-अलग होते हैं। संभव है कि किताब पढ़ने के बाद कुछ लोगों की उनके बारे में राय बदल जाए, जबकि कुछ लोगों की राय पहले से ज्यादा खराब भी हो सकती है। लेकिन उनके मुताबिक, जब कोई व्यक्ति किताब लिखता है या सार्वजनिक जीवन में रहता है, तो इस तरह की प्रतिक्रियाएं स्वाभाविक हैं।
सोनिया गांधी के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि वह अपनी किताब को लेकर संभावित प्रतिक्रियाओं से अनजान नहीं हैं। वह जानती हैं कि उनके जीवन से जुड़े प्रसंगों को राजनीतिक नजरिये से भी देखा जा सकता है।
उनकी किताब में निजी रिश्तों, परिवार, राजनीति और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनुभवों का कितना विस्तार होगा, यह प्रकाशन के बाद ही स्पष्ट होगा। लेकिन उनके शुरुआती वीडियो संदेश से इतना जरूर पता चलता है कि वह अपने जीवन की घटनाओं को अपने दृष्टिकोण से सामने रखना चाहती हैं।
सोनिया गांधी ने अपनी किताब के बारे में बात करते हुए एक दिलचस्प टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा कि जब यह किताब सामने आएगी, तो कुछ तमाशा होना तय है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि दशकों तक दूसरे लोग उनकी कहानी सुनाते रहे हैं, अब उनकी बारी है।
उनका यह बयान राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा का विषय बन सकता है। गांधी परिवार से जुड़ी किताबें और उनके निजी जीवन से संबंधित खुलासे अक्सर व्यापक सार्वजनिक रुचि पैदा करते रहे हैं।
सोनिया गांधी की किताब को लेकर भी यही उम्मीद की जा रही है कि इसमें उनके जीवन के कई ऐसे पहलुओं पर रोशनी पड़ सकती है, जिनके बारे में अब तक सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी उपलब्ध रही है।
हालांकि, किताब में किन घटनाओं का उल्लेख किया गया है और उनमें कौन-से नए तथ्य सामने आते हैं, इसका निर्णय उसके प्रकाशित होने के बाद ही किया जा सकेगा। फिलहाल उनके वीडियो संदेश ने किताब को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है।
सोनिया गांधी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर साझा किए गए एक अन्य वीडियो में राजीव गांधी के साथ अपनी पहली मुलाकात और प्रेम कहानी की शुरुआत का भी जिक्र किया है।
उन्होंने बताया कि उनकी प्रेम कहानी की शुरुआत कैम्ब्रिज में एक छोटे से ग्रीक रेस्तरां में हुई थी। उस समय राजीव गांधी ब्रिटेन में पढ़ाई कर रहे थे और सोनिया गांधी भी वहां अपने जीवन के शुरुआती दौर में थीं।
सोनिया गांधी ने अपने संदेश में कहा कि राजीव और उन्होंने मिलकर प्यार, हंसी और यादों से भरी एक दुनिया बनाई थी। उन्होंने अपनी किताब के माध्यम से उस दुनिया को पाठकों के साथ साझा करने की बात कही है।
यह प्रसंग उनकी किताब के भावनात्मक पहलू की ओर संकेत करता है। राजीव गांधी और सोनिया गांधी का रिश्ता भारतीय राजनीति के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है, लेकिन उनके निजी जीवन के कई अनुभव आम जनता के लिए हमेशा से जिज्ञासा का विषय रहे हैं।
किताब के माध्यम से सोनिया गांधी अपने रिश्ते, साझा जीवन और उससे जुड़ी यादों को किस तरह प्रस्तुत करती हैं, यह देखना दिलचस्प होगा।
राजीव गांधी के साथ सोनिया गांधी का जीवन कई महत्वपूर्ण घटनाओं से गुजरा। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री बने। उनके कार्यकाल के दौरान भारत ने तकनीक, संचार और आधुनिकीकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा देखी।
हालांकि, 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। इस घटना ने भारतीय राजनीति को गहरा झटका दिया और सोनिया गांधी के निजी जीवन को भी हमेशा के लिए बदल दिया।
राजीव गांधी की मृत्यु के बाद सोनिया गांधी लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। बाद में उन्होंने कांग्रेस की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और वर्ष 1998 में कांग्रेस अध्यक्ष बनीं। उनके नेतृत्व में पार्टी ने कई राजनीतिक चुनौतियों का सामना किया और 2004 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार के गठन में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इन घटनाओं ने सोनिया गांधी के सार्वजनिक जीवन को आकार दिया। उनकी आने वाली किताब में इन वर्षों के अनुभवों का कितना विस्तार होगा, यह जानने के लिए पाठकों को प्रकाशन का इंतजार करना होगा।
सोनिया गांधी की किताब की घोषणा ऐसे समय में सामने आई है, जब गांधी परिवार से जुड़े ऐतिहासिक और राजनीतिक प्रसंगों में लोगों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। इस परिवार के सदस्यों ने भारतीय राजनीति में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।
इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी और राहुल गांधी से जुड़े राजनीतिक फैसलों और निजी अनुभवों पर समय-समय पर चर्चा होती रही है। लेकिन सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्तियों के बारे में उपलब्ध जानकारी का बड़ा हिस्सा अक्सर राजनीतिक घटनाओं और दूसरे लोगों की व्याख्याओं पर आधारित होता है।
सोनिया गांधी की किताब इस दृष्टि से महत्वपूर्ण हो सकती है कि इसमें वह अपने अनुभवों को स्वयं प्रस्तुत करेंगी। पाठकों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि ऐतिहासिक घटनाओं और राजनीतिक परिस्थितियों को उन्होंने व्यक्तिगत स्तर पर किस तरह अनुभव किया।
यह भी संभव है कि किताब में कुछ प्रसंगों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक विचारधाराओं के लोगों के बीच बहस हो। लेकिन किसी भी खुलासे का आकलन करते समय उसके वास्तविक संदर्भ, उपलब्ध तथ्यों और किताब में दिए गए पूरे विवरण को देखना जरूरी होगा।
सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ 10 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करके पाठकों को इस किताब के बारे में जानकारी दी है।
किताब के शीर्षक से ही यह संकेत मिलता है कि इसमें रिश्तों, जुड़ाव और व्यक्तिगत अनुभवों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। उनके शुरुआती संदेशों में राजीव गांधी के साथ प्रेम कहानी, प्रधानमंत्री बनने को लेकर उनकी असहमति और अपने जीवन के बारे में लिखी गई गलत बातों का उल्लेख प्रमुखता से सामने आया है।
हालांकि, किताब के सभी अध्यायों और खुलासों की जानकारी उसके प्रकाशन के बाद ही सामने आएगी। फिलहाल सोनिया गांधी के बयान ने राजनीतिक इतिहास और गांधी परिवार के निजी जीवन में रुचि रखने वाले पाठकों की उत्सुकता बढ़ा दी है।
निष्कर्ष: सोनिया गांधी की आने वाली किताब ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ केवल उनके निजी जीवन की यादों तक सीमित रहेगी या इसमें भारतीय राजनीति के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों से जुड़े नए विवरण भी सामने आएंगे, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। राजीव गांधी के प्रधानमंत्री बनने को लेकर उनकी असहमति का खुलासा इस किताब के सबसे चर्चित पहलुओं में से एक बन सकता है। अब निगाहें 10 नवंबर पर हैं, जब पाठकों को उनकी कहानी विस्तार से पढ़ने का अवसर मिलेगा।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


