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पटना/भागलपुर। बिहार में बाढ़ का संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। राज्य की कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से 13 जिलों के बड़े हिस्से में बाढ़ का पानी फैल गया है। गांवों से लेकर शहरों तक जलजमाव और बाढ़ के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और प्रभावित परिवारों तक भोजन, पीने का पानी तथा जरूरी राहत सामग्री पहुंचाना है।
बताया जा रहा है कि राज्य में करीब 29 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में 20 से अधिक लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। लगातार बढ़ते जलस्तर और कई इलाकों में कटान की स्थिति ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। कई जगह सड़क संपर्क टूट गया है, जबकि निचले इलाकों में घरों और खेतों में पानी भर गया है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन लगाए गए हैं। लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 1,429 नावें लगाई गई हैं। प्रशासन और राहत दल लगातार प्रभावित इलाकों का जायजा लेकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हैं।
भागलपुर में स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक बनी हुई है। गंगा और कोसी नदी के बढ़े जलस्तर ने जिले के कई इलाकों में मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पानी के साथ-साथ नदी के तेज कटान से भी ग्रामीण क्षेत्रों में भारी नुकसान की खबर है।
जिले की 56 पंचायतों के 178 गांव और 347 वार्ड बाढ़ की चपेट में बताए जा रहे हैं। बाढ़ के पानी ने कई गांवों की सामान्य जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। लोगों को आवागमन के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। कई स्थानों पर घरों के आसपास पानी जमा है और ग्रामीण अपने जरूरी सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में लगे हुए हैं।
कटान ने भी लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। नदी के किनारे बसे कई परिवारों के सामने अपने घर और जमीन बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई मकान कटान की वजह से नदी में समा चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का कटाव लगातार आगे बढ़ रहा है, जिससे आने वाले दिनों में स्थिति और खराब होने की आशंका बनी हुई है।
बाढ़ और कटान के बीच भागलपुर से एक बेहद दुखद तस्वीर सामने आई है। जिले में करीब 100 साल पुराना एक मंदिर नदी के तेज बहाव और कटान की चपेट में आकर पानी में बह गया। मंदिर के बह जाने की घटना ने स्थानीय लोगों को झकझोर दिया है।
ग्रामीणों के मुताबिक नदी का कटाव लगातार तेज हो रहा था। देखते ही देखते नदी का पानी मंदिर के आसपास पहुंच गया और तेज धारा ने पूरे ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। इसके अलावा कई अन्य निर्माण और मकान भी कटान के कारण खतरे में हैं।
नदी किनारे रहने वाले परिवारों को डर है कि यदि जलस्तर और बढ़ा तो उनके घर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
भागलपुर जिले में ही करीब 2 लाख 17 हजार 811 लोग बाढ़ से प्रभावित बताए जा रहे हैं। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के प्रभावित होने से प्रशासन पर राहत एवं बचाव कार्य का दबाव काफी बढ़ गया है।
डीएम अलंकृता पांडे ने जिले में चल रहे राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी दी है। प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी की जा रही है और जरूरत के अनुसार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
जिला प्रशासन के अनुसार, अब तक 22,035 लोगों को बाढ़ प्रभावित इलाकों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बचाव दल लगातार ऐसे इलाकों पर नजर रख रहे हैं जहां लोग पानी के बीच फंसे हुए हैं।
प्रशासन की प्राथमिकता बुजुर्गों, बच्चों, महिलाओं और ऐसे परिवारों को सुरक्षित निकालना है जो बाढ़ के कारण अपने घरों में फंस गए हैं। कई जगह नावों के जरिए लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।
भागलपुर में लोगों की आवाजाही और राहत कार्यों के लिए 71 सरकारी एवं अधिग्रहित नावें चलाई जा रही हैं। इन नावों के जरिए प्रभावित गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और जरूरतमंद लोगों को सुरक्षित इलाकों में लाया जा रहा है।
बाढ़ के कारण सड़क मार्ग से संपर्क प्रभावित होने वाले इलाकों में नावें ही लोगों के लिए जीवनरेखा बनी हुई हैं। प्रशासन की टीमें नावों के जरिए लगातार प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रयास कर रही हैं।
बाढ़ पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत देने के लिए प्रशासन की ओर से जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक करीब 4 हजार पॉलीथिन सीट और तिरपाल वितरित किए जा चुके हैं।
जिन परिवारों के घरों में पानी घुस गया है या जिन लोगों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है, उनके लिए तिरपाल और पॉलीथिन शीट अस्थायी आश्रय के रूप में इस्तेमाल की जा रही हैं।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए जिले में 15 सामुदायिक रसोइयां संचालित की जा रही हैं। इन रसोइयों में अब तक एक लाख से अधिक लोगों को भोजन कराया जा चुका है।
बाढ़ की स्थिति में सबसे बड़ी जरूरत भोजन और स्वच्छ पेयजल की होती है। इसी को देखते हुए प्रशासन की ओर से सामुदायिक रसोइयों के माध्यम से प्रभावित लोगों को नियमित भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
राहत शिविरों और प्रभावित इलाकों में रह रहे परिवारों तक भोजन पहुंचाने की व्यवस्था भी की जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि कोई भी बाढ़ प्रभावित व्यक्ति भोजन से वंचित न रहे।
बाढ़ से विस्थापित लोगों के लिए जिले में कई राहत शिविर बनाए गए हैं। टीएनबी कॉलेजिएट समेत सात प्रमुख स्थानों पर राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं।
इन शिविरों में बाढ़ प्रभावित परिवारों को अस्थायी रूप से ठहराने की व्यवस्था की गई है। प्रशासन की ओर से यहां भोजन सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
घर छोड़कर राहत शिविरों में पहुंचे लोगों के लिए यह शिविर फिलहाल सुरक्षित आश्रय का काम कर रहे हैं।
बाढ़ का असर केवल घरों और सड़कों तक सीमित नहीं है। बड़ी संख्या में कृषि क्षेत्र भी पानी में डूब गए हैं। खेतों में पानी भरने से किसानों की फसल को भारी नुकसान होने की आशंका है।
कई ग्रामीण इलाकों में खेत और रास्ते एक जैसे दिखाई दे रहे हैं। किसानों को अपनी खड़ी फसल की चिंता सता रही है। यदि पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो फसलों के पूरी तरह बर्बाद होने का खतरा बढ़ सकता है।
बाढ़ का पानी कम होने के बाद किसानों के सामने खेतों से पानी निकालने और दोबारा खेती शुरू करने की चुनौती भी होगी।
बाढ़ के कारण कई ग्रामीण क्षेत्रों का मुख्य सड़कों से संपर्क प्रभावित हुआ है। पानी भरने के कारण कई मार्गों पर आवागमन मुश्किल हो गया है। ऐसे इलाकों में नावों के जरिए ही लोगों की आवाजाही हो रही है।
बाजार, स्कूल, छोटे व्यापार और दैनिक गतिविधियां भी प्रभावित हुई हैं। जिन इलाकों में पानी अधिक बढ़ गया है, वहां लोगों को घरों से बाहर निकलने में भी परेशानी हो रही है।
लगातार बढ़ते जलस्तर और कटान की खबरों के बीच नदी किनारे बसे गांवों में दहशत का माहौल है। लोगों को डर है कि रात के समय यदि नदी का पानी अचानक बढ़ा या कटान तेज हुआ तो उन्हें अपना घर खाली करने का पर्याप्त समय नहीं मिलेगा।
कई परिवार अपने जरूरी दस्तावेज, अनाज, कपड़े और अन्य सामान को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटे हुए हैं। कुछ परिवार पहले ही रिश्तेदारों या ऊंचे स्थानों पर शरण ले चुके हैं।
बिहार में बाढ़ का दायरा बढ़ने के साथ ही प्रशासन के सामने कई मोर्चों पर एक साथ काम करने की चुनौती है। एक तरफ लोगों को सुरक्षित निकालना है तो दूसरी तरफ राहत शिविरों में भोजन और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध करानी हैं।
इसके अलावा बाढ़ के बाद बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। दूषित पानी और जलजमाव के कारण संक्रमण फैलने की आशंका रहती है। ऐसे में प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव कार्यों को लगातार तेज रखने का प्रयास किया जा रहा है। नावों के संचालन, राहत शिविरों और सामुदायिक रसोइयों के जरिए प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाई जा रही है।
बिहार में बाढ़ की स्थिति फिलहाल गंभीर बनी हुई है। नदियों के जलस्तर और कटान पर प्रशासन की नजर है। आने वाले दिनों में पानी घटता है या स्थिति और बिगड़ती है, यह जलस्तर और मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा।
फिलहाल लाखों लोगों का जीवन बाढ़ से प्रभावित है। हजारों लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा चुके हैं, लेकिन बड़ी संख्या में परिवार अभी भी बाढ़ के बीच अपनी जिंदगी बचाने और घर-सामान को सुरक्षित रखने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
सरकार और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रभावित लोगों की जान बचाना, उन्हें सुरक्षित आश्रय देना और भोजन-पानी जैसी बुनियादी जरूरतें पूरी करना है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास, सड़क-पुलों की मरम्मत, फसल नुकसान और मकानों के पुनर्निर्माण जैसी बड़ी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।


