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- 12h ago
मुंबई। गणपति विसर्जन के बाद समुद्र तटों पर जमा होने वाले कचरे और पर्यावरणीय दबाव को कम करने के उद्देश्य से विवेकानंद एजुकेशन सोसाइटी (वी.ई.एस.) और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सक्रिय संस्था वनशक्ति ने संयुक्त रूप से दादर चौपाटी पर व्यापक समुद्र तट स्वच्छता अभियान चलाया। अभियान में वी.ई.एस. से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के 500 से अधिक छात्र-छात्राओं, एनएसएस टीम, शिक्षकों और प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। अभियान के दौरान स्वयंसेवकों ने समुद्र तट से 2000 किलोग्राम से अधिक कचरा एकत्र किया।
गणपति उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिमाओं का विसर्जन समुद्र और अन्य जलस्रोतों में करते हैं। विसर्जन के बाद समुद्र तटों पर फूल, कपड़े, प्लास्टिक, सजावटी सामग्री और अन्य प्रकार का कचरा जमा हो जाता है। इसी पृष्ठभूमि में आयोजित इस स्वच्छता अभियान का उद्देश्य केवल समुद्र तट से कचरा हटाना ही नहीं, बल्कि युवाओं और आम नागरिकों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना भी रहा।
अभियान के दौरान वी.ई.एस. के विभिन्न संस्थानों से जुड़े विद्यार्थियों ने समूहों में विभाजित होकर दादर चौपाटी के अलग-अलग हिस्सों में सफाई की। स्वयंसेवकों ने समुद्र तट पर बिखरे प्लास्टिक, कपड़े, पैकेजिंग सामग्री और अन्य कचरे को एकत्र किया। एकत्र किए गए कचरे को उसकी प्रकृति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया गया, ताकि उसे उचित तरीके से हटाया और निपटाया जा सके।
इस अभियान में वी.ई.एस. से जुड़े कई प्रमुख शिक्षण संस्थानों की भागीदारी रही। वी.ई.एस. पॉलिटेक्निक, वी.ई.एस. बिजनेस स्कूल, वी.ई.एस. कॉलेज ऑफ लॉ, वी.ई.एस. कॉलेज ऑफ फार्मेसी, वी.ई.एस. इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, वी.ई.एस. कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर, वी.ई. कॉलेज ऑफ आर्ट्स, साइंस एंड कॉमर्स, वी.ई.एस. इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च, वी.ई.एस. तुलसी टेक्निकल तथा स्वामी विवेकानंद हाई स्कूल एंड जूनियर कॉलेज के विद्यार्थी और प्रतिनिधि अभियान का हिस्सा बने।
विभिन्न विषयों और पाठ्यक्रमों से जुड़े विद्यार्थियों के एक साथ आने से अभियान को व्यापक स्वरूप मिला। विज्ञान, तकनीक, प्रबंधन, कानून, फार्मेसी, आर्किटेक्चर, कला और वाणिज्य सहित अलग-अलग क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने एक साझा पर्यावरणीय उद्देश्य के लिए श्रमदान किया।
अभियान में सिर्फ कचरा एकत्र करने पर जोर नहीं दिया गया, बल्कि कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर उसके उचित निस्तारण की दिशा में भी काम किया गया। स्वयंसेवकों ने प्लास्टिक, कपड़े और अन्य प्रकार के कचरे को अलग किया। इससे विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि सफाई व्यवस्था केवल सड़क या समुद्र तट से कचरा उठाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरे के स्रोत से लेकर उसके अंतिम निस्तारण तक जिम्मेदार व्यवहार आवश्यक है।
स्वच्छता अभियान के दौरान विद्यार्थियों के बीच पर्यावरण संरक्षण, प्लास्टिक प्रदूषण, समुद्री पारिस्थितिकी और सतत विकास जैसे विषयों को लेकर जागरूकता भी बढ़ी। समुद्र में जाने वाला प्लास्टिक और अन्य गैर-जैविक कचरा समुद्री जीव-जंतुओं तथा तटीय पारिस्थितिकी के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में समुद्र तटों को साफ रखने के साथ-साथ लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना भी महत्वपूर्ण है।
अभियान में बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी एजेंसियों या सफाई कर्मचारियों की जिम्मेदारी नहीं माना जा सकता। समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवाओं की सक्रिय भागीदारी से ऐसे अभियानों का प्रभाव और व्यापक हो सकता है।
छात्रों ने अभियान के दौरान श्रमदान करते हुए समुद्र तट पर जमा कचरे को हटाया। उनके लिए यह गतिविधि कक्षा और पाठ्यक्रम से बाहर का एक व्यावहारिक अनुभव भी रही, जिसमें उन्होंने सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक भागीदारी को प्रत्यक्ष रूप से समझा।
विवेकानंद एजुकेशन सोसाइटी के सचिव राजेश गेहानी ने कहा कि समुद्र तट स्वच्छता अभियान पर्यावरण और व्यापक समुदाय के प्रति संस्था की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहल के माध्यम से छात्रों को अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखने में सक्रिय भूमिका निभाने और जिम्मेदार कचरा प्रबंधन के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि वी.ई.एस. के विभिन्न संस्थानों से विद्यार्थियों और प्रतिनिधियों की भागीदारी पर्यावरण संरक्षण और समाज के प्रति सार्थक योगदान देने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उनके अनुसार, विद्यार्थियों को सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों से जोड़ना उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
वी.ई.एस. के अनुसार, समुद्र तट स्वच्छता अभियान संस्था की पर्यावरणीय गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे व्यापक समुदाय के प्रति प्रतिबद्धता के तहत आयोजित किया जाता है। गणपति विसर्जन के बाद समुद्र तट की स्थिति को देखते हुए इस तरह के अभियान का महत्व और बढ़ जाता है।
गणपति उत्सव मुंबई की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उत्सव के दौरान लाखों लोग विभिन्न स्थानों पर धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं। ऐसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों के बाद स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है। इस अभियान के माध्यम से धार्मिक आस्था और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाए रखने का संदेश भी सामने आया।
वी.ई.एस. की ओर से बताया गया कि संस्था पिछले कई वर्षों से शिक्षा के साथ मूल्य आधारित सीख और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी जोर देती रही है। इसी सोच के तहत विद्यार्थियों को समाज और पर्यावरण से जुड़े वास्तविक मुद्दों के साथ जोड़ने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाता है।
समुद्र तट स्वच्छता अभियान में विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सामूहिक जिम्मेदारी है। समुद्र, समुद्र तट और तटीय क्षेत्र केवल पर्यटन या मनोरंजन के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे एक व्यापक पारिस्थितिक तंत्र का हिस्सा हैं। इन क्षेत्रों में जमा होने वाला कचरा लंबे समय तक पर्यावरण को प्रभावित कर सकता है।
विवेकानंद एजुकेशन सोसाइटी की 50 वर्षों से अधिक की शैक्षणिक विरासत रही है। संस्था अकादमिक शिक्षा के साथ मूल्य आधारित शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी ध्यान केंद्रित करती रही है। संस्था से जुड़े विभिन्न शैक्षणिक परिसरों में विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारों से जोड़ने के लिए अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
समुद्र तट स्वच्छता अभियान इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण को केवल किताबों तक सीमित न रखते हुए उसे व्यवहार में अपनाने का अवसर मिला।
दादर चौपाटी पर आयोजित इस अभियान में 500 से अधिक विद्यार्थियों और अन्य प्रतिभागियों की भागीदारी तथा 2000 किलोग्राम से अधिक कचरे का संग्रह यह दर्शाता है कि सामूहिक प्रयासों से सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता में प्रभावी योगदान दिया जा सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं के स्तर पर आमतौर पर यह भी रेखांकित किया जाता रहा है कि सफाई अभियानों के साथ कचरा कम करने, स्रोत पर कचरे को अलग करने और नागरिकों में जिम्मेदार व्यवहार विकसित करने पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाना चाहिए।
गणपति विसर्जन के बाद आयोजित इस पहल ने इसी दिशा में जागरूकता का संदेश दिया। छात्रों ने अपने श्रम से समुद्र तट की सफाई की और समाज को यह संदेश दिया कि सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। नागरिकों की भागीदारी, जिम्मेदार कचरा प्रबंधन और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील व्यवहार भी उतना ही जरूरी है।
वी.ई.एस. और वनशक्ति की इस संयुक्त पहल ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के साथ-साथ सामुदायिक सेवा, सामाजिक जिम्मेदारी और सतत विकास के महत्व को भी रेखांकित किया। अभियान के माध्यम से यह संदेश सामने आया कि स्वच्छ समुद्र तट और स्वस्थ पर्यावरण के लिए नियमित प्रयासों के साथ-साथ नागरिकों की सोच और व्यवहार में बदलाव भी आवश्यक है।
मुंबई-रिपोर्टर,(हितेश जैन)।


