यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) विवाद और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग के खिलाफ अपना विरोध तेज करने का एलान किया है। राहुल गांधी ने घोषणा की कि सोमवार, 12 अक्तूबर को विपक्षी दलों, युवाओं और नागरिक समाज के संगठनों के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग भी उठाई। राहुल गांधी के इस एलान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
राहुल गांधी ने रविवार को दिल्ली में युवाओं के विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि शनिवार को शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर पुलिस और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने हमला किया। कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन विपक्ष इस मुद्दे पर पीछे हटने वाला नहीं है।
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए कहा कि शनिवार को दिल्ली की सड़कों पर देश के युवा शांतिपूर्ण विरोध के लिए उतरे थे। उनके मुताबिक, प्रदर्शनकारी युवाओं के मन में नफरत या गुस्सा नहीं, बल्कि मोहब्बत और लोकतंत्र के प्रति विश्वास था। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बावजूद युवाओं के साथ मारपीट की गई।
राहुल गांधी ने कहा कि ऐसा भारत नहीं होना चाहिए, जहां शांतिपूर्ण विरोध करने वाले युवाओं को अपनी बात रखने के लिए हिंसा का सामना करना पड़े। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में नागरिकों को अपनी आवाज उठाने और सरकार से सवाल पूछने का अधिकार है। उनके अनुसार, युवाओं के अधिकारों और संविधान की रक्षा के लिए विपक्ष एकजुट होकर आगे आएगा।
राहुल गांधी ने घोषणा की कि सोमवार, 12 अक्तूबर को विपक्षी दलों, युवाओं और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के साथ सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मार्च का उद्देश्य किसी एक राजनीतिक दल का समर्थन करना नहीं, बल्कि भारतीय नागरिकों के रूप में लोकतांत्रिक अधिकारों और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर करना है।
उन्होंने कहा कि मार्च में महिला-पुरुष, जाति, धर्म, समुदाय और राज्य की सीमाओं से ऊपर उठकर लोगों से शामिल होने की अपील की गई है। राहुल गांधी के अनुसार, लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले और संविधान के साथ खड़े सभी नागरिक इस पहल का हिस्सा बन सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि विपक्ष की ओर से देश की तरफ से मुख्य न्यायाधीश को एक ज्ञापन सौंपने की योजना है। इस ज्ञापन के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाया जाएगा और अपनी मांगों की ओर ध्यान आकर्षित किया जाएगा।
राहुल गांधी ने अपने बयान में तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें कथित वोट चोरी पर रोक लगाना, एसआईआर प्रक्रिया को रोकना और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा शामिल है।
विपक्ष की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
वोट चोरी के आरोपों पर कार्रवाई: राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की।
एसआईआर पर रोक: विपक्ष ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां जताते हुए इसे रोकने की मांग उठाई।
मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा: राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को दोहराया।
गौरतलब है कि ये विपक्ष की ओर से उठाई गई राजनीतिक मांगें और आरोप हैं। इनके संबंध में संबंधित संस्थाओं का पक्ष तथा आधिकारिक प्रतिक्रिया अलग से देखी जानी चाहिए।
राहुल गांधी ने अपने संदेश में इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दलों, नागरिक समाज के संगठनों और लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले लोगों से एकजुट होने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई किसी पार्टी, जाति, समुदाय या राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों से जुड़ी है।
उन्होंने अपने बयान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि देश की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष डरने वाला नहीं है और वह अपने विरोध को आगे जारी रखेगा।
उनका संदेश था कि देश के नागरिकों को मोहब्बत, भाईचारे और देशभक्ति की भावना के साथ एकजुट होना चाहिए। उन्होंने युवाओं से भी लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की।
एसआईआर को लेकर विपक्ष और चुनाव व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस लगातार चर्चा में है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठते हैं और इसे लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, इन आरोपों के मूल्यांकन के लिए चुनाव आयोग का पक्ष, लागू नियम और संबंधित आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण हैं।
राहुल गांधी के सुप्रीम कोर्ट तक मार्च के एलान ने इस मुद्दे को एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस विरोध के जरिए चुनाव प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों को प्रमुखता से सामने लाने की कोशिश कर रहे हैं।
राहुल गांधी की घोषणा के बाद अब सोमवार को प्रस्तावित मार्च को लेकर राजनीतिक हलकों में नजरें टिकी हैं। इस कदम से विपक्ष की एकजुटता, एसआईआर विवाद और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा तेज होने की संभावना है।
हालांकि, मार्च में कितने दलों और संगठनों की भागीदारी होगी, ज्ञापन सौंपने की प्रक्रिया किस रूप में आगे बढ़ेगी और संबंधित संस्थाओं की ओर से क्या प्रतिक्रिया आएगी, यह घटनाक्रम के दौरान स्पष्ट होगा।
राहुल गांधी ने अपने संदेश के अंत में कहा कि लोकतंत्र में विश्वास रखने वाले सभी लोगों को एक साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने निडर होकर संविधान और नागरिक अधिकारों की रक्षा करने का आह्वान किया। अब देखना होगा कि विपक्ष का यह प्रस्तावित मार्च एसआईआर विवाद को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ाने में कितना प्रभावी साबित होता है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


