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- 10h ago
नई दिल्ली। यमुनापार दिगम्बर जैन समाज की ओर से स्कोपमिनार ऑडिटोरियम में प्रतिभा सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। समारोह में दसवीं और बारहवीं कक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली समाज की मेधावी प्रतिभाओं को सम्मानित कर उनका उत्साहवर्धन किया गया। विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिह्न एवं उपहार प्रदान किए गए। सम्मान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और आत्मविश्वास साफ दिखाई दिया, वहीं उनके अभिभावकों में भी गर्व का भाव नजर आया।
कार्यक्रम में यमुनापार विकास बोर्ड के अध्यक्ष एवं विधायक अरविंदर सिंह लवली, दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन, जैन को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन राजेश जैन सहित अनेक जैन मंदिरों के प्रधान, संस्थाओं के वरिष्ठ पदाधिकारी, समाजसेवी, अभिभावक और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
अतिथियों ने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि विद्यार्थियों की उपलब्धि केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गौरव का विषय है।
मुख्य अतिथि यमुनापार विकास बोर्ड के अध्यक्ष एवं विधायक अरविंदर सिंह लवली ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि किसी भी समाज की सबसे बड़ी ताकत और पूंजी उसकी प्रतिभाशाली युवा पीढ़ी होती है। आज जिन विद्यार्थियों को सम्मानित किया जा रहा है, वे आने वाले समय में अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन करेंगे।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अपने जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर मेहनत करनी चाहिए। केवल परीक्षा में अच्छे अंक हासिल करना ही सफलता नहीं है। जीवन में अनुशासन, ईमानदारी, संवेदनशीलता, धैर्य और समाज के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी उतनी ही आवश्यक है।
लवली ने कहा कि प्रतिभा सम्मान जैसे आयोजन विद्यार्थियों के भीतर आगे बढ़ने का उत्साह पैदा करते हैं। जब किसी विद्यार्थी को समाज के सामने सम्मान मिलता है तो उसके आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और दूसरे विद्यार्थियों को भी बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने यमुनापार दिगम्बर जैन समाज की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि समाज को जोड़ने तथा युवा पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देने में ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष निर्मल जैन ने कहा कि समाज में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि इन प्रतिभाओं को समय पर पहचानकर उन्हें उचित मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के पर्याप्त अवसर दिए जाएं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान प्रदान करती है, लेकिन संस्कार उस ज्ञान का सही दिशा में उपयोग करना सिखाते हैं। इसलिए बच्चों की शिक्षा के साथ उनके संस्कार और चरित्र निर्माण पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
निर्मल जैन ने कहा कि दिगम्बर जैन समाज की गौरवशाली परंपरा शिक्षा, सेवा, त्याग, परोपकार और नैतिक मूल्यों से जुड़ी रही है। नई पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा के साथ भगवान महावीर के सिद्धांतों और जीवन मूल्यों से जोड़ना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
उन्होंने अभिभावकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों पर केवल अधिक अंक लाने का दबाव न बनाएं। प्रत्येक बच्चे की अपनी क्षमता, रुचि और प्रतिभा होती है। अभिभावकों को बच्चों की रुचि को समझकर उन्हें अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
जैन को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन राजेश जैन ने कहा कि प्रतिभा सम्मान समारोह केवल पुरस्कार बांटने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समाज की भावी पीढ़ी के निर्माण की दिशा में किया गया महत्वपूर्ण प्रयास है।
उन्होंने कहा कि जब किसी विद्यार्थी को सार्वजनिक मंच पर सम्मान मिलता है तो उसके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है। वह अपनी उपलब्धि को और आगे ले जाने के लिए प्रेरित होता है। साथ ही समाज के अन्य विद्यार्थी भी उससे प्रेरणा लेते हैं।
राजेश जैन ने कहा कि वर्तमान समय में प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ तकनीकी ज्ञान, व्यक्तित्व विकास, संवाद कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने सम्मानित प्रतिभाओं से कहा कि वे अपनी सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि न समझें, बल्कि समाज के दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणास्रोत बनें और अपनी क्षमता का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करें।
यमुनापार दिगम्बर जैन समाज के चेयरमैन विजय जैन ने कहा कि समाज हमेशा से शिक्षा, संस्कार और सेवा को प्राथमिकता देता रहा है। प्रतिभा सम्मान समारोह इसी सोच और परंपरा का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति उसकी शिक्षित, संस्कारित और जागरूक युवा पीढ़ी से होती है। इसलिए प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को केवल सम्मानित करने के बजाय उनके भविष्य को बेहतर बनाने के लिए निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन की व्यवस्था भी होनी चाहिए।
विजय जैन ने कहा कि आने वाले समय में समाज की ओर से प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के लिए शिक्षा सहायता, करियर मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और कौशल विकास जैसे कार्यक्रमों को और विस्तार देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि समाज की जिम्मेदारी है कि कोई भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी केवल आर्थिक या अन्य किसी कारण से अपने लक्ष्य तक पहुंचने से वंचित न रह जाए।
यमुनापार दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष विराग जैन ने कहा कि आज सम्मानित की जा रही प्रतिभाएं ही आने वाले समय में समाज का नेतृत्व करेंगी। इसलिए उनकी उपलब्धियों को पहचानना, उनका उत्साह बढ़ाना और उन्हें उचित मार्गदर्शन देना समाज की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता उनके माता-पिता और परिवार के लिए गर्व का विषय है, लेकिन जब समाज की प्रतिभा आगे बढ़ती है तो यह पूरे समाज के लिए गौरव की बात होती है।
विराग जैन ने युवाओं से आह्वान किया कि वे बड़े सपने देखें, लक्ष्य निर्धारित करें और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करें। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता का सर्वोच्च उद्देश्य केवल स्वयं आगे बढ़ना नहीं, बल्कि अपनी सफलता से समाज और राष्ट्र के लिए भी कुछ करना होना चाहिए।
समारोह के दौरान दसवीं एवं बारहवीं कक्षा में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों को मंच पर आमंत्रित कर सम्मानित किया गया। उन्हें प्रशस्ति-पत्र, स्मृति-चिह्न और उपहार प्रदान किए गए।
सम्मान प्राप्त करते समय विद्यार्थियों में विशेष उत्साह नजर आया। कई अभिभावकों ने कहा कि बच्चों को समाज के मंच पर सम्मान मिलने से उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि प्रतिभा को पहचानना और उसका सम्मान करना केवल विद्यार्थी का मनोबल बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे समाज में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा का वातावरण भी तैयार होता है।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों के भविष्य को लेकर भी चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में केवल पारंपरिक शिक्षा पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार सही करियर का चयन करने के लिए समय पर मार्गदर्शन मिलना जरूरी है।
उन्होंने करियर काउंसलिंग, उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
वक्ताओं ने कहा कि समाज के वरिष्ठ लोगों, शिक्षाविदों और विभिन्न क्षेत्रों में सफल व्यक्तियों को आगे आकर युवाओं का मार्गदर्शन करना चाहिए। इससे विद्यार्थियों को अपने भविष्य की दिशा तय करने में मदद मिलेगी।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि जैन समाज की पहचान केवल धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, सेवा, परोपकार, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी की मजबूत परंपरा भी इसकी पहचान रही है।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को आधुनिक दौर की चुनौतियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ उसे अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़कर रखना भी जरूरी है। तकनीक और आधुनिक शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों का समन्वय ही युवाओं को बेहतर नागरिक बनाने में मदद करेगा।
कार्यक्रम में अभिभावकों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि बच्चों की सफलता में विद्यालय और समाज के साथ-साथ परिवार की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
अभिभावकों को बच्चों की तुलना दूसरे बच्चों से करने के बजाय उनकी अपनी क्षमता को पहचानना चाहिए। बच्चों को असफलता से घबराने के बजाय उससे सीखने और दोबारा प्रयास करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
वक्ताओं ने कहा कि बच्चे जब परिवार से प्रोत्साहन और समाज से सम्मान प्राप्त करते हैं तो उनके भीतर आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना और मजबूत होती है।
समारोह में भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष सारिका जैन, वरिष्ठ समाजसेवी पी.के. जैन सहित विभिन्न जैन मंदिरों एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रधान, वरिष्ठ पदाधिकारी, समाजसेवी, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में अभिभावक मौजूद रहे।
अतिथियों ने विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे अपनी मेहनत और उपलब्धियों के माध्यम से समाज का नाम रोशन करते रहें।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, सम्मानित प्रतिभाओं, अभिभावकों, समाजबंधुओं और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
यमुनापार दिगम्बर जैन समाज का यह प्रतिभा सम्मान समारोह केवल मेधावी विद्यार्थियों के अभिनंदन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज की नई पीढ़ी को शिक्षा, संस्कार, परिश्रम, अनुशासन और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश भी दिया। समारोह से यह संदेश स्पष्ट रूप से सामने आया कि प्रतिभा का सम्मान वास्तव में समाज के उज्ज्वल भविष्य का सम्मान है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


