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- 12h ago
मथुरा। हिंदी साहित्य विचार मंच, मथुरा एवं श्रीमद् भागवत पीठ, वृंदावन के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार को श्री सत्य नारायण कथा पर आधारित ब्रजभाषा काव्य ग्रंथ के विमोचन समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में संत-महात्माओं, साहित्यकारों, कवियों, समाजसेवियों और धर्मप्रेमियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। समारोह के दौरान ‘श्री सत्य नारायण कथा रचना—ब्रज भाषा काव्य’ नामक ग्रंथ का विमोचन पूज्य संतों के कर-कमलों द्वारा किया गया।
ब्रज की माटी, संस्कृति, परंपरा और लोकभाषा को साहित्य के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में इस कृति को महत्वपूर्ण प्रयास बताया गया। रचनाकार पं. विनोद गौड़ आयुष, संस्थापक हिंदी साहित्य विचार मंच, मथुरा ने भगवान श्री सत्य नारायण की पावन कथा को ब्रजभाषा के काव्य रूप में प्रस्तुत किया है। कथा को ब्रज की सहज, मधुर और भावपूर्ण भाषा में अभिव्यक्त करने से धार्मिक आख्यान के साथ-साथ ब्रजभाषा की साहित्यिक गरिमा भी सामने आती है।
समारोह की अध्यक्षता आचार्य पीठ पीठाधीश्वर, भागवत प्रभाकर पूज्य मारुतिनंदनाचार्य, श्रद्धेय वागीश महाराज, कोटवन ने की। कार्यक्रम में पूज्य संत मोनी बाबा, अंतरराष्ट्रीय भागवत आचार्य कृष्ण चंद्र ठाकुर, राम कथा रस आचार्य ज्ञानेश गौड़, गोवर्धन से पूर्ण प्रकाश कौशिक महाराज, पं. अमित भारद्वाज, बिहारी लाल वशिष्ठ, स्वामी गिर्राज वशिष्ठ एवं बालयोगी सहित अनेक संत-महात्माओं की उपस्थिति रही।
अध्यक्षीय उद्बोधन में पूज्य महाराज श्री ने कहा कि ब्रजभाषा केवल बोलचाल की भाषा नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, संतों की वाणी और ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ी हुई भाषा है। उन्होंने कहा कि श्री सत्य नारायण कथा का ब्रजभाषा में काव्य रूपांतरण अत्यंत सराहनीय प्रयास है। ऐसी रचनाएं धार्मिक साहित्य को सरल और आत्मीय स्वरूप प्रदान करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और मातृभाषा से जोड़ने का कार्य करती हैं।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी आधुनिकता के साथ आगे बढ़ रही है, ऐसे में अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से उसका जुड़ाव बनाए रखना भी आवश्यक है। ब्रजभाषा में धार्मिक एवं सांस्कृतिक साहित्य का सृजन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने रचनाकार पं. विनोद गौड़ आयुष को इस कृति के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह प्रयास ब्रज की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने में सहायक होगा।
कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारों एवं संतों ने कहा कि ब्रजभाषा में श्री सत्य नारायण कथा को काव्य के रूप में प्रस्तुत करना साहित्य और अध्यात्म का सुंदर संगम है। कथा साहित्य का अपना विशिष्ट महत्व है और जब वही कथा लोकभाषा के माध्यम से जनसामान्य तक पहुंचती है तो उसका प्रभाव और अधिक व्यापक हो जाता है। ब्रजभाषा की मिठास और काव्य की लय के माध्यम से धार्मिक प्रसंगों को प्रस्तुत करने से पाठकों को आध्यात्मिक भाव के साथ साहित्यिक रस का भी अनुभव होगा।
समारोह में शहर के अनेक गणमान्य नागरिकों, साहित्यकारों, कवियों और धर्मप्रेमियों ने भाग लिया। अखिल भारतीय गौड़ मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष पं. पंकज शर्मा, वामन भगवान शोभायात्रा के संरक्षक संजय पिपरोनिया, ब्रह्मभारती पत्रिका के संपादक महेंद्र दत्त आचार्य, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष मनोज मिश्र, संरक्षक पं. रमेश गौड़, आशीष, मधुकर गौड़ सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
इस अवसर पर ब्रज के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों और साहित्यप्रेमियों ने भी कृति की सराहना की। वक्ताओं ने कहा कि ब्रजभाषा में निरंतर साहित्य सृजन की आवश्यकता है, ताकि आने वाली पीढ़ियां ब्रज की समृद्ध भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत को केवल इतिहास के रूप में न जानें, बल्कि उसे अपनी दैनिक जीवन परंपरा और साहित्य से भी जोड़ सकें।
समारोह के दौरान संतों एवं अतिथियों का सम्मान भी किया गया। रचनाकार पं. विनोद गौड़ आयुष ने कार्यक्रम में उपस्थित संत-महात्माओं, साहित्यकारों, अतिथियों एवं साहित्य प्रेमियों का सम्मान करते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस कृति के पीछे उद्देश्य केवल एक धार्मिक कथा को काव्य रूप देना नहीं, बल्कि ब्रजभाषा की मधुरता, धार्मिक भावनाओं और सांस्कृतिक विरासत को एक साथ पाठकों तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि ब्रजभूमि सदियों से संतों, भक्तों, कवियों और साहित्यकारों की साधना स्थली रही है। यहां की भाषा में भक्ति, प्रेम, वात्सल्य और आध्यात्मिक भाव सहज रूप से दिखाई देते हैं। ऐसे में धार्मिक कथाओं को ब्रजभाषा में प्रस्तुत करने से ब्रज की साहित्यिक परंपरा को भी मजबूती मिलती है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने ब्रजभाषा के संरक्षण और संवर्धन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि ब्रजभाषा में अधिक से अधिक मौलिक साहित्य, धार्मिक ग्रंथ, काव्य, बाल साहित्य और सांस्कृतिक रचनाएं तैयार की जाएं। विद्यालयों, साहित्यिक संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के स्तर पर भी ब्रजभाषा को बढ़ावा देने के प्रयास होने चाहिए।
समारोह के दौरान वातावरण भक्ति, साहित्य और संस्कृति के रंग में रंगा नजर आया। संतों के आशीर्वचन, साहित्यकारों के विचार और ब्रजभाषा के प्रति उपस्थित लोगों का उत्साह पूरे कार्यक्रम की विशेषता रहा। उपस्थित लोगों ने कृति के विमोचन को ब्रज साहित्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए रचनाकार को शुभकामनाएं दीं।
आयोजकों ने कहा कि हिंदी साहित्य विचार मंच, मथुरा का उद्देश्य साहित्य के माध्यम से समाज में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और भारतीय भाषाओं के प्रति जागरूकता पैदा करना है। इसी क्रम में ब्रजभाषा में धार्मिक एवं सांस्कृतिक साहित्य के सृजन और प्रकाशन को आगे भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
समारोह के अंत में रचनाकार पं. विनोद गौड़ आयुष ने सभी संत-महात्माओं, अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों, समाजसेवियों एवं साहित्य प्रेमियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संतों एवं साहित्यप्रेमियों का आशीर्वाद और सहयोग ही रचनाकार के लिए सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘श्री सत्य नारायण कथा रचना—ब्रज भाषा काव्य’ पाठकों के बीच स्थान बनाएगी और ब्रजभाषा के प्रति नई पीढ़ी में रुचि पैदा करने में योगदान देगी।
समारोह में बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति ने यह संदेश दिया कि ब्रज की भाषा, साहित्य, अध्यात्म और संस्कृति के प्रति लोगों का लगाव आज भी उतना ही गहरा है। कार्यक्रम ने एक ओर जहां श्री सत्य नारायण की भक्ति भावना को साहित्य से जोड़ा, वहीं दूसरी ओर ब्रजभाषा के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में भी सकारात्मक संदेश दिया।


