यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न अवसरों पर देश-विदेश से प्राप्त उपहार अब आम नागरिकों, संग्रहकर्ताओं और कला प्रेमियों के लिए ई-नीलामी के माध्यम से उपलब्ध होंगे। केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय ने प्रधानमंत्री स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी यानी पीएम मेमेंटोज ई-ऑक्शन के आठवें संस्करण की शुरुआत की है। इस बार कुल 1,498 स्मृति चिह्नों को ई-नीलामी के लिए रखा गया है। नीलामी 17 सितंबर 2026 से आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से शुरू की गई है।
इस संग्रह में भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराओं, पारंपरिक हस्तशिल्प, चित्रकला, आध्यात्मिक विरासत, लोक कलाओं और खेल उपलब्धियों को दर्शाने वाली अनेक वस्तुएं शामिल हैं। इन स्मृति चिह्नों को केवल उपहार के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इनके माध्यम से देश के अलग-अलग क्षेत्रों की कला और शिल्प परंपराओं की झलक भी सामने आती है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार संग्रह में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र, असम, बिहार और ओडिशा समेत विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करने वाली वस्तुएं शामिल हैं।
ई-नीलामी में भाग लेने से पहले आम लोग इन स्मृति चिह्नों को राष्ट्रीय आधुनिक कला गैलरी (एनजीएमए), नई दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनी में देख सकते हैं। इस प्रदर्शनी का उद्देश्य लोगों को उन वस्तुओं की कलात्मकता, शिल्प कौशल और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से परिचित कराना है, जिन्हें ई-नीलामी के माध्यम से हासिल किया जा सकता है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार एनजीएमए ने इस पूरी पहल के दस्तावेजीकरण, प्रदर्शनी और संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का समन्वय किया है।
प्रदर्शनी में अलग-अलग क्षेत्रों से आई वस्तुओं को देखकर यह समझने का अवसर मिलता है कि भारत की सांस्कृतिक विरासत कितनी व्यापक और विविध है। कहीं पारंपरिक मूर्तिकला दिखाई देती है तो कहीं लोक चित्रकला और हस्तशिल्प की बारीकियां नजर आती हैं। धार्मिक और आध्यात्मिक प्रतीकों के साथ-साथ आधुनिक भारत की उपलब्धियों तथा खेल जगत से जुड़े स्मृति चिह्न भी इस संग्रह का हिस्सा हैं।
इस बार 1,498 स्मृति चिह्नों में से 50 विशेष वस्तुओं को ‘हीरो ऑब्जेक्ट्स’ के रूप में चिह्नित किया गया है। ये वस्तुएं संग्रह की विशिष्ट और प्रमुख कलाकृतियों में शामिल हैं। इनके आधार मूल्य भी अन्य कई वस्तुओं की तुलना में अधिक निर्धारित किए गए हैं।
इन प्रमुख वस्तुओं में कर्नाटक से प्राप्त भगवान राम की चांदी की प्रतिमा सबसे अधिक आधार मूल्य वाली वस्तुओं में है। इसका आधार मूल्य 13.50 लाख रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा काकतीय कला तोरणम की चांदी की प्रतिकृति का आधार मूल्य 9 लाख रुपये रखा गया है।
इसी क्रम में ‘ट्री ऑफ लाइफ’ गोंड आर्ट पेंटिंग का आधार मूल्य 7.50 लाख रुपये है। रथ पर जगन्नाथ परिवार की प्रतिमा का आधार मूल्य 6 लाख रुपये तथा 99.99 फाइन गोल्ड-प्लेटेड राधा-कृष्ण आर्टवर्क का आधार मूल्य 5.40 लाख रुपये निर्धारित किया गया है।
इन वस्तुओं की खासियत केवल उनका मूल्य नहीं है, बल्कि इनके पीछे जुड़ी भारतीय कला, धार्मिक परंपरा और स्थानीय शिल्प की पहचान भी महत्वपूर्ण है।
इस बार के संग्रह को भारत की ‘पैन-इंडिया’ सांस्कृतिक तस्वीर के रूप में भी देखा जा सकता है। अलग-अलग राज्यों से प्राप्त स्मृति चिह्न इस बात को सामने रखते हैं कि भारत की कला परंपरा किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है।
पश्चिम बंगाल की कलात्मक परंपराओं से लेकर उत्तर प्रदेश की धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत, गुजरात की लोक एवं हस्तकला, महाराष्ट्र की आध्यात्मिक और लोक परंपराएं, असम की विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, बिहार और ओडिशा की कला एवं धार्मिक परंपराएं—इन सभी की झलक संग्रह में दिखाई देती है। संस्कृति मंत्रालय ने भी राज्यवार प्रतिनिधित्व को इस संस्करण की प्रमुख विशेषताओं में शामिल किया है।
इस दृष्टि से यह ई-नीलामी केवल वस्तुओं की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया नहीं रह जाती, बल्कि लोगों को भारत की विविध कलाओं से जोड़ने वाला माध्यम भी बनती है।
प्रधानमंत्री को विभिन्न अवसरों पर मिलने वाले स्मृति चिह्नों को ई-नीलामी में शामिल करने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन्हें सार्वजनिक सहभागिता के लिए उपलब्ध कराया जाता है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार नागरिक, संग्रहकर्ता, संस्थान और कला-संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग इस प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं।
इस व्यवस्था के जरिए कोई व्यक्ति किसी विशिष्ट कलाकृति या स्मृति चिह्न को अपने संग्रह का हिस्सा बना सकता है। दूसरी ओर, नीलामी से प्राप्त धनराशि को एक राष्ट्रीय उद्देश्य से जोड़ा गया है। इससे कला और संस्कृति से जुड़ी वस्तुओं के संरक्षण तथा पर्यावरणीय उद्देश्य के बीच एक संबंध स्थापित होता है।
इस ई-नीलामी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक यह है कि इससे प्राप्त धनराशि नमामि गंगे कार्यक्रम के लिए दी जाएगी। संस्कृति मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि नीलामी की आय का उपयोग गंगा नदी के संरक्षण, कायाकल्प और उससे जुड़े कार्यों में सहयोग के लिए किया जाएगा।
इस प्रकार नीलामी में शामिल प्रत्येक वस्तु अपने साथ दो तरह की विरासत लेकर आती है। पहली विरासत है भारत की कला और संस्कृति की, जबकि दूसरी इससे जुड़ा सार्वजनिक उद्देश्य है। यही वजह है कि इस आयोजन को सांस्कृतिक संग्रह और राष्ट्रीय मिशन के बीच एक सेतु के रूप में भी देखा जा रहा है।
पूरी ई-नीलामी प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए विभिन्न संस्थानों के बीच समन्वय किया गया है। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार एनजीएमए प्रदर्शनी, दस्तावेजीकरण और संचालन से जुड़े कार्यों का समन्वय कर रहा है। तकनीकी और पोर्टल संबंधी सहायता के लिए एनआईसी, मूल्यांकन और मूल्य निर्धारण के लिए संबंधित संस्थाएं, भुगतान संबंधी व्यवस्था के लिए एसबीआई तथा वस्तुओं की पैकिंग और सफल बोलीदाताओं तक डिलीवरी के लिए निर्धारित फाइन आर्ट हैंडलिंग एजेंसी की भूमिका है।
इससे ई-नीलामी की पूरी प्रक्रिया को एक निर्धारित संस्थागत ढांचे के भीतर संचालित करने की व्यवस्था की गई है।
प्रधानमंत्री स्मृति चिह्नों की ई-नीलामी की शुरुआत 2019 में हुई थी। इसके बाद अलग-अलग संस्करणों में प्रधानमंत्री को मिले स्मृति चिह्नों और उपहारों को ई-नीलामी के माध्यम से लोगों के लिए उपलब्ध कराया गया। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार पिछले संस्करणों से इस पहल के जरिए नमामि गंगे कार्यक्रम के लिए 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है।
हालांकि, अगस्त 2026 में लोकसभा में दिए गए सरकार के आंकड़ों के अनुसार 2021 से 2025 तक सात संस्करणों में अलग-अलग राशि प्राप्त हुई। इनमें 2021 में 3.1 करोड़, 2022 में 3.6 करोड़, 2023 के दो संस्करणों में क्रमश: 15.8 करोड़ और 14.4 करोड़, 2024 के दो संस्करणों में 11.16 करोड़ और 2.24 करोड़ तथा 2025 के संस्करण में 1.89 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।
पीएम मेमेंटोज ई-ऑक्शन के पिछले संस्करणों में खेल जगत से जुड़े स्मृति चिह्नों ने भी लोगों का खास ध्यान आकर्षित किया है। विशेष रूप से टोक्यो ओलंपिक और पैरालंपिक खेलों से जुड़े खिलाड़ियों के खेल उपकरण इस पहल के महत्वपूर्ण आकर्षण रहे हैं।
वर्ष 2021 की तीसरी ई-नीलामी में भारतीय ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीरज चोपड़ा के जैवलिन को सबसे अधिक 1.5 करोड़ रुपये की बोली मिली थी। उस समय यह स्मृति चिह्न सबसे अधिक बोली मूल्य पाने वाली वस्तु बना था।
उसी नीलामी में भवानी देवी की हस्ताक्षरित तलवार के लिए 1.25 करोड़ रुपये और पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता सुमित अंतिल के जैवलिन के लिए करीब 1.002 करोड़ रुपये की बोली लगी थी। इससे यह भी पता चलता है कि स्मृति चिह्नों के प्रति लोगों की रुचि केवल कला और धार्मिक वस्तुओं तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल उपलब्धियों से जुड़ी वस्तुओं को भी सार्वजनिक स्तर पर काफी महत्व मिलता है।
ई-नीलामी में शामिल वस्तुओं की विविधता कला प्रेमियों और संग्रहकर्ताओं के लिए अलग-अलग तरह के अवसर पैदा करती है। पारंपरिक मूर्तियां, चित्रकला, हस्तशिल्प, धार्मिक कलाकृतियां, सांस्कृतिक प्रतीक और खेल स्मृति चिह्न एक ही संग्रह में दिखाई देते हैं।
किसी संग्रहकर्ता के लिए यह किसी विशिष्ट कलाकृति को अपने निजी संग्रह में शामिल करने का अवसर हो सकता है, वहीं सामान्य नागरिकों के लिए यह भारत की कला और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने का माध्यम बन सकता है।
विशेष रूप से प्रदर्शनी की व्यवस्था इस पहल को केवल ऑनलाइन बोली तक सीमित नहीं रखती। लोग पहले वस्तुओं को प्रत्यक्ष रूप से देख सकते हैं और उनके बाद ऑनलाइन नीलामी प्रक्रिया में भाग ले सकते हैं। संस्कृति मंत्रालय ने नागरिकों, संस्थानों, संग्रहकर्ताओं, कॉरपोरेट्स और कला प्रेमियों से इस संस्करण में भाग लेने का आह्वान किया है।
ई-नीलामी का एक प्रमुख पहलू इसका डिजिटल स्वरूप भी है। आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से बोली लगाने की व्यवस्था होने से देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोग इस प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। इससे भौगोलिक दूरी कम होती है और किसी वस्तु में रुचि रखने वाले व्यक्ति को उसके लिए बोली लगाने का अवसर मिलता है।
सरकार ने पिछले संस्करणों में भी इस व्यवस्था के माध्यम से नागरिकों और संस्थानों की भागीदारी दर्ज की है। वर्ष 2021 की नीलामी में 1,348 स्मृति चिह्नों पर 8,600 से अधिक बोलियां प्राप्त होने की जानकारी सरकार ने दी थी।
इस पहल का एक व्यापक पक्ष यह भी है कि देश के विभिन्न हिस्सों में तैयार होने वाली पारंपरिक कलाकृतियां राष्ट्रीय स्तर पर दर्शकों तक पहुंच रही हैं। स्थानीय कारीगरों की कला, लोक परंपराओं, धार्मिक प्रतीकों और क्षेत्रीय हस्तशिल्प से जुड़ी वस्तुएं जब राष्ट्रीय स्तर के संग्रह का हिस्सा बनती हैं, तो उनके बारे में व्यापक स्तर पर जानकारी सामने आती है।
गोंड कला से लेकर चांदी की कलाकृतियों और पारंपरिक धार्मिक प्रतीकों तक, संग्रह भारत की उस विविधता को सामने लाता है जिसमें अलग-अलग समुदायों और क्षेत्रों की अपनी विशिष्ट कलात्मक पहचान है।
ई-नीलामी से प्राप्त धनराशि को नमामि गंगे कार्यक्रम से जोड़ना इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण आयाम है। गंगा भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना में विशेष स्थान रखती है और इसके संरक्षण तथा कायाकल्प से जुड़े कार्यक्रमों को लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर संचालित किया जा रहा है।
ऐसे में प्रधानमंत्री को प्राप्त स्मृति चिह्नों की सार्वजनिक नीलामी से प्राप्त धनराशि को गंगा संरक्षण के लिए उपयोग किए जाने की व्यवस्था संस्कृति और पर्यावरण के बीच एक अलग तरह का संबंध प्रस्तुत करती है। एक ओर देश की कला और परंपरा से जुड़ी वस्तुएं लोगों तक पहुंचती हैं और दूसरी ओर उनकी नीलामी से प्राप्त राशि नदी संरक्षण के उद्देश्य में लगाई जाती है।
पीएम मेमेंटोज ई-ऑक्शन का आठवां संस्करण कई दृष्टियों से उल्लेखनीय है। एक तरफ इसमें पिछली नीलामियों की तरह देश की विविध कलाओं और परंपराओं को स्थान दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ 1,498 वस्तुओं का बड़ा संग्रह और 50 ‘हीरो ऑब्जेक्ट्स’ इसे विशेष पहचान देता है।
कर्नाटक की चांदी की भगवान राम प्रतिमा, काकतीय कला तोरणम की प्रतिकृति, गोंड कला की ‘ट्री ऑफ लाइफ’, जगन्नाथ परिवार की प्रतिमा और राधा-कृष्ण की गोल्ड-प्लेटेड कलाकृति जैसी वस्तुएं संग्रह की विविधता को दर्शाती हैं।
कुल मिलाकर पीएम मेमेंटोज ई-ऑक्शन को कला, संस्कृति, सार्वजनिक सहभागिता और गंगा संरक्षण को एक साथ जोड़ने वाली पहल के रूप में देखा जा सकता है। इस बार 1,498 स्मृति चिह्नों के माध्यम से देश के विभिन्न हिस्सों की कलात्मक और सांस्कृतिक पहचान एक ही मंच पर दिखाई दे रही है। वहीं नीलामी से मिलने वाली राशि नमामि गंगे कार्यक्रम के लिए जाने से इस पूरी प्रक्रिया का एक सार्वजनिक उद्देश्य भी जुड़ा हुआ है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


