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- 12h ago
नई दिल्ली। भारतीय उत्पादों की विदेशों में बढ़ती मांग अब कई बड़े बाजारों में दिखाई देने लगी है। खास तौर पर चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस जैसे प्रमुख ब्रिक्स देशों में भारत से होने वाले निर्यात में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती पांच महीनों यानी अप्रैल से अगस्त के दौरान इन चार प्रमुख ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं को भारत का निर्यात 34 प्रतिशत बढ़कर 19.9 अरब डॉलर हो गया। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह आंकड़ा 14.9 अरब डॉलर था।
इस वृद्धि में सबसे ज्यादा चर्चा चीन की हो रही है। दुनिया की बड़ी विनिर्माण अर्थव्यवस्थाओं में शामिल चीन को भारत से होने वाला निर्यात 39 प्रतिशत बढ़कर 9.6 अरब डॉलर पहुंच गया। यानी चीन उन प्रमुख बाजारों में शामिल है जहां भारतीय सामान की मांग में उल्लेखनीय तेजी दिखाई दे रही है।
दक्षिण अफ्रीका में तो वृद्धि दर इससे भी अधिक रही। अप्रैल-अगस्त के दौरान वहां भारत का निर्यात 58 प्रतिशत बढ़ा। वहीं ब्राजील को निर्यात में 13 प्रतिशत और रूस को निर्यात में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
चीन भारतीय निर्यात के लिए लंबे समय से एक महत्वपूर्ण बाजार रहा है, लेकिन हालिया आंकड़ों में वहां भारतीय सामान की मांग में तेज वृद्धि दिखाई दी है। पांच महीनों में चीन को भारत का निर्यात 39 प्रतिशत बढ़कर 9.6 अरब डॉलर हो गया।
यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत और चीन के बीच व्यापार संबंधों में लंबे समय से आयात-निर्यात का बड़ा अंतर रहा है। ऐसे में चीन के बाजार में भारतीय उत्पादों की बिक्री में वृद्धि भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसरों की ओर संकेत करती है।
हालांकि, केवल पांच महीनों के आंकड़ों के आधार पर दीर्घकालिक व्यापार संतुलन में बड़े बदलाव का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगा। फिर भी चीन को निर्यात में दर्ज मौजूदा तेजी भारत के लिए बाजार विविधीकरण और निर्यात विस्तार के लिहाज से महत्वपूर्ण संकेत देती है।
चार प्रमुख ब्रिक्स देशों में प्रतिशत के लिहाज से सबसे तेज वृद्धि दक्षिण अफ्रीका में दर्ज की गई। अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान वहां भारत का निर्यात 58 प्रतिशत बढ़ा।
यह वृद्धि बताती है कि भारतीय कंपनियों के लिए अवसर केवल एशियाई बाजारों तक सीमित नहीं हैं। अफ्रीकी बाजारों में भी भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ रही है। दक्षिण अफ्रीका महाद्वीप की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और क्षेत्रीय व्यापार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण बाजार है।
भारत के निर्यात में बढ़ोतरी केवल चीन और दक्षिण अफ्रीका तक सीमित नहीं रही। ब्राजील को निर्यात में 13 प्रतिशत और रूस को निर्यात में 11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
इस तरह चारों प्रमुख ब्रिक्स बाजारों में भारत के निर्यात में वृद्धि हुई। इससे कुल मिलाकर इन चार देशों का भारतीय निर्यात में योगदान बढ़ा है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस का संयुक्त हिस्सा भारत के कुल निर्यात में अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान 9.2 प्रतिशत हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में इन चार देशों की हिस्सेदारी 8.1 प्रतिशत थी।
यानी केवल निर्यात की रकम ही नहीं बढ़ी, बल्कि भारत के कुल निर्यात में इन प्रमुख ब्रिक्स बाजारों का सापेक्ष महत्व भी बढ़ा है।
इन आंकड़ों को भारत में तैयार उत्पादों और घरेलू विनिर्माण की वैश्विक पहुंच के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारतीय कंपनियां अब परंपरागत बाजारों के अलावा एशिया, अफ्रीका और अन्य उभरते बाजारों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं।
वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि भारत जैसे-जैसे ब्रिक्स के साथ अपना जुड़ाव मजबूत कर रहा है, सबसे मजबूत गति चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस जैसे मूल ब्रिक्स साझेदारों के साथ व्यापार में दिखाई दे रही है।
हालांकि, इसे सीधे तौर पर हर क्षेत्र में 'मेड इन इंडिया' की समान सफलता नहीं माना जा सकता। अलग-अलग बाजारों में अलग-अलग उत्पादों की मांग और निर्यात वृद्धि के कारण भी अलग हो सकते हैं।
भारत के निर्यात की कहानी सिर्फ ब्रिक्स देशों तक सीमित नहीं है। अप्रैल-अगस्त 2026-27 के दौरान जापान को भारतीय निर्यात 43 प्रतिशत बढ़कर 3.43 अरब डॉलर हो गया।
इस वृद्धि में खनिज ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक्स और एल्युमीनियम जैसे उत्पादों की भूमिका बताई गई है।
जापान जैसे विकसित और उच्च गुणवत्ता वाले बाजार में निर्यात बढ़ना भारतीय निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे बाजारों में गुणवत्ता, मानकों और आपूर्ति की निरंतरता की मांग आम तौर पर अधिक होती है।
इटली को भारत का निर्यात अप्रैल-अगस्त 2026-27 में लगभग 30 प्रतिशत बढ़कर 3.92 अरब डॉलर हो गया। पिछले साल की समान अवधि में यह 3.02 अरब डॉलर था।
दक्षिण कोरिया को भारत का निर्यात भी 22 प्रतिशत बढ़कर 3.21 अरब डॉलर हो गया। यहां खनिज, ईंधन, इलेक्ट्रॉनिक्स, एल्युमीनियम, लौह-इस्पात और रसायन जैसे क्षेत्रों से जुड़े उत्पादों ने वृद्धि में योगदान दिया।
हालिया निर्यात आंकड़ों में इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उत्पादों का महत्व बढ़ता दिखाई दे रहा है। अगस्त 2026 में भारत का माल निर्यात सालाना आधार पर 26.1 प्रतिशत बढ़कर 43.81 अरब डॉलर पहुंचा। इस वृद्धि में इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान प्रमुख योगदानकर्ताओं में रहे।
यह बदलाव भारतीय निर्यात की संरचना में भी एक महत्वपूर्ण पहलू को दिखाता है। भारत लंबे समय से कच्चे माल और पारंपरिक उत्पादों के निर्यात के साथ-साथ अधिक मूल्य वाले विनिर्मित उत्पादों की हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
ब्रिक्स की मूल संरचना में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे। बाद में समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब शामिल हुए। 2025 में इंडोनेशिया भी समूह में शामिल हुआ।
इसके अलावा कई देशों को पार्टनर देशों के रूप में जोड़ा गया है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए संभावित बाजारों का दायरा भी बढ़ा है।
ब्रिक्स के व्यापक समूह में भारत के व्यापारिक अवसर केवल चार पुराने प्रमुख साझेदारों तक सीमित नहीं हैं। समूह के विस्तार के साथ ऊर्जा, कृषि, विनिर्माण और औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में सहयोग की संभावनाएं बढ़ी हैं।
वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक, भारत ब्रिक्स के भीतर अपनी व्यापारिक उपस्थिति मजबूत करने के साथ-साथ बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के साथ अधिक एकीकृत हो रहा है।
किसी एक या दो बड़े बाजार पर अत्यधिक निर्भरता निर्यातकों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है। ऐसे में चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, इटली, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस जैसे अलग-अलग क्षेत्रों के बाजारों में निर्यात बढ़ना भारतीय कंपनियों को अधिक व्यापक बाजार आधार उपलब्ध करा सकता है।
हालांकि, निर्यात में लगातार वृद्धि बनाए रखने के लिए कीमत, गुणवत्ता, वैश्विक मांग, लॉजिस्टिक्स, मुद्रा विनिमय दर और दूसरे देशों की व्यापार नीतियों जैसे कई कारक महत्वपूर्ण रहेंगे।
भारतीय निर्यात के बाजारों में विविधता बढ़ रही है, लेकिन अमेरिका अब भी भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य बना हुआ है। हालिया आंकड़ों में अमेरिका के साथ-साथ अन्य विकसित और उभरते बाजारों में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
इसका मतलब यह है कि भारत की निर्यात रणनीति केवल किसी एक व्यापारिक समूह पर निर्भर नहीं है। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने की कोशिश जारी है।
चीन में 39 प्रतिशत, दक्षिण अफ्रीका में 58 प्रतिशत, जापान में 43 प्रतिशत, इटली में करीब 30 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया में 22 प्रतिशत की निर्यात वृद्धि एक साथ देखें तो तस्वीर यह बनती है कि 2026-27 के शुरुआती महीनों में भारतीय निर्यातकों ने कई महत्वपूर्ण बाजारों में बेहतर प्रदर्शन किया है।
यह वृद्धि अलग-अलग उत्पाद श्रेणियों और बाजार परिस्थितियों से प्रभावित है, इसलिए इसे भारत के हर उत्पाद की वैश्विक मांग में समान वृद्धि के रूप में नहीं देखा जा सकता। फिर भी आंकड़े बताते हैं कि भारतीय निर्यात का भौगोलिक आधार व्यापक हो रहा है।
निर्यात में शुरुआती पांच महीनों की तेजी को पूरे वित्त वर्ष की स्थायी प्रवृत्ति में बदलना अगली चुनौती होगी। वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतें, व्यापार शुल्क, मुद्रा विनिमय दर, भू-राजनीतिक परिस्थितियां और प्रमुख देशों की मांग में बदलाव आगे के महीनों में निर्यात पर असर डाल सकते हैं।
इसके बावजूद चीन सहित प्रमुख ब्रिक्स देशों और जापान, इटली तथा दक्षिण कोरिया जैसे बाजारों में दर्ज वृद्धि भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसरों की ओर संकेत करती है।
यानी तस्वीर सिर्फ इतनी नहीं है कि चीन भारत से ज्यादा सामान खरीद रहा है। बड़ी तस्वीर यह है कि भारतीय निर्यात कई अलग-अलग बड़े बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ा रहा है। चीन को 9.6 अरब डॉलर का निर्यात और चार प्रमुख ब्रिक्स देशों को कुल 19.9 अरब डॉलर का निर्यात इसी बदलते व्यापारिक परिदृश्य का एक अहम हिस्सा है।


