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- 12h ago
नई दिल्ली। भारत को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य के साथ देश के तकनीकी उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की गई है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026 ने ‘विकसित टेक 47’ नाम से एक विशेष प्लेटफॉर्म की घोषणा की है। इसका उद्देश्य भारत की उन प्रौद्योगिकी कंपनियों, संस्थापकों, नेताओं और तकनीकी सक्षमकर्ताओं को पहचान देना है, जो देश में नवाचार, स्वदेशी तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन, विनिर्माण और घरेलू बौद्धिक संपदा को आगे बढ़ा रहे हैं।
यह पहल भारत के ‘विकसित भारत@2047’ विजन से जुड़ी है और इसका फोकस केवल घरेलू बाजार में सफल भारतीय कंपनियों को पहचान देने तक सीमित नहीं है। इसका व्यापक उद्देश्य ऐसी कंपनियों और तकनीकी नेतृत्व को सामने लाना है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक बाजारों में भारतीय टेक्नोलॉजी की मौजूदगी मजबूत कर सकें।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस का 10वां संस्करण 7 से 10 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली के यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर में आयोजित होगा। इस आयोजन को दूरसंचार विभाग और सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI) आयोजित कर रहे हैं।
आयोजकों के मुताबिक इस बार आयोजन में 1.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों, 300 से ज्यादा प्रदर्शकों और 100 से अधिक देशों की भागीदारी की उम्मीद है। आयोजन में 1,500 से अधिक टेक्नोलॉजी यूज-केसेज प्रदर्शित किए जाने की योजना है।
IMC की आधिकारिक वेबसाइट पर सम्मेलन के एजेंडे में Viksit Tech 47 के साथ 6G, सैटेलाइट कनेक्टिविटी, क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्योरिटी, स्मार्ट मोबिलिटी और अन्य तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल हैं।
‘विकसित टेक 47’ की सबसे महत्वपूर्ण गतिविधियों में भारतीय टेक कंपनियों का व्यापक अध्ययन शामिल है। इसके तहत 200 से अधिक भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनियों का आकलन किया जाएगा।
इस अध्ययन के साथ कंपनियों के संस्थापकों और उद्योग विशेषज्ञों से बातचीत भी की जाएगी। इससे भारतीय टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम की मौजूदा स्थिति, उसकी क्षमताओं, चुनौतियों और वैश्विक तकनीकी वैल्यू चेन में भारत की भूमिका को समझने का प्रयास किया जाएगा।
इस पूरी रिसर्च के आधार पर एक फ्लैगशिप रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसे IMC 2026 के दौरान जारी किया जाएगा। रिपोर्ट में यह देखने की कोशिश की जाएगी कि भारत वैश्विक टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन में वर्तमान में कहां खड़ा है और किन क्षेत्रों में देश के लिए आगे विस्तार की संभावनाएं मौजूद हैं। इस पहल के लिए Techarc को रिसर्च पार्टनर बनाया गया है।
‘विकसित टेक 47’ के दायरे में टेक्नोलॉजी के कई तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र शामिल किए गए हैं।
इनमें प्रमुख रूप से—
शामिल हैं।
इन क्षेत्रों का चयन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आज वैश्विक तकनीकी प्रतिस्पर्धा केवल स्मार्टफोन या दूरसंचार सेवाओं तक सीमित नहीं है। चिप्स, कंपोनेंट्स, एआई, रोबोटिक्स, कनेक्टेड डिवाइस, क्लाउड सॉफ्टवेयर और स्मार्ट उपकरणों से लेकर विनिर्माण तक पूरी टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है।
आधिकारिक Viksit Tech 47 प्लेटफॉर्म पर पुरस्कारों की अलग-अलग श्रेणियां रखी गई हैं। इनमें Viksit Tech Brand of the Year, Viksit Tech Leader of the Year और Viksit Tech Enabler of the Year शामिल हैं।
इस श्रेणी में ऐसे ब्रांडों पर ध्यान दिया जाएगा जो नवाचार, नई श्रेणी बनाने, स्थानीयकरण, निर्यात और कारोबारी प्रभाव जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे हैं।
इस श्रेणी का फोकस उन तकनीकी नेताओं पर है, जिन्होंने अपनी दूरदृष्टि, प्रभाव, विचार नेतृत्व और तकनीकी क्षेत्र में योगदान के जरिए भारतीय टेक इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम में कई ऐसी कंपनियां और संस्थाएं होती हैं जो सीधे अंतिम उपभोक्ता के सामने ब्रांड के रूप में नहीं आतीं, लेकिन तकनीकी विकास के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करती हैं। इस श्रेणी में ऐसे सक्षमकर्ताओं के सहयोग, तकनीकी हस्तांतरण और उनके प्रभाव को देखा जाएगा।
‘विकसित टेक 47’ का एक महत्वपूर्ण पहलू स्वदेशी तकनीकी क्षमता को पहचान देना है। भारत में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन, इंजीनियरिंग, कंपोनेंट निर्माण और स्थानीय बौद्धिक संपदा को मजबूत करने की दिशा में काम करने वाली कंपनियों को इस पहल के माध्यम से सामने लाने की योजना है।
इसका महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि किसी भी बड़े तकनीकी इकोसिस्टम की ताकत केवल तैयार उत्पाद बेचने में नहीं होती। डिजाइन, रिसर्च, सॉफ्टवेयर, कंपोनेंट, मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन जैसे अलग-अलग स्तरों पर घरेलू क्षमता विकसित होने से पूरी वैल्यू चेन मजबूत होती है।
पहल के तहत Dr. Zarabi Indigenisation Award for Startups भी शामिल किया गया है। यह पुरस्कार ऐसे स्टार्टअप्स को पहचान देने के लिए है, जो डिजाइन, इंजीनियरिंग, कंपोनेंट्स या मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े नवाचारों के माध्यम से भारत में ऐसे हार्डवेयर, गैजेट्स, डिवाइस और उपकरण विकसित कर रहे हैं, जिनके लिए पहले आयात पर निर्भरता थी।
इस श्रेणी में केवल अंतिम उत्पाद ही नहीं, बल्कि उस उत्पाद को भारत में विकसित करने के पीछे मौजूद तकनीकी क्षमता और इंजीनियरिंग को भी महत्व दिया जाएगा।
भारत में विनिर्माण बढ़ाने की चर्चा के बीच ‘विकसित टेक 47’ का एक महत्वपूर्ण पहलू भारतीय कंपनियों को घरेलू बाजार से आगे वैश्विक बाजार के लिए तैयार करने की सोच है।
किसी कंपनी का भारत में सफल होना और वैश्विक ब्रांड बनना अलग-अलग चरण हैं। वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए उत्पाद की गुणवत्ता, डिजाइन, लागत, पेटेंट और बौद्धिक संपदा, सप्लाई चेन, ब्रांडिंग, निर्यात नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों को समझना जरूरी होता है।
IMC के सीईओ रामकृष्ण पी. ने इसी दिशा की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि भारत में तकनीकी प्रतिभा और महत्वाकांक्षा की कमी नहीं है, लेकिन कंपनियों को घरेलू सफलता से आगे वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में मदद करने वाले प्लेटफॉर्म की जरूरत है।
भारत में पिछले वर्षों में स्टार्टअप और डीप-टेक कंपनियों का दायरा लगातार बढ़ा है। अब तकनीकी उद्यम केवल ऐप या डिजिटल सेवाओं तक सीमित नहीं हैं। हार्डवेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, IoT, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, मोबिलिटी और औद्योगिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में भी नई कंपनियां सामने आ रही हैं।
ऐसे में Viksit Tech 47 के जरिए इन कंपनियों को निवेशकों, उद्योग, तकनीकी विशेषज्ञों और संभावित वैश्विक साझेदारों के सामने अपनी क्षमताएं दिखाने का अवसर मिल सकता है।
IMC 2026 की आधिकारिक जानकारी के अनुसार आयोजन में 600 से अधिक स्टार्टअप, 300 से अधिक निवेशक/इनक्यूबेटर और बड़ी संख्या में उद्योग विशेषज्ञों की भागीदारी की योजना बताई गई है।
Viksit Tech 47 में AI और Deep Tech को अलग श्रेणी के रूप में शामिल किया गया है। इसका संकेत है कि भारत के तकनीकी भविष्य को केवल उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार के नजरिए से नहीं देखा जा रहा।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन, सेंसर टेक्नोलॉजी और अन्य डीप-टेक क्षेत्रों में विकसित होने वाली क्षमताएं आने वाले समय में उद्योग, स्वास्थ्य, परिवहन, रक्षा, कृषि और सेवाओं सहित कई क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती हैं।
IMC 2026 के कार्यक्रम में AI, 6G और सैटेलाइट-आधारित कनेक्टिविटी से जुड़े अनेक सत्र भी रखे गए हैं।
स्मार्ट होम और IoT को भी Viksit Tech 47 के प्रमुख क्षेत्रों में रखा गया है। घरों, कार्यालयों, कारखानों और शहरों में इंटरनेट से जुड़े उपकरणों की संख्या बढ़ने के साथ सेंसर, कनेक्टेड डिवाइस, डेटा प्लेटफॉर्म और ऑटोमेशन की मांग भी बढ़ रही है।
भारतीय कंपनियों के लिए यह क्षेत्र घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी विस्तार की संभावनाएं पैदा करता है।
कनेक्टेड मोबिलिटी भी इस पहल के प्रमुख क्षेत्रों में है। वाहनों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, सेंसर, स्मार्ट सिस्टम, डिजिटल सेवाएं और रियल-टाइम डेटा का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
ऐसे में भारतीय टेक कंपनियों के लिए ऑटोमोबाइल और मोबिलिटी क्षेत्र केवल वाहन निर्माण तक सीमित बाजार नहीं रह गया है। सॉफ्टवेयर, सेंसर, कनेक्टिविटी और डेटा आधारित सेवाओं के जरिए भी कंपनियां इस वैल्यू चेन का हिस्सा बन सकती हैं।
IMC 2026 की व्यापक थीम ‘Scale Without Boundaries’ रखी गई है। यह थीम भारतीय तकनीक, नवाचार और विचारों को देश की सीमाओं से आगे वैश्विक बाजार तक ले जाने की दिशा को दर्शाती है।
इस साल IMC में Viksit Tech 47 के अलावा ग्लोबल टेलीकॉम लीडरशिप, इंटरनेशनल 6G सिम्पोजियम, सैटकॉम समिट, साइबर सिक्योरिटी समिट, क्वांटम समिट, स्मार्ट मोबिलिटी और स्टार्टअप से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
IMC 2026 में गैर-स्थलीय नेटवर्क यानी Non-Terrestrial Networks (NTN), डायरेक्ट-टू-डिवाइस कनेक्टिविटी और सैटेलाइट-टू-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क के मेल पर भी चर्चा होनी है। इसके साथ 6G और भविष्य की कनेक्टिविटी तकनीकों पर भी विशेष सत्र होंगे।
इससे स्पष्ट है कि IMC अब केवल मोबाइल और टेलीकॉम उत्पादों की प्रदर्शनी तक सीमित मंच नहीं है, बल्कि भविष्य की डिजिटल और कनेक्टिविटी तकनीकों के लिए भी बड़ा उद्योग मंच बन रहा है।
100 से अधिक देशों की भागीदारी और बड़ी संख्या में प्रदर्शकों, निवेशकों तथा टेक्नोलॉजी कंपनियों की मौजूदगी भारतीय कंपनियों को वैश्विक साझेदारों के सामने अपनी तकनीक पेश करने का अवसर दे सकती है।
ऐसे मंच पर भारतीय कंपनियां संभावित निवेशकों, टेक्नोलॉजी पार्टनर्स, वितरकों और विदेशी बाजारों से जुड़े प्रतिनिधियों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर सकती हैं।
हालांकि किसी कंपनी के वैश्विक स्तर पर सफल होने का परिणाम उसके उत्पाद, कारोबार, पूंजी, बाजार रणनीति और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।
Viksit Tech 47 की रिपोर्ट इस पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। 200 से अधिक कंपनियों के अध्ययन और संस्थापकों तथा उद्योग विशेषज्ञों के साथ बातचीत के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर की तस्वीर पेश करेगी।
इसमें यह समझने का प्रयास होगा कि भारतीय कंपनियां वैश्विक वैल्यू चेन के किन हिस्सों में मौजूद हैं और किन क्षेत्रों में आगे विस्तार की गुंजाइश है।
आधिकारिक IMC कार्यक्रम के अनुसार Viksit Tech 47 के लिए 8 अक्टूबर को विशेष सत्र निर्धारित है। इसी दौरान इस पहल से जुड़े सम्मान और कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।
इस तरह 2026 का संस्करण भारतीय टेक कंपनियों के लिए केवल प्रदर्शनी का मंच नहीं, बल्कि ब्रांड निर्माण, नेटवर्किंग, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक पहचान से जुड़े अवसरों का मंच भी बनने जा रहा है।
भारत में बड़ी संख्या में टेक्नोलॉजी कंपनियां घरेलू स्तर पर उत्पाद और सेवाएं विकसित कर रही हैं। लेकिन वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने के लिए कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, उत्पाद मानकों, निर्यात, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ने की जरूरत होती है।
Viksit Tech 47 का घोषित उद्देश्य इसी अंतर को कम करने की दिशा में एक दीर्घकालिक मंच तैयार करना है। आयोजकों के अनुसार इसे आने वाले वर्षों में ऐसा प्लेटफॉर्म बनाने की योजना है जो भारतीय तकनीक को घरेलू सफलता से वैश्विक पहचान तक पहुंचाने में मदद करे।
पहल: Viksit Tech 47
आयोजक मंच: India Mobile Congress 2026
IMC की तारीख: 7 से 10 अक्टूबर 2026
स्थान: यशोभूमि कन्वेंशन सेंटर, नई दिल्ली
रिसर्च पार्टनर: Techarc
अध्ययन: 200 से अधिक भारतीय टेक कंपनियां
मुख्य क्षेत्र: AI, Deep Tech, IoT, SaaS, कंज्यूमर डिवाइस, वियरेबल्स, कनेक्टेड मोबिलिटी, कंपोनेंट्स और मैन्युफैक्चरिंग
पुरस्कार श्रेणियां: Viksit Tech Brand, Leader और Enabler of the Year
विशेष सम्मान: Dr. Zarabi Indigenisation Award for Startups
IMC 2026 थीम: Scale Without Boundaries
अपेक्षित प्रतिभागी: 1.5 लाख से अधिक
देशों की भागीदारी: 100 से अधिक
प्रदर्शक: 300 से अधिक
टेक्नोलॉजी यूज-केसेस: 1,500 से अधिक इस पहल का केंद्रीय विचार यही है कि भारत केवल वैश्विक तकनीक का बड़ा बाजार बनने तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसे उत्पाद, कंपनियां और तकनीकी बौद्धिक संपदा भी विकसित करे जिनकी वैश्विक बाजार में पहचान बने।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


