यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
नई दिल्ली। भारत के दूरसंचार क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक, नवाचार, डिजिटल आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) अवॉर्ड्स 2026 के माध्यम से नई पहचान मिली है। आईएमसी के दसवें संस्करण में आयोजित पुरस्कार समारोह में दूरसंचार उद्योग से जुड़ी अग्रणी कंपनियों, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और स्टार्टअप को विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इन पुरस्कारों के जरिए 5जी तकनीक के व्यावहारिक उपयोग, क्लाउड आधारित समाधानों, साइबर सुरक्षा, दूरसंचार सॉफ्टवेयर, स्वदेशी नवाचार और भारतीय तकनीक के निर्यात में उल्लेखनीय योगदान को मान्यता दी गई।
इस आयोजन ने यह भी रेखांकित किया कि भारत का दूरसंचार क्षेत्र अब केवल नेटवर्क विस्तार और किफायती सेवाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में विकसित तकनीकों, बौद्धिक संपदा और नए व्यावसायिक समाधानों के माध्यम से वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पुरस्कारों में बड़ी कंपनियों के साथ उभरते स्टार्टअप और घरेलू तकनीकी उद्यमों को स्थान मिलना इस बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत है।
आईएमसी 2026 के प्रमुख आकर्षणों में 5जी इनोवेशन हैकाथॉन रहा, जिसमें टॉर्चिट, स्काई एयर मोबिलिटी और स्कैनओ को विजेता के रूप में सम्मानित किया गया। वहीं, ओकुलो एयरोस्पेस, प्रॉक्सी और किसानएआई ने उपविजेता के रूप में अपनी जगह बनाई। इस राष्ट्रीय स्तर की नवाचार चुनौती की शुरुआत एरिक्सन इंडिया ने की थी। इसका उद्देश्य युवाओं, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और तकनीकी विशेषज्ञों को ऐसे समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करना था, जो आधुनिक संचार तकनीकों के माध्यम से वास्तविक समस्याओं का समाधान कर सकें।
हैकाथॉन में प्रतिभागियों को 5जी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्लाउड कंप्यूटिंग और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) जैसी तकनीकों का इस्तेमाल करके उपयोगी और व्यावहारिक समाधान तैयार करने का अवसर दिया गया। इन तकनीकों के समन्वित उपयोग से स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और औद्योगिक उत्पादन जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा हो रही हैं।
हैकाथॉन के लिए कुल 800 आवेदन प्राप्त हुए। इसके बाद तीन चरणों में मूल्यांकन की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें से 20 प्रतिभागियों को अंतिम चरण तक पहुंचने का अवसर मिला। चयन प्रक्रिया में तकनीकी नवीनता के साथ-साथ समाधान की उपयोगिता, व्यावहारिकता और समाज तथा उद्योग पर उसके संभावित प्रभाव को महत्व दिया गया।
प्रतियोगिता में ग्रामीण क्षेत्रों तक तकनीक की पहुंच बढ़ाने, स्वास्थ्य सेवाओं एवं जांच को बेहतर बनाने, पर्यावरण संरक्षण, कृषि उत्पादकता, खाद्य सुरक्षा और उन्नत विनिर्माण से जुड़ी समस्याओं पर विशेष ध्यान दिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि नई संचार तकनीकों का महत्व केवल तेज इंटरनेट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इनके जरिए समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन में ठोस बदलाव लाने की संभावनाएं भी विकसित हो रही हैं।
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत की असाधारण प्रगति के पीछे देश के युवाओं की नवाचार क्षमता और परंपरागत सोच से आगे बढ़कर समाधान तलाशने का दृष्टिकोण महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने दूरसंचार क्षेत्र में पिछले एक दशक के दौरान हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने व्यापक नेटवर्क कवरेज, समावेशिता और किफायती सेवाओं की उपलब्धता के मामले में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं।
सिंधिया के अनुसार, किसी भी तकनीकी क्षेत्र में वास्तविक मूल्य केवल उत्पाद या सेवा तैयार करने में नहीं, बल्कि उसके पीछे मौजूद बौद्धिक संपदा, मौलिक विचार और नवाचार की क्षमता में निहित होता है। देश में तकनीकी विकास को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ने आवश्यक नियामकीय ढांचा तैयार किया है, जिससे उद्यमियों, स्टार्टअप और शोधकर्ताओं को नए समाधान विकसित करने के अवसर मिल सकें।
उन्होंने भारत की विकास यात्रा को विश्वगुरु की विरासत से आत्मनिर्भर भारत और फिर वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने के लक्ष्य से जोड़ते हुए तकनीकी आत्मनिर्भरता के महत्व पर जोर दिया। इस दृष्टिकोण में दूरसंचार क्षेत्र की भूमिका विशेष मानी जा रही है, क्योंकि डिजिटल कनेक्टिविटी शिक्षा, स्वास्थ्य, कारोबार, प्रशासन और औद्योगिक विकास के अनेक क्षेत्रों को प्रभावित करती है।
युवाओं के नेतृत्व में विकसित हो रहे तकनीकी समाधान भारत को केवल विदेशी तकनीक का उपयोगकर्ता बनने के बजाय नई तकनीकों के विकास, निर्माण और निर्यात में भागीदार बनाने की क्षमता रखते हैं। आईएमसी पुरस्कार इसी दिशा में काम कर रहे उद्यमों और नवोन्मेषकों को प्रोत्साहित करने का माध्यम बने हैं।
आईएमसी अवॉर्ड्स 2026 में भारतीय दूरसंचार इकोसिस्टम के विकास, घरेलू तकनीकी क्षमताओं और उद्योगों में नवाचार को बढ़ावा देने वाले उद्यमों को भी सम्मानित किया गया। एरियल टेलीकॉम सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड को दूरसंचार इकोसिस्टम में सर्वश्रेष्ठ एमएसएमई का पुरस्कार दिया गया। यह सम्मान दूरसंचार क्षेत्र में छोटे और मध्यम उद्यमों की भूमिका को रेखांकित करता है।
एमएसएमई देश के औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और तकनीकी सेवाओं के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। दूरसंचार क्षेत्र में इनकी भागीदारी नेटवर्क समाधान, उपकरण, सॉफ्टवेयर और विभिन्न तकनीकी सेवाओं के विकास के माध्यम से सामने आती है। ऐसे उद्यमों को पहचान मिलने से घरेलू तकनीकी क्षमताओं के विकास और उद्योग के व्यापक विस्तार को प्रोत्साहन मिल सकता है।
कम्युनिकेशंस टेस्ट डिजाइन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (सीटीडीआई) को सतत विकास पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं, स्पेस वर्ल्ड डिजिटल सॉल्यूशंस को सर्वश्रेष्ठ मेड इन इंडिया टेलीकॉम इनोवेशन का पुरस्कार मिला। इन श्रेणियों में सम्मान भारतीय कंपनियों द्वारा विकसित तकनीकी समाधानों और दूरसंचार उद्योग में उनकी बढ़ती भागीदारी को सामने लाते हैं।
स्वदेशी तकनीक के विकास का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि इससे देश की तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के लिए घरेलू स्तर पर समाधान तैयार करने की क्षमता मजबूत होती है। साथ ही, भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपने उत्पाद और सेवाएं पेश करने के लिए नए अवसर मिल सकते हैं।
दूरसंचार नेटवर्क के विस्तार के साथ सॉफ्टवेयर, क्लाउड कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। आधुनिक नेटवर्क के संचालन, डेटा प्रबंधन, डिजिटल सेवाओं और उपयोगकर्ताओं की जानकारी की सुरक्षा के लिए इन तकनीकों की आवश्यकता होती है। आईएमसी पुरस्कारों में इन क्षेत्रों के योगदान को अलग-अलग श्रेणियों में मान्यता दी गई।
एरिक्सन को सर्वाधिक नवाचारी दूरसंचार सॉफ्टवेयर के लिए सम्मानित किया गया। एचसीएल टेक को दूरसंचार इकोसिस्टम के लिए सर्वश्रेष्ठ क्लाउड समाधान का पुरस्कार मिला, जबकि फोर्टिनेट को सुरक्षा, गोपनीयता एवं प्रमाणीकरण आधारित सर्वश्रेष्ठ समाधान के लिए सम्मानित किया गया।
इन पुरस्कारों से यह स्पष्ट होता है कि दूरसंचार उद्योग में प्रतिस्पर्धा अब केवल नेटवर्क की गति और कवरेज तक सीमित नहीं है। नेटवर्क को अधिक विश्वसनीय, सुरक्षित, प्रभावी और आधुनिक डिजिटल जरूरतों के अनुकूल बनाना भी उतना ही आवश्यक है।
क्लाउड तकनीक कंपनियों को अपने डिजिटल संसाधनों और सेवाओं का प्रबंधन करने में सहायता देती है। वहीं, साइबर सुरक्षा और प्रमाणीकरण आधारित समाधान डिजिटल प्रणालियों को अनधिकृत पहुंच तथा संभावित खतरों से सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दूरसंचार सॉफ्टवेयर इन सभी प्रक्रियाओं को एकीकृत और प्रभावी बनाने में योगदान देता है।
5जी तकनीक को उद्योगों में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सुंदरम क्लेटन लिमिटेड को वर्ष का सर्वाधिक नवाचारी 5जी उपयोग मामला लागू करने का पुरस्कार दिया गया। यह सम्मान औद्योगिक क्षेत्र में नई संचार तकनीक के व्यावहारिक उपयोग को रेखांकित करता है।
5जी नेटवर्क की उच्च गति, कम विलंबता और बड़ी संख्या में उपकरणों को जोड़ने की क्षमता से विनिर्माण, औद्योगिक स्वचालन और डिजिटल संचालन जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाएं पैदा होती हैं। कंपनियां इन क्षमताओं का उपयोग उत्पादन प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने, उपकरणों की निगरानी करने और संचालन से जुड़े आंकड़ों का अधिक प्रभावी विश्लेषण करने के लिए कर सकती हैं।
हालांकि, किसी भी तकनीक की वास्तविक सफलता उसके व्यावहारिक उपयोग और उससे मिलने वाले लाभों पर निर्भर करती है। ऐसे में 5जी आधारित सफल उपयोग मामलों को सम्मानित करना अन्य उद्योगों को भी नई तकनीकों को अपनाने और अपनी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।
आईएमसी अवॉर्ड्स 2026 में भारतीय दूरसंचार तकनीक की निर्यात क्षमता को भी प्रमुखता दी गई। तनला प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड को भारतीय दूरसंचार प्रौद्योगिकी के सबसे बड़े निर्यातक का सम्मान मिला। वहीं, समग्र दूरसंचार प्रौद्योगिकी निर्यात की श्रेणी में नोकिया सॉल्यूशंस एंड नेटवर्क्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सम्मानित किया गया।
तकनीकी निर्यात किसी भी देश के लिए आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण आधार होता है। जब घरेलू कंपनियां अपने तकनीकी उत्पादों और सेवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाती हैं, तो इससे भारतीय उद्योग की क्षमताओं को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलती है। इसके साथ ही, अनुसंधान, उत्पाद विकास और तकनीकी विशेषज्ञता में निवेश की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।
भारत में दूरसंचार तकनीक का निर्यात बढ़ाने के लिए नवाचार, गुणवत्ता, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उत्पाद विकसित करना महत्वपूर्ण है। पुरस्कारों के माध्यम से निर्यात में योगदान देने वाली कंपनियों को पहचान देना इस क्षेत्र की उपलब्धियों को सामने लाता है।
आईएमसी 2026 की प्रदर्शनी में कंपनियों ने अपनी तकनीकों, उत्पादों और समाधानों को प्रदर्शित किया। इस दौरान प्रदर्शनी की गुणवत्ता, दर्शकों के साथ संवाद और तकनीकी प्रस्तुतियों में नवीनता को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए गए।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनी डिजाइन का पुरस्कार मिला। क्वालकॉम को सर्वश्रेष्ठ इंटरैक्टिव प्रदर्शक, सिएना को सर्वाधिक नवाचारी तकनीकी प्रदर्शन और नेटप्रॉम्प्ट एआई को सर्वाधिक नवाचारी स्टार्टअप प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया।
प्रदर्शनी किसी भी तकनीकी सम्मेलन का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है, क्योंकि इसके माध्यम से कंपनियों को अपने समाधानों को सीधे उद्योग जगत, संभावित ग्राहकों, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है। संवाद आधारित प्रदर्शन से प्रतिभागियों को तकनीकों की उपयोगिता और उनके संभावित अनुप्रयोगों को समझने में मदद मिलती है।
स्टार्टअप के लिए ऐसे मंच विशेष रूप से उपयोगी हो सकते हैं, क्योंकि यहां उन्हें अपने विचारों और उत्पादों को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाने तथा उद्योग के अन्य प्रतिभागियों के साथ संपर्क स्थापित करने का अवसर मिलता है।
दूरसंचार विभाग, संचार मंत्रालय, भारत सरकार और सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) की ओर से आयोजित इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के दसवें संस्करण में बड़े स्तर पर अंतरराष्ट्रीय भागीदारी की संभावना जताई गई है।
आयोजन से संबंधित आंकड़ों के अनुसार, चार दिवसीय कार्यक्रम में 100 से अधिक देशों के 1.5 लाख से ज्यादा प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त 600 से अधिक भागीदारों एवं प्रदर्शकों, 500 से ज्यादा स्टार्टअप और 900 से अधिक विचारकों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। सम्मेलन में 2,000 से अधिक तकनीकी उपयोग मामलों और 120 से अधिक सत्रों को शामिल किया गया है।
इन आंकड़ों से आयोजन के व्यापक स्वरूप का अंदाजा लगाया जा सकता है। आईएमसी जैसे मंच पर दूरसंचार कंपनियों, तकनीकी उद्यमों, स्टार्टअप, नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं को एक साथ आने का अवसर मिलता है। इससे नई तकनीकों, उद्योग की जरूरतों और भविष्य की संचार प्रणालियों पर विचार-विमर्श के लिए साझा मंच तैयार होता है।
आईएमसी 2026 में वर्तमान दूरसंचार प्रणालियों के साथ-साथ भविष्य की तकनीकों और उनके संभावित उपयोगों पर भी चर्चा की जा रही है। सम्मेलन के प्रमुख विषयों में 5जी और 6जी, अगली पीढ़ी के एआई नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, गैर-स्थलीय नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, क्वांटम संचार, उद्यमों का तकनीकी रूपांतरण, सर्कुलर इकोनॉमी, पर्यावरण-सामाजिक-शासन (ईएसजी) और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण शामिल हैं।
इन क्षेत्रों का महत्व तेजी से बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित नेटवर्क संचार प्रणालियों को अधिक स्वचालित और कुशल बनाने की दिशा में उपयोगी हो सकते हैं। गैर-स्थलीय नेटवर्क दूरसंचार कनेक्टिविटी के नए विकल्पों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जबकि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण आधुनिक डिजिटल उपकरणों तथा संचार अवसंरचना के लिए महत्वपूर्ण हैं।
इसी तरह, क्वांटम संचार और साइबर सुरक्षा भविष्य की डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा से जुड़े अहम विषय हैं। सर्कुलर इकोनॉमी और ईएसजी के माध्यम से तकनीकी विकास के साथ संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग तथा पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
6जी पर केंद्रित चर्चा भविष्य की संचार तकनीकों के अनुसंधान और विकास की दिशा को समझने का अवसर देती है। हालांकि, नई पीढ़ी की तकनीकों का व्यापक उपयोग उनके विकास, मानकीकरण, परीक्षण और व्यावसायिक उपलब्धता पर निर्भर करेगा।
आईएमसी अवॉर्ड्स 2026 ने भारतीय दूरसंचार उद्योग में नवाचार, स्वदेशी तकनीकी विकास, औद्योगिक उपयोग और निर्यात को प्रोत्साहित करने वाले प्रयासों को एक साझा मंच पर पहचान दी। पुरस्कारों में स्टार्टअप से लेकर स्थापित कंपनियों और घरेलू एमएसएमई तक की भागीदारी यह दर्शाती है कि भारत का दूरसंचार इकोसिस्टम अनेक स्तरों पर विकसित हो रहा है।
5जी इनोवेशन हैकाथॉन के माध्यम से युवाओं और शोधकर्ताओं को वास्तविक समस्याओं के समाधान तैयार करने का अवसर मिला, जबकि विभिन्न औद्योगिक श्रेणियों में दिए गए पुरस्कारों ने सॉफ्टवेयर, क्लाउड, साइबर सुरक्षा, स्वदेशी तकनीक और निर्यात में योगदान को रेखांकित किया।
भारत के वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य के संदर्भ में डिजिटल कनेक्टिविटी, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में इंडिया मोबाइल कांग्रेस जैसे आयोजन उद्योग, सरकार, शोध संस्थानों और स्टार्टअप के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा भारतीय तकनीकी क्षमताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने में उपयोगी मंच साबित हो सकते हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


