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- 12h ago
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला मैदान में आयोजित लवकुश रामलीला में भगवान श्रीराम की कथा के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया। रामलीला के दौरान सांसद एवं अभिनेता मनोज तिवारी ने केवट की भूमिका निभाकर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। उनके अभिनय और गायकी ने मंच पर ऐसा भक्तिमय वातावरण बनाया कि दर्शक रामकथा के प्रसंगों में डूबे नजर आए। इस दौरान रामलीला देखने पहुंचे भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी मनोज तिवारी की प्रस्तुति देखकर मुस्कुराते नजर आए। मंच पर कलाकारों की प्रस्तुति, गीत-संगीत और रामायण के भावनात्मक प्रसंगों ने पूरे वातावरण को धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह से भर दिया।
लाल किला मैदान में आयोजित लवकुश रामलीला दिल्ली की प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं में गिनी जाती है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु और दर्शक यहां भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित विभिन्न लीलाओं का मंचन देखने पहुंचते हैं। रामलीला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, लोककला, संगीत, नाट्य परंपरा और सामाजिक मूल्यों को जीवंत बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। इस बार भी मंच पर प्रस्तुत विभिन्न प्रसंगों ने दर्शकों को रामायण की कथा से जोड़ने का काम किया।
रामलीला के प्रमुख आकर्षणों में केवट प्रसंग विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। सांसद एवं भोजपुरी अभिनेता-गायक मनोज तिवारी ने केवट की भूमिका निभाते हुए अपने अभिनय और गायकी का परिचय दिया। केवट और भगवान श्रीराम के बीच संवाद रामायण की कथा का ऐसा प्रसंग है, जिसमें भक्ति, विनम्रता, श्रद्धा, सेवा और समर्पण की भावना प्रमुखता से सामने आती है। मंच पर इस प्रसंग का भावपूर्ण चित्रण किया गया।
केवट का चरित्र भारतीय जनमानस में निष्काम सेवा और सच्ची भक्ति के प्रतीक के रूप में जाना जाता है। रामायण की कथा के अनुसार, वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार करनी होती है। इस अवसर पर केवट उन्हें नदी पार कराने में सहायता करता है। यह प्रसंग सामाजिक समानता, मानवीय संवेदना और भगवान के प्रति अनन्य प्रेम की भावना को भी अभिव्यक्त करता है।
मनोज तिवारी ने केवट के चरित्र को मंच पर प्रस्तुत करते हुए संवादों और गीत-संगीत के माध्यम से प्रसंग की भावनात्मक गहराई को सामने रखा। उनकी प्रस्तुति में केवट की सहजता, श्रद्धा और प्रभु श्रीराम के प्रति समर्पण को दर्शाने का प्रयास किया गया। दर्शकों के लिए यह प्रसंग विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहा। रामलीला में अभिनय के साथ गायन का समावेश होने से मंचन अधिक प्रभावशाली और जीवंत नजर आया।
लवकुश रामलीला में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही। रामलीला के दौरान जब मनोज तिवारी केवट की भूमिका में मंच पर अपनी प्रस्तुति दे रहे थे, तब नितिन नवीन उन्हें देखकर मुस्कुराते नजर आए। यह दृश्य आयोजन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।
रामलीला में राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियों की उपस्थिति से कार्यक्रम का महत्व और बढ़ गया। हालांकि आयोजन का मूल उद्देश्य भगवान श्रीराम की कथा का मंचन करना और उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना है, लेकिन ऐसे अवसर विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी प्रदान करते हैं।
नितिन नवीन ने रामलीला के महत्व पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रामलीलाएं भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को संरक्षित रखने के साथ-साथ नई पीढ़ी को उनसे जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनके अनुसार, भगवान श्रीराम का जीवन आदर्श शासन, मर्यादा, त्याग और कर्तव्यपालन का संदेश देता है। इन आदर्शों को अपनाकर समाज में नैतिक मूल्यों, आपसी सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे प्रभु श्रीराम के आदर्शों को केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने दैनिक जीवन और व्यवहार में भी अपनाएं। रामायण के संदेशों को जीवन में उतारना ही इन सांस्कृतिक आयोजनों की सार्थकता है।
रामलीला के दौरान केवट प्रसंग के अतिरिक्त रामायण के कई महत्वपूर्ण और भावनात्मक दृश्यों का मंचन किया गया। इनमें राजा दशरथ के देहांत, भरत और कैकेयी के बीच संवाद तथा चित्रकूट में भरत मिलाप जैसे प्रसंग शामिल रहे। इन दृश्यों के माध्यम से पारिवारिक संबंधों, त्याग, कर्तव्य, भ्रातृप्रेम और धर्म के प्रति समर्पण की भावना को प्रस्तुत किया गया।
राजा दशरथ के देहांत का प्रसंग रामायण की कथा के सबसे मार्मिक अध्यायों में से एक है। भगवान श्रीराम के वनवास के वियोग में राजा दशरथ का दुख और अंततः उनका निधन कथा को गहरी भावनात्मक दिशा प्रदान करता है। इस प्रसंग में एक पिता के स्नेह, वचनबद्धता और पुत्र-वियोग की पीड़ा का चित्रण किया जाता है।
इसके बाद भरत और कैकेयी के संवाद का प्रसंग सामने आता है। भरत का चरित्र रामायण में त्याग, धर्मनिष्ठा और भ्रातृप्रेम का उदाहरण माना जाता है। वे राजसिंहासन को अपना अधिकार मानकर स्वीकार नहीं करते, बल्कि भगवान श्रीराम के प्रति अपनी निष्ठा और सम्मान को सर्वोपरि रखते हैं। भरत का यह चरित्र दर्शाता है कि सत्ता और व्यक्तिगत लाभ से ऊपर परिवार, कर्तव्य और धर्म के मूल्य होते हैं।
चित्रकूट में भरत मिलाप रामायण का अत्यंत भावुक प्रसंग है। इस दृश्य में भरत अपने बड़े भाई भगवान श्रीराम से मिलकर उन्हें अयोध्या लौटने के लिए मनाने का प्रयास करते हैं। वहीं भगवान श्रीराम अपने पिता के वचन और धर्म के पालन को सर्वोपरि रखते हुए वनवास पूरा करने के अपने संकल्प पर अडिग रहते हैं। यह प्रसंग दोनों भाइयों के प्रेम, सम्मान और त्याग की भावना को दर्शाता है।
रामलीला में इन प्रसंगों का मंचन दर्शकों को रामायण के उन मूल संदेशों से जोड़ता है, जो आज भी परिवार, समाज और सार्वजनिक जीवन में प्रासंगिक हैं। रामायण के पात्रों के माध्यम से सत्य, वचनपालन, त्याग, कर्तव्य और पारिवारिक एकता की महत्ता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि रामलीलाएं भारतीय संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की जीवंत अभिव्यक्ति हैं। इनके माध्यम से भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों को समाज के विभिन्न वर्गों तक पहुंचाया जाता है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के लिए रामलीला भारतीय इतिहास, धार्मिक कथाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करती है।
उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेने पर जोर देते हुए कहा कि मर्यादा, त्याग, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श शासन जैसे मूल्य समाज को सही दिशा देने में सहायक हैं। आज के समय में भी इन मूल्यों की प्रासंगिकता बनी हुई है। सामाजिक सद्भाव, आपसी सम्मान और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत बनाने के लिए रामायण के आदर्शों को आत्मसात करना आवश्यक है।
रामलीला जैसे आयोजन लोगों को सामूहिक रूप से अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हैं। मंच पर प्रस्तुत कथा, कलाकारों का अभिनय, संवाद, संगीत और पारंपरिक वेशभूषा मिलकर भारतीय नाट्य परंपरा का एक विशिष्ट रूप सामने लाते हैं। इस प्रकार रामलीला धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक संरक्षण का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनती है।
लाल किला मैदान में आयोजित इस रामलीला में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, सांसद प्रवीण खंडेलवाल, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, सांसद एवं अभिनेता मनोज तिवारी तथा सांसद योगेंद्र चंदोलिया सहित अन्य अतिथियों ने भी लीला का अवलोकन किया।
इन अतिथियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष पहचान दी। रामलीला में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भारतीय सांस्कृतिक आयोजनों के व्यापक सामाजिक महत्व को रेखांकित करती है। ऐसे आयोजन धार्मिक आस्था रखने वाले लोगों के साथ-साथ कला, साहित्य, संगीत और रंगमंच में रुचि रखने वाले दर्शकों को भी आकर्षित करते हैं।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अतिथियों ने रामलीला के विभिन्न प्रसंगों का आनंद लिया। भगवान श्रीराम की कथा को मंच पर जीवंत करने वाले कलाकारों की भूमिका आयोजन का मुख्य आकर्षण रही। रामलीला की पारंपरिक शैली में संवादों, संगीत और अभिनय का संयोजन दर्शकों को कथा के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ता है।
लव कुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि केवट प्रसंग में मनोज तिवारी ने अपनी गायकी और अभिनय के माध्यम से दर्शकों को भावविभोर किया। उन्होंने कहा कि इस प्रसंग में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा पार कराने के दृश्य का मंचन किया गया। गीत-संगीत और संवादों के माध्यम से रामलीला का वातावरण भक्तिमय हो गया।
केवट प्रसंग रामायण की उन कथाओं में शामिल है, जिनमें भक्ति और सेवा की भावना को सरल लेकिन प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। केवट का चरित्र यह संदेश देता है कि सच्ची श्रद्धा का आधार दिखावा नहीं, बल्कि प्रेम, समर्पण और निस्वार्थ सेवा है। यही कारण है कि रामलीला में इस प्रसंग को दर्शकों के बीच विशेष लोकप्रियता मिलती है।
मनोज तिवारी की लोकप्रियता एक अभिनेता और गायक के रूप में रही है। ऐसे में केवट की भूमिका में उनकी प्रस्तुति ने अभिनय और संगीत के मेल को मंच पर विशेष रूप दिया। रामलीला के माध्यम से दर्शकों को एक बार फिर यह संदेश मिला कि भगवान श्रीराम की कथा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और सामाजिक समरसता की प्रेरणा भी है।
लव कुश रामलीला कमेटी के महामंत्री सुभाष गोयल ने बताया कि कार्यक्रम के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित उपस्थित अतिथियों और सांसदों को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। आयोजन समिति की ओर से अतिथियों का स्वागत किया गया और रामलीला में उनकी उपस्थिति के लिए आभार व्यक्त किया गया।
रामलीला समितियां हर वर्ष इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास करती हैं। मंचन की तैयारियों से लेकर कलाकारों के चयन, संवादों के अभ्यास, संगीत संयोजन, मंच सज्जा और व्यवस्थाओं तक अनेक लोगों का योगदान रहता है। सामूहिक प्रयासों से ही रामलीला जैसा विशाल आयोजन सफल हो पाता है।
लाल किला मैदान में होने वाली लवकुश रामलीला दिल्ली की सांस्कृतिक पहचान से भी जुड़ी हुई है। यहां आयोजित कार्यक्रम में रामायण के प्रसंगों को आधुनिक मंचीय तकनीक और पारंपरिक अभिनय शैली के मेल से दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है। इससे नई पीढ़ी को भी भारतीय धार्मिक कथाओं और सांस्कृतिक विरासत के प्रति आकर्षित करने में मदद मिलती है।
रामलीला भारतीय समाज की ऐसी सांस्कृतिक परंपरा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी रामायण की कथा को जीवंत बनाए हुए है। इसमें भगवान श्रीराम के जीवन के विभिन्न चरणों के माध्यम से सत्य, न्याय, मर्यादा, त्याग, सेवा, प्रेम और कर्तव्यपालन जैसे मूल्यों को प्रस्तुत किया जाता है। मंच पर जब इन प्रसंगों का अभिनय होता है, तो दर्शक केवल कथा नहीं देखते, बल्कि उसके संदेशों से भी जुड़ते हैं।
विशेष रूप से केवट प्रसंग समाज में समानता और मानवीय संबंधों की महत्ता को सामने लाता है। यह प्रसंग बताता है कि श्रद्धा और समर्पण किसी सामाजिक हैसियत के मोहताज नहीं होते। भगवान श्रीराम और केवट के बीच संवाद भक्ति के साथ-साथ आत्मीयता और मानवीय संवेदना का संदेश भी देता है।
इसी प्रकार भरत मिलाप का प्रसंग पारिवारिक प्रेम और त्याग का उदाहरण प्रस्तुत करता है। राजा दशरथ का प्रसंग वचनपालन और पिता-पुत्र के संबंधों की भावनात्मक गहराई को दर्शाता है। रामलीला के इन दृश्यों के माध्यम से दर्शकों को जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने का अवसर मिलता है।
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में भी रामायण के ये संदेश प्रासंगिक हैं। परिवार में आपसी सम्मान, समाज में सद्भाव, सार्वजनिक जीवन में कर्तव्यनिष्ठा और व्यक्तिगत व्यवहार में मर्यादा जैसे मूल्य किसी भी समाज की मजबूती के आधार हैं। रामलीला इन मूल्यों को सरल और प्रभावशाली तरीके से जनमानस तक पहुंचाती है।
दिल्ली में आयोजित लवकुश रामलीला लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रही है। नवरात्र और विजयादशमी के अवसर पर आयोजित होने वाले रामलीला कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग भगवान श्रीराम की कथा देखने पहुंचते हैं। यह आयोजन श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था से जोड़ने के साथ-साथ दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता को भी प्रदर्शित करता है।
रामलीला के दौरान मंच सज्जा, पारंपरिक वेशभूषा, संगीत, संवाद और अभिनय के माध्यम से रामायण के विभिन्न पात्रों को जीवंत किया जाता है। कलाकारों का परिश्रम और आयोजन समिति की तैयारियां दर्शकों को कथा का व्यापक अनुभव प्रदान करती हैं। अलग-अलग आयु वर्ग के लोग इस आयोजन में शामिल होकर भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा से परिचित होते हैं।
विजयादशमी के अवसर पर भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का मंचन बुराई पर अच्छाई, असत्य पर सत्य और अधर्म पर धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। रामलीला का यही संदेश इसे केवल एक मंचीय कार्यक्रम से आगे बढ़ाकर सामाजिक और नैतिक प्रेरणा का माध्यम बनाता है।
लाल किला मैदान में आयोजित रामलीला में केवट प्रसंग से लेकर भरत मिलाप तक के भावनात्मक दृश्यों ने रामायण की कथा के विभिन्न रंगों को सामने रखा। मनोज तिवारी की केवट के रूप में प्रस्तुति, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी और अन्य जनप्रतिनिधियों की सहभागिता कार्यक्रम के उल्लेखनीय पहलू रहे।
कुल मिलाकर, लवकुश रामलीला का यह आयोजन भक्ति, कला और संस्कृति के संगम के रूप में सामने आया। भगवान श्रीराम के आदर्शों को मंच के माध्यम से जन-जन तक पहुंचाने की परंपरा ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि रामायण की कथा आज भी लोगों को सत्य, मर्यादा, सेवा, त्याग और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


