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- 10h ago
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य कवरेज की मासिक वेतन सीमा बढ़ाने को मंजूरी दे दी है। अब ईपीएफओ की वेज सीलिंग 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह की जाएगी। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कैबिनेट के इस महत्वपूर्ण फैसले की जानकारी दी।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। सरकार का कहना है कि वेतन सीमा बढ़ने से बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल हो सकेंगे, जो मौजूदा सीमा के कारण अनिवार्य ईपीएफ कवरेज से बाहर रह जाते थे।
सरकार के मुताबिक इस फैसले से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ के दायरे में आ सकते हैं। इसके साथ ही उनके लिए भविष्य निधि, पेंशन और कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्थाओं का विस्तार होगा।
ईपीएफओ की वेज सीलिंग यानी वेतन सीमा लंबे समय से 15,000 रुपये प्रति माह निर्धारित थी। अब इसमें 10,000 रुपये की बढ़ोतरी की गई है।
इस बदलाव का सबसे बड़ा असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनका शुरुआती मासिक वेतन 15,000 रुपये से अधिक लेकिन 25,000 रुपये तक है। ऐसे कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग अब अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा कवरेज के दायरे में आ सकता है।
सरकार का उद्देश्य इस बदलाव के जरिए औपचारिक रोजगार में आने वाले अधिक से अधिक कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ना है।
ईपीएफओ की वेज सीलिंग वह निर्धारित वेतन सीमा है, जिसके आधार पर कर्मचारी भविष्य निधि कानून के तहत अनिवार्य कवरेज का दायरा तय होता है।
इसका संबंध कर्मचारी के वेतन से होने वाले पीएफ योगदान और उससे जुड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से है। सीमा कम होने की स्थिति में एक निश्चित स्तर से अधिक वेतन पर नौकरी शुरू करने वाले कुछ कर्मचारी अनिवार्य कवरेज से बाहर रह सकते थे।
अब सीमा बढ़ाए जाने से सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी।
सरकार के अनुसार नए निर्णय से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी ईपीएफओ की सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ेंगे।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश में बड़ी संख्या में कर्मचारी ऐसे हैं जो संगठित क्षेत्र में काम करने के बावजूद मौजूदा वेतन सीमा के कारण अनिवार्य ईपीएफ व्यवस्था में शामिल नहीं हो पाते थे।
नई सीमा लागू होने के बाद 15,000 से 25,000 रुपये के बीच वेतन पाने वाले पात्र कर्मचारियों का एक बड़ा हिस्सा इस व्यवस्था में आ सकता है।
ईपीएफओ केवल भविष्य निधि तक सीमित व्यवस्था नहीं है। इसके तहत कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा से जुड़े कई लाभ मिलते हैं।
कर्मचारी के वेतन से होने वाला पीएफ योगदान भविष्य के लिए बचत तैयार करता है। वहीं नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) में भी जाता है। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों को कर्मचारी जमा लिंक्ड बीमा योजना (EDLI) के तहत बीमा सुरक्षा भी मिल सकती है।
इस तरह वेज सीलिंग बढ़ाने का प्रभाव केवल पीएफ खाते में जमा होने वाली रकम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सामाजिक सुरक्षा के व्यापक ढांचे पर पड़ेगा।
ईपीएफ का सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्य कर्मचारी के कार्यकाल के दौरान नियमित बचत तैयार करना है। कर्मचारी और नियोक्ता की ओर से किए गए निर्धारित योगदान से कर्मचारी के नाम पर भविष्य निधि तैयार होती है।
समय के साथ इस राशि पर ब्याज भी जुड़ता है। नौकरी बदलने के बावजूद पीएफ खाता और जमा राशि नियमों के अनुसार आगे जारी रह सकती है।
वेज सीलिंग बढ़ने से अधिक कर्मचारियों को इस औपचारिक बचत व्यवस्था का हिस्सा बनने का अवसर मिलेगा।
इस फैसले का प्रमुख प्रभाव ऐसे कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनका मासिक वेतन 15,000 से अधिक और 25,000 रुपये तक है और जो मौजूदा नियमों के तहत अनिवार्य ईपीएफ कवरेज से बाहर रह सकते थे।
उदाहरण के लिए यदि कोई पात्र कर्मचारी 18,000 रुपये मासिक वेतन पर नौकरी शुरू करता है, तो नई सीमा के तहत वह ईपीएफओ के अनिवार्य कवरेज के दायरे में आ सकता है। इसी तरह 22,000 या 24,000 रुपये मासिक वेतन पाने वाले पात्र नए कर्मचारियों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
हालांकि किसी व्यक्ति पर नियम किस तरह लागू होंगे, यह उसकी नौकरी की प्रकृति, प्रतिष्ठान की पात्रता और लागू ईपीएफ नियमों पर निर्भर करेगा।
वेज सीलिंग बढ़ने का अर्थ यह नहीं है कि हर मौजूदा कर्मचारी का पीएफ योगदान अपने आप बढ़ जाएगा। किसी कर्मचारी पर नया नियम किस तरह लागू होगा, यह उसकी मौजूदा ईपीएफ सदस्यता और रोजगार की स्थिति सहित संबंधित नियमों पर निर्भर करेगा।
इसलिए कर्मचारियों को यह समझना जरूरी है कि वेज सीलिंग बढ़ना और पीएफ योगदान की सीमा बढ़ना एक ही बात नहीं है।
वेज सीलिंग मुख्य रूप से अनिवार्य कवरेज के दायरे से जुड़ी है। पीएफ में वास्तविक योगदान का निर्धारण लागू नियमों और कर्मचारी-नियोक्ता की स्थिति के आधार पर होगा।
केंद्र सरकार लंबे समय से औपचारिक रोजगार और सामाजिक सुरक्षा कवरेज के विस्तार पर जोर देती रही है। वेज सीलिंग बढ़ाने का फैसला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इससे उन कर्मचारियों को भविष्य निधि जैसी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था से जोड़ने का रास्ता खुलेगा, जो नियमित वेतन पाने के बावजूद मौजूदा सीमा के कारण इसके अनिवार्य दायरे में नहीं आते थे।
आज बड़ी संख्या में कर्मचारी अपने करियर के दौरान कई कंपनियों में काम करते हैं। ऐसी स्थिति में ईपीएफ खाता कर्मचारियों के लिए दीर्घकालिक बचत का महत्वपूर्ण माध्यम बनता है।
नियमों के अनुसार पात्र मामलों में कर्मचारी नौकरी बदलने के बाद अपने पीएफ खाते को आगे जारी रख सकता है। इससे लगातार रोजगार के दौरान बचत का सिलसिला बना रहता है।
वेज सीलिंग बढ़ने से नए कर्मचारियों का एक बड़ा वर्ग शुरुआत से ही इस औपचारिक सामाजिक सुरक्षा तंत्र से जुड़ सकता है।
इस बदलाव का प्रभाव केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। पात्र कर्मचारियों को ईपीएफओ के दायरे में लाने पर संबंधित नियोक्ताओं को भी लागू नियमों के अनुसार अपना योगदान और अनुपालन सुनिश्चित करना होगा।
इससे कंपनियों के लिए पेरोल व्यवस्था, ईपीएफ योगदान और संबंधित रिकॉर्ड में बदलाव की आवश्यकता पड़ सकती है।
विशेषकर छोटे और मध्यम प्रतिष्ठानों के लिए नए पात्र कर्मचारियों की पहचान करना और ईपीएफ संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करना महत्वपूर्ण होगा।
ईपीएफओ का विस्तार देश में औपचारिक रोजगार व्यवस्था को मजबूत करने से भी जुड़ा हुआ है। जब कर्मचारी किसी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली से जुड़ता है तो उसके रोजगार से संबंधित योगदान और लाभों का रिकॉर्ड तैयार होता है।
वेज सीलिंग बढ़ाकर सरकार ने सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था में शामिल होने वाले कर्मचारियों का दायरा बढ़ाने का प्रयास किया है।
वर्तमान समय में महंगाई, स्वास्थ्य खर्च, बच्चों की शिक्षा और सेवानिवृत्ति के बाद की आर्थिक जरूरतों को देखते हुए नियमित बचत और सामाजिक सुरक्षा का महत्व बढ़ गया है।
ईपीएफ जैसी व्यवस्था कर्मचारियों को नौकरी के दौरान छोटी-छोटी नियमित बचत के जरिए भविष्य के लिए आर्थिक आधार तैयार करने में मदद करती है। पेंशन और बीमा से जुड़े लाभ इसके सामाजिक सुरक्षा पक्ष को और व्यापक बनाते हैं।
ऐसे में वेज सीलिंग को 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपये करना उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव है, जो अब तक इस व्यवस्था से बाहर रह सकते थे।
पुरानी वेज सीलिंग: ₹15,000 प्रति माह
नई वेज सीलिंग: ₹25,000 प्रति माह
बढ़ोतरी: ₹10,000 प्रति माह
संभावित अतिरिक्त कवरेज: 51 लाख से अधिक कर्मचारी
लाभ का क्षेत्र: कर्मचारी भविष्य निधि, पेंशन और संबंधित सामाजिक सुरक्षा
लक्षित वर्ग: संगठित क्षेत्र में वेतन सीमा के कारण अनिवार्य कवरेज से बाहर रहने वाले पात्र कर्मचारी
फैसला: केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी
नई व्यवस्था का सबसे बड़ा संदेश यह है कि 15,000 से 25,000 रुपये के वेतन वर्ग में आने वाले पात्र कर्मचारियों के लिए सामाजिक सुरक्षा का दायरा व्यापक होगा।
हालांकि कर्मचारियों को अपने वेतन स्लिप, नियुक्ति की स्थिति और ईपीएफ खाते में योगदान की वास्तविक स्थिति की जांच करनी चाहिए। केवल वेतन 25,000 रुपये से कम होने से हर व्यक्ति स्वत: ईपीएफओ का सदस्य बन जाएगा, ऐसा मानना उचित नहीं है; प्रतिष्ठान और कर्मचारी की पात्रता से जुड़े नियम भी लागू होंगे।
केंद्र सरकार के इस फैसले को देश में सामाजिक सुरक्षा कवरेज बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। संगठित क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या बढ़ने के साथ यह जरूरी है कि अधिक से अधिक कर्मचारी भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी व्यवस्थाओं से जुड़े रहें।
वेज सीलिंग में बढ़ोतरी से ईपीएफओ का दायरा बढ़ेगा और लाखों नए कर्मचारियों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा नेटवर्क से जोड़ने का अवसर मिलेगा। आने वाले समय में इस फैसले का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि नए पात्र कर्मचारियों का पंजीकरण कितनी तेजी से होता है और नियोक्ता नई व्यवस्था का अनुपालन किस तरह करते हैं।
कुल मिलाकर, 15,000 रुपये से 25,000 रुपये तक वेज सीलिंग बढ़ाने का फैसला ईपीएफओ के दायरे के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम है। इससे 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा कवच से जोड़ने का रास्ता खुलने की उम्मीद है और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


