यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
मथुरा। जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा कार्यालय की कार्यप्रणाली और विभिन्न प्रकरणों के निस्तारण में कथित देरी को लेकर एडेड माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों और प्रधानाचार्यों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। रविवार को सेठ बीएन पोद्दार इंटर कॉलेज, मथुरा में आयोजित सर्वदलीय बैठक में वक्ताओं ने जिला विद्यालय निरीक्षक मथुरा राघवेंद्र सिंह की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। बैठक में कार्यालय में कथित भ्रष्टाचार, प्रकरणों के लंबित रहने, शिकायतों के निस्तारण में पारदर्शिता की कमी, फरियादियों के साथ कथित अभद्र व्यवहार तथा जातिवाद और धनाढ्य लोगों को संरक्षण दिए जाने जैसे आरोपों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की संयुक्त अध्यक्षता जाने-माने शिक्षाविद् अयोध्या प्रसाद अग्रवाल एवं विनोद कुमार उपाध्याय ने की। बैठक में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ तथा प्रधानाचार्य परिषद सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। पदाधिकारियों ने अपने-अपने संगठनों और विद्यालयों से जुड़ी समस्याओं को सामने रखते हुए कहा कि लंबे समय से कई महत्वपूर्ण सेवा संबंधी प्रकरणों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इससे शिक्षक एवं कर्मचारी स्वयं को परेशान और उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि एनपीएस, जीपीएफ, अवशेष भुगतान, पेंशन, प्रोन्नत वेतनमान, चयन वेतनमान सहित कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़े कई प्रकरणों के निस्तारण में अनावश्यक विलंब किया जा रहा है। वक्ताओं का आरोप था कि जिन मामलों में कार्यालय स्तर से कार्रवाई होनी चाहिए, उनमें भी कर्मचारियों और विद्यालयों के प्रतिनिधियों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि सेवा संबंधी मामलों का निस्तारण निर्धारित समयसीमा और नागरिक चार्टर के अनुसार किया जाना चाहिए, ताकि किसी शिक्षक या कर्मचारी को अपने वैध कार्य के लिए अनावश्यक रूप से परेशान न होना पड़े। बैठक में मांग उठी कि डीआईओएस कार्यालय में लंबित सभी प्रकरणों की पटलवार समीक्षा कराई जाए और प्रत्येक प्रकरण की स्थिति सार्वजनिक की जाए।
बैठक में ऑनलाइन शिकायतों के निस्तारण को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए। वक्ताओं ने दावा किया कि कुछ शिकायतों का वास्तविक समाधान किए बिना पोर्टल पर उनका निस्तारण दर्शाया जा रहा है। शिकायतकर्ताओं को कथित रूप से दबाव में लेने और धमकाने के आरोप भी बैठक में लगाए गए।
वक्ताओं ने कहा कि किसी भी शिकायत का निस्तारण शिकायतकर्ता को संतुष्ट करने और नियमानुसार कार्रवाई करने के बाद ही होना चाहिए। यदि किसी शिकायत में विभागीय स्तर पर कोई कमी पाई जाती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि ऑनलाइन शिकायतों के निस्तारण की भी उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
बैठक में कुछ वक्ताओं ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कथित रूप से अवैध धन की मांग किए जाने के आरोप भी लगाए। वक्ताओं ने दावा किया कि कुछ प्रकरणों में काम कराने के लिए धन की मांग की जाती है। बैठक में जिला विद्यालय निरीक्षक राघवेंद्र सिंह पर स्वयं कुछ लोगों से कथित तौर पर यह कहने का आरोप लगाया गया कि उन्होंने शासन में मोटा धन देकर मथुरा स्थानांतरण कराया है और अब अपना पैसा वसूलना है।
हालांकि, बैठक में लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। पदाधिकारियों ने कहा कि यदि इस प्रकार की शिकायतें सामने आती हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच किसी सक्षम उच्चाधिकारी से कराई जानी चाहिए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
बैठक में वक्ताओं ने जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि कार्यालय में आम फरियादियों और प्रभावशाली लोगों के साथ कथित रूप से अलग-अलग व्यवहार किया जाता है। कुछ वक्ताओं ने कार्यालय में जातिगत आधार पर भेदभाव किए जाने तथा धनाढ्य लोगों को संरक्षण दिए जाने का आरोप भी लगाया।
वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा विभाग का कार्यालय सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यालय प्रबंधनों के लिए समान रूप से खुला होना चाहिए। किसी व्यक्ति की जाति, आर्थिक स्थिति अथवा राजनीतिक एवं सामाजिक प्रभाव के आधार पर उसके साथ अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए।
बैठक में जिलाधिकारी से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय का औचक निरीक्षण कराने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रत्येक पटल पर लंबित प्रकरणों की संख्या, उनके लंबित रहने की अवधि और उनके निस्तारण की स्थिति की जांच की जाए तो कार्यालय की वास्तविक कार्यप्रणाली सामने आ सकती है।
वक्ताओं ने जिलाधिकारी से मांग की कि कार्यालय के सभी पटलों का रिकॉर्ड देखा जाए और यह पता लगाया जाए कि किस पटल पर कितनी फाइलें लंबित हैं। साथ ही यह भी जांच की जाए कि निर्धारित समयसीमा में किन प्रकरणों का निस्तारण नहीं किया गया और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।
बैठक के दौरान राघवेंद्र सिंह के पूर्व कार्यकाल से संबंधित बागपत के प्रकरणों की चर्चा भी की गई। वक्ताओं ने उनके कार्यकाल से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामलों की जांच की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि यदि पूर्व में उनके विरुद्ध किसी प्रकार की शिकायतें अथवा आरोप सामने आए हैं तो उनकी भी निष्पक्ष जांच कराकर तथ्य सामने लाए जाने चाहिए।
वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि किसी अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की जांच दस्तावेजों और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर होनी चाहिए, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
बैठक में विभिन्न संगठनों की ओर से अपनी-अपनी समस्याएं रखने के बाद सर्वसम्मति से संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया गया। समिति का संयोजक डॉ. अजय कृष्ण सारस्वत को बनाया गया। वहीं श्रीमती रुमा देवी, राजेश कुमार सिंह, डॉ. मनवीर सिंह, दिनेश राणा और संजय पचौरी को सहसंयोजक की जिम्मेदारी दी गई।
निर्णय लिया गया कि संघर्ष समिति के साथ प्रत्येक संबंधित संगठन के जिलाध्यक्ष और जिला मंत्री भी सदस्य के रूप में जुड़े रहेंगे। समिति संयुक्त रूप से शिक्षकों एवं कर्मचारियों की समस्याओं को अधिकारियों के सामने रखेगी तथा उनके समाधान के लिए आगे की रणनीति तय करेगी।
बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक को संयुक्त प्रत्यावेदन दिया जाएगा। इसमें लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण, शिकायतों की निष्पक्ष जांच, पोर्टल पर शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा, कार्यालय में पारदर्शिता तथा नागरिक चार्टर के प्रभावी अनुपालन सहित अन्य मांगें शामिल रहेंगी।
वक्ताओं ने कहा कि यदि प्रत्यावेदन के बाद भी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संगठन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेंगे। इसके तहत धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन देने के साथ उच्चाधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया जाएगा।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं की लगातार अनदेखी होने पर आक्रोश बढ़ सकता है। उन्होंने जिलाधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति की समीक्षा कराने की मांग की। वक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो संघर्ष समिति आंदोलन को व्यापक रूप देने पर विचार करेगी।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों और शिक्षकों को अपने सेवा संबंधी अधिकारों के लिए बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने की स्थिति नहीं होनी चाहिए। प्रत्येक प्रकरण का नियमों के अनुसार निर्धारित समय में निस्तारण होना चाहिए।
बैठक में संरक्षक अयोध्या प्रसाद अग्रवाल, प्रांतीय कोषाध्यक्ष सुरेंद्र शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय और पूर्व अध्यक्ष केपी सिंह ने जिला विद्यालय निरीक्षक की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी बात रखी। पदाधिकारियों ने कहा कि संगठन शिक्षकों और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान के लिए लोकतांत्रिक एवं वैधानिक तरीके से संघर्ष करेगा।
बैठक का संचालन वीरेंद्र कुमार उपाध्याय ने किया।
इस अवसर पर अनिल सिंह छौंकर, मनोज छौंकर, जोगेंद्र सिंह, चंद्रभान यादव, सुरेश चंद्र तोमर, शिव कुमार सिंह, डॉ. शिवाजी सिंह, दिवाकर चौबे, प्रमोद गौतम, प्रमोद चतुर्वेदी, रोहताश सोलंकी, सूरज पाल सिंह, प्रदीप शर्मा सहित विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, संघर्ष समिति के पदाधिकारी एवं अन्य शिक्षक प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक के अंत में पदाधिकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि शिक्षा विभाग के कार्यालय में पारदर्शी व्यवस्था, समयबद्ध कार्यप्रणाली और शिक्षकों एवं कर्मचारियों की समस्याओं का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित कराना है। उन्होंने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच कराने और दोष पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।


