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- 10h ago
नई दिल्ली: दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक निर्माणाधीन/जर्जर इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसा इतना भीषण था कि देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस तथा राहत एजेंसियों को सूचना दी। हादसे में एक व्यक्ति की मौत की सूचना है, जबकि कई अन्य लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका जताई जा रही है।
घटना की गंभीरता को देखते हुए राहत और बचाव अभियान युद्धस्तर पर शुरू किया गया है। दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने तथा उसमें फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश में जुटी हैं। रेस्क्यू टीमों द्वारा अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे को सावधानीपूर्वक हटाया जा रहा है, ताकि अंदर फंसे किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे।
सत्य निकेतन हादसे की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपना गोवा दौरा बीच में ही रद्द कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने दिल्ली के हालात पर अधिकारियों से जानकारी ली और राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी शुरू कर दी।
अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना से उन्हें गहरा दुख हुआ है। उन्होंने बताया कि उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और एनडीआरएफ के महानिदेशक से बातचीत कर घटनास्थल के जमीनी हालात की जानकारी ली है।
गृह मंत्री ने कहा कि स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें मिलकर तेजी से राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। घायलों को हर संभव चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना भी की।
हादसे के बाद सबसे बड़ी चुनौती मलबे के अंदर फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। रेस्क्यू टीमों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी और लोग दबे हो सकते हैं। इसी वजह से बचावकर्मी बेहद सावधानी के साथ मलबे को हटाने का काम कर रहे हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान राहतकर्मी संभावित रूप से दबे लोगों की आवाज और गतिविधियों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। भारी मलबे को हटाने के लिए मशीनों और अन्य उपकरणों की मदद ली जा रही है। घटनास्थल पर एंबुलेंस को भी तैनात रखा गया है, ताकि किसी व्यक्ति के बाहर निकलते ही उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया जा सके।
हादसे के बाद दिल्ली सरकार के कई मंत्री सक्रिय हो गए हैं। दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि फिलहाल सरकार की प्राथमिकता लोगों की जान बचाना है। उन्होंने कहा कि प्रभावित लोगों को हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी और बचाव अभियान में किसी तरह की लापरवाही नहीं होने दी जाएगी।
मंत्री आशीष सूद ने भी घटना पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने बताया कि दिल्ली फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंच चुकी हैं और बचाव अभियान में जुटी हैं। संबंधित अधिकारियों को लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
वहीं, मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने हादसे को हृदयविदारक बताया। उन्होंने कहा कि मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सभी संबंधित एजेंसियां पूरी ताकत से काम कर रही हैं।
इमारत गिरने के बाद घटनास्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। पुलिस ने लोगों को घटनास्थल से दूर रहने की अपील की है, ताकि राहत एवं बचाव अभियान में किसी प्रकार की बाधा न आए। आसपास की आवाजाही को नियंत्रित किया जा रहा है और रेस्क्यू टीमों के लिए रास्ता साफ रखा गया है।
अधिकारियों की ओर से लगातार घटनास्थल की स्थिति का जायजा लिया जा रहा है। यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि बचाव अभियान के दौरान मलबे का कोई अतिरिक्त हिस्सा न गिरे और राहतकर्मियों तथा आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा बनी रहे।
हादसे में घायल हुए लोगों को तत्काल नजदीकी अस्पतालों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। घटनास्थल के आसपास एंबुलेंस और मेडिकल टीमों को तैयार रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद हादसे में घायल और मृत लोगों की संख्या को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और घायलों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
इमारत आखिर किन परिस्थितियों में गिरी, इसकी जांच भी की जाएगी। शुरुआती तौर पर इमारत की स्थिति, निर्माण कार्य, सुरक्षा मानकों और हादसे से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा सकती है। प्रशासन की ओर से हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाने की संभावना है।
घटना के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन यह पता लगाने की कोशिश कर सकता है कि कहीं आसपास की किसी अन्य इमारत को भी नुकसान तो नहीं पहुंचा है।
सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर राजधानी में निर्माणाधीन और पुरानी इमारतों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। घनी आबादी वाले इलाकों में निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन कितना हो रहा है, इस पर भी सवाल खड़े होते हैं।
फिलहाल सभी का ध्यान राहत और बचाव अभियान पर है। एनडीआरएफ, दिल्ली फायर सर्विस, पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार मलबा हटाने में जुटी हैं। बचाव अभियान पूरा होने के बाद ही हादसे में कुल कितने लोग प्रभावित हुए और इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या थी, इसकी पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
फिलहाल सत्य निकेतन में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और प्रशासन की ओर से मलबे में फंसे लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


