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- 12h ago
हरदोई। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) समाज कल्याण एवं जनपद के प्रभारी मंत्री श्री असीम अरुण ने मंगलवार को तहसील बिलग्राम क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों का व्यापक भ्रमण कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर जलभराव, आवागमन की स्थिति, प्रभावित परिवारों की समस्याओं तथा प्रशासन की ओर से संचालित राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली। प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए राहत कार्यों में किसी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए और प्रभावित लोगों तक आवश्यक सहायता हर हाल में समय से पहुंचाई जाए।
प्रभारी मंत्री ने राजघाट स्थित बाढ़ निगरानी कक्ष का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने बाढ़ की वर्तमान स्थिति, जलस्तर में हो रहे बदलाव, प्रभावित क्षेत्रों, प्रशासन की तैयारियों तथा राहत एवं बचाव कार्यों के संबंध में अधिकारियों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर लगातार नजर रखी जाए और जलस्तर अथवा परिस्थितियों में किसी भी प्रकार का बदलाव होने पर तत्काल उच्चाधिकारियों को अवगत कराया जाए।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसलिए अधिकारी और कर्मचारी पूरी संवेदनशीलता तथा तत्परता के साथ कार्य करें। जिन क्षेत्रों में पानी बढ़ रहा है या जहां लोगों के आवागमन में परेशानी हो रही है, वहां आवश्यक व्यवस्थाएं तत्काल सुनिश्चित की जाएं।
प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाढ़ की स्थिति सामान्य होने तक प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखी जाए। प्रशासनिक और राजस्व विभाग के अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित भ्रमण करें तथा स्थानीय स्तर पर प्राप्त होने वाली सूचनाओं पर तत्काल कार्रवाई करें।
उन्होंने कहा कि बाढ़ का स्वरूप और जलस्तर लगातार बदल सकता है। ऐसे में किसी भी क्षेत्र को सामान्य मानकर निगरानी में कमी नहीं की जानी चाहिए। संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां विशेष सतर्कता बरती जाए तथा जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्रवाई तत्काल शुरू की जाए।
प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से प्रभावित परिवारों को उपलब्ध कराई जा रही राहत सामग्री की जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि जरूरतमंद परिवारों तक भोजन, पेयजल, आवश्यक दवाएं और अन्य जरूरी सामग्री समय से पहुंचाई जाए। राहत सामग्री के वितरण में पात्रता और वास्तविक जरूरत को प्राथमिकता दी जाए, ताकि संकट की स्थिति में किसी परिवार को परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं का लाभ बाढ़ प्रभावित प्रत्येक पात्र परिवार तक पहुंचना चाहिए। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक देरी की शिकायत मिलने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री ने बाढ़ प्रभावित परिवारों से भी बातचीत की और उनकी समस्याओं को सीधे सुना। उन्होंने लोगों से राहत सामग्री, आवागमन, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों से प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए तथा उनका प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाए। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में प्रशासन को प्रभावित लोगों के बीच उपस्थित रहकर उनकी वास्तविक समस्याओं को समझना चाहिए।
प्रभारी मंत्री ने प्रभावित लोगों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश सरकार संकट की इस घड़ी में उनके साथ खड़ी है। सरकार और जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
प्रभारी मंत्री ने बाढ़ के कारण फसलों, मकानों तथा अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान की जानकारी भी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का वास्तविक और पारदर्शी आकलन कराया जाए।
उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण के दौरान वास्तविक क्षति को दर्ज किया जाए, ताकि पात्र प्रभावितों को शासन की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार समयबद्ध तरीके से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उन्होंने राजस्व एवं संबंधित विभागों के अधिकारियों से कहा कि क्षति का आकलन करते समय प्रभावित लोगों की समस्याओं और उनकी स्थिति को भी ध्यान में रखा जाए।
बाढ़ से प्रभावित किसानों की स्थिति का भी प्रभारी मंत्री ने जायजा लिया। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल को होने वाला नुकसान उनके लिए बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकता है। इसलिए फसल क्षति का सही आकलन कर पात्र किसानों को नियमानुसार राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित गांवों में फसल क्षति का सर्वेक्षण गंभीरता से किया जाए और रिपोर्ट समय से तैयार की जाए। जिन किसानों की फसल बाढ़ के कारण प्रभावित हुई है, उन्हें निर्धारित नियमों के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रभारी मंत्री ने बाढ़ के कारण मकानों को हुए संभावित नुकसान का भी आकलन कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी स्थिति का मौके पर जाकर सत्यापन कराया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कमजोर और क्षतिग्रस्त मकानों वाले परिवारों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए। यदि किसी क्षेत्र में लोगों के लिए रहना सुरक्षित नहीं है तो उन्हें आवश्यकता के अनुसार सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की जाए।
प्रभारी मंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले क्षेत्रों में बीमारियों की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
उन्होंने आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, स्वास्थ्य कर्मियों की सक्रियता और जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य टीमों को भेजने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि बाढ़ के दौरान साफ पेयजल और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाना आवश्यक है।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन की स्थिति की भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन स्थानों पर पानी भरने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है, वहां स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए।
उन्होंने कहा कि आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाहनों, राहत दलों तथा स्वास्थ्य टीमों की आवाजाही में किसी प्रकार की बाधा नहीं होनी चाहिए। संवेदनशील मार्गों और संपर्क मार्गों की स्थिति की नियमित निगरानी की जाए।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में जलस्तर अचानक बढ़ता है या लोगों के लिए खतरा उत्पन्न होता है तो तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और बचाव दलों को सक्रिय रखा जाए तथा जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त संसाधनों की मांग समय से की जाए। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है, इसलिए निर्णय लेने और कार्रवाई करने में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।
राजघाट स्थित बाढ़ निगरानी कक्ष के निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री ने वहां से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था को देखा। उन्होंने अधिकारियों से प्राप्त सूचनाओं, जलस्तर की स्थिति और प्रशासन की तैयारियों के बारे में जानकारी ली।
उन्होंने निर्देश दिया कि निगरानी कक्ष को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाए और संबंधित क्षेत्रों से प्राप्त सूचनाओं का तत्काल संज्ञान लिया जाए। स्थानीय प्रशासन, पुलिस, राजस्व, स्वास्थ्य तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर भी उन्होंने जोर दिया।
असीम अरुण ने कहा कि आपदा के समय प्रशासनिक अधिकारियों का व्यवहार संवेदनशील और सहयोगात्मक होना चाहिए। प्रभावित परिवार पहले से ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे होते हैं, इसलिए उनकी शिकायतों को सुनकर तत्काल समाधान की दिशा में कदम उठाना जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राहत एवं बचाव कार्य केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उसका लाभ जमीन पर प्रभावित लोगों को स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए। अधिकारी स्वयं क्षेत्र में जाकर व्यवस्थाओं की समीक्षा करें और कमियों को तत्काल दूर कराएं।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार बाढ़ सहित किसी भी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में प्रभावित लोगों के साथ खड़ी है। सरकार का प्रयास है कि संकट की घड़ी में किसी भी पात्र व्यक्ति को आवश्यक सहायता से वंचित न रहना पड़े।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन को शासन की मंशा के अनुरूप पूरी तत्परता के साथ कार्य करना चाहिए। राहत सामग्री, आर्थिक सहायता, स्वास्थ्य सेवाएं तथा अन्य आवश्यक सुविधाएं पात्र लोगों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाई जानी चाहिए।
उन्होंने प्रभावित परिवारों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रशासन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए लगातार कार्य कर रहा है और स्थिति पर उच्च स्तर से भी नजर रखी जा रही है।
प्रभारी मंत्री ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। राजस्व, पुलिस, स्वास्थ्य, सिंचाई, पंचायत, आपदा प्रबंधन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी आपसी तालमेल के साथ कार्य करें।
उन्होंने कहा कि किसी भी विभाग को अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहिए। प्रभावित क्षेत्रों की आवश्यकता के अनुसार सभी विभागों को अपने संसाधनों का प्रभावी उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में लोगों को भी आवश्यक सावधानियों के बारे में जागरूक किया जाए। लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक रूप से जाने से बचने, सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने के लिए कहा जाए।
उन्होंने कहा कि प्रशासन और जनता के बीच बेहतर संवाद से आपदा की स्थिति में नुकसान को कम किया जा सकता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीण स्तर के जिम्मेदार लोगों को भी राहत एवं बचाव कार्यों से जोड़ा जाना चाहिए।
प्रभारी मंत्री ने राहत कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राहत सामग्री के वितरण और आर्थिक सहायता से संबंधित प्रक्रिया में पात्र लोगों की पहचान सही तरीके से की जाए। वास्तविक रूप से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता दी जाए और शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी प्रभावित परिवार को केवल जानकारी के अभाव में सरकारी राहत से वंचित न होना पड़े। जरूरतमंद लोगों को उपलब्ध सहायता और प्रक्रिया की जानकारी भी दी जाए।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से बाढ़ से निपटने के लिए उपलब्ध संसाधनों की भी जानकारी ली। उन्होंने बचाव एवं राहत कार्यों के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं को सक्रिय रखने और संभावित परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी रखने को कहा।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में छोटी से छोटी सूचना भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए अधिकारियों और कर्मचारियों को क्षेत्रीय स्तर से मिलने वाली सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रभारी मंत्री के निरीक्षण के दौरान भाजपा जिलाध्यक्ष अजीत सिंह बब्बन, अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) प्रफुल्ल कुमार त्रिपाठी, उप जिलाधिकारी बिलग्राम सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने प्रभारी मंत्री को बाढ़ की स्थिति, राहत एवं बचाव कार्यों तथा प्रभावित क्षेत्रों में उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के संबंध में जानकारी दी।
प्रभारी मंत्री ने अधिकारियों से कहा कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थिति सामान्य होने तक निगरानी और राहत कार्यों को प्राथमिकता के साथ जारी रखा जाए। उन्होंने दोहराया कि प्रशासन का पहला उद्देश्य प्रभावित लोगों की सुरक्षा और उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ की चुनौती के बीच प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के सामूहिक प्रयास से प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाई जा सकती है। शासन स्तर से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के साथ जिला प्रशासन को मौके की परिस्थितियों के अनुसार त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं।
हरदोई-स्टेट ब्यूरो,(लव कुश सिंह)।


