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- 12h ago
नई दिल्ली। भारत को वैश्विक जहाज निर्माण के शीर्ष पांच देशों में शामिल करने और देश में प्रतिस्पर्धी समुद्री उद्योग तंत्र विकसित करने की दिशा में नेमएक्सपो 2026 एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में सामने आ रहा है। नौसैनिक एवं समुद्री जहाज निर्माण पर केंद्रित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की औपचारिक घोषणा कर दी गई है। सम्मेलन का आयोजन 1 और 2 दिसंबर, 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में किया जाएगा। इसमें नीति-निर्माताओं, रक्षा क्षेत्र के प्रतिनिधियों, उद्योग जगत, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों के भाग लेने की उम्मीद है।
सम्मेलन का प्रमुख उद्देश्य भारत की जहाज निर्माण क्षमता का विस्तार करना, घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना और नौसैनिक तथा वाणिज्यिक जहाज निर्माण क्षेत्रों के बीच सहयोग को मजबूत करना है। इसके माध्यम से जहाज निर्माण की पूरी मूल्य शृंखला में निवेश, तकनीकी साझेदारी, औद्योगिक सहयोग और नए कारोबारी अवसरों को प्रोत्साहित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
नेमएक्सपो 2026 का आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई), सोसाइटी फॉर एयरोस्पेस, मैरीटाइम एंड डिफेंस स्टडीज (एसएएमडीईएस) तथा रिसर्च एंड इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर डेवलपिंग कंट्रीज (आरआईएस) की साझेदारी में किया जा रहा है। यह पहल वर्ष 2047 तक 300 अरब डॉलर का जहाज निर्माण उद्योग विकसित करने और भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्य से जुड़ी है।
भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए स्वदेशी उत्पादन क्षमता का विस्तार, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल और उद्योग से जुड़े विभिन्न पक्षों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक माना जा रहा है। नेमएक्सपो 2026 में इन प्राथमिकताओं पर विशेष चर्चा होगी।
सम्मेलन के औपचारिक शुभारंभ कार्यक्रम में सीआईआई की समुद्री पारिस्थितिकी कार्यबल के सह-अध्यक्ष, आरआईएस में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस और बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के पूर्व सचिव टी. के. रामचंद्रन ने कहा कि भारत के पास वैश्विक जहाज निर्माण शक्ति बनने के लिए प्रतिभा, क्षमता और महत्वाकांक्षा मौजूद है। हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों के बीच की बाधाओं को दूर करना, स्वदेशीकरण की प्रक्रिया को तेज करना और सरकार, उद्योग, शिक्षण संस्थानों तथा रक्षा क्षेत्र के बीच तालमेल बढ़ाना होगा।
रामचंद्रन के अनुसार, नेमएक्सपो ऐसे समय आयोजित हो रहा है, जब भारत अपने समुद्री उद्योग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठा सकता है। उनके मुताबिक, यह सम्मेलन देश की दीर्घकालिक परिकल्पना को ठोस परिणामों में बदलने में योगदान दे सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत जहाज निर्माण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए भारत में जहाज निर्माण सुविधाएं स्थापित करने, घरेलू औद्योगिक क्षमताओं में निवेश करने और भारतीय कंपनियों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने के अवसर मौजूद हैं।
नेमएक्सपो 2026 का एक प्रमुख उद्देश्य नौसैनिक और वाणिज्यिक जहाज निर्माण क्षेत्रों के बीच सहयोग बढ़ाना है। इन दोनों क्षेत्रों की जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन डिजाइन, इंजीनियरिंग, उन्नत विनिर्माण, उपकरण उत्पादन, डिजिटल तकनीक और आपूर्ति शृंखला जैसे कई क्षेत्रों में साझा क्षमताएं विकसित करने की संभावनाएं हैं।
एसएएमडीईएस के संस्थापक सदस्य, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और पवन हंस लिमिटेड के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक तथा एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. आर. के. त्यागी ने कहा कि महासागर देशों, अर्थव्यवस्थाओं और समाजों को जोड़ते हैं। समुद्री क्षेत्र के भविष्य को मजबूत बनाने के लिए अलग-अलग देशों और संस्थानों के प्रयासों के साथ व्यापक सहयोग भी जरूरी है।
त्यागी के अनुसार, नेमएक्सपो विभिन्न देशों, संस्थानों, उद्योगों और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों के बीच समन्वय स्थापित करने का अवसर देगा। इससे भारतीय उद्योग को नौसैनिक और वाणिज्यिक जहाज निर्माण में तकनीकी विकास, दीर्घकालिक सहयोग तथा अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां विकसित करने में मदद मिल सकती है।
सम्मेलन में इस बात पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है कि किस तरह घरेलू कंपनियों, अनुसंधान संस्थानों और वैश्विक उद्योग भागीदारों के बीच सहयोग बढ़ाकर भारत की जहाज निर्माण क्षमताओं को व्यापक बनाया जा सकता है।
आरआईएस के महानिदेशक प्रो. सचिन कुमार शर्मा ने कहा कि नौसैनिक एवं वाणिज्यिक जहाज निर्माण और समुद्री परिवहन के क्षेत्र में सरकार तथा उद्योग के बीच बेहतर तालमेल अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने नीतियों को उद्योग की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया। उनके अनुसार, नीति-निर्माण और औद्योगिक आवश्यकताओं के बीच प्रभावी समन्वय से विचारों को व्यावहारिक परिणामों में बदलने तथा आत्मनिर्भर भारतीय समुद्री क्षेत्र विकसित करने में मदद मिल सकती है।
जहाज निर्माण उद्योग में बड़े निवेश, लंबी उत्पादन अवधि, उन्नत तकनीकी जरूरतों और जटिल आपूर्ति शृंखला की भूमिका होती है। ऐसे में नीतिगत स्पष्टता, वित्तपोषण तक पहुंच, कुशल मानव संसाधन और आधुनिक बुनियादी ढांचा क्षेत्र की वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण कारक हैं। सम्मेलन में इन विषयों पर उद्योग और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद का अवसर मिलने की उम्मीद है।
नेमएक्सपो 2026 में जहाज निर्माण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण तकनीकी और औद्योगिक प्राथमिकताओं पर चर्चा होगी। इनमें जहाजों की डिजाइनिंग, उन्नत विनिर्माण प्रक्रियाएं, प्रणोदन प्रणाली, डिजिटल प्रौद्योगिकी, प्रमाणन मानक, समुद्री उपकरण निर्माण और आपूर्ति शृंखला का विकास शामिल हैं।
आधुनिक जहाज निर्माण में केवल जहाज का ढांचा तैयार करना ही पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए इंजन और प्रणोदन प्रणाली, नेविगेशन उपकरण, संचार व्यवस्था, सुरक्षा प्रणालियां, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य विशेष घटकों की भी जरूरत होती है। इन क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ने से उद्योग की निर्भरता कम करने और भारतीय कंपनियों को वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जोड़ने की संभावनाएं बन सकती हैं।
सम्मेलन के दौरान तकनीकी साझेदारी और ज्ञान के आदान-प्रदान के जरिए भारतीय कंपनियों की क्षमताओं को मजबूत बनाने पर भी ध्यान दिए जाने की उम्मीद है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय कंपनियों और भारतीय उद्योग के बीच सहयोग के संभावित क्षेत्रों की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा।
आयोजकों के मुताबिक, भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र में क्षमता विस्तार की संभावनाएं बढ़ रही हैं। जहाज निर्माण केंद्रों और औद्योगिक क्लस्टरों का विकास, पोत परिवहन क्षेत्र को बुनियादी ढांचा क्षेत्र का दर्जा और हालिया विधायी सुधार इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताए जा रहे हैं। इन पहलों का उद्देश्य उत्पादन क्षमता बढ़ाने और उद्योग के विकास को गति देना है।
नेमएक्सपो का लक्ष्य केवल नीतिगत चर्चा तक सीमित रहना नहीं, बल्कि व्यावहारिक कारोबारी परिणामों की संभावनाओं को भी आगे बढ़ाना है। इसके लिए जहाज निर्माण कंपनियों, मूल उपकरण निर्माताओं, समुद्री उपकरण आपूर्तिकर्ताओं, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), निवेशकों और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को एक मंच पर लाने की योजना है।
इस मंच पर कंपनियां संभावित निवेश, तकनीकी सहयोग, व्यावसायिक साझेदारी और नए ऑर्डर से जुड़े अवसरों पर चर्चा कर सकेंगी। इससे छोटे और मध्यम उद्यमों को भी बड़े औद्योगिक नेटवर्क से जुड़ने तथा जहाज निर्माण की आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं।
समुद्री उपकरण बनाने वाली कंपनियों के लिए यह मंच नए ग्राहकों और साझेदारों तक पहुंच बनाने का माध्यम बन सकता है, जबकि निवेशकों और वित्तीय संस्थानों को क्षेत्र की जरूरतों तथा संभावित परियोजनाओं को समझने का अवसर मिल सकता है।
भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के दीर्घकालिक लक्ष्य के तहत वर्ष 2047 तक 300 अरब डॉलर का जहाज निर्माण उद्योग विकसित करने की परिकल्पना रखी गई है। इस लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए घरेलू उत्पादन, तकनीकी नवाचार, निवेश, कौशल विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वैश्विक जहाज निर्माण बाजार में प्रतिस्पर्धा के लिए उत्पादन लागत, गुणवत्ता, समयबद्ध आपूर्ति, आधुनिक तकनीक और मजबूत आपूर्ति शृंखला अहम भूमिका निभाते हैं। भारत के सामने चुनौती केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाने की नहीं, बल्कि ऐसा औद्योगिक तंत्र विकसित करने की भी है, जो घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की मांग के अनुरूप भी काम कर सके।
नौसैनिक जहाज निर्माण में रक्षा संबंधी आवश्यकताओं और विशेष तकनीकी मानकों का महत्व होता है, जबकि वाणिज्यिक जहाज निर्माण में परिचालन दक्षता, लागत और बाजार की जरूरतें प्रमुख रहती हैं। दोनों क्षेत्रों में उपलब्ध विशेषज्ञता और औद्योगिक क्षमताओं के बीच उपयुक्त सहयोग विकसित करना भारत के समुद्री उद्योग के विस्तार में उपयोगी हो सकता है।
आयोजकों ने जहाज निर्माण कंपनियों, समुद्री क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों, उपकरण निर्माताओं, वित्तीय संस्थानों, निवेशकों, स्टार्टअप और अंतरराष्ट्रीय समुद्री उद्योग के प्रतिनिधियों से सम्मेलन में भाग लेने की अपील की है।
जहाज निर्माण क्षेत्र में नए सिरे से प्रवेश करने या अपने कारोबार का विस्तार करने की इच्छुक कंपनियों के लिए यह सम्मेलन उद्योग की चुनौतियों, तकनीकी आवश्यकताओं और संभावित साझेदारियों को समझने का अवसर प्रदान कर सकता है।
कुल मिलाकर, नेमएक्सपो 2026 का फोकस भारत के नौसैनिक और वाणिज्यिक जहाज निर्माण क्षेत्रों को अधिक निकटता से जोड़ने, घरेलू औद्योगिक क्षमता का विस्तार करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने पर रहेगा। सम्मेलन से मिलने वाले सुझावों, संपर्कों और संभावित साझेदारियों के आधार पर भारत को वैश्विक जहाज निर्माण केंद्र बनाने की दिशा में निवेश और औद्योगिक सहयोग को गति मिलने की उम्मीद है।
सम्मेलन की प्रमुख जानकारी
आयोजन: नेमएक्सपो 2026—नौसैनिक एवं समुद्री जहाज निर्माण पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
तिथि: 1 और 2 दिसंबर, 2026
स्थान: मानेकशॉ सेंटर, नई दिल्ली
मुख्य उद्देश्य: भारत की जहाज निर्माण क्षमता का विस्तार, स्वदेशी विनिर्माण को प्रोत्साहन और अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक साझेदारी को बढ़ावा देना
दीर्घकालिक लक्ष्य: वर्ष 2047 तक 300 अरब डॉलर का जहाज निर्माण उद्योग विकसित करने की परिकल्पना को आगे बढ़ाना
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


