17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 10h ago
बड़ौत। युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने और उन्हें शिक्षा, खेल, रोजगार तथा सकारात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से ‘नशे को कहें ना और सपनों को कहें हां’ अभियान को जनपद बागपत में गांव-गांव तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। सोशल मीडिया नेटवर्क की मशहूर डायरेक्टर पारुल चौधरी तुगाना ने कहा कि वह जिले के गांवों में पहुंचकर युवाओं और ग्रामीणों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करेंगी और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने का प्रयास करेंगी।
मीडिया से बातचीत के दौरान पारुल चौधरी ने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि परिवार, ग्रामीण, सामाजिक संगठन और युवा मिलकर इस दिशा में प्रयास करें तो नशे की समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि ‘नशे को कहें ना और सपनों को कहें हां’ एक सकारात्मक संदेश है। युवाओं को यह समझने की आवश्यकता है कि नशा उनके वर्तमान के साथ-साथ उनके भविष्य को भी प्रभावित कर सकता है। नशे की आदत व्यक्ति की सेहत, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक स्थिति और पारिवारिक संबंधों पर भी विपरीत प्रभाव डालती है।
पारुल चौधरी ने कहा कि केंद्रीय मंत्री एवं राष्ट्रीय लोकदल के सुप्रीमो जयंत चौधरी द्वारा युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हुए ‘नशा छोड़ो’ अभियान की पहल की गई है। इसी पहल से प्रेरणा लेते हुए वह अब बागपत के गांव-गांव में जाकर लोगों का सहयोग लेने और युवाओं को जागरूक करने का प्रयास करेंगी।
उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल युवाओं को नशे से दूर रहने की अपील करना नहीं है, बल्कि उन्हें उनके सपनों और लक्ष्यों से जोड़ना भी है। युवाओं को यह एहसास कराना जरूरी है कि उनके सामने आगे बढ़ने के लिए अनेक अवसर हैं और नशे की वजह से उन्हें अपने जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों को गंवाना नहीं चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज का युवा अपने भविष्य को लेकर अनेक सपने देखता है। कोई शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहता है, कोई खेलों में अपना नाम बनाना चाहता है, कोई सरकारी सेवा में जाना चाहता है, तो कोई कारोबार या अपने हुनर के माध्यम से नई पहचान बनाना चाहता है। ऐसे में नशा इन सपनों की राह में बड़ी बाधा बन सकता है।
पारुल चौधरी ने कहा कि युवाओं के भीतर ऊर्जा, प्रतिभा और आगे बढ़ने की क्षमता होती है। आवश्यकता केवल इस बात की है कि उनकी ऊर्जा को सही दिशा मिले। यदि युवा खेल, शिक्षा, तकनीक, रोजगार, स्वरोजगार और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ेंगे तो वे न केवल अपने परिवार का भविष्य बेहतर बनाएंगे, बल्कि समाज और देश के विकास में भी योगदान देंगे।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ अभियान को केवल भाषणों तक सीमित रखने के बजाय इसे सामाजिक आंदोलन का रूप देने की जरूरत है। इसके लिए गांवों में संवाद स्थापित करना जरूरी है। बड़े-बुजुर्गों, अभिभावकों, युवाओं और सामाजिक लोगों को एक साथ बैठकर इस विषय पर चर्चा करनी होगी।
पारुल चौधरी ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने में परिवार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। कई बार युवा तनाव, गलत संगत, बेरोजगारी, पारिवारिक परिस्थितियों या दूसरे कारणों से नशे की ओर बढ़ जाते हैं। ऐसे समय में परिवार को उन्हें डांटने या उनसे दूरी बनाने के बजाय उनकी समस्या समझने और उचित मदद लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि किसी परिवार का कोई सदस्य नशे की समस्या से जूझ रहा है तो उसे छिपाने के बजाय समय रहते मदद लेनी चाहिए। नशे की समस्या को लेकर शर्म या संकोच करने के बजाय उसके समाधान की दिशा में कदम उठाना जरूरी है।
पारुल चौधरी ने ग्रामीणों से अपील की कि वे अपने गांव में बड़े-बुजुर्गों के साथ बैठकर इस अभियान की शुरुआत करें। गांवों में सामूहिक चर्चा, युवाओं से संवाद और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से नशे के खिलाफ वातावरण तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि गांव के बुजुर्गों का अनुभव और युवाओं की ऊर्जा मिलकर इस अभियान को मजबूत बना सकती है। यदि हर गांव अपने स्तर पर कुछ युवाओं को नशे से दूर रखने और उन्हें सकारात्मक गतिविधियों से जोड़ने का संकल्प ले तो धीरे-धीरे इसका व्यापक असर देखने को मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान युवाओं को केवल नशे के नुकसान बताने के बजाय उन्हें सकारात्मक विकल्पों की जानकारी भी दी जाएगी। खेल, शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ने के लिए युवाओं को प्रेरित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे युवाओं को भी सामने लाने की जरूरत है जिन्होंने नशे को छोड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी है। उनकी सफलता की कहानियां दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती हैं।
पारुल चौधरी ने कहा कि नशे के खिलाफ यह मुहिम केवल एक अभियान नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने और युवाओं को सही दिशा देने का सामूहिक संकल्प है। वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब परिवार, समाज और प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे।
उन्होंने कहा कि युवाओं को यह संदेश देने की जरूरत है कि जीवन में असफलता आने पर नशा कोई समाधान नहीं है। मेहनत, धैर्य और सही मार्गदर्शन के जरिए कठिन परिस्थितियों से बाहर निकला जा सकता है।
पारुल चौधरी ने आमजन से अभियान में सहयोग की अपील करते हुए कहा कि यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति नशे की समस्या से जूझ रहा है या कोई अपना इस आदत से बाहर निकलना चाहता है तो उसकी मदद करने में संकोच न करें। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ या उचित सहायता लेने के लिए उसे प्रेरित करें।
उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ समाज की एकजुटता ही इस मुहिम को सफल बना सकती है। गांवों में परिवारों, युवाओं, बुजुर्गों और सामाजिक लोगों को एक साथ आकर नशे के खिलाफ सकारात्मक माहौल तैयार करना होगा।
उन्होंने कहा कि हर युवा के सपने होते हैं और उन सपनों को नशे की वजह से टूटने नहीं दिया जाना चाहिए। युवाओं को नशे से दूर रखकर उन्हें शिक्षा, खेल, हुनर और रोजगार की दिशा में आगे बढ़ाना ही इस मुहिम का मूल उद्देश्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बागपत के गांवों से शुरू होने वाला यह जागरूकता अभियान युवाओं में नई ऊर्जा पैदा करेगा और समाज को नशामुक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।


