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मॉस्को,नई दिल्ली, 25 सितम्बर 2026 (यूटीएन)। रूस के तीन दिवसीय संसदीय चुनाव के नतीजों ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और क्रेमलिन के राजनीतिक प्रभाव को और मजबूत स्थिति में ला दिया है। केंद्रीय चुनाव आयोग के उपलब्ध अंतिम/लगभग पूर्ण नतीजों के मुताबिक, पुतिन समर्थक यूनाइटेड रशिया ने 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में रिकॉर्ड 355 सीटें हासिल की हैं। यह पार्टी का अब तक का सबसे बड़ा संसदीय आंकड़ा है और 2016 में हासिल 343 सीटों के पिछले रिकॉर्ड से भी अधिक है।
पार्टी को पार्टी-लिस्ट मतदान में 57.83 प्रतिशत वोट मिले। 2021 के पिछले संसदीय चुनाव में यूनाइटेड रशिया को 49.8 प्रतिशत वोट मिले थे। इस तरह वोट शेयर और सीटों, दोनों के लिहाज से पार्टी ने अपनी संसदीय स्थिति मजबूत की है।
यह चुनाव रूस के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण था क्योंकि फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू होने के बाद यह पहला संसदीय चुनाव था। राष्ट्रपति पुतिन ने चुनाव को देश की एकता और उनकी सरकार की नीतियों के प्रति समर्थन के संकेत के रूप में पेश किया था।
स्टेट ड्यूमा में कुल 450 सीटें हैं। इनमें 225 सीटें पार्टी-लिस्ट प्रणाली और बाकी 225 सीटें एकल-सदस्यीय निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं। यूनाइटेड रशिया ने दोनों व्यवस्थाओं में मजबूत प्रदर्शन किया और कुल मिलाकर 355 सीटों पर कब्जा किया।
355 सीटों के साथ पार्टी के पास संविधान में बदलाव शुरू करने के लिए आवश्यक 301 सीटों से भी काफी अधिक संख्या है। इसका अर्थ है कि संसद के निचले सदन में क्रेमलिन समर्थक पार्टी के पास कानून बनाने और संवैधानिक संशोधनों की प्रक्रिया शुरू करने के लिए पर्याप्त संसदीय ताकत बनी रहेगी।
यह आंकड़ा 2021 की तुलना में यूनाइटेड रशिया की संसदीय स्थिति में स्पष्ट वृद्धि दिखाता है। पार्टी ने 2016 में 343 सीटें जीती थीं, जबकि पिछली संसद में उसके पास 324 सीटें थीं। अब 355 सीटों के साथ उसने अपने पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।
केंद्रीय चुनाव आयोग के मुताबिक चुनाव में मतदान प्रतिशत करीब 59 प्रतिशत रहा। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे एक दशक से अधिक समय में संसदीय चुनाव के लिए सबसे अधिक मतदान बताया गया है। करीब 11.1 करोड़ पात्र मतदाताओं वाले देश में तीन दिन तक मतदान कराया गया।
तीन दिन तक मतदान कराने के साथ कुछ क्षेत्रों में इलेक्ट्रॉनिक या ऑनलाइन मतदान की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। चुनाव अधिकारियों के अनुसार इससे मतदाताओं के लिए मतदान की सुविधा बढ़ाने और मतदान प्रक्रिया को अधिक व्यापक बनाने में मदद मिली।
हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक मतदान और चुनाव प्रक्रिया को लेकर आलोचक सवाल भी उठाते रहे। AP और Reuters की रिपोर्टों के अनुसार विपक्षी कार्यकर्ताओं तथा कुछ आलोचकों ने चुनाव की निष्पक्षता और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग को लेकर आपत्तियां उठाईं, जबकि रूसी अधिकारियों ने चुनाव प्रक्रिया का बचाव किया।
यूनाइटेड रशिया के बाद कम्युनिस्ट पार्टी दूसरे स्थान पर रही। इसके अलावा लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ रूस (LDPR), न्यू पीपल और ए जस्ट रशिया भी संसद में प्रतिनिधित्व हासिल करने में सफल रहीं।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार कम्युनिस्ट पार्टी को 40, LDPR को 25, न्यू पीपल को 20 और ए जस्ट रशिया को चार सीटें मिलीं। इस तरह संसद में मौजूद सभी प्रमुख दलों में यूनाइटेड रशिया का संसदीय अंतर काफी बड़ा बना हुआ है।
चुनाव का सबसे विवादित पहलू विपक्षी राजनीति की स्थिति रही। स्वतंत्र और सरकार की आलोचना करने वाले कई राजनीतिक नेताओं और उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं मिला। उदारवादी और युद्ध-विरोधी पार्टी याब्लोको राष्ट्रीय स्तर पर स्टेट ड्यूमा में प्रवेश नहीं कर सकी।
Reuters और AP की रिपोर्टों के अनुसार, रूस में युद्ध की आलोचना पर कड़े प्रतिबंधों और विपक्षी नेताओं के जेल जाने या निर्वासन में रहने के कारण चुनावी मुकाबले का दायरा सीमित रहा।
याब्लोको राष्ट्रीय संसद में सीट हासिल करने में असफल रही, हालांकि उसे एक क्षेत्रीय संसद में सीमित सफलता मिली। Reuters ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की कमजोर स्थिति के बावजूद एक छोटी क्षेत्रीय उपलब्धि के रूप में रिपोर्ट किया।
राष्ट्रपति पुतिन ने चुनाव परिणामों को अपनी नीतियों और सरकार के प्रति जनता के समर्थन से जोड़ा। क्रेमलिन की ओर से भी परिणामों को रूस में राजनीतिक एकजुटता के संकेत के रूप में पेश किया गया।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने परिणामों को राष्ट्रपति के आसपास रूसी समाज के उच्च स्तर के एकीकरण का संकेत बताया।
रूस की सत्ता के लिए यह संदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव ऐसे समय में हुआ है जब यूक्रेन युद्ध जारी है और रूस को आर्थिक, सैन्य और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई दबावों का सामना करना पड़ रहा है।
यह चुनाव यूक्रेन युद्ध के बीच हुआ। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर हमला शुरू किया था और उसके बाद से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है।
पुतिन ने चुनाव को युद्ध के दौर में देश की एकता और राजनीतिक समर्थन के संकेत के रूप में प्रस्तुत किया। दूसरी ओर, रूस के बाहर और विपक्षी समूहों ने चुनावी प्रतिस्पर्धा और राजनीतिक स्वतंत्रता की स्थिति पर सवाल उठाए।
चुनाव के अंतिम दिन रूस के कई इलाकों, विशेषकर मॉस्को क्षेत्र, में यूक्रेनी ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आईं। इन घटनाओं ने मतदान के दौरान सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त दबाव पैदा किया।
रूस ने यूक्रेन के उन क्षेत्रों में भी मतदान कराया, जिन्हें मॉस्को ने अपने कब्जे में लेकर रूस में शामिल करने का दावा किया है। इनमें डोनेत्स्क, लुहांस्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया के कब्जे वाले हिस्से शामिल हैं। इसके अलावा क्रीमिया में भी मतदान हुआ, जिसे रूस ने 2014 में अपने नियंत्रण में लिया था।
यूक्रेन ने इन क्षेत्रों में रूसी चुनाव कराने को अवैध बताया है। पश्चिमी देशों की ओर से भी कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों में मतदान को लेकर आपत्ति जताई गई है। इसलिए चुनाव का यह हिस्सा रूस-यूक्रेन विवाद का एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहलू बना रहा।
चुनाव का एक उल्लेखनीय पहलू युद्ध से जुड़े पूर्व सैनिकों की राजनीतिक भागीदारी भी रही। यूनाइटेड रशिया के अनुसार, यूक्रेन में लड़ चुके 49 युद्ध veterans पार्टी के टिकट पर ड्यूमा में पहुंचने वाले हैं।
यह घटनाक्रम रूसी राजनीति में युद्ध और सैन्य सेवा की बढ़ती राजनीतिक भूमिका को भी दर्शाता है। नई संसद में ऐसे प्रतिनिधियों की मौजूदगी से युद्ध से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक विमर्श में और अधिक स्थान मिलने की संभावना है।
रूस के चुनाव को लेकर कई अंतरराष्ट्रीय सरकारों और संस्थाओं ने निष्पक्षता तथा राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि प्रमुख सरकार-विरोधी राजनीतिक आवाजों को चुनावी प्रक्रिया से बाहर रखने के कारण मतदाताओं के सामने विकल्प सीमित रहे।
AP की रिपोर्ट के अनुसार, उदारवादी याब्लोको को राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव लड़ने से बाहर रखा गया था और कई युद्ध-विरोधी नेता जेल या निर्वासन में थे। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षण को लेकर भी सीमाएं थीं।
हालांकि, रूसी चुनाव अधिकारियों ने मतदान प्रक्रिया का बचाव किया और परिणामों को वैध बताया। इस तरह चुनाव के आधिकारिक नतीजों और उनकी राजनीतिक व्याख्या को लेकर रूस तथा उसके आलोचकों के बीच स्पष्ट अंतर बना हुआ है।
यूनाइटेड रशिया की 355 सीटों की जीत राष्ट्रपति पुतिन के लिए संसद में मजबूत राजनीतिक आधार बनाए रखती है। पार्टी के पास साधारण कानूनों के साथ-साथ संविधान संशोधन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए भी पर्याप्त संख्या है।
हालांकि, संसद में किसी पार्टी की संख्या और पूरे समाज में उसके प्रति समर्थन को एक ही चीज मानना जरूरी नहीं है। चुनाव में विपक्षी दलों की भागीदारी, राजनीतिक माहौल, मतदान प्रणाली और चुनावी प्रतिस्पर्धा की सीमा जैसे कारक परिणामों की व्याख्या में महत्वपूर्ण होते हैं।
इसलिए 355 सीटों का आंकड़ा रूस की संसद में यूनाइटेड रशिया की मजबूत स्थिति को स्पष्ट रूप से दिखाता है, जबकि इस परिणाम की लोकतांत्रिक वैधता और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा पर अलग-अलग पक्षों के बीच मतभेद बने हुए हैं।
चुनाव ऐसे समय हुआ जब रूस की अर्थव्यवस्था पर युद्ध का प्रभाव, श्रम बाजार में दबाव, महंगाई और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े सवाल चर्चा में हैं। Reuters ने चुनाव से पहले ईंधन की कमी, ऊंची ब्याज दरों और श्रम की कमी जैसे आर्थिक दबावों को भी चुनावी माहौल के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल किया था।
इन परिस्थितियों के बावजूद यूनाइटेड रशिया के वोट शेयर में 2021 के मुकाबले बढ़ोतरी दर्ज हुई। पार्टी का वोट शेयर 49.8 प्रतिशत से बढ़कर 57.83 प्रतिशत हुआ।
नई संसद में यूनाइटेड रशिया का भारी बहुमत सरकार के लिए विधायी एजेंडा आगे बढ़ाना आसान बनाएगा। रक्षा, अर्थव्यवस्था, सामाजिक नीति, बजट और युद्ध से जुड़े कानूनों पर सरकार को संसद में व्यापक समर्थन प्राप्त रहेगा।
संवैधानिक बहुमत के कारण पार्टी को संवैधानिक संशोधनों की प्रक्रिया में भी पर्याप्त संसदीय ताकत हासिल है। हालांकि संवैधानिक बदलावों की वास्तविक प्रक्रिया रूस के संवैधानिक प्रावधानों के तहत अन्य संस्थागत चरणों पर भी निर्भर करती है।
स्टेट ड्यूमा के सभी 450 सदस्य पांच साल के कार्यकाल के लिए चुने गए हैं। ऐसे में नई संसद अगले कई वर्षों तक रूस की घरेलू और युद्ध-संबंधी नीतियों के लिए महत्वपूर्ण विधायी भूमिका निभाएगी।
यूनाइटेड रशिया का रिकॉर्ड संसदीय बहुमत पुतिन सरकार को नीतिगत निरंतरता बनाए रखने में मदद करेगा। विपक्ष के सीमित प्रतिनिधित्व के कारण संसद में सरकार की नीतियों को चुनौती देने वाली प्रभावी आवाजों की संख्या भी कम रहेगी।
रूस के इस चुनाव को केवल सामान्य संसदीय चुनाव के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा। यह पहली बार है जब 2022 के पूर्ण पैमाने के यूक्रेन युद्ध के बाद राष्ट्रीय संसद के लिए मतदान हुआ है।
इसलिए चुनाव के परिणामों को रूस की घरेलू राजनीति के साथ-साथ युद्ध के राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। पुतिन के लिए यह चुनाव देश के भीतर राजनीतिक स्थिरता और समर्थन का प्रदर्शन करने का अवसर रहा, जबकि आलोचकों के लिए यह सीमित राजनीतिक प्रतिस्पर्धा की ओर संकेत करने वाला चुनाव है।
नई संसद में यूनाइटेड रशिया की रिकॉर्ड संख्या के कारण तत्काल राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव आने की संभावना कम है। इसके बजाय मौजूदा नीतियों की निरंतरता और सरकार के विधायी कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की क्षमता अधिक महत्वपूर्ण होगी।
संसद में कम्युनिस्ट पार्टी, LDPR, न्यू पीपल और ए जस्ट रशिया मौजूद रहेंगे, लेकिन यूनाइटेड रशिया के मुकाबले उनका संसदीय आकार काफी छोटा है। इसलिए प्रमुख नीतिगत फैसलों में सत्तारूढ़ पार्टी की भूमिका केंद्रीय बनी रहेगी।
कुल मिलाकर, 2026 का रूसी संसदीय चुनाव यूनाइटेड रशिया के लिए रिकॉर्ड संसदीय बहुमत लेकर आया है। 450 में 355 सीटों के साथ पार्टी ने न केवल अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि संविधान संशोधन के लिए आवश्यक संख्या से भी काफी अधिक ताकत हासिल की है। दूसरी ओर, विपक्षी भागीदारी और चुनावी प्रतिस्पर्धा को लेकर अंतरराष्ट्रीय तथा रूसी विपक्ष की आपत्तियां इस चुनाव की राजनीतिक व्याख्या का दूसरा प्रमुख पक्ष बनी हुई हैं।


