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भोपाल/नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी के इस फैसले के साथ ही पुरी की राज्यसभा सदस्यता को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। उत्तर प्रदेश से उनका मौजूदा राज्यसभा कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होने वाला है और हाल ही में भाजपा की ओर से उत्तर प्रदेश के राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम शामिल नहीं किया गया था। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य और केंद्रीय मंत्रिमंडल में बने रहने को लेकर सवाल उठने लगे थे।
अब मध्य प्रदेश की खाली हुई राज्यसभा सीट से पुरी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उनके संसद के उच्च सदन में बने रहने का रास्ता खुल गया है। हालांकि, उम्मीदवार घोषित होने और राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने में अंतर है। उनका निर्वाचन उपचुनाव की प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगा। भाजपा को मध्य प्रदेश विधानसभा में प्राप्त संख्याबल के कारण इस चुनाव में मजबूत स्थिति में माना जा रहा है।
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने हरदीप सिंह पुरी के नाम को मंजूरी दी है। पार्टी की घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है। निर्वाचन आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव के लिए 12 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।
हरदीप सिंह पुरी वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हैं। वह पूर्व राजनयिक भी रहे हैं और भारतीय विदेश सेवा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। राजनीति में आने के बाद उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं।
पुरी उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य हैं और उनका मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त होना निर्धारित है। भाजपा ने अक्टूबर की शुरुआत में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए आठ उम्मीदवारों की घोषणा की थी, लेकिन उस सूची में पुरी का नाम नहीं था। इसके बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई थी कि पार्टी उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजेगी या नहीं।
राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने की स्थिति में उनके संसदीय पद को लेकर संवैधानिक और राजनीतिक सवाल उठ सकते थे। हालांकि, अब मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा ने उनके लिए राज्यसभा में वापसी का रास्ता तैयार कर दिया है।
केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बने रहने के संदर्भ में भी यह फैसला महत्वपूर्ण है। संविधान के अनुच्छेद 75(5) के अनुसार, कोई मंत्री लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य न होने पर मंत्री पद पर नहीं रह सकता। इसलिए राज्यसभा के लिए उनका निर्वाचन उनकी संसदीय स्थिति को बनाए रखने में अहम होगा। फिर भी, केवल उम्मीदवार घोषित होने से उनका निर्वाचन सुनिश्चित नहीं होता और मंत्रिमंडल में बने रहने का अंतिम राजनीतिक फैसला प्रधानमंत्री तथा सरकार के नेतृत्व पर निर्भर करता है।
मध्य प्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर उपचुनाव कराने की आवश्यकता पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के कारण पैदा हुई। मुरुगन ने 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिपरिषद और राज्यसभा की सदस्यता, दोनों से इस्तीफा दे दिया था। उनका राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2030 तक निर्धारित था, लेकिन उन्होंने तमिलनाडु में पार्टी संगठन को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम करने की इच्छा जताई।
मुरुगन केंद्र सरकार में सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य से जुड़े राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। वह तमिलनाडु भाजपा के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं और दक्षिण भारत में पार्टी के संगठनात्मक विस्तार से जुड़े रहे हैं।
अपने इस्तीफे के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र और सोशल मीडिया पर साझा किए गए संदेश में मुरुगन ने कहा था कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश और तमिलनाडु की सेवा करना उनके लिए बड़े सम्मान की बात रही है। उन्होंने अपने साधारण पारिवारिक और सामाजिक परिवेश का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्रिपरिषद तक पहुंचने को अपने जीवन का बड़ा अवसर बताया था।
मुरुगन ने यह भी कहा था कि वह अब जमीनी स्तर पर लौटकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ काम करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले तमिलनाडु में भाजपा को मजबूत करना है। इसी उद्देश्य से उन्होंने केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य के पद से इस्तीफा दिया।
उनके इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट खाली हो गई और निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी।
निर्वाचन आयोग ने 22 अक्टूबर 2026 को मध्य प्रदेश की खाली राज्यसभा सीट पर उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव प्रक्रिया अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हो चुकी है।
चुनाव का कार्यक्रम इस प्रकार है:
अधिसूचना जारी होने की तारीख: 26 अक्टूबर 2026
नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख: 2 नवंबर 2026
नामांकन पत्रों की जांच: 3 नवंबर 2026
उम्मीदवारी वापस लेने की अंतिम तारीख: 5 नवंबर 2026
मतदान की तारीख: 12 नवंबर 2026
मतदान का समय: सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक
मतगणना: 12 नवंबर को शाम 5 बजे से
चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तारीख: 16 नवंबर 2026
मतदान और मतगणना की प्रक्रिया निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी की जाएगी। यदि चुनाव में मुकाबला होता है, तो मतदान के बाद मतगणना की जाएगी। यदि केवल एक वैध उम्मीदवार मैदान में रहता है, तो निर्वाचन प्रक्रिया के नियमों के अनुसार निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बन सकती है।
मध्य प्रदेश विधानसभा में भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए इस उपचुनाव में पार्टी के उम्मीदवार को बढ़त हासिल मानी जा रही है। राज्यसभा सदस्यों का चुनाव आम तौर पर संबंधित राज्य के निर्वाचित विधायक करते हैं। यह चुनाव सीधे जनता के मतदान से नहीं होता।
इसलिए उम्मीदवार की जीत में विधानसभा का संख्याबल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भाजपा के पास मध्य प्रदेश विधानसभा में पर्याप्त संख्या होने के कारण हरदीप सिंह पुरी के निर्वाचन की संभावनाएं मजबूत मानी जा रही हैं। हालांकि, अंतिम परिणाम नामांकन की स्थिति, चुनावी प्रक्रिया और आवश्यक होने पर मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस सीट पर निर्वाचित होने वाले सदस्य का कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक रहेगा। इसका अर्थ है कि यह उपचुनाव केवल कुछ महीनों के लिए नहीं, बल्कि मौजूदा रिक्ति के शेष कार्यकाल के लिए कराया जा रहा है।
भाजपा का हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाना कई दृष्टियों से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पहली बात, पार्टी ने ऐसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री को राज्यसभा में भेजने का विकल्प चुना है, जिनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने वाला है। दूसरी बात, मध्य प्रदेश में खाली हुई सीट के लिए पार्टी को ऐसा उम्मीदवार मिला है, जिसकी केंद्र सरकार में पहले से महत्वपूर्ण भूमिका है।
तीसरी बात, इस फैसले से पार्टी ने यह संकेत दिया है कि राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में केवल संबंधित राज्य के नेताओं को ही प्राथमिकता देना जरूरी नहीं है। केंद्रीय नेतृत्व राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां निभा रहे नेताओं को भी दूसरे राज्यों से उच्च सदन में भेजने का निर्णय कर सकता है।
हालांकि, इस फैसले को मध्य प्रदेश के स्थानीय नेताओं के संदर्भ में भी देखा जा सकता है। राज्यसभा की एक सीट के लिए राज्य के कई नेताओं के नाम चर्चा में आने की संभावना रहती है। ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व द्वारा किसी वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री को उम्मीदवार बनाना पार्टी के भीतर प्राथमिकताओं और संगठनात्मक रणनीति को लेकर चर्चा का विषय बन सकता है।
हरदीप सिंह पुरी भारतीय विदेश सेवा के पूर्व अधिकारी हैं। राजनयिक के रूप में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया और संयुक्त राष्ट्र में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। बाद में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और भाजपा से जुड़कर राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार में मंत्री रहे हैं और वर्तमान में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र, पेट्रोलियम आपूर्ति, प्राकृतिक गैस और संबंधित नीतिगत मामलों में उनका मंत्रालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
पुरी को उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य के रूप में संसद में भेजा गया था। अब मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उनका संसदीय प्रतिनिधित्व नए राज्य से जारी रहने की संभावना है। उनका राजनीतिक और प्रशासनिक अनुभव इस फैसले को भाजपा के लिए महत्वपूर्ण बनाता है।
भाजपा की ओर से उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब नामांकन और निर्वाचन की औपचारिक प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। नामांकन पत्रों की जांच, नाम वापसी और आवश्यकता पड़ने पर मतदान के बाद ही इस सीट के परिणाम की पुष्टि होगी।
यदि हरदीप सिंह पुरी निर्वाचित होते हैं, तो वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य बनेंगे और उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक रहेगा। इससे संसद के उच्च सदन में उनकी सदस्यता जारी रहेगी और केंद्र सरकार में उनकी भूमिका को लेकर बनी अनिश्चितता भी काफी हद तक दूर हो सकती है।
फिलहाल भाजपा के इस फैसले ने राज्यसभा उपचुनाव को राजनीतिक रूप से चर्चा में ला दिया है। एक ओर एल. मुरुगन तमिलनाडु में संगठनात्मक जिम्मेदारी संभालने की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से उम्मीदवार बनाकर भाजपा ने केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री के संसदीय भविष्य को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
निष्कर्ष: मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट पर हरदीप सिंह पुरी की उम्मीदवारी भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णय है। उत्तर प्रदेश से दोबारा उम्मीदवार नहीं बनाए जाने के बाद उनके संसदीय भविष्य को लेकर जो सवाल उठ रहे थे, उनका समाधान तलाशने की दिशा में यह कदम अहम है। अब सभी की नजर 12 नवंबर को होने वाले उपचुनाव और उसके परिणाम पर रहेगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


