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- 10h ago
बांदा। नगर पालिका परिषद बांदा के वार्ड नंबर 20 स्थित सेढ़ू तलैया मोहल्ले में बिजली विभाग की कथित लापरवाही से बड़ा हादसा होने का खतरा बना हुआ है। मोहल्ले में जर्जर हालत में खड़ा बिजली का एक खंभा अचानक टूटकर एक मकान के छज्जे पर जा गिरा। खंभा गिरने से हुए तेज झटके के कारण आसपास लगे करीब चार से पांच अन्य बिजली के खंभे भी तिरछे हो गए हैं। हादसे के बाद इलाके में बिजली के तार और केबल बेहद नीचे झूल रहे हैं, जिससे राहगीरों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि घटना को 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बिजली विभाग ने क्षतिग्रस्त खंभों को बदलने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अधिकारियों को घटना की जानकारी देने के बावजूद न तो मौके पर नए खंभे पहुंचाए गए और न ही जिम्मेदार अधिकारी मौके का निरीक्षण करने पहुंचे।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका परिषद बांदा के वार्ड नंबर 20 के सेढ़ू तलैया मोहल्ले में रात के समय बिजली का एक जर्जर खंभा अचानक टूट गया। खंभा इतनी तेजी से गिरा कि वह पास स्थित एक मकान के छज्जे पर जा गिरा। गनीमत रही कि घटना के समय कोई व्यक्ति उसकी चपेट में नहीं आया, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था।
खंभा गिरने के साथ ही बिजली की लाइन से जुड़े दूसरे खंभों पर भी जोरदार खिंचाव पड़ा। इसके चलते आसपास के करीब चार से पांच खंभे भी तिरछे हो गए। अब स्थिति यह है कि कई खंभे अपनी जगह से झुक चुके हैं और कभी भी गिर सकते हैं।
स्थानीय लोगों के मुताबिक यह स्थिति किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों के लिए यहां से निकलना जोखिम भरा हो गया है।
हादसे के बाद बिजली की केबल भी काफी नीचे आ गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली की केबल सड़क से मात्र एक से दो मीटर की ऊंचाई पर झूल रही है। ऐसे में बड़े वाहन या अन्य ऊंचे वाहन यहां से गुजरते समय केबल की चपेट में आ सकते हैं।
सबसे गंभीर बात यह बताई जा रही है कि वर्तमान में डाली गई बिजली की केबल आसपास के मकानों को छू रही है। इससे करंट उतरने या किसी व्यक्ति के संपर्क में आने की स्थिति में गंभीर दुर्घटना होने की आशंका बनी हुई है।
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते केबल को सुरक्षित ऊंचाई पर नहीं किया गया और क्षतिग्रस्त खंभों को नहीं बदला गया तो किसी भी समय जान-माल का नुकसान हो सकता है।
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक घटना के बाद बिजली विभाग के अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। विभाग के उच्च अधिकारियों तक भी सूचना पहुंचाई गई, लेकिन इसके बावजूद 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने पर भी समस्या का समाधान नहीं किया गया।
लोगों का कहना है कि दुर्घटना के बाद विभाग को सबसे पहले मौके पर पहुंचकर बिजली की लाइन को सुरक्षित करना चाहिए था। इसके बाद क्षतिग्रस्त खंभों को हटाकर नए खंभे लगाए जाने चाहिए थे, लेकिन विभाग की ओर से ऐसी कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आई।
नागरिकों का आरोप है कि विभागीय अधिकारी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। यदि झुके हुए खंभों में से कोई दूसरा खंभा भी गिर गया या नीचे झूल रही केबल किसी व्यक्ति के संपर्क में आ गई तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
स्थानीय उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नगर पालिका परिषद की ओर से नागरिकों की सुविधा के लिए लगाए गए स्ट्रीट लाइट के खंभों का भी बिजली विभाग द्वारा इस्तेमाल किया गया।
नागरिकों के मुताबिक इन खंभों पर बिजली विभाग ने अपनी मोटी और भारी केबल खींच दीं। उनका कहना है कि जिस व्यवस्था का इस्तेमाल नगर पालिका ने स्ट्रीट लाइट के लिए किया था, उस पर अतिरिक्त भार डालने से खंभों पर दबाव बढ़ गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिजली विभाग ने अपने मूल खंभों की उचित देखरेख और मरम्मत पर ध्यान नहीं दिया। इसके चलते बिजली व्यवस्था के कई पोल जर्जर होते चले गए और अब उनकी स्थिति खतरनाक हो गई है।
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि भारी केबल और बिजली के तारों के भार के चलते नगर पालिका परिषद द्वारा लगाए गए स्ट्रीट लाइट के कई खंभे भी प्रभावित हुए हैं। कुछ खंभे गिर चुके हैं तो कई क्षतिग्रस्त स्थिति में हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार शहर में बिजली के बुनियादी ढांचे की नियमित जांच और रखरखाव बेहद जरूरी है। यदि पुराने और जर्जर खंभों की समय रहते पहचान कर उन्हें बदल दिया जाए तो इस तरह के हादसों को रोका जा सकता है।
लेकिन यहां घटना होने के बाद भी विभागीय कार्रवाई नहीं होने से नागरिकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
मोहल्ले के लोगों का कहना है कि घटना के बाद संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई। बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों को भी स्थिति से अवगत कराया गया। इसके बावजूद न तो नए पोल मौके पर भेजे गए और न ही अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
लोगों का कहना है कि यदि कोई सामान्य तकनीकी शिकायत होती तो विभागीय कार्रवाई में समय लगने की बात समझी जा सकती है, लेकिन यहां मामला सीधे तौर पर लोगों की जान की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
एक खंभा मकान पर गिर चुका है और उसके झटके से अन्य पोल भी तिरछे हो चुके हैं। ऐसे में विभाग की प्राथमिकता तत्काल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना होनी चाहिए थी।
घटना के बाद सेढ़ू तलैया मोहल्ले के लोगों में बिजली विभाग के खिलाफ नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि वे लगातार विभाग से समस्या का समाधान कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मामले को गंभीरता से नहीं ले रहे।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जर्जर खंभों को हटाकर नए खंभे नहीं लगाए गए, झूल रही केबल को सुरक्षित नहीं किया गया और बिजली व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
स्थानीय उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग को दो दिन का समय देते हुए चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि निर्धारित समय के भीतर क्षेत्र की बिजली व्यवस्था से संबंधित सभी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो वे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अनवरत धरना शुरू करेंगे।
नागरिकों ने स्पष्ट किया है कि धरना तब तक जारी रखा जाएगा, जब तक मोहल्ले में जर्जर खंभों को बदलने, झुके हुए पोलों को ठीक करने, नीचे झूल रही बिजली की केबल को सुरक्षित ऊंचाई पर करने और मकानों को छू रही केबल को हटाने की कार्रवाई नहीं की जाती।
स्थानीय लोगों ने आंदोलन की स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी अधिशासी अभियंता, नगरीय विद्युत वितरण तथा एसडीओ तुलसी नगर की होने की बात कही है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बिजली का एक खंभा पहले ही टूटकर मकान के छज्जे पर गिर चुका है। इसके बावजूद विभाग ने बाकी जर्जर और झुके हुए खंभों को बदलने में तत्परता नहीं दिखाई। लोगों का कहना है कि विभाग को किसी बड़े हादसे का इंतजार नहीं करना चाहिए।
नागरिकों का सवाल है कि यदि अगला खंभा किसी राहगीर, बच्चे या वाहन के ऊपर गिर गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? यदि नीचे झूल रही बिजली की केबल किसी व्यक्ति के संपर्क में आ गई तो होने वाले नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
मोहल्ले के लोगों ने प्रशासन और बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। नागरिकों का कहना है कि मौके का निरीक्षण कर सभी जर्जर पोलों की स्थिति का आकलन कराया जाए।
इसके साथ ही—
सेढ़ू तलैया की घटना ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब एक जर्जर बिजली का खंभा टूटकर मकान पर गिर चुका है और उससे जुड़े कई अन्य खंभे भी तिरछे हो गए हैं, तो विभाग ने उन्हें तत्काल बदलने की कार्रवाई क्यों नहीं की?
सड़क के ऊपर कम ऊंचाई पर झूल रही बिजली की केबल और मकान को छू रही लाइन को लेकर भी गंभीर चिंता बनी हुई है। ऐसे में किसी दुर्घटना की प्रतीक्षा करने के बजाय तत्काल सुरक्षा उपाय किए जाने की जरूरत है।
अब देखना यह होगा कि बिजली विभाग स्थानीय लोगों की चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या दो दिन के भीतर सेढ़ू तलैया मोहल्ले में बिजली के जर्जर खंभों और झूलती केबल की समस्या का समाधान हो पाता है या फिर नागरिकों को अपनी मांगों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पर धरना देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।


