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- 12h ago
नई दिल्ली। इस बार लाल किले के मैदान में होने वाली लवकुश रामलीला सिर्फ वहां मौजूद दर्शकों तक सीमित नहीं रहने वाली है। रामलीला की भव्यता, श्रीराम के आदर्शों और भारतीय संस्कृति का संदेश देश-दुनिया के करोड़ों लोगों तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया को बड़ा माध्यम बनाया गया है। लवकुश रामलीला कमेटी ने इसके लिए एक बड़े डिजिटल अभियान की शुरुआत की है, जिसके तहत 100 से अधिक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को अभियान से जोड़ा गया है।
कमेटी का लक्ष्य इस डिजिटल मुहिम के माध्यम से एक करोड़ से अधिक लोगों तक ‘घर-घर राम’ का संदेश पहुंचाना है। इंस्टाग्राम की रील्स से लेकर फेसबुक पोस्ट, यूट्यूब वीडियो और लाइव प्रसारण तक अलग-अलग डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा। अभियान का विशेष फोकस युवाओं और खासकर जनरेशन जेड पर रखा गया है, जो पारंपरिक आयोजनों की तुलना में सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट से अधिक तेजी से जुड़ती है।
11 से 21 अक्टूबर तक आयोजित होने वाली रामलीला को इस बार मैदान से बाहर निकालकर मोबाइल स्क्रीन तक ले जाने की व्यापक तैयारी की जा रही है। कमेटी का मानना है कि डिजिटल माध्यम के जरिए उन लोगों तक भी रामलीला की पहुंच बनाई जा सकती है, जो किसी कारणवश लाल किले के मैदान में पहुंचकर कार्यक्रम नहीं देख पाते।
लवकुश रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार के मुताबिक डिजिटल अभियान में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े 100 से अधिक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स हिस्सा ले रहे हैं। इनमें फैशन डिजाइनर, मेकअप आर्टिस्ट, ब्लॉगर, यूट्यूबर और सोशल मीडिया की लोकप्रिय हस्तियां शामिल हैं।
अभियान से जुड़े कई इंफ्लुएंसर्स के इंस्टाग्राम, फेसबुक और यूट्यूब पर बड़ी संख्या में फॉलोअर्स हैं। कमेटी के अनुसार इनमें कई ऐसे डिजिटल क्रिएटर हैं, जिनके सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर करीब एक लाख से लेकर 10 लाख तक फॉलोअर्स हैं।
ऐसे में अलग-अलग इंफ्लुएंसर्स के व्यक्तिगत डिजिटल नेटवर्क को एक साथ जोड़कर रामलीला के प्रचार का दायरा काफी बड़ा करने की योजना है। कमेटी को उम्मीद है कि इन सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म की संयुक्त पहुंच के जरिए एक करोड़ से अधिक लोगों तक रामलीला का संदेश पहुंचाया जा सकेगा।
इस अभियान में केवल रामलीला के कार्यक्रम की सूचना साझा करने तक सीमित रहने के बजाय सोशल मीडिया के अलग-अलग लोकप्रिय फॉर्मेट का इस्तेमाल किया जाएगा।
इंफ्लुएंसर्स रामलीला से जुड़े—
सोशल मीडिया पर साझा करेंगे।
इससे रामलीला का माहौल केवल कार्यक्रम स्थल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लगातार दिखाई देता रहेगा।
लवकुश रामलीला कमेटी के मुताबिक डिजिटल अभियान का उद्देश्य केवल दर्शकों की संख्या बढ़ाना नहीं है। इसके पीछे नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और श्रीराम के आदर्शों से जोड़ने का प्रयास भी है।
आज की युवा पीढ़ी का एक बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पर अपना काफी समय बिताता है। ऐसे में कमेटी ने इसी डिजिटल माध्यम को सांस्कृतिक संदेश पहुंचाने का जरिया बनाने की रणनीति अपनाई है।
कमेटी अध्यक्ष अर्जुन कुमार का कहना है कि युवाओं, महिलाओं और जनरेशन जेड को भगवान श्रीराम के आदर्शों तथा भारतीय संस्कृति से जोड़ना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।
उनका कहना है कि रामलीला केवल एक धार्मिक या सांस्कृतिक मंचन नहीं, बल्कि भारतीय समाज की परंपरा, जीवन-मूल्यों और संस्कारों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण परंपरा है। इसलिए इसे आधुनिक डिजिटल माध्यमों के जरिए नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है।
डिजिटल अभियान को लेकर सीटीआई चेयरमैन बृजेश गोयल के नेतृत्व में बैठक आयोजित की गई। इसमें 100 से अधिक सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स ने हिस्सा लिया और रामलीला के डिजिटल प्रचार-प्रसार की रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि रामलीला की पहुंच केवल दिल्ली और आसपास के दर्शकों तक न रहे, बल्कि देश के दूसरे हिस्सों और विदेशों में रहने वाले भारतीयों तक भी इसे डिजिटल माध्यम से पहुंचाया जाए।
सोशल मीडिया की वैश्विक पहुंच को देखते हुए कमेटी इस अभियान को केवल स्थानीय प्रचार तक सीमित नहीं रखना चाहती। इंटरनेट के जरिए विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवार भी रामलीला की झलक और मंचन से जुड़ सकेंगे।
अभियान का मूल विचार ‘घर-घर राम’ के संदेश को डिजिटल माध्यम से व्यापक स्तर पर पहुंचाना है।
कमेटी का मानना है कि पहले रामलीला देखने के लिए लोगों को आयोजन स्थल तक जाना पड़ता था, लेकिन सोशल मीडिया ने इस व्यवस्था को काफी बदल दिया है। अब किसी भी बड़े सांस्कृतिक आयोजन की तस्वीरें, वीडियो और लाइव प्रसारण कुछ ही सेकंड में हजारों-लाखों लोगों तक पहुंच सकते हैं।
इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए लवकुश रामलीला कमेटी ने इस बार डिजिटल प्रचार को आयोजन की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
लाल किले के मैदान में होने वाली रामलीला अपने भव्य मंचन के लिए जानी जाती है। इस बार आयोजन से जुड़े दृश्य सोशल मीडिया के जरिए भी लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।
रामलीला के दौरान मंच पर होने वाली गतिविधियों, कलाकारों के प्रदर्शन और प्रमुख प्रसंगों को डिजिटल कंटेंट के रूप में तैयार कर सोशल मीडिया पर साझा किया जाएगा।
इससे ऐसे दर्शक भी रामलीला से जुड़ पाएंगे जो दिल्ली से बाहर रहते हैं या आयोजन स्थल पर पहुंचने में असमर्थ हैं।
डिजिटल अभियान की एक खास बात यह है कि इसमें केवल धार्मिक या राजनीतिक विषयों पर कंटेंट बनाने वाले लोग ही शामिल नहीं हैं। फैशन डिजाइनर, मेकअप आर्टिस्ट, लाइफस्टाइल ब्लॉगर और दूसरे क्षेत्रों से जुड़े डिजिटल क्रिएटर्स को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।
इससे रामलीला की पहुंच अलग-अलग तरह के सोशल मीडिया दर्शकों तक बनाने की कोशिश की जा रही है।
यानी जिस व्यक्ति की सोशल मीडिया रुचि फैशन में है, उसे भी रामलीला का कंटेंट दिखाई देगा और जो मनोरंजन, लाइफस्टाइल या शॉर्ट वीडियो देखता है, उसके डिजिटल फीड में भी रामलीला की झलक पहुंच सकती है।
अभियान से जुड़ने वाले सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स में प्रियंका सक्सेना, निकिता आर्या, श्वेता राजपाल, पूजा दुआ, आशी बजाज, निधि नंदराजोग, अंजलि मठारु, प्रियंका सोबती, गुलफ्शा कुरेशी, अनिशा गुप्ता, वाणी मनचंदा और अनामिका सचदेवा सहित अनेक सोशल मीडिया हस्तियां शामिल हैं।
इन इंफ्लुएंसर्स के माध्यम से अलग-अलग डिजिटल ऑडियंस तक रामलीला का संदेश पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
रामलीला की परंपरा सदियों पुरानी है, लेकिन इसके प्रचार का तरीका समय के साथ लगातार बदलता रहा है। कभी मोहल्लों और बाजारों में पोस्टर-बैनर इसके प्रचार का माध्यम हुआ करते थे, फिर अखबार, टेलीविजन और वेबसाइटों ने इसकी जगह ली। अब सोशल मीडिया प्रचार का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है।
लवकुश रामलीला कमेटी ने इसी बदलाव को ध्यान में रखते हुए परंपरा को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने की कोशिश की है।
कमेटी का कहना है कि लाल किले का मंच अब केवल मैदान में मौजूद दर्शकों के सामने नहीं होगा, बल्कि करोड़ों मोबाइल स्क्रीन पर भी दिखाई देगा।
रामलीला जैसे पारंपरिक आयोजनों के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि नई पीढ़ी को उनसे कैसे जोड़ा जाए। मोबाइल और इंटरनेट के दौर में युवाओं की मनोरंजन की आदतें तेजी से बदली हैं।
ऐसे में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को अभियान में शामिल करना कमेटी की इसी चुनौती का जवाब माना जा रहा है।
युवा जिस भाषा, शैली और माध्यम में डिजिटल कंटेंट देखते हैं, उसी माध्यम से रामलीला की कहानी, पात्रों और संदेश को उनके सामने रखने का प्रयास किया जाएगा।
इसका उद्देश्य यह है कि रामलीला केवल पारंपरिक दर्शकों का आयोजन न रहकर युवाओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बने।
डिजिटल अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू इसकी संभावित वैश्विक पहुंच भी है। सोशल मीडिया की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती। भारत के किसी शहर में तैयार किया गया वीडियो कुछ ही समय में विदेशों में बैठे दर्शकों तक पहुंच सकता है।
कमेटी इसी डिजिटल क्षमता का इस्तेमाल करते हुए विदेशों में रहने वाले भारतीयों और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों तक रामलीला की झलक पहुंचाने की तैयारी कर रही है।
इस तरह लाल किले के मैदान से होने वाला मंचन डिजिटल माध्यम के जरिए देश की सीमाओं से बाहर भी अपनी सांस्कृतिक उपस्थिति दर्ज करा सकता है।
अर्जुन कुमार के अनुसार यह अभियान केवल रामलीला के प्रचार तक सीमित नहीं है। इसके पीछे उद्देश्य परंपरा और आधुनिक डिजिटल दुनिया के बीच एक ऐसा पुल तैयार करना है, जिसके माध्यम से युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति से जुड़ सके।
रामलीला में श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, परिवार, कर्तव्य, त्याग, मर्यादा और संघर्ष से जुड़े प्रसंगों का मंचन होता है। कमेटी का प्रयास है कि इन संदेशों को सोशल मीडिया की तेज और लोकप्रिय भाषा में नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।
इस अवसर पर पवन गुप्ता, सुभाष गोयल, बृजमोहन गोयल, अखिल सिंघल सहित अन्य लोगों ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स का स्वागत किया और डिजिटल अभियान में उनकी भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया।
कमेटी से जुड़े लोगों का कहना है कि इस बार रामलीला को देखने के लिए केवल लाल किले के मैदान तक पहुंचना जरूरी नहीं होगा। डिजिटल माध्यम के जरिए देश के अलग-अलग हिस्सों में बैठे लोग भी इसके साथ जुड़ सकेंगे।
लवकुश रामलीला कमेटी की इस पूरी रणनीति का केंद्र एक बड़ा डिजिटल लक्ष्य है—एक करोड़ से अधिक लोगों तक रामलीला का संदेश पहुंचाना।
यदि अभियान अपने लक्ष्य के मुताबिक आगे बढ़ता है तो रामलीला का प्रचार पारंपरिक पोस्टर, बैनर और स्थानीय प्रचार से आगे निकलकर बड़े डिजिटल नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा।
इससे यह भी संकेत मिलता है कि आने वाले समय में देश के पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए सोशल मीडिया केवल प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि दर्शकों से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।
लाल किले के मैदान में मंच सजेगा, कलाकार रामायण के प्रसंगों को जीवंत करेंगे और दूसरी ओर मोबाइल स्क्रीन पर करोड़ों लोगों तक इसकी झलक पहुंचाने की कोशिश होगी। यानी इस बार लवकुश रामलीला का संदेश मैदान से निकलकर डिजिटल दुनिया में भी अपनी अलग पहचान बनाने की तैयारी में है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


