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- 12h ago
नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष स्वर्गीय अशोक सिंघल की जन्मशती वर्ष के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके जीवन, संघर्ष, संगठनात्मक कार्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण को याद किया। राजधानी स्थित भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंघल का पूरा जीवन संघर्ष, निष्ठा और त्याग से भरा रहा। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा हिंदू समाज, राष्ट्र और सामाजिक जागरण से जुड़े कार्यों के लिए समर्पित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत जय श्री राम के उद्घोष के साथ हुई। समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, महामंडलेश्वर परमानंद गिरि जी महाराज, विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार और अशोक सिंघल फाउंडेशन के संयोजक महेश भागचंदका सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंघल की जन्मशती का हिस्सा बनना उनके लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने कहा कि सिंघल ने विद्यार्थी जीवन से लेकर संघ के स्वयंसेवक, प्रचारक और विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख दायित्व तक हर भूमिका को पूरी निष्ठा से निभाया और जीवन के अंतिम समय तक सक्रिय रहे।
अमित शाह ने अशोक सिंघल के जीवन की विभिन्न भूमिकाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने जीवन के हर पड़ाव पर अपने दायित्व के प्रति समर्पण दिखाया।
विद्यार्थी जीवन से ही उनके भीतर राष्ट्र और समाज के प्रति प्रतिबद्धता दिखाई देती थी। आगे चलकर वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े और प्रचारक के रूप में विभिन्न क्षेत्रों में संगठनात्मक कार्य किया। बाद में विश्व हिंदू परिषद में उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।
अमित शाह के अनुसार, अलग-अलग जिम्मेदारियों के बावजूद उनके जीवन की मूल भावना में कोई बदलाव नहीं आया। राष्ट्र, समाज और अपने विचारों के प्रति प्रतिबद्धता उनके सार्वजनिक जीवन की प्रमुख विशेषता रही।
गृह मंत्री ने अशोक सिंघल के व्यक्तिगत जीवन की सादगी का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सिंघल का जीवन बेहद अनुशासित था और उन्होंने व्यक्तिगत सुख-सुविधाओं को प्राथमिकता नहीं दी।
अमित शाह ने अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए कहा कि जब वह स्वयं कठिन दौर से गुजर रहे थे और उनके खिलाफ तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय मामले दर्ज किए गए थे, तब वह अशोक सिंघल से मिलने जाते थे।
उन्होंने बताया कि सिंघल विश्व हिंदू परिषद के कार्यालय में एक छोटे से कमरे में रहते थे। अमित शाह ने कहा कि उनका रहन-सहन और जीवनशैली इस बात का उदाहरण था कि किस तरह कोई व्यक्ति बड़े संगठनात्मक दायित्वों के बावजूद अत्यंत सादगी के साथ जीवन जी सकता है।
अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंघल के व्यक्तित्व में संघर्ष, निष्ठा और त्याग प्रमुख रूप से दिखाई देते थे। उन्होंने अपने जीवन के लंबे समय को सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों के लिए समर्पित किया।
गृह मंत्री ने कहा कि सिंघल ने अपने लिए किसी व्यक्तिगत उपलब्धि या सुविधा को लक्ष्य नहीं बनाया, बल्कि जिन विचारों और उद्देश्यों में विश्वास किया, उनके लिए लगातार काम करते रहे।
उन्होंने अशोक सिंघल की राष्ट्रभक्ति को उनके व्यक्तित्व की महत्वपूर्ण विशेषता बताया।
अमित शाह ने अपने संबोधन में राम जन्मभूमि आंदोलन को भी प्रमुखता से याद किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण एक लंबे संघर्ष और अनेक लोगों के योगदान का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि हिंदू समाज ने लंबे समय तक राम जन्मभूमि से जुड़े आंदोलन में संघर्ष और बलिदान किया। इस आंदोलन में अशोक सिंघल की भूमिका महत्वपूर्ण रही।
गृह मंत्री ने आंदोलन के दौरान अशोक सिंघल पर हुए लाठीचार्ज का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान सिंघल ने चोटें सहीं और अपना खून भी बहाया।
अमित शाह के अनुसार, अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण का सपना उनके सार्वजनिक जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ था।
अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंघल अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण को लंबे समय से अपने अभियान का महत्वपूर्ण लक्ष्य मानते थे।
उन्होंने बताया कि सिंघल का विचार था कि अयोध्या में मौजूद ऐतिहासिक विवाद को समाप्त करके भव्य मंदिर का निर्माण होना चाहिए।
गृह मंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल की पहचान संघर्षों से जुड़ी रही और वह अपने विचारों को लेकर लगातार सक्रिय रहे।
अमित शाह ने अशोक सिंघल के धार्मिक और वैचारिक दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि वह हिंदू धर्म, वेद और उपनिषदों में पूरे विश्व के कल्याण की भावना देखते थे।
उन्होंने कहा कि सिंघल का मानना था कि भारतीय आध्यात्मिक परंपरा केवल किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि उसमें व्यापक मानव कल्याण का विचार मौजूद है।
गृह मंत्री ने कहा कि सिंघल ने अपने विचारों का प्रचार व्यक्तिगत महिमामंडन के लिए नहीं किया। वह अपने कार्यों को ही अपनी पहचान मानते थे।
अमित शाह ने कहा कि अशोक सिंघल लंबे समय तक बिना किसी व्यक्तिगत प्रचार और महिमामंडन के काम करते रहे।
उन्होंने कहा कि सिंघल के लिए संगठन और समाज का काम व्यक्तिगत प्रसिद्धि से अधिक महत्वपूर्ण था। वह अपने जीवन को जिन उद्देश्यों के लिए समर्पित कर चुके थे, उनके लिए लगातार काम करते रहे।
गृह मंत्री ने कहा कि ऐसे लोगों को याद करना केवल किसी समारोह की औपचारिकता नहीं है, बल्कि उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर भी है।
अमित शाह ने अशोक सिंघल की जन्मशती मनाने को कृतज्ञता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जन्मशती वर्ष केवल किसी महान व्यक्तित्व की स्मृति में आयोजित कार्यक्रमों की श्रृंखला नहीं है, बल्कि समाज के लिए यह सोचने का अवसर भी है कि उस व्यक्ति ने राष्ट्र और समाज के लिए क्या योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि कोई भी समाज यदि अपने नायकों और अपने योगदानकर्ताओं को भूल जाता है तो धीरे-धीरे वैचारिक शून्य पैदा हो सकता है।
गृह मंत्री के अनुसार, अपने इतिहास, परंपरा और महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को याद करना समाज को उसकी जड़ों और सभ्यतागत स्रोतों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भी अशोक सिंघल से जुड़े अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद और संघ के कार्यक्रमों के दौरान उन्हें कई बार अशोक सिंघल से मिलने का अवसर मिला। होसबाले ने सिंघल के व्यक्तित्व के दो अलग-अलग पहलुओं का उल्लेख किया।
उनके अनुसार, अशोक सिंघल के चेहरे पर दृढ़ निश्चय दिखाई देता था, लेकिन उनके हृदय में संतों जैसी कोमलता भी थी।
उन्होंने कहा कि सिंघल जरूरत पड़ने पर कठोर निर्णय लेने में पीछे नहीं हटते थे, लेकिन दूसरों की पीड़ा देखकर वह भावुक भी हो जाते थे।
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि अशोक सिंघल के व्यक्तित्व में दृढ़ता और संवेदनशीलता दोनों का अनोखा मेल था।
एक ओर वह संगठन और आंदोलन से जुड़े कठिन फैसले लेने की क्षमता रखते थे, वहीं दूसरी ओर समाज के लोगों की परेशानियों और पीड़ा को लेकर संवेदनशील रहते थे।
होसबाले ने कहा कि यही गुण उन्हें संगठनात्मक जीवन में अलग पहचान देता था।
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में अशोक सिंघल की भूमिका के बारे में व्यापक रूप से चर्चा हुई है और इस विषय पर बार-बार लिखा और कहा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि सिंघल केवल आंदोलन के सार्वजनिक चेहरों में शामिल नहीं थे, बल्कि लंबे समय तक उससे जुड़े संगठनात्मक कार्यों में भी सक्रिय रहे।
राम जन्मभूमि आंदोलन के अलावा भी समाज से जुड़े अनेक मुद्दों पर उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई।
दत्तात्रेय होसबाले ने अशोक सिंघल के गोसेवा, गोरक्षा और वेद संरक्षण से जुड़े कार्यों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि सिंघल ने वैदिक परंपरा और वेद शिक्षा को लेकर अनेक प्रयास किए। प्रयाग क्षेत्र से वेदशास्त्रियों को जोड़ने और उन्हें संगठित करने के प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया।
होसबाले ने वर्ष 1994 के नासिक कुंभ से जुड़े एक प्रसंग का जिक्र करते हुए कहा कि महिला वेदपाठियों को भी संगठित किया गया था।
दत्तात्रेय होसबाले ने राम जानकी यात्रा से जुड़े एक प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यात्रा के दौरान प्रशासन से सुरक्षा मांगी गई थी, लेकिन जब प्रशासन की ओर से सुरक्षा उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई गई तो युवाओं को स्वयं सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार किया गया।
होसबाले ने कहा कि इस तरह धर्म और सामाजिक कार्यों से जुड़े युवाओं को संगठित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी।
इसी संदर्भ में उन्होंने बजरंग दल की स्थापना और उसके शुरुआती दौर से जुड़े प्रसंग का उल्लेख किया।
होसबाले के अनुसार, अशोक सिंघल युवाओं की ऊर्जा और क्षमता को सामाजिक कार्यों में लगाने के पक्षधर थे।
उनका मानना था कि युवाओं में अनुशासन, संगठन और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होनी चाहिए। विभिन्न अभियानों में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के प्रयास भी इसी सोच का हिस्सा थे।
दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि जब अशोक सिंघल दिल्ली के संघ के प्रांत प्रचारक थे, तब उन्होंने कन्याकुमारी तक यात्रा का कार्यक्रम भी किया था।
उस समय वह विश्व हिंदू परिषद में आए ही थे। होसबाले ने कहा कि सिंघल देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों से संपर्क करने और सामाजिक मुद्दों को समझने में विश्वास रखते थे।
होसबाले ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के नाम से जुड़े एक प्रसंग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब बीएचयू के नाम से ‘हिंदू’ शब्द हटाने की चर्चा सामने आई, तब अशोक सिंघल ने इसका विरोध किया।
उन्होंने कहा कि सिंघल ऐसे मामलों को केवल राजनीतिक या प्रशासनिक विषय के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि उन्हें सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देखते थे।
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के अलावा जब भी समाज से जुड़ा कोई महत्वपूर्ण विषय सामने आया, अशोक सिंघल उस पर सक्रिय रहे।
गोसेवा, गोरक्षा, वेद संरक्षण, धार्मिक शिक्षा और सामाजिक जागरण जैसे विषयों से उनका जुड़ाव रहा।
उनके अनुसार, सिंघल की सक्रियता केवल किसी एक अभियान तक सीमित नहीं थी।
दत्तात्रेय होसबाले ने अशोक सिंघल के व्यक्तित्व को कई विशेषताओं का संगम बताया।
उन्होंने कहा कि सिंघल में व्यक्तित्व, कर्तृत्व और नेतृत्व का त्रिवेणी संगम था। इसके साथ ही उन्होंने उन्हें संगठन, संघर्ष और समन्वय का भी संगम बताया।
होसबाले ने कहा कि अशोक सिंघल के जीवन में सादगी, परिश्रम और अनुशासन भी एक साथ दिखाई देते थे।
उन्होंने कहा कि अशोक सिंघल के साथ काम करने वालों को उनसे दो विशेष गुण सीखने को मिलते थे—निर्भयता और विनम्रता।
कार्यक्रम में संत समाज के प्रतिनिधियों ने भी अशोक सिंघल के जीवन और कार्यों को याद किया। महामंडलेश्वर परमानंद गिरि ने लोगों से धर्म और सामाजिक विषयों के प्रति सजग रहने तथा निरंतर परिश्रम करने का आह्वान किया।
समारोह में मौजूद वक्ताओं ने कहा कि अशोक सिंघल का सार्वजनिक जीवन लंबे समय तक सामाजिक और धार्मिक विषयों से जुड़ा रहा और उनकी जन्मशती नई पीढ़ी को उनके कार्यों को जानने का अवसर प्रदान करती है।
अशोक सिंघल की जन्मशती के अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों में उनके जीवन और कार्यों से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। ऐसे कार्यक्रमों में उनके संगठनात्मक जीवन, सामाजिक कार्यों, धार्मिक गतिविधियों, शिक्षा और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े योगदान को याद किया जा रहा है।
जन्मशती वर्ष के माध्यम से उनके विचारों और कार्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
अशोक सिंघल का सार्वजनिक जीवन कई दशकों तक विभिन्न सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ा रहा। उनके समर्थकों और सहयोगियों के अनुसार, उनके व्यक्तित्व की विशेषता यह थी कि वह कठिन परिस्थितियों में भी अपने उद्देश्यों के प्रति दृढ़ रहे।
अमित शाह और दत्तात्रेय होसबाले के संबोधनों में उनके जीवन के अलग-अलग पहलू सामने आए—कहीं उनका सादगीपूर्ण जीवन दिखाई दिया तो कहीं संगठन के लिए उनका परिश्रम, कहीं राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका का उल्लेख हुआ तो कहीं वेद संरक्षण और युवाओं को संगठित करने के प्रयासों की चर्चा हुई।
भारत मंडपम में आयोजित जन्मशती वर्ष के उद्घाटन समारोह ने अशोक सिंघल के जीवन और कार्यों को एक बार फिर सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने उनके संघर्ष, संगठनात्मक क्षमता, अनुशासन, सामाजिक कार्यों और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों में योगदान को याद किया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर बताया, जबकि दत्तात्रेय होसबाले ने उनके व्यक्तित्व में दृढ़ता और संवेदनशीलता के मेल को रेखांकित किया।
अशोक सिंघल की जन्मशती के अवसर पर आयोजित यह कार्यक्रम उनके समर्थकों के लिए उनके लंबे सार्वजनिक जीवन को याद करने और नई पीढ़ी को उनके कार्यों से परिचित कराने का माध्यम बना।


