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- 12h ago
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चल रही बहस और चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों की खबरों के बीच शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की अहम बैठक हुई। बैठक के बाद चुनाव आयोग ने कई महत्वपूर्ण फैसलों और स्पष्टीकरणों की जानकारी दी।
आयोग ने कहा कि देशव्यापी SIR से जुड़े उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र की व्यवस्था को लेकर उठे सवाल को वह मुख्य मुद्दा नहीं मानता। आयोग के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के फैसले में संबंधित व्यवस्था को बरकरार रखा गया है।
बैठक ऐसे समय हुई जब हाल के दिनों में चुनाव आयोग के भीतर SIR से जुड़े निर्णयों को लेकर कथित मतभेदों की खबरें सामने आई थीं। शनिवार की बैठक और उसके बाद जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण को आयोग की ओर से इन चर्चाओं के जवाब के रूप में भी देखा गया।
आयोग ने SIR प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए कहा कि जिन मतदाताओं को नोटिस दिया गया है, उनके घर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) जाकर आवश्यक दस्तावेज प्राप्त करेंगे। आयोग के अनुसार ऐसे मामलों में आम तौर पर सुनवाई की आवश्यकता नहीं होगी और सुनवाई केवल जरूरत के अनुसार की जाएगी।
इस कदम का उद्देश्य नोटिस पाने वाले मतदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना और उन्हें संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत को कम करना है। खासकर बुजुर्ग, कमजोर वर्गों और ऐसे लोगों के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण हो सकती है जिनके लिए दस्तावेज लेकर कार्यालय तक पहुंचना कठिन होता है।
SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची की जांच और आवश्यक दस्तावेजों की प्रक्रिया के दौरान किसी मतदाता से अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज मांगे जाने की स्थिति में BLO की घर-घर पहुंच को महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है।
चुनाव आयोग ने जिला निर्वाचन अधिकारियों यानी DEO को जरूरत के अनुसार रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए हेल्प डेस्क स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं।
इसका उद्देश्य ऐसे लोगों तक मतदाता सूची से संबंधित सुविधाएं पहुंचाना है, जिनके पास स्थायी निवास या नियमित कार्यालय पहुंच जैसी सुविधाएं नहीं हो सकती हैं। आयोग के इस फैसले से SIR प्रक्रिया में कमजोर और अस्थायी आवास वाले समूहों तक प्रशासनिक सहायता पहुंचाने की कोशिश दिखाई देती है।
फॉर्म-6 नए मतदाता के रूप में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाला आवेदन है। SIR प्रक्रिया के संदर्भ में फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र को लेकर सवाल उठे थे।
चुनाव आयोग ने शनिवार को कहा कि SIR में फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र की व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के समक्ष बनी रही है। सुप्रीम कोर्ट के 2026 के फैसले में भी 24 जून 2025 के SIR आदेश के संदर्भ में नए मतदाताओं के लिए Form 6 के साथ Declaration Form की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है।
आयोग की ओर से इस मुद्दे को लेकर यह स्पष्ट किया गया कि इसे SIR प्रक्रिया के व्यापक संदर्भ से अलग करके मुख्य विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आयोग ने कहा कि बिहार, पश्चिम बंगाल सहित देश के 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद जिन लोगों के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं, वे लगातार अद्यतन यानी continuous updation की प्रक्रिया के तहत संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के पास आवेदन कर सकते हैं।
इसमें वे युवा और पहली बार मतदान करने वाले लोग भी शामिल हैं जो पात्र होने के बावजूद मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज नहीं करा पाए हैं।
आयोग ने मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEO) को इस प्रक्रिया में मतदाताओं को सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। SIR पूरा होने के बाद CEO, DEO और ERO को छूटे हुए और नए पात्र मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
चुनाव आयोग के Voter Services Portal पर भी मतदाता पंजीकरण, मतदाता सूची में नाम खोजने और आवेदन की स्थिति जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में गोवा का उदाहरण भी दिया। आयोग के अनुसार वहां BLO घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं जिनके नाम छूट गए हैं और उनसे फॉर्म-6 भरवाने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है।
आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य केवल सूची से नामों की समीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाना है।
बैठक में ECINet की समीक्षा का फैसला भी लिया गया। इसके लिए एक समिति गठित कर वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (Senior DEC) के साथ स्वतंत्र IIT/IIM विशेषज्ञों को शामिल किए जाने की बात कही गई है।
ECINet चुनावी प्रक्रिया से संबंधित डिजिटल व्यवस्थाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में स्वतंत्र विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ इसकी समीक्षा किए जाने का फैसला तकनीकी और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
इस समीक्षा में सिस्टम की कार्यक्षमता, प्रक्रिया, तकनीकी व्यवस्था और उपयोग से संबंधित पहलुओं का परीक्षण किया जा सकता है।
चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में मतदाता सूची को लेकर दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीखों में भी बदलाव किया है।
उपलब्ध ताजा रिपोर्टों के अनुसार दिल्ली में अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 नवंबर की गई है। संबंधित प्रक्रिया में नोटिस, दावे और आपत्तियों के निस्तारण की समयसीमा में भी बदलाव किया गया है।
इस विस्तार का उद्देश्य मतदाताओं को अपने नाम, पात्रता और मतदाता सूची से जुड़े दावों को दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय उपलब्ध कराना है।
आयोग ने अपनी आंतरिक कार्यप्रणाली से जुड़ा एक महत्वपूर्ण फैसला भी लिया है। अब आयोग की बैठकों में एजेंडा पहले भेजे जाने और बैठक की कार्यवाही जारी किए जाने की व्यवस्था पर जोर दिया गया है।
इससे आयोग की निर्णय प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक स्पष्टता और रिकॉर्ड-रखरखाव को मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
बैठक में अधिकारियों की Annual Performance Appraisal Report (APAR) से संबंधित निर्णय भी लिया गया। आयोग ने कहा कि सभी अधिकारियों की APAR हर वर्ष निर्धारित समयसीमा यानी 31 दिसंबर तक पूरी की जाएगी।
इसका उद्देश्य अधिकारियों की वार्षिक कार्य-प्रगति और प्रदर्शन मूल्यांकन की प्रक्रिया को समयबद्ध रखना है।
चुनाव आयोग ने अधिकारियों की विदेश यात्राओं से संबंधित व्यवस्था में भी बदलाव किया है। अब अधिकारियों की विदेश यात्रा के लिए चुनाव आयोग की मंजूरी आवश्यक होगी।
आयोग ने यह भी कहा कि आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को जारी किए गए सभी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
बैठक के बाद आयोग ने कैबिनेट सचिव को लिखे गए पत्र को लेकर भी स्पष्टीकरण दिया।
आयोग ने कहा कि संबंधित पत्र आईटी नीति से संबंधित नहीं था, बल्कि एक प्रतिनियुक्त अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था। आयोग ने इसे अपने चुनावी या SIR संबंधी नीतिगत फैसलों से अलग बताया।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब हाल की मीडिया रिपोर्टों में आयोग के भीतर कुछ निर्णयों और पत्राचार को लेकर सवाल उठाए गए थे।
आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा कि देशव्यापी SIR से जुड़े उसके सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए। शनिवार की बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों की मौजूदगी में आयोग ने अपने निर्णयों को लेकर यह स्थिति दोहराई।
हाल की मीडिया रिपोर्टों में आयोग के भीतर SIR को लेकर कथित असहमति की चर्चा हुई थी। आयोग का आधिकारिक पक्ष इसके विपरीत है और वह अपने फैसलों को सर्वसम्मत बता रहा है।
SIR को लेकर कानूनी बहस के संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट के 2026 के फैसले में आयोग के 24 जून 2025 के SIR आदेश और उसके उद्देश्यों पर विस्तार से चर्चा की गई है। फैसले में यह भी दर्ज है कि नए मतदाताओं के लिए Form 6 के साथ Declaration Form की आवश्यकता रखी गई थी।
इसलिए फॉर्म-6 से जुड़ी मौजूदा चर्चा को समझने के लिए चुनाव आयोग के मौजूदा स्पष्टीकरण के साथ-साथ अदालत के फैसले और उसके संदर्भ को देखना भी महत्वपूर्ण है।
आयोग ने यह भी संदेश दिया कि SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी पात्र नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने का रास्ता बंद नहीं होता। पात्र युवा, पहली बार वोट देने वाले और ऐसे लोग जिनका नाम किसी कारणवश छूट गया है, निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकते हैं।
इस व्यवस्था का महत्व खास तौर पर उन मतदाताओं के लिए है जो SIR के दौरान किसी कारण से सूची में शामिल नहीं हो सके।
चुनाव आयोग की वेबसाइट और Voter Services Portal के माध्यम से मतदाता पंजीकरण, नाम की जांच, आवेदन की स्थिति और अन्य चुनावी सेवाओं की सुविधाएं उपलब्ध हैं। आयोग के अनुसार डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल मतदाताओं को चुनावी प्रक्रिया से जोड़ने और सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान बनाने के लिए किया जा रहा है।
SIR के दौरान भी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से दावे, आपत्तियां और नाम जोड़ने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
शनिवार की बैठक के फैसलों को देखा जाए तो आयोग ने केवल SIR से जुड़े विवादित मुद्दों पर ही चर्चा नहीं की, बल्कि अपनी आंतरिक प्रशासनिक व्यवस्था, डिजिटल सिस्टम, अधिकारियों के मूल्यांकन, विदेश यात्राओं और बैठक की प्रक्रिया से जुड़े विषयों पर भी निर्णय लिए।
एक तरफ BLO के माध्यम से घर-घर दस्तावेज लेने और हेल्प डेस्क जैसी मतदाता-केंद्रित व्यवस्थाओं पर जोर दिया गया, तो दूसरी तरफ ECINet की स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा और बैठकों के एजेंडे एवं कार्यवाही को लेकर भी व्यवस्था तय की गई।
SIR को लेकर चल रही सार्वजनिक बहस के बीच आयोग ने अपने आधिकारिक बयान में संस्थागत प्रक्रिया और सर्वसम्मति पर जोर दिया। आयोग ने कहा कि देशव्यापी SIR से संबंधित निर्णय सभी आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
इस बीच विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में आयोग के भीतर कथित मतभेदों की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं। इन दावों और आयोग के आधिकारिक पक्ष को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध आधिकारिक स्थिति यह है कि आयोग अपने SIR संबंधी निर्णयों को सर्वसम्मत बता रहा है।
अब SIR के बाद छूटे हुए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, दावों और आपत्तियों के निस्तारण तथा संबंधित राज्यों में संशोधित मतदाता सूचियों की प्रक्रिया पर ध्यान रहेगा।
दिल्ली और महाराष्ट्र में बढ़ाई गई समयसीमा के कारण मतदाताओं को अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त अवसर मिलेगा। वहीं अन्य राज्यों में SIR पूरा होने के बाद विशेष अभियान के जरिए नए और छूटे हुए मतदाताओं को सूची में शामिल करने पर जोर रहेगा।
शनिवार की बैठक में चुनाव आयोग ने SIR को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने के साथ-साथ मतदाताओं की सुविधा और प्रशासनिक पारदर्शिता से जुड़े कई फैसले किए। फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र को लेकर आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए व्यवस्था को बरकरार बताया, जबकि नोटिस पाने वाले मतदाताओं के घर BLO भेजने, कमजोर वर्गों के लिए हेल्प डेस्क, ECINet की विशेषज्ञों से समीक्षा और दावे-आपत्तियों की समयसीमा बढ़ाने जैसे कदम प्रक्रिया को अधिक सुलभ बनाने पर केंद्रित हैं।
आयोग ने कैबिनेट सचिव को भेजे पत्र को भी SIR या IT नीति संबंधी नीतिगत निर्णय से अलग बताया और दोहराया कि देशव्यापी SIR से जुड़े फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए थे।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


