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- 12h ago
नई दिल्ली। बाजार में बिकने वाला नकली सामान केवल किसी उपभोक्ता की जेब को नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि धीरे-धीरे पूरी आर्थिक व्यवस्था के उस भरोसे को कमजोर करता है, जिस पर निर्माता, कारोबारी, निवेशक, उपभोक्ता और नियामक संस्थाएं निर्भर रहती हैं। तस्करी और काउंटरफीट कारोबार को इसी व्यापक संदर्भ में देखते हुए पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि अवैध कारोबार के खिलाफ लड़ाई वास्तव में अर्थव्यवस्था के भरोसे, बाजार की विश्वसनीयता और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था की रक्षा की लड़ाई है।
नई दिल्ली में आयोजित फिक्की-कैस्केड के ‘मासकरैड 2026’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रामनाथ कोविंद ने कहा कि बदलती तकनीक और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के दौर में अवैध कारोबार का स्वरूप भी तेजी से बदल रहा है। अपराधी नेटवर्क अब केवल सीमाओं के पार माल की तस्करी तक सीमित नहीं हैं। वे आधुनिक लॉजिस्टिक्स, डिजिटल प्लेटफॉर्म, वित्तीय चैनलों, ई-कॉमर्स और जटिल आपूर्ति शृंखलाओं का इस्तेमाल करके अवैध गतिविधियों को वैध कारोबार के बीच छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यही कारण है कि काउंटरफीट और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को केवल जब्ती और गिरफ्तारी तक सीमित रखने के बजाय पूरे नेटवर्क को समझने और उसकी आर्थिक संरचना पर प्रहार करने की जरूरत है।
रामनाथ कोविंद ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यापार व्यवस्था में आपूर्ति शृंखलाएं कई देशों, कंपनियों और संस्थाओं से होकर गुजरती हैं। ऐसी स्थिति में पूरी आपूर्ति शृंखला की सुरक्षा उसकी सबसे कमजोर कड़ी जितनी ही मजबूत होती है।
यदि किसी एक स्थान पर निगरानी कमजोर है, किसी सीमा बिंदु पर नियंत्रण प्रभावी नहीं है, किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विक्रेता की पर्याप्त जांच नहीं होती या वित्तीय लेनदेन की निगरानी में कमी रहती है, तो अवैध कारोबारी उस कमजोरी का फायदा उठा सकते हैं।
उन्होंने इस चुनौती से निपटने के लिए खुफिया सूचनाओं के आदान-प्रदान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक तकनीक और विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण बताया।
उनके अनुसार, किसी एक विभाग, संस्था या देश की कार्रवाई से सीमा पार फैले अवैध कारोबार के नेटवर्क को पूरी तरह समाप्त करना कठिन है। इसके लिए साझा रणनीति और निरंतर सहयोग की आवश्यकता है।
मासकरैड 2026 की थीम ‘एक दुनिया, एक लड़ाई: सामूहिक कार्रवाई के माध्यम से जालसाजी और तस्करी को खत्म करना’ का उल्लेख करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि अवैध व्यापार की चुनौती सीमाओं में बंधी नहीं है।
उन्होंने भारत की वैश्विक सोच ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ को ‘एक दुनिया, एक लड़ाई’ की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि जब समस्या का स्वरूप वैश्विक है तो उसके समाधान के लिए भी देशों और संस्थाओं को मिलकर काम करना होगा।
आज किसी देश में तैयार किया गया नकली उत्पाद दूसरे देश में पैक होकर तीसरे देश के डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उपभोक्ता तक पहुंच सकता है। इसी तरह भुगतान किसी अलग वित्तीय चैनल से होकर गुजर सकता है। इसलिए अवैध कारोबार की पूरी श्रृंखला को समझना और उसके विभिन्न हिस्सों के बीच संबंधों की पहचान करना आवश्यक है।
रामनाथ कोविंद ने कहा कि भारत आज विनिर्माण, बुनियादी ढांचे, तकनीक, उद्यमिता और वैश्विक व्यापार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारतीय कंपनियां वैश्विक वैल्यू चेन का हिस्सा बन रही हैं और डिजिटल अर्थव्यवस्था नए अवसर पैदा कर रही है।
ऐसे समय में बाजार की विश्वसनीयता बनाए रखना और वैध कारोबार को अवैध प्रतिस्पर्धा से बचाना बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने भारत की विकास यात्रा से जुड़ी तीन व्यापक आकांक्षाओं का उल्लेख किया। इनमें भारत का वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली भूमिका की ओर बढ़ना, देश को उद्यमिता-विनिर्माण और नवाचार का प्रमुख केंद्र बनाना तथा जागरूक और सशक्त उपभोक्ता तैयार करना शामिल है।
उनके अनुसार, नकली और तस्करी का कारोबार इन सभी लक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है।
काउंटरफीट उत्पादों की समस्या का एक बड़ा असर वैध उद्योग पर पड़ता है। कोई कंपनी उत्पाद तैयार करने, गुणवत्ता नियंत्रण, अनुसंधान, डिजाइन, ब्रांड निर्माण और कानूनी अनुपालन पर निवेश करती है। इसके विपरीत नकली उत्पाद बनाने वाला नेटवर्क इन लागतों से बचकर कम कीमत पर बाजार में सामान उतार सकता है।
इससे वैध कारोबारी के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल प्रभावित होता है। यदि उपभोक्ता असली और नकली उत्पाद में अंतर नहीं कर पाता, तो वह कीमत के आधार पर निर्णय ले सकता है। इससे ब्रांड की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ वैध कंपनियों के निवेश और नवाचार पर भी असर पड़ सकता है।
लंबी अवधि में यह स्थिति उस कारोबारी माहौल के लिए चुनौती बन सकती है जिसमें कंपनियां गुणवत्ता और अनुसंधान पर निवेश करती हैं।
नकली उत्पादों का प्रभाव केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता। उत्पाद की प्रकृति के आधार पर यह उपभोक्ता की सुरक्षा से भी जुड़ सकता है।
दवाओं, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, कॉस्मेटिक उत्पादों, खाद्य सामग्री, खिलौनों और अन्य संवेदनशील श्रेणियों में नकली उत्पादों की मौजूदगी अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकती है।
उपभोक्ता के लिए सबसे बड़ी समस्या यह हो सकती है कि पैकेजिंग, लोगो और लेबल की नकल इतनी बारीकी से की जाए कि सामान्य जांच में असली और नकली उत्पाद में अंतर करना कठिन हो जाए।
इसी कारण काउंटरफीट कारोबार पर नियंत्रण को उपभोक्ता जागरूकता, बाजार निगरानी और तकनीकी जांच से जोड़कर देखने की जरूरत है।
रामनाथ कोविंद ने अवैध कारोबार से मुकाबले में तकनीक की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि डेटा एनालिटिक्स संदिग्ध गतिविधियों के पैटर्न की पहचान करने में मदद कर सकता है, जबकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जोखिमों का अधिक स्मार्ट तरीके से आकलन कर सकता है।
आज बड़ी मात्रा में व्यापारिक और लॉजिस्टिक डेटा उपलब्ध है। यदि इस डेटा का प्रभावी विश्लेषण किया जाए तो असामान्य लेनदेन, संदिग्ध व्यापार मार्ग, बार-बार बदलते विक्रेता, असामान्य मूल्य, संदिग्ध आयात-निर्यात पैटर्न और अन्य जोखिम संकेतों की पहचान की जा सकती है।
हालांकि पूर्व राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक अकेले इस समस्या का समाधान नहीं कर सकती। तकनीकी प्रणालियों के साथ एजेंसियों के बीच सहयोग, मानव विशेषज्ञता और अंतरराष्ट्रीय सूचना साझेदारी भी जरूरी होगी।
ई-कॉमर्स और डिजिटल मार्केटप्लेस ने उपभोक्ताओं को बड़ी संख्या में उत्पादों तक पहुंच दी है। लेकिन इसी के साथ नकली सामान बेचने वाले नेटवर्क के लिए भी नए रास्ते खुले हैं।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर विक्रेता, आपूर्ति का स्रोत और वास्तविक निर्माता की पहचान हर मामले में उपभोक्ता के लिए स्पष्ट नहीं होती। नकली उत्पादों की तस्वीर, विवरण और ब्रांडिंग असली उत्पादों जैसी दिखाई जा सकती है।
ऐसे में डिजिटल प्लेटफॉर्म, ब्रांड मालिकों, प्रवर्तन एजेंसियों और भुगतान प्रणाली से जुड़े संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक हो जाता है।
सीबीआईसी के चेयरमैन विवेक चतुर्वेदी ने कहा कि अवैध अर्थव्यवस्था ने वैध व्यापार के समानांतर अपना नेटवर्क विकसित करने की क्षमता हासिल कर ली है। इसमें लॉजिस्टिक्स, दस्तावेज, वित्तीय चैनल और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि अवैध व्यापार के खिलाफ कार्रवाई को केवल राजस्व नुकसान की भरपाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। यह बाजार की शुचिता, उपभोक्ता सुरक्षा, वैध उद्योग और राष्ट्रीय आर्थिक हितों की रक्षा से जुड़ा विषय है।
चतुर्वेदी के अनुसार, सीमा शुल्क विभाग जोखिम वाले माल की पहचान और जांच के लिए गैर-घुसपैठ निरीक्षण तकनीकों को मजबूत कर रहा है।
उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में डीआरआई ने 3,000 से अधिक वाणिज्यिक मामले दर्ज किए, जिनमें करीब 4,000 करोड़ रुपये के शुल्क, निर्यात और प्रोत्साहन से संबंधित रकम शामिल थी।
उन्होंने कहा कि सीमा शुल्क की सफलता का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जाना चाहिए कि कितनी मात्रा में माल जब्त किया गया। यह भी देखना होगा कि अवैध माल को बाजार में प्रवेश करने से कितनी हद तक रोका गया।
अवैध व्यापार से सरकार को कर और सीमा शुल्क से संबंधित राजस्व का नुकसान हो सकता है। लेकिन इसके प्रभाव इससे कहीं व्यापक हो सकते हैं।
जब नकली या तस्करी का सामान वैध उत्पादों के साथ बाजार में पहुंचता है तो वैध कारोबार के लिए प्रतिस्पर्धा का माहौल प्रभावित हो सकता है। इससे निवेश के फैसले, रोजगार, ब्रांड वैल्यू और नवाचार पर भी असर पड़ सकता है।
इसके अलावा, यदि किसी बाजार में नकली उत्पादों की मौजूदगी लगातार बढ़ती है तो उपभोक्ता के लिए यह तय करना कठिन हो सकता है कि वह जिस उत्पाद को खरीद रहा है वह वास्तव में वैध स्रोत से आया है या नहीं।
इस प्रकार बाजार का भरोसा कमजोर होना अवैध व्यापार की सबसे महत्वपूर्ण अप्रत्यक्ष लागतों में से एक हो सकता है।
फिक्की कैस्केड के चेयरमैन अनिल राजपूत ने कहा कि अवैध व्यापार को केवल राजस्व के नुकसान के नजरिए से देखना पर्याप्त नहीं है। यह सुरक्षा, सुशासन और वैश्विक स्थिरता से जुड़ा विषय भी है।
उन्होंने सामूहिक कार्रवाई के लिए यूनाइट की अवधारणा पर जोर दिया, जिसमें एकीकृत खुफिया, नेटवर्क प्रवर्तन, नवाचार, विश्वसनीय व्यापार और सशक्त नागरिक ढांचे को महत्व दिया गया।
उनके अनुसार, अवैध नेटवर्क जितने अधिक संगठित और तकनीक-सक्षम होते जा रहे हैं, उनका मुकाबला करने के लिए संस्थाओं को भी उसी स्तर पर अपनी क्षमता विकसित करनी होगी।
फिक्की के महासचिव अनंत स्वरूप ने कहा कि अवैध नेटवर्क अब तकनीक-सक्षम और सीमाहीन होते जा रहे हैं। इनका असर केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है।
अवैध कारोबार निवेश, रोजगार, उपभोक्ता सुरक्षा, नवाचार और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकता है। यदि वैध कंपनियों को लगातार ऐसे उत्पादों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़े जिन पर समान नियामकीय और उत्पादन लागत लागू नहीं होती, तो कारोबारी माहौल पर असर पड़ सकता है।
भारत जैसे तेजी से बढ़ते विनिर्माण बाजार के लिए यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वैश्विक कंपनियां उत्पादन और निवेश के फैसले लेते समय बाजार की पारदर्शिता और नियमों के प्रभावी अनुपालन को भी ध्यान में रखती हैं।
फिक्की कैस्केड के सदस्य कपिल हाथी ने कहा कि नकली उत्पाद तैयार करने वालों की तकनीकी क्षमता तेजी से बढ़ी है। आज कई मामलों में नकली उत्पादों की पैकेजिंग और बाहरी स्वरूप इस तरह तैयार किए जाते हैं कि सामान्य उपभोक्ता के लिए उनकी पहचान करना मुश्किल हो सकता है।
ऐसे में उन तकनीकों में निवेश की आवश्यकता है जो मानव आंख से मुश्किल से पहचाने जाने वाले नकली उत्पादों की भी पहचान कर सकें।
डिजिटल ट्रैकिंग, उत्पाद प्रमाणीकरण, विशिष्ट कोड, डेटा आधारित निगरानी और आधुनिक जांच प्रणालियां इस दिशा में उपयोगी हो सकती हैं।
अवैध कारोबार के खिलाफ लड़ाई में प्रवर्तन एजेंसियों और कंपनियों के साथ उपभोक्ता भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संदिग्ध कीमत, असामान्य पैकेजिंग, गलत वर्तनी, संदिग्ध विक्रेता, अस्पष्ट बिल या उत्पाद की गुणवत्ता में असामान्यता जैसे संकेतों पर सावधानी बरतना जरूरी है।
उपभोक्ताओं को अधिकृत विक्रेताओं से खरीदारी करने, बिल लेने और जरूरत पड़ने पर उत्पाद की प्रामाणिकता जांचने के लिए उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करने के प्रति जागरूक करना भी इस लड़ाई का हिस्सा है।
हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक उपभोक्ता पर पूरी जिम्मेदारी डालना पर्याप्त नहीं है। बाजार निगरानी और प्रभावी प्रवर्तन भी उतना ही आवश्यक है।
आज उत्पादन प्रक्रिया कई देशों में बंटी हुई है। कच्चा माल एक देश से आता है, निर्माण दूसरे देश में हो सकता है, पैकेजिंग किसी तीसरे स्थान पर और अंतिम बिक्री किसी चौथे बाजार में।
इस जटिल व्यवस्था में अवैध कारोबारी छोटी-सी कमजोरी का फायदा उठाकर नकली उत्पाद को वैध आपूर्ति शृंखला में शामिल करने का प्रयास कर सकते हैं।
इसलिए सीमा शुल्क, पुलिस, आर्थिक अपराध जांच एजेंसियों, कर विभागों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और उद्योग संगठनों के बीच समन्वय को मजबूत करना आवश्यक माना जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान फिक्की-केपीएमजी की रिपोर्ट ‘भारत में अवैध व्यापार: आर्थिक असर, कानून लागू करने की चुनौतियां और आगे का रास्ता’ का विमोचन भी किया गया।
रिपोर्ट का फोकस भारत में अवैध व्यापार से जुड़े आर्थिक प्रभावों, प्रवर्तन की चुनौतियों और आगे की रणनीति पर रहा। कार्यक्रम में मौजूद विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि अवैध कारोबार का मुकाबला करने के लिए केवल कानून और प्रवर्तन पर्याप्त नहीं होंगे। इसके लिए उद्योग, सरकार, तकनीकी कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और उपभोक्ताओं के बीच सहयोग भी आवश्यक होगा।
मासकरैड 2026 में सामने आए विचारों का व्यापक संदेश यह रहा कि अवैध कारोबार का स्वरूप बदल रहा है और उसके मुकाबले की रणनीति को भी उसी गति से बदलना होगा।
पहले जहां तस्करी मुख्य रूप से भौतिक सीमाओं और परिवहन मार्गों से जुड़ी चुनौती थी, वहीं अब डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन मार्केटप्लेस, आधुनिक लॉजिस्टिक्स और वित्तीय तकनीक ने इसकी जटिलता बढ़ा दी है।
इसलिए भविष्य की कार्रवाई में पारंपरिक जांच के साथ डेटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल ट्रैकिंग और रियल टाइम सूचना साझाकरण जैसे साधनों की भूमिका बढ़ सकती है।
पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के संबोधन का केंद्रीय संदेश यही रहा कि नकली और तस्करी के कारोबार का नुकसान किसी एक व्यक्ति, कंपनी या सरकारी विभाग तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव उस भरोसे पर पड़ता है जो एक स्वस्थ बाजार की बुनियाद है।
जब उपभोक्ता को भरोसा होता है कि उसे जो उत्पाद बेचा जा रहा है वह वास्तविक है, निर्माता को भरोसा होता है कि उसके उत्पाद के साथ अवैध प्रतिस्पर्धा नहीं होगी और निवेशक को भरोसा होता है कि बाजार में नियम समान रूप से लागू होंगे, तभी आर्थिक गतिविधियां मजबूत आधार पर आगे बढ़ती हैं।
इसलिए काउंटरफीट और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को आर्थिक अपराध नियंत्रण के साथ-साथ बाजार की विश्वसनीयता, उपभोक्ता हित, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा, नवाचार और राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा के व्यापक ढांचे में देखने की जरूरत है।
मासकरैड 2026 में वक्ताओं ने अलग-अलग पहलुओं पर जोर देते हुए एक बात को प्रमुखता से सामने रखा कि अवैध व्यापार का नेटवर्क जितना संगठित और सीमाहीन होता जा रहा है, उसका मुकाबला भी उतने ही व्यापक स्तर पर करना होगा।
सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, अंतरराष्ट्रीय सूचना साझेदारी, उद्योग की सक्रिय भागीदारी, आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्लेटफॉर्म की जवाबदेही और उपभोक्ता जागरूकता—इन सभी को साथ लेकर चलने से अवैध कारोबार के खिलाफ कार्रवाई को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। नकली उत्पाद के खिलाफ कार्रवाई का अंतिम लक्ष्य केवल माल जब्त करना नहीं, बल्कि ऐसे बाजार का निर्माण करना है जहां उपभोक्ता को उत्पाद की प्रामाणिकता पर भरोसा हो, वैध उद्योग को निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा मिले और निवेश एवं नवाचार के लिए सुरक्षित कारोबारी वातावरण बना रहे। यही आर्थिक व्यवस्था में उस भरोसे की रक्षा का आधार है, जिसकी ओर पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने संबोधन में ध्यान आकर्षित किया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


