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- 12h ago
नई दिल्ली। विश्व हिंदू परिषद के प्रमुख नेताओं में रहे स्वर्गीय अशोक सिंघल की जन्मशती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें विशेष रूप से याद किया। प्रधानमंत्री ने अशोक सिंघल के जीवन, उनके संगठनात्मक कार्य, सामाजिक सरोकारों, शिक्षा के प्रति लगाव, संगीत प्रेम और राम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका को याद करते हुए एक विस्तृत श्रद्धांजलि लेख लिखा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि अशोक सिंघल का व्यक्तित्व प्रभावशाली होने के साथ-साथ सादगी, दृढ़ विचारों और समर्पण का उदाहरण था। उन्होंने आध्यात्मिक निष्ठा, संगठनात्मक क्षमता और सामाजिक एकता के प्रति प्रतिबद्धता को अपने जीवन का हिस्सा बनाया। पीएम मोदी ने कहा कि उन्हें लंबे समय तक अशोक सिंघल के साथ काम करने, उनसे सीखने और संवाद करने का अवसर मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अशोक सिंघल से जुड़े अपने शुरुआती अनुभवों को भी साझा किया। उन्होंने वर्ष 1981 की एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय वह एक युवा कार्यकर्ता के रूप में संगठन की जिम्मेदारियां निभा रहे थे।
इसी दौरान उन्हें अशोक सिंघल का हाथ से लिखा हुआ एक पत्र मिला था। पत्र में एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम की जानकारी देने के साथ उन्हें कुछ जिम्मेदारियां भी सौंपी गई थीं। प्रधानमंत्री ने कहा कि उस समय अशोक सिंघल से हाथ से लिखा पत्र मिलना उनके लिए बेहद विशेष और यादगार अनुभव था।
पीएम मोदी के मुताबिक, आने वाले दशकों में उन्होंने अशोक सिंघल को लगातार सक्रिय देखा। वह संगठनात्मक जिम्मेदारियों के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्राएं करते थे और कठिन परिस्थितियों में भी कार्यकर्ताओं से संपर्क बनाए रखते थे।
प्रधानमंत्री ने अशोक सिंघल की यात्राओं और सामाजिक कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह देश के दूर-दराज के क्षेत्रों में जाते थे। गुजरात के आदिवासी इलाकों से उनका विशेष जुड़ाव था।
वह समाज के वंचित वर्गों और अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के लिए लगातार विचार करते रहते थे। पीएम मोदी ने कहा कि जब भी देश में प्राकृतिक आपदा आती थी, अशोक सिंघल प्रभावित लोगों की सहायता के लिए सक्रिय हो जाते थे या कार्यकर्ताओं को राहत कार्यों के लिए दिशा-निर्देश देते थे।
वर्ष 2001 के कच्छ भूकंप के बाद का अनुभव भी प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से याद किया। उन्होंने इसे अशोक सिंघल के साथ अपने अनुभवों का अविस्मरणीय हिस्सा बताया।
अशोक सिंघल का सार्वजनिक जीवन राम जन्मभूमि आंदोलन से भी गहराई से जुड़ा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने लेख में कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन में अशोक सिंघल की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किए बिना उनके बारे में कोई भी चर्चा अधूरी रहेगी।
प्रधानमंत्री ने वर्ष 1991 की बोट क्लब रैली में अशोक सिंघल के संबोधन का उल्लेख किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान घायल और खून से लथपथ सिंघल की चर्चित तस्वीर को भी याद किया।
पीएम मोदी ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के पीछे लंबे समय तक चले आंदोलन और उसमें योगदान देने वाले अनेक लोगों का समर्पण रहा है। उन्होंने अशोक सिंघल को उन प्रमुख व्यक्तित्वों में शामिल किया जिन्होंने इस उद्देश्य के लिए अपना जीवन समर्पित किया।
प्रधानमंत्री ने लिखा कि यदि अशोक सिंघल आज जीवित होते और अयोध्या में राम मंदिर को आकार लेते देखते, तो उन्हें अत्यंत प्रसन्नता होती।
प्रधानमंत्री ने अशोक सिंघल के सामाजिक विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि वह समाज में समरसता और भाईचारे को महत्वपूर्ण मानते थे। उनके अनुसार समाज के प्रत्येक व्यक्ति को समान सम्मान और गरिमा मिलनी चाहिए।
पीएम मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की पहली ईंट रखने के संदर्भ में अशोक सिंघल के विचारों का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सिंघल चाहते थे कि यह कार्य बिहार से जुड़े विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता और वंचित वर्ग से आने वाले कामेश्वर चौपाल के हाथों हो।
इस प्रसंग के माध्यम से प्रधानमंत्री ने अशोक सिंघल के सामाजिक समरसता संबंधी दृष्टिकोण को रेखांकित किया। काशी में धर्म संसद के दौरान डोम राजा को सम्मानित किए जाने और विभिन्न सामुदायिक अभियानों में उनके साथ काम करने का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया।
अशोक सिंघल को संगठनात्मक कार्यों के लिए भी जाना जाता था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्होंने दशकों तक अशोक सिंघल को लगातार काम करते देखा।
उनके लिए संगठन केवल बैठकों और कार्यक्रमों तक सीमित नहीं था। वह कार्यकर्ताओं के साथ संपर्क, देश के अलग-अलग हिस्सों में यात्रा और सामाजिक विषयों पर निरंतर काम करने को महत्व देते थे।
पीएम मोदी ने कहा कि अशोक सिंघल ने दृढ़ता और मेहनत के साथ विभिन्न संस्थानों और आंदोलनों को मजबूत करने में योगदान दिया। उनकी कार्यशैली में अनुशासन और कर्तव्यबोध प्रमुख था।
अशोक सिंघल का जन्म 27 सितंबर 1926 को हुआ था। प्रधानमंत्री ने उनके पारिवारिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जन्म एक प्रतिष्ठित और समृद्ध परिवार में हुआ था।
उनके पिता महावीर सिंघल प्रशासनिक सेवा से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। उनके भाई बी. पी. सिंघल पुलिस सेवा में रहे और बाद में सांसद भी बने। एक अन्य भाई वी. पी. सिंघल त्रिपुरा के मुख्य सचिव रहे।
परिवार के अन्य सदस्यों ने भी वाणिज्य और कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में सफलता हासिल की। इसके बावजूद अशोक सिंघल ने अपने जीवन के लिए एक अलग रास्ता चुना।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बचपन से ही उनका झुकाव भारत के पुनरुत्थान और देश की जनता में गौरव की भावना जगाने की दिशा में था। इसी भावना ने उन्हें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जोड़ा।
प्रधानमंत्री मोदी के अनुसार, अशोक सिंघल ने संगठन में आने के बाद अपने सामने आने वाली जिम्मेदारियों को अनुशासन और कर्तव्यबोध के साथ स्वीकार किया।
उन्होंने संगठनात्मक कार्यों के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में काम किया और कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर संवाद बनाए रखा। कठिन परिस्थितियों में भी उनके काम करने की शैली में निरंतरता दिखाई देती थी।
उनका जीवन लंबे समय तक सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों से जुड़ा रहा।
अशोक सिंघल के व्यक्तित्व का एक महत्वपूर्ण पक्ष शिक्षा के प्रति उनका लगाव भी था। प्रधानमंत्री मोदी ने विशेष रूप से वैदिक शिक्षा के क्षेत्र में उनकी रुचि का उल्लेख किया।
उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की थी और विद्यार्थी जीवन में प्रतिभाशाली माने जाते थे। राष्ट्र निर्माण के साथ-साथ शिक्षा को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुंचाने के प्रयासों में भी उनकी रुचि रही।
दूर-दराज के गांवों और आदिवासी क्षेत्रों में शिक्षा के विस्तार से जुड़ी 'एकल विद्यालय' पहल के साथ उनके जुड़ाव का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया।
प्रधानमंत्री ने अशोक सिंघल के प्रयागराज से जुड़े जीवन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि सिंघल प्रयागराज में पले-बढ़े और संगम के किनारे बैठना उन्हें पसंद था।
आध्यात्मिकता और सामाजिक कार्य के साथ उनका संगीत से भी गहरा संबंध था। वह केवल संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय व्यक्ति नहीं थे, बल्कि संगीत में भी उनकी विशेष रुचि थी।
पीएम मोदी ने अपने लेख में अशोक सिंघल के संगीत प्रेम से जुड़े कई संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि सिंघल बहुत सुंदर गाते थे।
नागपुर की बैठकों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल वहां अक्सर 'एकल गीत' गाया करते थे। उनका गायन बैठकों में मौजूद लोगों को प्रभावित करता था और वातावरण में नई ऊर्जा पैदा करता था।
वर्ष 2015 में उनके 90वें जन्मदिन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया। इस दौरान अशोक सिंघल द्वारा 'हे मातृभूमि मेरी, हे पितृभूमि मेरी' गीत गाए जाने का प्रसंग सामने आया था।
अशोक सिंघल के सामाजिक सरोकारों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं के समय उनके सक्रिय होने की बात कही।
पीएम मोदी ने कहा कि जब भी देश में कोई बड़ी प्राकृतिक आपदा आती थी, सिंघल प्रभावित क्षेत्रों में सहायता पहुंचाने के लिए कार्यकर्ताओं को सक्रिय करते थे। उनका ध्यान केवल संगठनात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं था, बल्कि जरूरतमंद लोगों की सहायता पर भी रहता था।
कच्छ के 2001 के भूकंप के बाद का अनुभव प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में याद किया।
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में अशोक सिंघल के उस पक्ष को भी रेखांकित किया, जिसमें वह समाज के वंचित वर्गों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए काम करने पर जोर देते थे।
गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों की उनकी यात्राओं का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सिंघल लगातार यह सोचते रहते थे कि समाज के उन लोगों के लिए और क्या किया जा सकता है, जो विकास की मुख्यधारा से दूर हैं।
यह पक्ष उनके सामाजिक कार्यों की एक महत्वपूर्ण विशेषता के रूप में प्रधानमंत्री के लेख में सामने आया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अशोक सिंघल के जीवन को राष्ट्र के प्रति समर्पण से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने अपने जीवन में देश के उत्कर्ष का सपना देखा।
पीएम मोदी के मुताबिक, दूसरों के लिए जीने की भावना ने उन्हें संगठनात्मक और सामाजिक कार्यों की ओर प्रेरित किया। उन्होंने अपने जीवन में आने वाली विभिन्न जिम्मेदारियों को स्वीकार किया और लंबे समय तक सक्रिय रहकर उन्हें निभाया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अशोक सिंघल के आदर्श आज भी प्रेरणा देने वाले हैं।
अशोक सिंघल की जन्मशती के अवसर पर प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी से उनके जीवन और कार्यों को जानने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अशोक सिंघल के व्यक्तित्व और उनके सार्वजनिक जीवन से परिचित कराया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने युवाओं से राष्ट्र और देशवासियों के लिए अशोक सिंघल के सपनों को आगे बढ़ाने के संकल्प को दोहराने की अपील की।
अशोक सिंघल की जन्मशती ने उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और विभिन्न क्षेत्रों में किए गए कार्यों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिखे गए लेख में उनके साथ बिताए व्यक्तिगत अनुभवों से लेकर संगठनात्मक कार्य, सामाजिक समरसता, शिक्षा, संगीत और राम जन्मभूमि आंदोलन तक उनके जीवन के अलग-अलग पहलुओं का उल्लेख किया गया।
प्रधानमंत्री ने अपने संस्मरणों के माध्यम से यह बताया कि अशोक सिंघल का व्यक्तित्व केवल एक संगठनात्मक भूमिका तक सीमित नहीं था। उनके जीवन में राष्ट्र निर्माण, सामाजिक कार्य, शिक्षा, आध्यात्मिकता और संगीत जैसे अनेक आयाम दिखाई देते थे।
जन्मशती के अवसर पर प्रधानमंत्री का यह लेख अशोक सिंघल के सार्वजनिक जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को याद करने का माध्यम बना है। इसमें उनके साथ प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत अनुभवों और उनके लंबे सामाजिक-संगठनात्मक जीवन को प्रमुखता से रखा गया है।


