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नई दिल्ली। शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले एस.डी. पब्लिक स्कूल को नया नेतृत्व मिला है। विद्यालय की प्रबंध समिति ने संजीव सिंघल को सर्वसम्मति से विद्यालय का नया अध्यक्ष निर्वाचित किया है। उनके अध्यक्ष बनने पर प्रबंध समिति के सदस्यों और विद्यालय से जुड़े लोगों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि उनके सक्षम नेतृत्व, दूरदर्शिता और मार्गदर्शन में विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा।
समिति के सदस्यों के अनुसार संजीव सिंघल के सामने विद्यालय की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ बदलते समय की शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप संस्थान को और मजबूत करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी। विद्यालय की गौरवशाली विरासत को आधुनिक शिक्षा, अनुशासन, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ जोड़ना नए नेतृत्व की प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
विद्यालय की प्रबंध समिति के प्रबंधक एवं सचिव प्रदीप शरण, सदस्य धीरजधर गुप्ता, सुभाष गोयल तथा पूर्व निगम पार्षद अशोक जैन ने विद्यालय के इतिहास और इसकी गौरवशाली यात्रा पर प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि एस.डी. पब्लिक स्कूल की यात्रा वर्ष 1917 में शुरू हुई थी। उस समय शिक्षा का प्रसार आज की तरह व्यापक नहीं था। समाज के अधिक से अधिक लोगों तक शिक्षा पहुंचाने और ज्ञान की ज्योति प्रज्वलित करने के उद्देश्य से लाला लक्ष्मण दास जी ने चीराखाना, चांदनी चौक में विद्यालय की नींव रखी थी।
एक छोटे से शैक्षिक प्रयास के रूप में शुरू हुई यह संस्था समय के साथ लगातार आगे बढ़ती गई और आज एक लंबे शैक्षिक सफर की पहचान बन चुकी है।
प्रबंध समिति के सदस्यों ने कहा कि लाला लक्ष्मण दास जी द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में रोपी गई छोटी-सी पौध ने वर्षों के समर्पण, परिश्रम और सामाजिक सहयोग के चलते विशाल वृक्ष का रूप ले लिया।
विद्यालय ने अपनी लंबी यात्रा के दौरान हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान की है। हालांकि संस्था का उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देना नहीं रहा, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन, नैतिक मूल्यों और जिम्मेदार नागरिकता की भावना से जोड़ना भी इसकी परंपरा का हिस्सा रहा है।
यही वजह है कि विद्यालय की पहचान केवल एक शिक्षण संस्थान के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा और संस्कार की परंपरा को आगे बढ़ाने वाली संस्था के रूप में बनी है।
विद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में कई पीढ़ियों की भूमिका रही है। समिति के सदस्यों ने बताया कि लाला लक्ष्मण दास जी के निधन के बाद उनके पुत्र लाला बृजभूषण शरण जी ने इस शैक्षिक एवं सामाजिक मिशन को आगे बढ़ाया।
उन्होंने संस्था की शैक्षिक परंपरा को मजबूत करने और समाज के बीच शिक्षा के उद्देश्य को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इसके बाद इस विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अगली पीढ़ी ने संभाली। वर्तमान में प्रदीप शरण जी अपने दादा द्वारा शुरू की गई इस गौरवशाली परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने में जुटे हैं।
इस तरह संस्था की यात्रा केवल वर्षों की संख्या नहीं, बल्कि पीढ़ी-दर-पीढ़ी शिक्षा के प्रति समर्पण की कहानी भी है।
प्रबंध समिति द्वारा संजीव सिंघल को सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना जाना उनके प्रति समिति के सदस्यों के विश्वास को दर्शाता है। समिति ने उम्मीद जताई कि उनका अनुभव, नेतृत्व क्षमता और दूरदर्शी सोच विद्यालय के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
नए अध्यक्ष के सामने विद्यालय की स्थापित पहचान को बनाए रखने के साथ-साथ उसे भविष्य की शैक्षिक चुनौतियों के अनुरूप विकसित करने की जिम्मेदारी होगी।
शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी बदलाव, विद्यार्थियों की बदलती जरूरतें और आधुनिक शिक्षण पद्धतियों के बीच पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखना आज विद्यालयों के सामने बड़ी चुनौती है। ऐसे समय में एस.डी. पब्लिक स्कूल के नए नेतृत्व से भी इसी संतुलन को मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।
विद्यालय की प्रबंध समिति ने स्पष्ट किया कि संस्था की पहचान शिक्षा के साथ संस्कारों के लिए भी रही है। आने वाले समय में आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक जीवन-मूल्यों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा।
विद्यालय का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल परीक्षा और प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाना भी है।
अनुशासन, जिम्मेदारी, नैतिकता, सामाजिक संवेदनशीलता और दूसरों के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों को शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। नए अध्यक्ष के नेतृत्व में इन मूल्यों को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने की उम्मीद जताई गई है।
इस अवसर पर विद्यालय के पूर्व अध्यक्ष स्वर्गीय श्री भुवन मोहन जी को भी श्रद्धापूर्वक याद किया गया। समिति के सदस्यों ने कहा कि विद्यालय के विकास और प्रगति में उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा।
उन्होंने संस्था के लिए जिस समर्पण और सेवाभाव के साथ कार्य किया, उसे विद्यालय परिवार लंबे समय तक सम्मान के साथ याद करता रहेगा।
उनकी सेवाओं को याद करते हुए समिति ने कहा कि संस्था की वर्तमान स्थिति और उसकी उपलब्धियों के पीछे पूर्व पदाधिकारियों एवं सदस्यों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।
एस.डी. पब्लिक स्कूल का इतिहास एक सदी से अधिक पुराना है। ऐसे संस्थान की जिम्मेदारी संभालना केवल प्रशासनिक पद संभालने तक सीमित नहीं होता। इसके साथ संस्था की परंपराओं, मूल्यों और प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी भी जुड़ी होती है।
संजीव सिंघल के अध्यक्ष चुने जाने के बाद विद्यालय परिवार को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में संस्था शिक्षा के क्षेत्र में नई योजनाओं और नई सोच के साथ आगे बढ़ेगी।
समिति के अनुसार विद्यालय की पुरानी उपलब्धियों को आधार बनाकर भविष्य के लिए नए लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे।
विद्यालय की स्थापना का उद्देश्य केवल शिक्षा का प्रसार नहीं था, बल्कि समाज में ज्ञान की ज्योति जलाना भी था। इसी मूल भावना को आगे बढ़ाते हुए संस्था से जुड़े लोगों ने सामाजिक सरोकारों को भी महत्वपूर्ण बताया।
शिक्षा को समाज के विकास का सबसे प्रभावी माध्यम माना जाता है। विद्यालयों से निकलने वाले विद्यार्थी जब जिम्मेदार नागरिक बनते हैं तो उसका प्रभाव पूरे समाज पर पड़ता है। इसलिए विद्यार्थियों को सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना भी विद्यालय की भूमिका का अहम हिस्सा माना जाता है।
प्रबंध समिति ने विश्वास जताया कि संजीव सिंघल के नेतृत्व में विद्यालय अपनी समृद्ध विरासत को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल करेगा।
समिति का मानना है कि बदलते शैक्षिक परिवेश में विद्यालय को निरंतर नए प्रयोगों, बेहतर शिक्षण पद्धतियों और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर ध्यान देना होगा।
इसके साथ ही संस्था की पुरानी पहचान और मूल्यों को बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण होगा।
आज शिक्षा का अर्थ केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं रह गया है। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, रचनात्मक क्षमता, आत्मविश्वास, अनुशासन और सामाजिक समझ को भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
एस.डी. पब्लिक स्कूल की लंबे समय से चली आ रही परंपरा में शिक्षा और संस्कार दोनों को महत्व दिया जाता रहा है। ऐसे में नए अध्यक्ष के सामने विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शैक्षिक और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों को और मजबूत करने का अवसर भी होगा।
1917 में शुरू हुई संस्था ने समय के अनेक बदलाव देखे हैं। शिक्षा के तरीकों में बदलाव आया, तकनीक ने स्कूलों की कार्यप्रणाली को प्रभावित किया और विद्यार्थियों की जरूरतें भी बदलीं। इसके बावजूद विद्यालय की मूल भावना—शिक्षा और संस्कार—को बनाए रखना संस्था की बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
अब संजीव सिंघल के रूप में विद्यालय को नया अध्यक्ष मिला है। ऐसे में विद्यालय परिवार को उम्मीद है कि पुरानी विरासत और नई सोच के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करते हुए संस्था आने वाले वर्षों में और मजबूत पहचान बनाएगी।
प्रबंध समिति ने संजीव सिंघल को नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में विद्यालय शिक्षा, संस्कार और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा।
समिति ने कहा कि विद्यालय की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाना सामूहिक जिम्मेदारी है और नए नेतृत्व के साथ संस्था इसी दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
एस.डी. पब्लिक स्कूल की कहानी एक विद्यालय की कहानी से कहीं अधिक है। यह उस विचार की कहानी है जिसमें शिक्षा को समाज के विकास और ज्ञान के प्रसार का माध्यम माना गया। वर्ष 1917 में लाला लक्ष्मण दास जी द्वारा शुरू किया गया प्रयास आज एक लंबी शैक्षिक विरासत में बदल चुका है।
अब संजीव सिंघल के अध्यक्ष चुने जाने के साथ विद्यालय एक नए अध्याय में प्रवेश कर रहा है। समिति को उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में संस्था अपनी गौरवशाली परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक शिक्षा की आवश्यकताओं के अनुरूप आगे बढ़ेगी और आने वाली पीढ़ियों को शिक्षा के साथ संस्कार एवं जीवन-मूल्यों से जोड़ने का अपना मिशन जारी रखेगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


