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- 12h ago
नई दिल्ली। भारतीय विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने वाले प्रख्यात वैज्ञानिक प्रो. जीपी तलवार के 100वें जन्मवर्ष के अवसर पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली में विशेष समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, चिकित्सा विशेषज्ञों, प्रो. तलवार के पूर्व विद्यार्थियों, सहयोगियों और विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े प्रमुख लोगों ने भाग लिया।
समारोह के दौरान वक्ताओं ने प्रो. तलवार के छह दशक से अधिक लंबे वैज्ञानिक सफर, उनके शोध कार्यों और संस्थान निर्माण में योगदान को याद किया। वैज्ञानिकों ने कहा कि प्रो. तलवार ने केवल शोध के क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल नहीं कीं, बल्कि उन्होंने भारत में आधुनिक प्रतिरक्षा विज्ञान की मजबूत नींव तैयार करने और नई पीढ़ी के वैज्ञानिकों को तैयार करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में प्रो. तलवार के जीवन, वैज्ञानिक उपलब्धियों और शोध यात्रा पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया। इस पुस्तक में उनके वैज्ञानिक जीवन के विभिन्न पहलुओं के साथ देश और दुनिया के वैज्ञानिकों, सहयोगियों तथा उनके विद्यार्थियों के संदेशों को शामिल किया गया है।
समारोह को संबोधित करते हुए नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने प्रो. तलवार के लंबे वैज्ञानिक योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि प्रो. तलवार का वैज्ञानिक जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने भारत में अनुसंधान की संस्कृति को मजबूत करने और संस्थानों के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रो. तलवार ने फ्रांस स्थित इंस्टीट्यूट पाश्चर में नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक जैक मोनोड के निर्देशन में पीएचडी की। इसके बाद जर्मनी में उन्हें हम्बोल्ट फेलोशिप मिली। विदेशों में उच्चस्तरीय वैज्ञानिक प्रशिक्षण और शोध के अवसर मिलने के बावजूद उन्होंने भारत लौटकर देश में वैज्ञानिक अनुसंधान को आगे बढ़ाने का रास्ता चुना।
वक्ताओं ने कहा कि उस दौर में भारत में वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए संसाधन और सुविधाएं आज की तुलना में सीमित थीं। इसके बावजूद प्रो. तलवार ने देश में रहकर शोध को आगे बढ़ाया और वैज्ञानिक संस्थानों को मजबूत करने में योगदान दिया।
प्रो. तलवार के प्रमुख वैज्ञानिक योगदानों में कुष्ठ रोग के खिलाफ आईसीएमआर-डब्ल्यूएचओ वैक्सीन के विकास से जुड़ा शोध विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। प्रतिरक्षा विज्ञान के क्षेत्र में उनके काम ने कुष्ठ रोग जैसी गंभीर सामाजिक और स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के वैज्ञानिक प्रयासों को नई दिशा देने में योगदान किया।
कुष्ठ रोग से जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों और मरीजों के प्रति भेदभाव को देखते हुए इसके उपचार और रोकथाम के लिए वैज्ञानिक समाधान विकसित करना लंबे समय से स्वास्थ्य अनुसंधान की महत्वपूर्ण प्राथमिकता रही है।
प्रो. तलवार ने प्रतिरक्षा प्रणाली की कार्यप्रणाली और संक्रमण के प्रति शरीर की प्रतिक्रिया को समझने के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण शोध किया। उनके काम ने भारत में इम्यूनोलॉजी को एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक विषय के रूप में विकसित करने में योगदान दिया।
प्रो. तलवार का शोध कार्य केवल संक्रामक रोगों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने परिवार नियोजन के लिए वैक्सीन विकसित करने की अवधारणा पर भी काम किया।
इस क्षेत्र में उनका शोध प्रजनन स्वास्थ्य और प्रतिरक्षा विज्ञान के बीच संबंधों पर आधारित था। उनके वैज्ञानिक कार्यों ने यह दिखाने का प्रयास किया कि प्रतिरक्षा प्रणाली की विशिष्ट प्रतिक्रियाओं को समझकर प्रजनन स्वास्थ्य से जुड़े नए वैज्ञानिक समाधान तलाशे जा सकते हैं।
इस शोध के कारण प्रो. तलवार का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिरक्षा विज्ञान और प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी चर्चा में आया।
प्रो. तलवार का एम्स से रिश्ता बेहद महत्वपूर्ण रहा। वे एम्स के संस्थापक संकाय सदस्यों में शामिल रहे और संस्थान में बायोकैमिस्ट्री विभाग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
एम्स की स्थापना के शुरुआती दौर में देश में विश्वस्तरीय चिकित्सा शिक्षा, शोध और स्वास्थ्य सेवाओं की आधारभूत संरचना तैयार करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में प्रो. तलवार जैसे वैज्ञानिकों ने संस्थान की शोध संस्कृति को विकसित करने में योगदान दिया।
उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान को चिकित्सा शिक्षा और मरीजों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया। यही कारण है कि उनके योगदान को केवल एक विभाग या प्रयोगशाला तक सीमित करके नहीं देखा जाता।
दिल्ली में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी (एनआईआई) की स्थापना के पीछे भी प्रो. तलवार की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती है। भारत में प्रतिरक्षा विज्ञान के क्षेत्र में एक समर्पित संस्थान की आवश्यकता को देखते हुए उन्होंने संस्थान निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
एनआईआई के विकास ने देश में इम्यूनोलॉजी, संक्रामक रोगों, वैक्सीन और जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान के क्षेत्र में वैज्ञानिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई।
प्रो. तलवार की सोच में शोध के साथ-साथ वैज्ञानिक प्रतिभाओं को तैयार करने पर भी विशेष जोर रहा। यही वजह है कि उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए अनेक वैज्ञानिक बाद में देश और विदेश के प्रतिष्ठित शोध संस्थानों तथा जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे।
प्रो. तलवार ने वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाने के साथ संस्थागत ढांचे के विकास में भी योगदान दिया। तलवार रिसर्च फाउंडेशन और एम्स में आईसीएमआर-डब्ल्यूएचओ रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर जैसी पहलों से उनका नाम जुड़ा रहा।
इन संस्थानों और केंद्रों के माध्यम से भारत में प्रतिरक्षा विज्ञान के क्षेत्र में शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया। देश और विदेश के वैज्ञानिकों के बीच सहयोग तथा ज्ञान के आदान-प्रदान को भी इससे गति मिली।
वक्ताओं ने कहा कि किसी वैज्ञानिक की उपलब्धियों का वास्तविक प्रभाव केवल उसके प्रकाशित शोधपत्रों या पुरस्कारों से नहीं मापा जाता, बल्कि यह भी देखा जाता है कि उसने अपने बाद कितने वैज्ञानिकों और संस्थानों को आगे बढ़ने का अवसर दिया। इस दृष्टि से प्रो. तलवार की विरासत काफी व्यापक है।
प्रो. तलवार के पूर्व विद्यार्थियों और सहयोगियों ने उनके वैज्ञानिक मार्गदर्शन को याद करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा शोधकर्ताओं को सवाल पूछने, प्रमाण के आधार पर निष्कर्ष निकालने और कठिन वैज्ञानिक समस्याओं पर लगातार काम करने के लिए प्रेरित किया।
उनके मार्गदर्शन में प्रशिक्षित वैज्ञानिक आज देश और विदेश के विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों और जैव-प्रौद्योगिकी कंपनियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा रहे हैं।
समारोह में शामिल पूर्व विद्यार्थियों के लिए यह अवसर केवल अपने गुरु को याद करने का नहीं बल्कि उनके साथ बिताए वैज्ञानिक जीवन के अनुभवों को साझा करने का भी रहा।
वैज्ञानिक क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने प्रो. जीपी तलवार को पद्म भूषण से सम्मानित किया। फ्रांस सरकार ने भी उन्हें ‘ऑफिसिएर डी ला लेजिओं द ऑनर’ से सम्मानित किया।
समारोह में वक्ताओं ने उनके अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका और यूरोप के वैज्ञानिक समुदाय से जुड़े सदस्यों ने उन्हें कई बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया है।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के एक वर्ग ने केंद्र सरकार से प्रो. तलवार को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किए जाने की मांग भी रखी। यह मांग कार्यक्रम में वक्ताओं और उपस्थित लोगों द्वारा व्यक्त की गई।
प्रो. तलवार की वैज्ञानिक यात्रा ऐसे समय में आगे बढ़ी जब भारत वैश्विक वैज्ञानिक समुदाय में अपनी पहचान मजबूत करने की प्रक्रिया में था। विदेशों में प्रशिक्षण और शोध का अनुभव हासिल करने के बाद भारत लौटकर उन्होंने देश में वैज्ञानिक संस्थानों के विकास को प्राथमिकता दी।
उनका काम इस बात का उदाहरण माना गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर की वैज्ञानिक शिक्षा और अनुभव का इस्तेमाल देश में शोध संस्थानों और वैज्ञानिक प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
उनकी वैज्ञानिक सोच में बुनियादी शोध और उसके संभावित सामाजिक प्रभाव दोनों को महत्व दिया गया।
समारोह समिति के संयोजक और कॉफी टेबल बुक के संपादक डॉ. नरेंद्र मल्होत्रा ने बताया कि कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रो. तलवार के देश-विदेश में फैले पूर्व विद्यार्थियों और सहयोगियों ने स्वैच्छिक रूप से योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि प्रो. तलवार से जुड़े वैज्ञानिकों और विद्यार्थियों के लिए उनका 100वां जन्मवर्ष एक विशेष अवसर है। इसीलिए अलग-अलग संस्थानों और देशों में कार्यरत उनके पूर्व विद्यार्थियों तथा सहयोगियों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया गया।
डॉ. मल्होत्रा ने प्रो. तलवार की पत्नी रक्षा तलवार के प्रति भी आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रो. तलवार के लंबे वैज्ञानिक सफर में परिवार के सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि प्रो. तलवार की सबसे बड़ी विरासत केवल उनके शोध कार्य नहीं हैं, बल्कि उनके द्वारा तैयार की गई वैज्ञानिक पीढ़ियां और विकसित किए गए संस्थान भी हैं।
वैज्ञानिकों का मानना है कि भारत में अनुसंधान को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ाने के लिए ऐसी वैज्ञानिक परंपरा को मजबूत करना जरूरी है, जिसमें मौलिक शोध, संस्थागत सहयोग, प्रतिभा विकास और समाजोपयोगी विज्ञान को समान महत्व दिया जाए।
प्रो. तलवार का शताब्दी वर्ष इसी वैज्ञानिक विरासत को याद करने और नई पीढ़ी को अनुसंधान के प्रति प्रेरित करने का अवसर बन रहा है।
एम्स की प्रोफेसर और मीडिया सलाहकार डॉ. रिमा दादा ने समारोह के समापन पर मीडिया का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रो. तलवार का शताब्दी वर्ष भारतीय विज्ञान में उनके दीर्घकालिक योगदान को याद करने के साथ नई पीढ़ी को उनके वैज्ञानिक जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर भी है।
उन्होंने कहा कि प्रो. तलवार का जीवन यह संदेश देता है कि वैज्ञानिक उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सम्मान तक सीमित नहीं होती। शोध से संस्थान बनते हैं, संस्थानों से वैज्ञानिक तैयार होते हैं और वैज्ञानिकों की नई पीढ़ियां देश की शोध परंपरा को आगे बढ़ाती हैं।
एम्स में आयोजित यह समारोह इसी लंबी वैज्ञानिक परंपरा को सम्मान देने का अवसर बना। देश और विदेश से आए वैज्ञानिकों, पूर्व विद्यार्थियों और सहयोगियों ने प्रो. जीपी तलवार के योगदान को याद करते हुए उनकी वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।
प्रो. जीपी तलवार का वैज्ञानिक सफर भारतीय चिकित्सा अनुसंधान के विकास के कई महत्वपूर्ण चरणों से जुड़ा रहा। प्रतिरक्षा विज्ञान से लेकर वैक्सीन अनुसंधान, प्रजनन स्वास्थ्य, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और संस्थान निर्माण तक उनके कार्यों का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है।
उनका शताब्दी वर्ष ऐसे समय में मनाया जा रहा है जब भारत विज्ञान, जैव-प्रौद्योगिकी और चिकित्सा अनुसंधान के क्षेत्र में अपनी वैश्विक भूमिका को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में उनके वैज्ञानिक जीवन और संस्थान निर्माण के अनुभव नई पीढ़ी के शोधकर्ताओं के लिए संदर्भ और प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


