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- 12h ago
नई दिल्ली। लालकिला मैदान स्थित माधवदास पार्क में श्री धार्मिक लीला कमेटी की रामलीला का शुभारंभ विधि-विधान के साथ गणेश पूजन और गणेश वंदना से हुआ। भगवान गणेश की आराधना के साथ शुरू हुए इस धार्मिक आयोजन में भक्तिमय वातावरण देखने को मिला। गणपति बप्पा के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। कार्यक्रम के दौरान भगवान गणेश की एकदंत कथा का मंचन भी किया गया, जिसके माध्यम से कलाकारों ने श्रद्धालुओं को प्रथम पूज्य गणपति के जीवन से जुड़ी पौराणिक कथा से परिचित कराया।
रामलीला के शुभारंभ अवसर पर कमेटी के पदाधिकारियों, कलाकारों और श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर आयोजन के निर्विघ्न और सफल संपन्न होने की कामना की। धार्मिक अनुष्ठान के साथ शुरू हुए इस कार्यक्रम ने रामलीला के आगामी मंचनों के लिए आध्यात्मिक वातावरण तैयार किया।
रामलीला मंचन से पहले आयोजित गणेश पूजन में श्री धार्मिक लीला कमेटी के पदाधिकारियों और कलाकारों ने भाग लिया। परंपरानुसार भगवान गणेश की पूजा कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने गणपति बप्पा का स्मरण करते हुए सुख-समृद्धि और मंगल की कामना की।
कमेटी के महासचिव धीरजधर गुप्ता, सचिव प्रदीप शरण और प्रवक्ता रवि जैन ने बताया कि रामलीला के प्रारंभ से पहले गणेश पूजन आयोजित करना धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य माना जाता है। इसी मान्यता के अनुरूप पूजा-अर्चना कर रामलीला के सफल आयोजन की प्रार्थना की गई।
कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक आयोजन की परंपरा और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया।
गणेश पूजन के साथ भगवान गणेश की एकदंत कथा का मंचन कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। कलाकारों ने पौराणिक प्रसंग को मंच के माध्यम से प्रस्तुत कर श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के स्वरूप और उनसे जुड़ी धार्मिक मान्यताओं से अवगत कराया।
हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, शुभारंभ और मंगल का प्रतीक माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य से पहले उनकी पूजा करने की परंपरा प्रचलित है। इसी धार्मिक आस्था को केंद्र में रखते हुए रामलीला की शुरुआत गणपति वंदना से की गई।
कथा मंचन के दौरान श्रद्धालु भक्ति भाव में लीन नजर आए। गणपति बप्पा के जयकारों और धार्मिक वातावरण ने कार्यक्रम को विशेष आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।
धार्मिक कार्यक्रम की अगली कड़ी में कमेटी की ओर से गुरुजी के सत्संग का आयोजन किया गया। सत्संग में श्रद्धा, भक्ति और भारतीय धार्मिक परंपराओं के महत्व पर प्रकाश डाला गया। उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म और आध्यात्मिकता से जुड़े मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने का संदेश दिया गया।
सत्संग के माध्यम से धार्मिक आयोजनों के सामाजिक और आध्यात्मिक पक्ष को भी सामने रखा गया। ऐसे कार्यक्रम लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ आपसी सद्भाव, नैतिकता और सेवा भावना को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
श्री धार्मिक लीला कमेटी के पदाधिकारियों ने कहा कि रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है।
भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित रामलीला में सत्य, धर्म, कर्तव्य, त्याग, आदर्श और मर्यादा जैसे मूल्यों का संदेश मिलता है। रामायण के प्रसंगों के माध्यम से दर्शकों को पारिवारिक संबंधों, सामाजिक जिम्मेदारियों और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है।
पदाधिकारियों के अनुसार, ऐसे सांस्कृतिक आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय धार्मिक विरासत से परिचित कराने के साथ ही समाज में संस्कारों और नैतिक मूल्यों के महत्व को मजबूत करते हैं।
लालकिला मैदान स्थित माधवदास पार्क में गणेश पूजन के साथ रामलीला का शुभारंभ धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा के संगम के रूप में सामने आया। पूजा-अर्चना, एकदंत कथा के मंचन और गुरुजी के सत्संग ने कार्यक्रम को आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान किया।
श्री धार्मिक लीला कमेटी के इस आयोजन के माध्यम से भगवान गणेश की आराधना के साथ भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश दिया गया। रामलीला के आगामी मंचनों में रामायण के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं और दर्शकों को धर्म, सत्य तथा मर्यादा के महत्व से परिचित कराने की परंपरा आगे बढ़ेगी।
इस प्रकार गणेश वंदना के साथ शुरू हुई रामलीला ने भारतीय धार्मिक विरासत, सामूहिक आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समाज की प्रतिबद्धता को एक बार फिर रेखांकित किया।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


