यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के युवाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार ने एक नई पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर प्रदेश के सभी 75 जिलों में सरदार वल्लभभाई पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन विकसित करने की घोषणा की। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत युवाओं को उनकी रुचि, योग्यता और क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण देने के साथ-साथ रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की जाएगी।
शनिवार को राजधानी लखनऊ स्थित लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने 1,725 करोड़ रुपये की लागत वाली 'सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना' का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा और क्षमता की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उनकी क्षमता को सही दिशा देने, आधुनिक तकनीक से प्रशिक्षित करने और उन्हें रोजगार के उपयुक्त अवसरों से जोड़ने की है। इसी उद्देश्य से प्रदेश के प्रत्येक जिले में कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्र विकसित किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया कि योजना के पहले चरण में गोरखपुर, लखनऊ, कानपुर, झांसी और गौतमबुद्धनगर में सरदार वल्लभभाई पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन विकसित किए जाएंगे। इन केंद्रों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त बनाया जाएगा, जहां युवाओं को प्रशिक्षण से लेकर रोजगार प्राप्त करने तक की सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।
पहले चरण के बाद इस योजना का विस्तार प्रदेश के सभी 18 मंडल मुख्यालयों तक किया जाएगा। इसके बाद प्रदेश के प्रत्येक जिले में ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि सभी 18 मंडल मुख्यालयों के लिए धनराशि की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। जहां जमीन उपलब्ध होगी, वहां निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। सरकार का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में प्रदेश के सभी 75 जिलों को इस रोजगार व्यवस्था से जोड़ना है।
इस योजना की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह होगी कि युवाओं को रोजगार प्राप्त करने के लिए अलग-अलग कार्यालयों और संस्थानों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन में युवाओं का पंजीकरण किया जाएगा। इसके बाद उनकी शैक्षिक योग्यता, रुचि, कौशल और रोजगार की आवश्यकता का आकलन कर उन्हें उपयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा।
प्रशिक्षण पूरा होने के बाद युवाओं को संबंधित उद्योगों, कंपनियों, फैक्ट्रियों, संस्थानों और अन्य रोजगार क्षेत्रों में अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक केंद्र पर एक समर्पित प्लेसमेंट सेल स्थापित किया जाएगा। यह सेल प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं और रोजगार देने वाली कंपनियों के बीच समन्वय स्थापित करेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई युवा हाईस्कूल पास है और रोजगार की तलाश कर रहा है, तो उसका पंजीकरण कराकर उसकी रुचि और योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद उसे संबंधित संस्थान, फैक्ट्री अथवा अन्य रोजगार क्षेत्र में प्लेसमेंट से जोड़ने की व्यवस्था की जाएगी।
योजना के माध्यम से युवाओं को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ व्यावहारिक और तकनीकी कौशल से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य युवाओं को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित करना है, ताकि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें रोजगार प्राप्त करने में आसानी हो।
आज के समय में औद्योगिक क्षेत्र, विनिर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, ऑटोमोबाइल, स्वास्थ्य सेवाओं, तकनीकी सेवाओं और अन्य क्षेत्रों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में कौशल आधारित प्रशिक्षण युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खोल सकता है।
सरकार की इस पहल के तहत युवाओं को उनकी क्षमता के अनुरूप प्रशिक्षण देने और उद्योगों की मांग के अनुसार उन्हें तैयार करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे कंपनियों को प्रशिक्षित कर्मचारी मिलने और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि इन केंद्रों पर दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले युवाओं की सुविधा का ध्यान रखा जाएगा। इसके लिए हॉस्टल की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों के युवाओं को प्रशिक्षण प्राप्त करने में परेशानी न हो।
अक्सर आर्थिक और भौगोलिक कारणों से ग्रामीण क्षेत्रों के युवा बड़े शहरों में जाकर प्रशिक्षण नहीं ले पाते हैं। रहने, खाने और आने-जाने का खर्च भी उनके लिए चुनौती बनता है। ऐसे में हॉस्टल जैसी सुविधाएं उपलब्ध होने से अधिक युवाओं को प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जुड़ने का अवसर मिल सकता है।
सरकार का उद्देश्य केवल बड़े शहरों के युवाओं तक रोजगार की सुविधाएं सीमित रखना नहीं है, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण, पिछड़े और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं को भी कौशल विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
इस योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू विदेशों में रोजगार के अवसर तलाशने वाले युवाओं से भी जुड़ा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो युवा विदेशों में काम करना चाहते हैं, उन्हें संबंधित देश की भाषा, कार्यप्रणाली और वहां की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि यदि नर्सिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कोई युवा जापान या जर्मनी में रोजगार प्राप्त करना चाहता है, तो उसे संबंधित देश की भाषा सिखाने के साथ-साथ वहां की आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके बाद संबंधित दूतावास के सहयोग से उसके रोजगार की व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।
इस पहल के माध्यम से युवाओं को अंतरराष्ट्रीय रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। विदेश में काम करने के इच्छुक युवाओं को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि भाषा, कार्य संस्कृति और संबंधित क्षेत्र की व्यावसायिक जरूरतों की जानकारी भी उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
इससे विदेशों में रोजगार की तलाश करने वाले युवाओं को बेहतर तैयारी का अवसर मिल सकता है। खासकर नर्सिंग, स्वास्थ्य सेवाओं, तकनीकी कार्यों और अन्य कुशल व्यवसायों से जुड़े युवाओं को अंतरराष्ट्रीय अवसरों के लिए तैयार करने में यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि रोजगार की आवश्यकता केवल कम उम्र के युवाओं तक सीमित नहीं है। बड़ी उम्र के लोग भी इन केंद्रों के माध्यम से रोजगार के अवसर तलाश सकेंगे। इसका अर्थ है कि कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ी सुविधाओं को व्यापक वर्ग तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किया जाएगा।
कई ऐसे लोग होते हैं जिनके पास काम का अनुभव तो होता है, लेकिन आधुनिक तकनीक या बदलती औद्योगिक जरूरतों के अनुसार नए कौशल की आवश्यकता होती है। ऐसे लोगों को भी प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ने की संभावनाएं विकसित की जाएंगी।
इस व्यवस्था के जरिए पहले से काम कर चुके लोगों को अपने कौशल को बेहतर बनाने और नए क्षेत्रों में रोजगार तलाशने का अवसर मिल सकता है।
योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने और युवाओं को उद्योगों की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षित करने के लिए कई प्रतिष्ठित संस्थाओं और औद्योगिक समूहों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) किए गए हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार टाटा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ स्किल्स, अशोक लीलैंड, बीबीजी ग्रुप, पीटीसी इंडस्ट्रीज, सीआईपैट, एशियन डेवलपमेंट बैंक, अवाडा ग्रुप और सीएसआर मिंडा जैसी संस्थाएं इस पहल से जुड़ी हैं।
इन संस्थाओं के अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता, प्रशिक्षण क्षमता और औद्योगिक संसाधनों का लाभ युवाओं को उपलब्ध कराने की योजना है। उद्योगों से जुड़े संस्थानों की भागीदारी से प्रशिक्षण कार्यक्रमों को रोजगार बाजार की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करने में सहायता मिल सकती है।
इसका एक उद्देश्य यह भी है कि प्रशिक्षण के दौरान युवाओं को केवल किताबी जानकारी तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें व्यावहारिक कार्यों, मशीनों, उपकरणों, तकनीकी प्रक्रियाओं और उद्योगों में काम करने के तौर-तरीकों से भी परिचित कराया जाए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि गौतमबुद्धनगर में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) इस केंद्र को विकसित कर रहा है। वहीं गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण भी इस योजना से जुड़ा है।
इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार केंद्रों को विकसित किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औद्योगिक अवसरों और प्रशिक्षित युवाओं के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
लखनऊ, कानपुर और झांसी में भी पहले चरण के तहत केंद्र विकसित किए जाने की योजना है। इन पांच जिलों में शुरुआत के बाद अन्य मंडलों और जिलों तक इसका विस्तार किया जाएगा।
सरकार ने इस योजना के लिए 1,725 करोड़ रुपये की लागत निर्धारित की है। इस राशि के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार से संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास की योजना बनाई गई है।
इसमें प्रशिक्षण केंद्रों की स्थापना, आधुनिक सुविधाओं का विकास, रोजगार से संबंधित व्यवस्थाएं और युवाओं को उद्योगों से जोड़ने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा।
योजना का उद्देश्य प्रशिक्षण और रोजगार के बीच मौजूद अंतर को कम करना है। कई बार युवा किसी विषय में शिक्षा प्राप्त कर लेते हैं, लेकिन उनके पास उद्योगों की मांग के अनुरूप व्यावहारिक कौशल नहीं होता। वहीं कंपनियों को अपनी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित कर्मचारी नहीं मिल पाते। ऐसे में कौशल प्रशिक्षण और प्लेसमेंट को एक ही व्यवस्था से जोड़ने की पहल महत्वपूर्ण हो सकती है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस योजना का व्यापक उद्देश्य उत्तर प्रदेश को ग्लोबल मैनपावर हब के रूप में विकसित करना है। इसके लिए प्रदेश के युवाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा।
आज दुनिया के कई देशों में स्वास्थ्य सेवाओं, तकनीकी कार्यों, निर्माण, विनिर्माण और अन्य क्षेत्रों में कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता है। ऐसे में यदि युवाओं को संबंधित क्षेत्र की भाषा, तकनीक और कार्यप्रणाली के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाए, तो उनके लिए देश और विदेश दोनों जगह रोजगार के अवसर तलाशना आसान हो सकता है।
सरकार इस योजना के माध्यम से प्रदेश के मानव संसाधन को व्यवस्थित तरीके से कौशल आधारित रोजगार से जोड़ने की दिशा में काम करना चाहती है।
उत्तर प्रदेश के अनेक जिलों में ऐसे युवा हैं जो रोजगार की तलाश में बड़े शहरों का रुख करते हैं। कई बार उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि किस क्षेत्र में प्रशिक्षण लेने से उन्हें बेहतर रोजगार मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर, सही मार्गदर्शन और प्रशिक्षण की कमी के कारण उनकी योग्यता का पूरा उपयोग नहीं हो पाता।
जिला स्तर पर स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन विकसित होने से युवाओं को अपने आसपास ही प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था बन सकती है। इससे उन्हें रोजगार के लिए आवश्यक जानकारी, पंजीकरण और प्रशिक्षण प्राप्त करने में सुविधा होगी।
विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को इसका लाभ मिलने की संभावना है। उन्हें अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण प्राप्त करने तथा विभिन्न कंपनियों में उपलब्ध अवसरों की जानकारी हासिल करने का माध्यम मिल सकता है।
इस योजना में प्रत्येक केंद्र पर डेडिकेटेड प्लेसमेंट सेल बनाने की घोषणा की गई है। यह सेल युवाओं के प्रशिक्षण के बाद उन्हें रोजगार से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्लेसमेंट सेल के माध्यम से रोजगार देने वाली कंपनियों और प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले युवाओं के बीच संपर्क स्थापित किया जाएगा। कंपनियों की जरूरतों के अनुसार योग्य उम्मीदवारों की पहचान करने और उन्हें इंटरव्यू तथा चयन प्रक्रिया तक पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जा सकती है।
इससे प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद युवाओं के सामने रोजगार तलाशने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित हो सकेगी। हालांकि वास्तविक परिणाम इस बात पर निर्भर करेंगे कि प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योगों की भागीदारी और प्लेसमेंट व्यवस्था कितनी प्रभावी ढंग से लागू होती है।
योजना के तहत अगले तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों को स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआत में पांच जिलों में केंद्र विकसित किए जाएंगे। इसके बाद सभी 18 मंडल मुख्यालयों तक योजना का विस्तार होगा और फिर प्रत्येक जिले में रोजगार एवं कौशल प्रशिक्षण की सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि मंडल मुख्यालयों के लिए धनराशि की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है। अब जमीन की उपलब्धता के आधार पर निर्माण कार्य आगे बढ़ाया जाएगा।
इस योजना की सफलता के लिए जरूरी होगा कि प्रत्येक जिले में स्थानीय उद्योगों, रोजगार की मांग, युवाओं की शैक्षिक योग्यता और उपलब्ध संसाधनों को ध्यान में रखकर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं।
यदि योजना निर्धारित लक्ष्य और गुणवत्ता के साथ लागू होती है, तो उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार तलाशने की प्रक्रिया में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
हाईस्कूल पास युवाओं को भी उनकी योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण से जोड़ने का अवसर मिलेगा।
रोजगार की तलाश कर रहे युवाओं का पंजीकरण एक व्यवस्थित केंद्र पर हो सकेगा।
युवाओं को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा।
उद्योगों और कंपनियों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने में मदद मिलेगी।
प्रत्येक केंद्र पर प्लेसमेंट सेल के माध्यम से रोजगार से जोड़ने की व्यवस्था होगी।
दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले प्रशिक्षणार्थियों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
विदेशों में रोजगार चाहने वाले युवाओं को संबंधित देश की भाषा और कार्य संबंधी जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अधिक उम्र के लोग भी रोजगार के अवसर तलाशने के लिए इन केंद्रों से जुड़ सकेंगे।
औद्योगिक संस्थानों और प्रशिक्षण देने वाली एजेंसियों की भागीदारी से व्यावहारिक कौशल विकसित करने पर जोर दिया जाएगा।
विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी कौशल विकास योजना की वास्तविक सफलता केवल प्रशिक्षण केंद्रों के निर्माण से नहीं, बल्कि वहां दिए जाने वाले प्रशिक्षण की गुणवत्ता और प्रशिक्षण के बाद युवाओं को मिलने वाले रोजगार से तय होती है।
इसलिए जरूरी होगा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों को समय-समय पर उद्योगों की बदलती आवश्यकताओं के अनुसार अपडेट किया जाए। युवाओं को आधुनिक मशीनों, डिजिटल तकनीक, तकनीकी उपकरणों और व्यावहारिक कार्यों का अनुभव दिया जाए। इसके साथ ही कंपनियों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखना भी आवश्यक होगा।
युवाओं को प्रशिक्षण के दौरान रोजगार से संबंधित आवश्यक जानकारी, साक्षात्कार की तैयारी, संवाद कौशल और कार्यस्थल पर आवश्यक व्यवहारिक कौशल से भी परिचित कराया जाना उपयोगी हो सकता है।
इसके अलावा यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रशिक्षण पूरा करने वाले कितने युवाओं को वास्तव में रोजगार मिलता है, उन्हें किस प्रकार का काम मिलता है और रोजगार मिलने के बाद वे कितने समय तक उस क्षेत्र में काम कर पाते हैं।
लौहपुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर शुरू की गई इस योजना को प्रदेश में कौशल विकास और रोजगार के लिए एक नई संस्थागत व्यवस्था के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण, उद्योगों की जरूरत और रोजगार के अवसरों के बीच सीधा संपर्क स्थापित करना है।
प्रदेश के सभी 75 जिलों तक योजना का विस्तार होने पर जिला स्तर पर युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी सुविधाओं से जोड़ने का एक व्यापक नेटवर्क विकसित हो सकता है।
अब इस योजना का अगला महत्वपूर्ण चरण पांच शुरुआती जिलों में केंद्रों का विकास, मंडल मुख्यालयों के लिए जमीन की उपलब्धता, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का निर्धारण और औद्योगिक संस्थानों के साथ प्रभावी समन्वय स्थापित करना होगा।
कुल मिलाकर, 1,725 करोड़ रुपये की सरदार वल्लभभाई पटेल कौशल प्रशिक्षण एवं रोजगार क्षेत्र विकास योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश में कौशल प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ने की दिशा में व्यापक पहल की गई है। अगले तीन वर्षों में सभी 75 जिलों तक इसके विस्तार का लक्ष्य है। अब इस योजना की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि युवाओं को कितनी गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग मिलती है और प्रशिक्षण के बाद कितने युवाओं को उनकी योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध हो पाते हैं।


