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- 12h ago
नई दिल्ली। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) के बाद मतदाता सूची में नाम छूटने या हट जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। आयोग ने ऐसे पात्र मतदाताओं को दोबारा मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान शुरू करने का निर्देश दिया है। यह अभियान उन राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चलाया जाएगा जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अभियान का दायरा करीब 20 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक है।
इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य उन मतदाताओं की पहचान करना है, जो पहले की मतदाता सूची में दर्ज थे, लेकिन SIR के दौरान तैयार की गई नई सूची में किसी कारण से शामिल नहीं हो सके। इसके साथ ही पहली बार मतदान करने वाले युवाओं को भी मतदाता सूची में शामिल करने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं की पहचान करेंगे, जिनके नाम नई मतदाता सूची में नहीं दिखाई दे रहे हैं। BLO पुराने और नए मतदाता रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि कौन-सा पात्र मतदाता सूची में शामिल होने से छूट गया है।
इस दौरान ऐसे मामलों की भी जानकारी जुटाई जाएगी जिनमें मतदाता का नाम पहले की सूची में मौजूद था, लेकिन SIR के बाद प्रकाशित सूची में नहीं आया। इसके अलावा ऐसे लोग भी इस अभियान के दायरे में होंगे जो पात्र होने के बावजूद अभी तक मतदाता के रूप में पंजीकृत नहीं हो पाए हैं।
आयोग ने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा है कि पात्र मतदाता केवल प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में मताधिकार से वंचित न रह जाए।
इस अभियान में पात्र मतदाताओं का नाम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए Form-6 का इस्तेमाल किया जाएगा। चुनाव आयोग के अनुसार Form-6 नए मतदाता के पंजीकरण के लिए निर्धारित आवेदन है। आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार पात्र भारतीय नागरिक, जिनकी उम्र संबंधित qualifying date पर 18 वर्ष या उससे अधिक हो और जो संबंधित क्षेत्र के सामान्य निवासी हों, मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसका मतलब यह है कि यदि किसी व्यक्ति का नाम SIR के बाद की सूची में नहीं है, लेकिन वह मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए पात्र है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form-6 के माध्यम से अपना नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है।
BLO को ऐसे लोगों तक पहुंचने और उन्हें आवेदन की प्रक्रिया में मदद करने के निर्देश दिए गए हैं।
विशेष अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नए और पहली बार वोट देने वाले युवाओं का पंजीकरण भी है। 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके पात्र युवा अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार मतदाता सूची के लिए qualifying dates 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर हैं। पात्रता पूरी करने वाला व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण करा सकता है।
इससे उन युवाओं को भी मतदाता सूची में शामिल होने का अवसर मिलेगा जो हाल ही में 18 वर्ष के हुए हैं और अभी तक अपना नाम दर्ज नहीं करा पाए हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में BLO की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने क्षेत्र में ऐसे मतदाताओं की पहचान करें जिनके नाम छूट गए हैं और फिर उनके वर्तमान स्टेटस का पता लगाएं।
BLO जरूरत के अनुसार मतदाता से संपर्क करेंगे और पात्र पाए जाने पर Form-6 के जरिए नाम दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध कराएंगे। रिपोर्टों के मुताबिक BLO को करीब एक महीने में यह अभ्यास पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है और प्रत्येक BLO से सप्ताह में लगभग 20 से 25 मतदाताओं को कवर करने की अपेक्षा की गई है।
इस व्यवस्था का मकसद यह है कि केवल उन लोगों के आवेदन का इंतजार न किया जाए जिन्हें अपना नाम छूटने की जानकारी है, बल्कि प्रशासन खुद ऐसे संभावित मतदाताओं तक पहुंचे।
अभियान के दौरान तैयार की जाने वाली सूचनाओं और सूचियों को राजनीतिक दलों के साथ साझा करने की व्यवस्था भी बताई गई है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में हुए बदलाव को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना और राजनीतिक दलों को भी जानकारी उपलब्ध कराना है।
चुनाव आयोग पहले भी मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान राजनीतिक दलों को संबंधित सूचियां उपलब्ध कराने की व्यवस्था करता रहा है। आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों में भी ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद राजनीतिक दलों और आम लोगों को दावे तथा आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिए जाने का उल्लेख है।
SIR के दौरान बड़ी संख्या में नाम नई मतदाता सूची में शामिल नहीं होने को लेकर राजनीतिक विवाद भी सामने आया है। विपक्षी दलों ने बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने का आरोप लगाया है। वहीं चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग स्पष्टीकरण दिए गए हैं।
मीडिया रिपोर्टों में करीब 13 करोड़ नामों के हटने या सूची में शामिल न होने के आंकड़े को लेकर राजनीतिक दावे और सवाल सामने आए हैं। हालांकि, इन आंकड़ों को समझते समय यह अंतर करना जरूरी है कि किसी पुराने रिकॉर्ड में नाम होना, SIR की नई सूची में नाम का न आना और स्थायी रूप से मतदाता सूची से नाम हट जाना—ये सभी एक ही बात नहीं हैं।
इसी वजह से नए अभियान में ऐसे मामलों की पहचान और सत्यापन पर जोर दिया जा रहा है।
मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया में कई तरह के मामले सामने आ सकते हैं। उदाहरण के लिए किसी मतदाता का निधन हो चुका हो, वह दूसरे स्थान पर स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गया हो, किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक जगह दर्ज हो या फिर किसी पात्र मतदाता का नाम प्रक्रिया के दौरान छूट गया हो।
चुनाव आयोग के SIR संबंधी दस्तावेजों में भी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट मतदाताओं जैसे संभावित कारणों की पहचान और उनके रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया का उल्लेख है।
इसलिए किसी नाम का नई सूची में नहीं होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह नाम गलत तरीके से हटाया गया है। प्रत्येक मामले की स्थिति और पात्रता की जांच आवश्यक होगी।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में नाम जोड़ना निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। यदि कोई पात्र व्यक्ति अभी तक मतदाता सूची में शामिल नहीं हुआ है या उसका नाम हट गया है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकता है।
चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर मतदाता पंजीकरण, आवेदन की स्थिति देखने, मतदाता सूची में नाम खोजने और अन्य सेवाओं की सुविधा उपलब्ध है।
मतदाता अपने क्षेत्र के BLO, ERO या संबंधित निर्वाचन कार्यालय से भी जानकारी प्राप्त कर सकता है।
मतदाताओं के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि वे अपनी स्थिति खुद भी जांच सकते हैं। चुनाव आयोग के मतदाता सेवा पोर्टल पर नाम और अन्य विवरण के माध्यम से मतदाता सूची में अपना रिकॉर्ड देखा जा सकता है।
SIR से संबंधित पोर्टल पर अंतिम SIR मतदाता सूची में भी नाम खोजने की सुविधा उपलब्ध है। इसमें राज्य, जिला, विधानसभा क्षेत्र, मतदान केंद्र और अन्य विवरण के आधार पर खोज की जा सकती है।
इसलिए जिन लोगों को संदेह है कि SIR के बाद उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है, वे पहले अपना नाम ऑनलाइन जांच सकते हैं और जरूरत पड़ने पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।
चुनाव आयोग की इस पहल से साफ है कि SIR के बाद छूटे हुए पात्र मतदाताओं की पहचान को अब अलग से प्राथमिकता दी जा रही है। BLO के माध्यम से घर-घर संपर्क करने का उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है जो स्वयं कार्यालय तक नहीं पहुंच पा रहे हैं या जिन्हें यह जानकारी नहीं है कि उनका नाम नई सूची में मौजूद है या नहीं।
साथ ही नए युवा मतदाताओं को जोड़ने से मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
मतदाताओं को चाहिए कि वे चुनाव के समय तक इंतजार करने के बजाय अभी अपनी स्थिति जांच लें। परिवार के सभी सदस्यों के नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं या नहीं, इसकी जांच की जा सकती है।
खास तौर पर जिन लोगों ने हाल में अपना निवास स्थान बदला है, जिनके परिवार में किसी सदस्य की उम्र 18 वर्ष हुई है या जिनका नाम पहले मतदाता सूची में था लेकिन अब दिखाई नहीं दे रहा है, उन्हें अपनी स्थिति जरूर जांचनी चाहिए।
यदि पात्र व्यक्ति का नाम सूची में नहीं है तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत Form-6 के जरिए आवेदन किया जा सकता है। चुनाव आयोग के पोर्टल पर आवेदन और अन्य मतदाता सेवाओं की सुविधा भी उपलब्ध है।
कुल मिलाकर, SIR के बाद मतदाता सूची में छूटे हुए पात्र लोगों को दोबारा जोड़ने के लिए चुनाव आयोग ने अब जमीनी स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया तेज करने का फैसला किया है। इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि BLO द्वारा चिन्हित मामलों का सत्यापन किस तरह होता है और पात्र पाए जाने वाले लोगों के नाम कितनी तेजी से मतदाता सूची में शामिल किए जाते हैं।


