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- 12h ago
नई दिल्ली। पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली को फिल्म ‘दूसरा’ की रिलीज रोकने की मांग पर दिल्ली हाईकोर्ट से तत्काल राहत नहीं मिली है। अदालत ने 23 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए निर्धारित फिल्म के प्रदर्शन पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि, इस मामले में गांगुली के व्यक्तित्व अधिकारों और उनकी पहचान के कथित व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर उठे सवालों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। विवाद की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को निर्धारित किए जाने के बीच फिल्म की रिलीज को लेकर कानूनी लड़ाई चर्चा में आ गई है।
यह मामला केवल एक फिल्म की रिलीज तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में एक तरफ सौरव गांगुली की लोकप्रियता, उनके क्रिकेट करियर से जुड़ी ऐतिहासिक छवियां और प्रस्तावित आधिकारिक बायोपिक के अधिकार हैं, तो दूसरी तरफ फिल्म निर्माताओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और एक काल्पनिक कहानी में ऐतिहासिक खेल घटना के इस्तेमाल का सवाल है। अदालत के सामने यह विवाद ऐसे समय पहुंचा, जब फिल्म की रिलीज की तैयारियां पूरी होने की बात कही जा रही थी।
सौरव गांगुली और प्रोडक्शन हाउस लव फिल्म्स एलएलपी ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर फिल्म ‘दूसरा’ की रिलीज पर रोक लगाने की मांग की थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि फिल्म में गांगुली की पहचान, लोकप्रियता और उनके क्रिकेट करियर से जुड़े ऐतिहासिक पलों का बिना उचित अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल किया जा रहा है।
विवाद का सबसे प्रमुख हिस्सा वर्ष 2002 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक नेटवेस्ट ट्रॉफी जीत से जुड़ा है। लॉर्ड्स के मैदान पर खेले गए इस मुकाबले में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत दर्ज की थी। इसके बाद कप्तान सौरव गांगुली का लॉर्ड्स की बालकनी में अपनी टी-शर्ट उतारकर लहराना भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित दृश्यों में शामिल हो गया।
यह घटना भारतीय क्रिकेट के आत्मविश्वास और आक्रामक तेवरों का प्रतीक बन गई थी। आज भी क्रिकेट प्रशंसक इस पल को भारतीय टीम की ऐतिहासिक जीत की याद के रूप में देखते हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि गांगुली की पहचान और उनके करियर से जुड़ी ऐसी छवियों का व्यावसायिक उपयोग उनके व्यक्तित्व अधिकारों तथा व्यावसायिक हितों को प्रभावित कर सकता है। इसी आधार पर फिल्म की रिलीज रोकने की मांग की गई।
इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू सौरव गांगुली की प्रस्तावित आधिकारिक बायोपिक ‘दादा – द सौरव गांगुली स्टोरी’ भी है। इस फिल्म पर लव फिल्म्स एलएलपी काम कर रहा है।
याचिका के अनुसार, 5 अगस्त 2021 को हुए समझौते के तहत प्रोडक्शन हाउस को गांगुली के जीवन और क्रिकेट करियर पर फिल्म बनाने के विशेष अधिकार दिए गए थे। याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि ‘दूसरा’ में उनकी पहचान और क्रिकेट इतिहास से जुड़े चर्चित दृश्यों के इस्तेमाल से आधिकारिक बायोपिक के व्यावसायिक हित प्रभावित हो सकते हैं।
यहां विवाद का मूल प्रश्न यह है कि किसी चर्चित सार्वजनिक व्यक्तित्व से जुड़ी ऐतिहासिक घटना को किसी दूसरी फिल्म में किस सीमा तक इस्तेमाल किया जा सकता है और किन परिस्थितियों में उसके लिए अनुमति आवश्यक हो सकती है।
हालांकि, इन सवालों का अंतिम उत्तर मामले के तथ्यों, संबंधित समझौतों, इस्तेमाल की गई सामग्री और लागू कानूनी सिद्धांतों के आधार पर ही तय होगा। केवल अंतरिम स्तर पर राहत नहीं मिलने से इन अधिकारों की वैधता या सीमा पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
फिल्म के निर्माताओं ने याचिका में लगाए गए आरोपों का विरोध किया। उनका कहना है कि ‘दूसरा’ सौरव गांगुली की बायोपिक नहीं है, बल्कि एक काल्पनिक लड़की की कहानी है, जो सामाजिक बंदिशों और पारिवारिक रूढ़ियों के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष करती है।
फिल्म की कहानी राजस्थान के एक मध्यमवर्गीय परिवार की लड़की तारा के इर्द-गिर्द घूमती है। वह ऐसे सामाजिक वातावरण में बड़ी होती है, जहां उसकी स्वतंत्रता और व्यक्तिगत फैसलों पर पारिवारिक परंपराओं का प्रभाव दिखाई देता है।
निर्माताओं के मुताबिक, टेलीविजन पर वर्ष 2002 की ऐतिहासिक जीत के बाद सौरव गांगुली को जश्न मनाते देखकर तारा को अपने जीवन में साहस और स्वतंत्रता के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। इस तरह फिल्म क्रिकेट के एक ऐतिहासिक क्षण को महिला स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आत्मसम्मान की कहानी से जोड़ती है।
निर्माताओं का तर्क है कि फिल्म का उद्देश्य गांगुली के जीवन पर आधारित बायोपिक प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक खेल घटना से प्रेरित काल्पनिक कहानी कहना है।
अदालत में फिल्म निर्माताओं की ओर से यह भी दलील दी गई कि फिल्म में इस्तेमाल किए गए संबंधित क्रिकेट फुटेज के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से आवश्यक अनुमति ली गई है।
यह दलील विवाद के महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। किसी क्रिकेट मैच के फुटेज के इस्तेमाल की अनुमति और किसी व्यक्ति की पहचान, छवि या व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े सवाल कानूनी रूप से अलग-अलग मुद्दे हो सकते हैं। इसलिए फुटेज के संबंध में अनुमति होने का दावा अपने आप में विवाद के सभी पहलुओं का समाधान नहीं करता।
मामले में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां किन विशिष्ट दृश्यों और अधिकारों से संबंधित हैं तथा निर्माताओं की ओर से पेश की गई दलीलों और दस्तावेजों का कानूनी महत्व क्या है।
निर्माताओं ने अदालत को यह भी बताया कि फिल्म की रिलीज की तैयारियां काफी आगे बढ़ चुकी हैं। उनके मुताबिक, 100 से अधिक सिनेमाघरों की बुकिंग समेत अन्य व्यवस्थाएं पूरी की जा चुकी थीं। ऐसे में रिलीज के अंतिम समय पर रोक लगाने से फिल्म के प्रदर्शन और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता था।
मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दिनेश भट्ट की पीठ ने शुरुआती स्तर पर सुविधा के संतुलन को फिल्म निर्माताओं के पक्ष में माना। अदालत ने इस चरण पर फिल्म के प्रदर्शन पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।
अंतरिम राहत से जुड़े मामलों में अदालत आम तौर पर यह देखती है कि तत्काल आदेश देने से संबंधित पक्षों को क्या नुकसान हो सकता है, किस पक्ष को अधिक असुविधा होने की आशंका है और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तत्काल हस्तक्षेप कितना आवश्यक है।
इस मामले में फिल्म की निर्धारित रिलीज तारीख नजदीक थी और निर्माताओं की ओर से सिनेमाघरों की बुकिंग सहित तैयारियां पूरी होने की दलील दी गई थी। ऐसे में अदालत ने तत्काल रोक लगाने की मांग स्वीकार नहीं की।
हालांकि, यह आदेश विवाद के अंतिम नतीजे के समान नहीं है। अदालत द्वारा फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक नहीं लगाने का अर्थ यह नहीं है कि गांगुली के व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े सभी दावे खारिज कर दिए गए हैं। इसी तरह, इससे निर्माताओं की सभी दलीलों पर अंतिम मुहर भी नहीं लगती।
मामले में आगे की सुनवाई और अदालत के विस्तृत आदेश से ही विवाद की कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
व्यक्तित्व अधिकार किसी व्यक्ति की पहचान, छवि, नाम, आवाज और अन्य विशिष्ट विशेषताओं के व्यावसायिक इस्तेमाल से जुड़े अधिकारों तथा हितों के संदर्भ में महत्वपूर्ण होते हैं। सार्वजनिक जीवन में चर्चित व्यक्तियों के मामले में ये सवाल अक्सर फिल्मों, विज्ञापनों, डिजिटल सामग्री और जीवनी आधारित परियोजनाओं के संदर्भ में सामने आते हैं।
सौरव गांगुली भारतीय क्रिकेट के चर्चित पूर्व कप्तान हैं। उनके क्रिकेट करियर की कई घटनाएं सार्वजनिक स्मृति का हिस्सा बन चुकी हैं। ऐसे में किसी फिल्म में उनके नाम, छवि या उनसे जुड़ी ऐतिहासिक घटना का इस्तेमाल किस सीमा तक किया जा सकता है, यह कानूनी परीक्षण का विषय बन सकता है।
दूसरी ओर, फिल्मों में ऐतिहासिक घटनाओं और सार्वजनिक रूप से चर्चित प्रसंगों से प्रेरणा लेना भी रचनात्मक अभिव्यक्ति का हिस्सा है। ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति के अधिकारों और फिल्म निर्माताओं की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन का प्रश्न उठता है।
‘दूसरा’ से जुड़ा विवाद इसी व्यापक बहस को सामने लाता है। एक तरफ गांगुली और लव फिल्म्स के व्यावसायिक अधिकारों से संबंधित दावे हैं, वहीं दूसरी ओर निर्माताओं का कहना है कि फिल्म एक अलग काल्पनिक कहानी प्रस्तुत करती है।
अंततः इन दावों का मूल्यांकन अदालत को उपलब्ध तथ्यों, समझौतों और लागू कानून के आधार पर करना होगा।
निर्देशक अभिनय देव की फिल्म ‘दूसरा : इंडियाज अदर फ्रीडम स्ट्रगल’ वर्ष 2002 की नेटवेस्ट ट्रॉफी में भारत की ऐतिहासिक जीत की पृष्ठभूमि पर आधारित एक सामाजिक कहानी है।
फिल्म की मुख्य पात्र तारा राजस्थान के एक मध्यमवर्गीय परिवार में रहती है। वह अपने आसपास की सामाजिक रूढ़ियों और पारिवारिक बंदिशों के बीच अपनी पहचान बनाने की कोशिश करती है। भारतीय क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक जीत और सौरव गांगुली का जश्न उसके भीतर भी स्वतंत्रता और आत्मविश्वास की भावना पैदा करता है।
फिल्म इस विचार को सामने लाती है कि किसी सार्वजनिक घटना का प्रभाव व्यक्ति के निजी जीवन पर भी पड़ सकता है। तारा के लिए लॉर्ड्स का वह दृश्य केवल क्रिकेट का जश्न नहीं, बल्कि अपने जीवन की सीमाओं को चुनौती देने की प्रेरणा बनता है।
प्लाबिता बोरठाकुर, अंकुर विकल और समीधा गुरु फिल्म के प्रमुख कलाकारों में शामिल हैं। फिल्म का निर्माण माशा सजदेह और रोहन सजदेह ने किया है, जबकि नीता शाह सह-निर्माता हैं। कहानी और पटकथा एग्नेलो ओसविन डायस ने लिखी है तथा संगीत राम संपत ने दिया है।
निर्देशक अभिनय देव ने इस फिल्म के जरिए खेल और सामाजिक स्वतंत्रता के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है। यही विषय फिल्म को एक सामान्य क्रिकेट-केंद्रित कहानी से अलग बनाता है।
फिल्म की रिलीज से ठीक पहले सौरव गांगुली की याचिका ने इसे चर्चा के केंद्र में ला दिया। एक ओर फिल्म की कहानी और उसके सामाजिक संदेश को लेकर उत्सुकता थी, वहीं दूसरी ओर ऐतिहासिक क्रिकेट दृश्यों के इस्तेमाल और व्यक्तित्व अधिकारों को लेकर सवाल उठे।
फिल्म निर्माताओं के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि सिनेमाघरों में रिलीज की तैयारियां पूरी होने की बात कही गई थी। रिलीज से ठीक पहले किसी फिल्म पर रोक लगने से वितरण, प्रदर्शन और प्रचार से जुड़ी व्यवस्थाओं पर असर पड़ सकता है।
दिल्ली हाईकोर्ट के तत्काल रोक लगाने से इनकार के बाद फिल्म की प्रस्तावित रिलीज के रास्ते में फिलहाल अंतरिम बाधा नहीं रही। लेकिन व्यक्तित्व अधिकारों और आधिकारिक बायोपिक से जुड़े व्यावसायिक हितों पर उठे सवाल अभी भी मामले का हिस्सा हैं।
यह विवाद फिल्म उद्योग के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐतिहासिक घटनाओं, वास्तविक व्यक्तित्वों और काल्पनिक कथाओं के मेल से तैयार होने वाली फिल्मों में अधिकारों की सीमा को लेकर कई तरह के प्रश्न उठ सकते हैं।
फिलहाल इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाने से इनकार किया है, लेकिन विवाद के सभी पहलुओं पर अंतिम फैसला नहीं सुनाया है।
आगे की सुनवाई में याचिकाकर्ताओं और फिल्म निर्माताओं की दलीलों, संबंधित समझौते, फुटेज के इस्तेमाल से जुड़े तथ्यों और व्यक्तित्व अधिकारों के दावों पर विचार किया जा सकता है। मामले का अंतिम नतीजा अदालत के आगे के आदेशों पर निर्भर करेगा।
इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि सौरव गांगुली के सभी दावे खारिज हो गए हैं या फिल्म निर्माताओं को विवाद के हर पहलू पर अंतिम कानूनी जीत मिल गई है। अभी तक सामने आई स्थिति केवल इतनी है कि तत्काल अंतरिम रोक की मांग स्वीकार नहीं की गई।
सौरव गांगुली और लव फिल्म्स एलएलपी की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला फिल्म ‘दूसरा’ के लिए तत्काल राहत लेकर आया है। अदालत ने 23 अक्टूबर की प्रस्तावित रिलीज पर रोक लगाने से इनकार किया, जिससे सिनेमाघरों में फिल्म के प्रदर्शन का रास्ता फिलहाल खुला रहा।
हालांकि, यह विवाद केवल रिलीज की तारीख का नहीं है। इसके साथ एक चर्चित क्रिकेट व्यक्तित्व की पहचान, ऐतिहासिक घटनाओं के इस्तेमाल, आधिकारिक बायोपिक के अधिकारों और रचनात्मक स्वतंत्रता से जुड़े सवाल भी जुड़े हैं।
फिल्म निर्माताओं का कहना है कि ‘दूसरा’ सौरव गांगुली की बायोपिक नहीं, बल्कि एक लड़की की स्वतंत्रता और आत्मसम्मान की कहानी है। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने गांगुली की पहचान और क्रिकेट करियर से जुड़े दृश्यों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर आपत्ति जताई है।
फिलहाल फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक नहीं लगी है, लेकिन सौरव गांगुली के व्यक्तित्व अधिकारों से जुड़े विवाद का अंतिम नतीजा अभी बाकी है। आगे की न्यायिक कार्यवाही ही यह स्पष्ट करेगी कि इस मामले में दोनों पक्षों के दावों पर अदालत का अंतिम रुख क्या रहता है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


