17 सितंबर से मथुरा में शुरू होगा सेवा संकल्प अभियान, 5 लाख दीपों से जगमगाएंगे धार्मिक स्थल
- 10h ago
नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर रविवार सुबह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से नाश्ते की मेज पर मुलाकात की। इस दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद रहीं। कांग्रेस की ओर से साझा की गई तस्वीरों और दृश्यों में राहुल गांधी और अनवर इब्राहिम के बीच गर्मजोशी और सहज संवाद दिखाई दिया। एक तस्वीर में दोनों नेता हाथ मिलाते और मुस्कुराते हुए नजर आए।
दोनों नेताओं की यह मुलाकात ऐसे समय हुई, जब राजधानी दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का अंतिम चरण चल रहा था और सम्मेलन में शामिल देशों के शीर्ष नेता विभिन्न वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा कर रहे थे। नाश्ते की मेज पर हुई इस अनौपचारिक मुलाकात ने सम्मेलन के औपचारिक कार्यक्रमों से अलग नेताओं के बीच व्यक्तिगत संवाद और आपसी संपर्क की तस्वीर भी सामने रखी।
राहुल गांधी और प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मुलाकात का माहौल काफी सहज नजर आया। सामने आई तस्वीरों में दोनों नेता आमने-सामने बैठकर बातचीत करते दिखाई दिए। राहुल गांधी ने मलयेशियाई प्रधानमंत्री से हाथ मिलाकर अभिवादन किया और दोनों के चेहरे पर मुस्कान नजर आई।
इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं। उनकी मौजूदगी के कारण यह मुलाकात राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी। हालांकि सामने आए दृश्यों में बातचीत के विषयों को लेकर कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन दोनों नेताओं के बीच सौहार्दपूर्ण माहौल साफ दिखाई दिया।
ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय सम्मेलन के दौरान इस तरह के अनौपचारिक संवादों का अपना महत्व होता है। औपचारिक बैठकों के अलावा नेताओं को एक-दूसरे से व्यक्तिगत स्तर पर बातचीत और विचारों के आदान-प्रदान का अवसर मिलता है।
18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों और आमंत्रित देशों के नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, विकास, स्थिरता, ऊर्जा, जलवायु परिवर्तन, बहुपक्षीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
सम्मेलन के अंतिम दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में विभिन्न देशों से आए राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों का स्वागत किया। नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकातों और अनौपचारिक बातचीत का दौर भी जारी रहा।
सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य बदलती वैश्विक परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करना तथा वैश्विक दक्षिण की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक प्रभावी ढंग से सामने रखना रहा।
ब्रिक्स सम्मेलन के बीच राहुल गांधी और मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की नाश्ते पर हुई मुलाकात ने विशेष रूप से ध्यान आकर्षित किया। कांग्रेस की ओर से तस्वीरें साझा किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुलाकात की चर्चा हुई।
राहुल गांधी भारत की संसद में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष हैं, जबकि अनवर इब्राहिम मलयेशिया के प्रधानमंत्री हैं। ऐसे में दोनों नेताओं का एक साथ दिखाई देना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय हलकों के लिए महत्वपूर्ण रहा।
मुलाकात की तस्वीरों में दोनों नेताओं के बीच औपचारिकता के बजाय सहजता नजर आई। हाथ मिलाते और बातचीत करते हुए दोनों नेताओं की तस्वीरें सम्मेलन के दौरान होने वाले अनौपचारिक कूटनीतिक संवाद की झलक देती हैं।
इस मुलाकात में प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस की प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और संसद सदस्य भी हैं।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेताओं के साथ मुलाकातों को अक्सर राजनीतिक एवं सार्वजनिक जीवन के संदर्भ में देखा जाता है। हालांकि इस मुलाकात का स्वरूप अनौपचारिक था, लेकिन ब्रिक्स सम्मेलन जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन की पृष्ठभूमि में इसकी तस्वीरें चर्चा में आ गईं।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत मंडपम में विभिन्न देशों के नेताओं का गर्मजोशी से स्वागत किया। खुले सत्र से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सऊद, वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग, बुरुंडी के राष्ट्रपति एवरिस्ट नदायिशिमिये, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव और युगांडा की उपराष्ट्रपति जेसिका अलुपो सहित कई नेताओं का हाथ मिलाकर अभिवादन किया।
भारत द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में देशों की भागीदारी ने ब्रिक्स के बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को रेखांकित किया। विभिन्न देशों के नेताओं की मौजूदगी ने सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर व्यापक प्रतिनिधित्व दिया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के खुले सत्र का विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता : समावेशी वैश्विक विकास के भविष्य को आकार देना' रखा गया।
इस विषय के माध्यम से दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों के बीच आर्थिक विकास को अधिक समावेशी और टिकाऊ बनाने पर जोर दिया गया। सम्मेलन में यह विचार प्रमुख रहा कि वैश्विक विकास का लाभ केवल कुछ देशों या क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्थाओं की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वित्त, तकनीक, ऊर्जा, स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।
पिछले वर्षों में ब्रिक्स का दायरा लगातार बढ़ा है। नए देशों के जुड़ने के साथ इस समूह की आर्थिक और राजनीतिक भूमिका भी व्यापक हुई है। सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की अधिक प्रभावी भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
भारत लगातार यह बात उठाता रहा है कि वैश्विक संस्थाओं और निर्णय लेने वाली व्यवस्थाओं को वर्तमान विश्व की वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाया जाना चाहिए।
ब्रिक्स के विस्तार से ऊर्जा, व्यापार, निवेश, तकनीक, खाद्य सुरक्षा और विकास जैसे क्षेत्रों में सहयोग की नई संभावनाएं भी पैदा हुई हैं।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र में पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। क्षेत्र में जारी तनाव और संघर्ष के कारण पैदा हुई मानवीय परिस्थितियों पर ब्रिक्स देशों ने चिंता जाहिर की।
घोषणा-पत्र में सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने और ऐसे किसी भी कदम से बचने की अपील की गई, जिससे तनाव और बढ़ सकता है। ब्रिक्स देशों ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहता। इसका प्रभाव ऊर्जा बाजार, वैश्विक व्यापार, परिवहन मार्गों और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है।
नई दिल्ली घोषणा-पत्र में इस्राइल-फलस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए दो-राष्ट्र समाधान के प्रति ब्रिक्स के समर्थन को दोहराया गया। घोषणा-पत्र में फलस्तीन के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थागत समर्थन को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
गाजा में मानवीय संकट को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। घोषणा-पत्र में मानवीय सहायता की आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के पालन की अहमियत रेखांकित की गई।
ब्रिक्स देशों का मानना है कि क्षेत्र में स्थायी शांति के लिए राजनीतिक समाधान की दिशा में गंभीर प्रयास आवश्यक हैं। इस मुद्दे को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता भी महसूस की गई।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण आम नागरिकों पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर सम्मेलन में चिंता सामने आई। संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में मानवीय सहायता, भोजन, दवाइयों और आवश्यक सेवाओं की उपलब्धता अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
ब्रिक्स देशों की ओर से मानवीय सहायता की निर्बाध आपूर्ति और नागरिकों की सुरक्षा को महत्व दिए जाने की बात सामने आई। क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
ब्रिक्स सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी प्रमुख रहे। दुनिया के कई हिस्सों में आर्थिक अनिश्चितता, व्यापारिक तनाव और आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियों के बीच सदस्य देशों के बीच सहयोग को महत्वपूर्ण माना गया।
उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यापार और निवेश के अवसर बढ़ाने तथा आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। विकासशील देशों की आर्थिक जरूरतों को वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अधिक महत्व देने की आवश्यकता भी सम्मेलन के प्रमुख विषयों में रही।
वैश्विक परिस्थितियों के बीच ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा भी महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। ऊर्जा आपूर्ति में किसी भी प्रकार का व्यवधान कई देशों की अर्थव्यवस्थाओं और आम लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकता है।
इसी तरह खाद्य कीमतों और आपूर्ति व्यवस्था में अस्थिरता का सबसे अधिक प्रभाव गरीब और विकासशील देशों पर पड़ता है। ब्रिक्स देशों के बीच कृषि, खाद्य उत्पादन, तकनीक और आपूर्ति व्यवस्था में सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन और सतत विकास की चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। विकासशील देशों के सामने एक तरफ आर्थिक विकास को तेज करने की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटना भी जरूरी है।
भारत ने लगातार यह पक्ष रखा है कि विकासशील देशों की विकास संबंधी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए जलवायु कार्रवाई की रणनीति तैयार की जानी चाहिए। स्वच्छ ऊर्जा, तकनीकी सहयोग और जलवायु वित्त जैसे विषय इस संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।
ब्रिक्स देशों के बीच तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना भी सम्मेलन की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा। डिजिटल तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य तकनीक और आधुनिक औद्योगिक तकनीकों में सहयोग की संभावनाओं पर ध्यान दिया गया।
तकनीक के क्षेत्र में सहयोग से विकासशील देशों को नई क्षमताएं विकसित करने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिल सकती है।
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान वैश्विक दक्षिण के देशों की चिंताओं को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अधिक प्रभावी ढंग से उठाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। विकासशील देशों के सामने मौजूद वित्तीय, तकनीकी और पर्यावरणीय चुनौतियों को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
भारत ने ब्रिक्स के मंच से यह संदेश देने की कोशिश की कि वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में विकासशील देशों की भूमिका और भागीदारी बढ़नी चाहिए।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल बहुपक्षीय बैठकों तक सीमित नहीं रहा। सम्मेलन में शामिल देशों के नेताओं के बीच द्विपक्षीय मुलाकातों का भी दौर चला। इन बैठकों के माध्यम से व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, तकनीक, शिक्षा और सांस्कृतिक सहयोग जैसे क्षेत्रों में संबंधों को आगे बढ़ाने के अवसर मिले।
ऐसे सम्मेलनों के दौरान नेताओं के बीच होने वाली अनौपचारिक मुलाकातें भी कई बार रिश्तों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। राहुल गांधी और अनवर इब्राहिम की नाश्ते पर मुलाकात भी इसी संदर्भ में चर्चा में रही।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा। भारत ने सम्मेलन के माध्यम से वैश्विक दक्षिण, समावेशी विकास, बहुपक्षीय सहयोग और टिकाऊ विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से सामने रखा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी को महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि मौजूदा दौर की वैश्विक चुनौतियों का समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
सम्मेलन के औपचारिक सत्रों के अलावा विभिन्न देशों के नेताओं के बीच होने वाली अनौपचारिक बातचीत ने भी ध्यान आकर्षित किया। ऐसे अवसरों पर नेता औपचारिक एजेंडे से इतर विभिन्न मुद्दों पर विचार साझा करते हैं और व्यक्तिगत स्तर पर भी संबंध मजबूत करते हैं।
नई दिल्ली में राहुल गांधी और अनवर इब्राहिम की नाश्ते पर मुलाकात इसी तरह के अनौपचारिक संवाद का उदाहरण रही। तस्वीरों में दोनों नेताओं के बीच दिखाई दी सहजता और गर्मजोशी ने इस मुलाकात को खास बना दिया।
वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था में तेजी से बदलाव के बीच ब्रिक्स की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। सदस्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं, जनसंख्या और भौगोलिक विविधता के कारण यह समूह वैश्विक दक्षिण की एक महत्वपूर्ण आवाज के रूप में उभर रहा है।
सम्मेलन में इस बात पर जोर रहा कि वैश्विक चुनौतियों का समाधान किसी एक देश के प्रयासों से नहीं बल्कि व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग से संभव होगा। आर्थिक अस्थिरता, जलवायु संकट, स्वास्थ्य आपात स्थिति, क्षेत्रीय संघर्ष और खाद्य-ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति की जरूरत है।
ब्रिक्स सम्मेलन के माध्यम से भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को सहयोग, संवाद और सामूहिक कार्रवाई का संदेश दिया। भारत का जोर रहा कि अलग-अलग देशों के हितों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए साझा समाधान तलाशे जाएं।
सम्मेलन के दौरान सामने आए विचारों से यह भी स्पष्ट हुआ कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ रही है और ब्रिक्स इस बदलाव का एक महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।
राहुल गांधी और अनवर इब्राहिम की नाश्ते की मुलाकात से लेकर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा विभिन्न देशों के नेताओं के स्वागत तक, नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान औपचारिक कूटनीति के साथ-साथ अनौपचारिक संवादों की भी कई तस्वीरें सामने आईं। सम्मेलन के एजेंडे में जहां वैश्विक विकास और आर्थिक सहयोग प्रमुख रहे, वहीं पश्चिम एशिया और फलस्तीन जैसे संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी ब्रिक्स देशों ने अपनी चिंताएं और प्राथमिकताएं स्पष्ट कीं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


