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- 12h ago
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और राजधानी की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की, वहीं दूसरी ओर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी पुलिस मुख्यालय पहुंचीं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक ने एसआईआर को लेकर अपना विरोध तेज कर दिया है। विपक्षी दलों ने 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने का एलान किया है। इस रैली के जरिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी।
अमित शाह के दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचने को राजधानी में जारी विरोध-प्रदर्शनों और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार बैठक का मुख्य विषय दिल्ली की कानून-व्यवस्था की स्थिति थी। गृह मंत्री ने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। दूसरी ओर, इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित रैली को लेकर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में 1 नवंबर को रैली आयोजित करने के लिए कांग्रेस को अनुमति भी दे दी है।
एसआईआर को लेकर जारी विवाद अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गया है। विपक्षी दल इसे मतदाताओं के अधिकार, चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की जवाबदेही से जोड़कर उठा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा जाना चाहिए। वहीं, इस मुद्दे पर विपक्ष की ओर से लगातार विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह शनिवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की और राजधानी की कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों पर चर्चा की। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी पुलिस मुख्यालय पहुंचीं। राजधानी में विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध-प्रदर्शनों की गतिविधियां जारी रहने के बीच यह बैठक हुई।
दिल्ली में राजनीतिक दलों के विरोध-प्रदर्शन, छात्र संगठनों की गतिविधियां और आगामी रैली को देखते हुए कानून-व्यवस्था तथा यातायात प्रबंधन महत्वपूर्ण विषय बने हुए हैं। किसी भी बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान पुलिस के सामने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही सुचारु बनाए रखने की जिम्मेदारी होती है।
गौरतलब है कि एसआईआर के विरोध में दिल्ली में विभिन्न राजनीतिक दलों और छात्र संगठनों की ओर से प्रदर्शन किए जा रहे हैं। शुक्रवार को भी वामपंथी दलों और छात्र नेताओं ने बंगला साहिब गुरुद्वारे के आसपास मार्च निकाला था। इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को देखते हुए दिल्ली यातायात पुलिस ने कुछ मार्गों पर यातायात में बदलाव संबंधी परामर्श भी जारी किया था।
ऐसे में राजधानी में राजनीतिक गतिविधियों के बढ़ने के साथ पुलिस और संबंधित एजेंसियों के लिए सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, अमित शाह और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की बैठक के संबंध में उपलब्ध जानकारी में किसी विशेष प्रदर्शन या रैली को लेकर किए गए अलग-अलग निर्देशों का विस्तृत ब्योरा सामने नहीं आया है।
कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दलों ने एसआईआर के विरोध में 1 नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली आयोजित करने की घोषणा की है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने शनिवार को कहा कि रैली आयोजित करने का निर्णय गठबंधन के सहयोगी दलों से बातचीत के बाद संयुक्त रूप से लिया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों के बीच कोई मतभेद नहीं है।
जेबी माथेर के अनुसार, यह रैली केवल कांग्रेस का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इसमें इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दल भी शामिल होंगे। विपक्षी दल इस आयोजन के जरिए एसआईआर को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखना चाहते हैं। साथ ही, वे चुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग को भी प्रमुखता से उठाएंगे।
माथेर ने कहा कि रैली की तारीख को लेकर कोई विशेष राजनीतिक संदेश नहीं है। विपक्ष पहले से ही इस मुद्दे पर लगातार प्रदर्शन कर रहा है और आगे भी अपने आंदोलन को जारी रखने की तैयारी में है। उनके मुताबिक, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने अलग-अलग स्तर पर कार्यक्रम और संगठनात्मक व्यवस्थाएं की हैं।
कांग्रेस सांसद ने यह भी कहा कि प्रस्तावित रैली में देश के विभिन्न हिस्सों से राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है। विपक्ष का उद्देश्य इस मुद्दे पर अपनी साझा मांग को व्यापक स्तर पर सामने लाना है।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान में रैली आयोजित करने के लिए कांग्रेस को अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किया है। पुलिस के मुताबिक, आयोजन को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए आयोजकों, यातायात पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय किया जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए आवश्यक इंतजाम किए जाने की बात भी कही गई है।
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने रैली के उद्देश्य और विपक्षी एकजुटता को लेकर स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम गठबंधन के सहयोगी दलों के साथ विचार-विमर्श के बाद तय किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया ब्लॉक के भीतर कोई असहमति नहीं है।
माथेर के मुताबिक, विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर लगातार अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। रैली भी इसी आंदोलन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दल मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े सवालों को उठाते रहेंगे और चुनाव प्रणाली में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करेंगे।
उन्होंने प्रस्तावित कार्यक्रम को देशव्यापी राजनीतिक जुटान बताते हुए कहा कि इसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उनका कहना है कि विपक्ष एक मंच पर आकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग करेगा।
माथेर ने यह भी कहा कि इस आयोजन के माध्यम से लोकतंत्र की रक्षा और चुनावी व्यवस्था में निष्पक्षता बहाल करने का संदेश दिया जाएगा। उनके मुताबिक, इस मुद्दे पर विपक्ष की साझा रणनीति है और सहयोगी दल मिलकर आगे की गतिविधियों को अंजाम देंगे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केसी वेणुगोपाल ने भी 1 नवंबर की प्रस्तावित रैली को लेकर विपक्षी एकजुटता पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि एसआईआर और मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी आंदोलन के बीच यह कार्यक्रम विपक्ष की साझा राजनीतिक रणनीति को सामने लाएगा।
वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार और उनकी टीम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर कथित तौर पर 'वोट चोरी' की है। कांग्रेस इस आरोप को अपने राजनीतिक अभियान का प्रमुख हिस्सा बना रही है। हालांकि, यह कांग्रेस का आरोप है और इसे स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
वेणुगोपाल ने कहा कि देशभर से बड़ी संख्या में लोग प्रस्तावित कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। उनके मुताबिक, विपक्ष का संदेश देश के हर हिस्से तक पहुंचाने की कोशिश की जाएगी कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी संबंधित दल एकजुट हैं।
उन्होंने अपने बयान में कहा कि विपक्ष ऐसे लोगों को सत्ता से बाहर करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिन पर कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगा रही है। कांग्रेस नेताओं की ओर से इस्तेमाल किए जा रहे 'वोट चोरी' के नारे को विपक्ष के व्यापक अभियान से जोड़कर देखा जा रहा है।
केसी वेणुगोपाल ने 5 अक्टूबर को ही 1 नवंबर को रैली आयोजित करने की घोषणा की थी। उस समय उन्होंने कहा था कि एसआईआर के विरोध और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर देशव्यापी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर मतदाता सूचियों की समीक्षा और पुनरीक्षण से जुड़ी प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची की जांच की जाती है, ताकि पात्र मतदाताओं का विवरण सही रखा जा सके और सूची में आवश्यक सुधार किए जा सकें। लेकिन इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आए हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और अन्य कथित अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। कांग्रेस का कहना है कि यदि पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटते हैं, तो इससे उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। विपक्षी दल इसीलिए प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
दूसरी ओर, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अद्यतन करना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। किसी भी कथित गड़बड़ी का आकलन करने के लिए संबंधित मतदाता सूची, निर्वाचन आयोग के निर्देशों, आपत्तियों और सुधार की प्रक्रिया की जांच महत्वपूर्ण होती है।
इस विवाद में एक प्रमुख सवाल यह भी है कि मतदाता सूची से नाम हटाने या जोड़ने की प्रक्रिया में शिकायतों का निपटारा किस प्रकार किया जाता है और पात्र मतदाताओं को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए क्या अवसर उपलब्ध होते हैं। विपक्षी दल इन सवालों को राजनीतिक आंदोलन का हिस्सा बना रहे हैं।
इंडिया ब्लॉक की प्रस्तावित रैली में एसआईआर से जुड़े इन्हीं मुद्दों को प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है। कांग्रेस और उसके सहयोगी दल इस आयोजन के जरिए अपनी आपत्तियों को व्यापक स्तर पर सामने रखना चाहते हैं।
एसआईआर के विरोध का असर केवल राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। दिल्ली में छात्र संगठनों और अन्य समूहों की ओर से भी विरोध-प्रदर्शन किए जा रहे हैं। विभिन्न संगठनों ने निर्वाचन आयोग की भूमिका पर सवाल उठाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है।
हाल के दिनों में दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन और मार्च आयोजित किए गए हैं। इन कार्यक्रमों के दौरान यातायात व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने आवश्यक परामर्श जारी किए हैं। सार्वजनिक स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने के कारण सुरक्षा और आवाजाही का प्रबंधन प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण विषय बना हुआ है।
छात्र संगठनों की ओर से कुछ विश्वविद्यालयों में विरोध से जुड़ी गतिविधियां भी सामने आई हैं। जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्र संघ की बहाली और विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन भी जारी रहने की खबरें आई हैं। इन गतिविधियों को एसआईआर के विरोध से अलग विषयों के रूप में देखना जरूरी है, हालांकि इनसे राजधानी में व्यापक विरोध-प्रदर्शनों का माहौल बना हुआ है।
ऐसे माहौल में राजनीतिक दलों के बड़े आयोजनों को लेकर पुलिस और प्रशासन की तैयारियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 1 नवंबर की रैली में कितनी भीड़ जुटेगी, कौन-कौन से नेता शामिल होंगे और कार्यक्रम के दौरान यातायात व्यवस्था किस प्रकार संचालित होगी, ये सभी विषय आयोजन से पहले महत्वपूर्ण रहेंगे।
रामलीला मैदान में 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को लेकर दिल्ली के व्यापारिक संगठनों की ओर से भी चिंता जताई गई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली को 10 नवंबर के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया है।
व्यापारिक संगठन का कहना है कि धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के दौरान दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही और कारोबार बढ़ जाता है। ऐसे समय में किसी बड़े राजनीतिक आयोजन के कारण यातायात में बदलाव या भीड़ बढ़ने से व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।
सीटीआई के अध्यक्ष बृजेश गोयल ने रैली को भाई दूज के बाद आयोजित करने का सुझाव दिया है। संगठन का तर्क है कि त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी का दबाव रहता है और व्यापारियों के लिए निर्बाध आवाजाही महत्वपूर्ण होती है।
इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि प्रस्तावित रैली को लेकर राजनीतिक तैयारियों के साथ-साथ स्थानीय व्यापार और यातायात प्रबंधन से जुड़े सवाल भी सामने आए हैं। हालांकि, रैली की तारीख बदलने को लेकर किसी अंतिम निर्णय की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
इंडिया ब्लॉक की 1 नवंबर की रैली को एसआईआर के विरोध में जारी आंदोलन का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम माना जा रहा है। इससे पहले भी विपक्षी दलों ने मार्च, सार्वजनिक सभाओं और अन्य कार्यक्रमों के जरिए अपनी मांगें उठाई हैं। कांग्रेस नेताओं के बयानों से संकेत मिलता है कि वे इस मुद्दे को केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित रखने के बजाय व्यापक राजनीतिक अभियान के रूप में आगे बढ़ाना चाहते हैं।
विपक्षी दलों के सामने एक ओर अपनी साझा मांगों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों में मतदाता सूची से जुड़े सवालों को सामने लाने की रणनीति भी महत्वपूर्ण होगी। रैली में सहयोगी दलों की भागीदारी और उनके नेताओं के वक्तव्य से विपक्ष के अभियान की दिशा के बारे में अधिक जानकारी मिल सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम में निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया, एसआईआर से जुड़े आधिकारिक स्पष्टीकरण और मतदाता सूची में सुधार के लिए उपलब्ध प्रक्रियाएं भी महत्वपूर्ण रहेंगी। किसी भी आरोप की पुष्टि के लिए संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक तथ्यों की जांच आवश्यक होगी।
फिलहाल, 1 नवंबर की रैली को लेकर कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के सहयोगी दल अपनी तैयारियों में जुटे हैं। दूसरी ओर, दिल्ली में कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक कार्यक्रमों के प्रबंधन को लेकर पुलिस तथा संबंधित एजेंसियों की भूमिका भी अहम बनी हुई है।
कुल मिलाकर, एसआईआर को लेकर जारी विवाद ने राजधानी की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अमित शाह और रेखा गुप्ता की पुलिस मुख्यालय में मौजूदगी, विपक्षी दलों के लगातार प्रदर्शन और रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली ने इस मुद्दे को राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब निगाहें 1 नवंबर के आयोजन, उसमें शामिल होने वाले नेताओं और एसआईआर को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर रहेंगी।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


