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- 12h ago
नई दिल्ली। भारतीय शास्त्रीय नृत्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण एवं संवर्धन को समर्पित राष्ट्रीय शास्त्रीय नृत्य महोत्सव एवं प्रतियोगिता ‘नृत्यकी सीजन 4 – भक्ति, शक्ति और संस्कृति’ का आयोजन बीएमवीके ऑडिटोरियम, ग्रेटर कैलाश-1, दिल्ली में भव्यता के साथ संपन्न हुआ। इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन में देश के 10 से अधिक राज्यों से आए 150 से अधिक कलाकारों, नृत्य साधकों और गुरुओं ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोह लिया। शास्त्रीय नृत्य की विविध शैलियों, भावपूर्ण अभिव्यक्तियों, आकर्षक मुद्राओं और लयबद्ध प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की गहराई, आध्यात्मिक चेतना और कलात्मक समृद्धि का प्रभावशाली प्रदर्शन किया गया।
महोत्सव में कलाकारों ने अपनी साधना, अनुशासन और कला के प्रति समर्पण का परिचय देते हुए भारतीय शास्त्रीय नृत्य की गौरवशाली परंपरा को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। मंच पर दिखाई दी नृत्य की विविधता ने यह संदेश दिया कि भारतीय शास्त्रीय नृत्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान, आध्यात्मिक विचारधारा और ऐतिहासिक परंपराओं को अभिव्यक्त करने वाली महत्वपूर्ण कला विधा है।
नृतकी ग्रुप की चेयरमैन श्रीमती सुमन गुप्ता के आयोजन में संपन्न इस महोत्सव ने देशभर की उभरती नृत्य प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए राष्ट्रीय मंच प्रदान किया। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभाशाली कलाकारों को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ भारतीय शास्त्रीय नृत्य की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और गुरु-शिष्य संबंधों की महत्ता को रेखांकित करना रहा।
आयोजकों की ओर से कार्यक्रम के मार्गदर्शन एवं आयोजन की सफलता के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता तथा दिल्ली सरकार के कला एवं सांस्कृतिक मंत्री श्री कपिल शर्मा के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया गया।
महोत्सव में कला एवं नृत्य जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। समारोह में संगीत कला पुरस्कार एवं उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित कथक नृत्यांगना श्रीमती मोनिसा नायक, नाट्यकलायुवश्री एवं पंडित अर्जुन मिश्रा पुरस्कार से सम्मानित ओडिसी नृत्यांगना डॉ. श्रीमोयी गंगोपाध्याय तथा डॉ. विनय मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इन कला विशेषज्ञों की उपस्थिति ने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया और युवा कलाकारों को अनुभवी व्यक्तित्वों से प्रेरणा प्राप्त करने का अवसर दिया। ऐसे आयोजन वरिष्ठ कलाकारों और नई पीढ़ी के नृत्य साधकों के बीच संवाद एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं। इनके जरिए युवा प्रतिभाओं को कला के प्रति अपनी प्रतिबद्धता मजबूत करने और निरंतर अभ्यास के महत्व को समझने की प्रेरणा मिलती है।
प्रतियोगिता का महत्वपूर्ण पक्ष प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों का मूल्यांकन रहा। इसके लिए अनुभवी कला विशेषज्ञों और नृत्य गुरुओं का निर्णायक मंडल गठित किया गया था। निर्णायक मंडल में गुरु मानसी, भरतनाट्यम नृत्यांगना श्रीमती मानसी चेतना शर्मा, कथक नृत्यांगना सुश्री माधुरी, भरतनाट्यम नृत्यांगना श्रीमती तनुश्री दास, कथक एवं छाऊ नृत्यांगना श्रीमती सुनीता चौधरी तथा संगीत एवं हारमोनियम वादक शुभ नारायण शामिल रहे।
निर्णायकों के अनुभव और कला संबंधी समझ ने प्रतिभागियों को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से कौशल प्रदर्शित करने का अवसर दिया। शास्त्रीय नृत्य में भाव, ताल, लय, तकनीक, शारीरिक संतुलन, मंच पर प्रस्तुति और विषय की अभिव्यक्ति जैसे विभिन्न पक्ष महत्वपूर्ण होते हैं। इस तरह की प्रतियोगिताएं कलाकारों को अपनी क्षमताओं का आकलन करने, अपनी कमियों को पहचानने और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस मंच ने युवा नृत्य साधकों को अपनी प्रतिभा सामने लाने और विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों के साथ अनुभव साझा करने का अवसर दिया। इससे कलाकारों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, परस्पर सीखने की भावना और भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति सम्मान को बढ़ावा मिला।
भारतीय शास्त्रीय नृत्य की परंपरा को आगे बढ़ाने में गुरुओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी नृत्य शैली की बारीकियों, तकनीकी शुद्धता, भावाभिव्यक्ति और अनुशासन को सीखने के लिए वर्षों की साधना और गुरु का मार्गदर्शन आवश्यक होता है। इसी भावना के तहत आयोजकों ने उन गुरुओं के योगदान के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कलाकारों को प्रशिक्षण देकर इस प्रतिष्ठित मंच तक पहुंचने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस अवसर पर डॉ. कामना कौशिक, श्रीमती रश्मि राउत जायसवाल, पंकज श्रीधर, पम्पा अधिकारी दास, श्रीमती स्मिता चक्रवर्ती, गुरु एम. वेंकट उज्ज्वला, गुरु एम. श्री पवानी, श्रीमती मीनाक्षी तमटा, गुरु भवानी सिंह, श्रीमती इंदु सिंह, श्रीमती ऐश्वर्या सिंह, रश्मि जायसवाल, डॉ. मोनिका श्रीवास्तव, सुश्री चेतना वाधवानी तथा श्रीमती किरण शाह सहित कलाकारों को प्रशिक्षित करने वाले गुरुओं के योगदान को सराहा गया।
गुरु-शिष्य परंपरा भारतीय कला-संस्कृति की आधारशिला रही है। इस परंपरा के माध्यम से नृत्य की तकनीक के साथ-साथ कला के प्रति समर्पण, अनुशासन, संवेदनशीलता और सांस्कृतिक मूल्यों का भी हस्तांतरण होता है। इसलिए गुरुओं का सम्मान करना केवल उनके व्यक्तिगत योगदान की सराहना नहीं, बल्कि उस सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान भी है, जिसे वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाते हैं।
‘नृत्यकी सीजन 4’ की थीम ‘भक्ति, शक्ति और संस्कृति’ भारतीय शास्त्रीय नृत्य की व्यापक भावभूमि को सामने लाती है। भक्ति जहां आध्यात्मिक समर्पण और आंतरिक अनुभूति का प्रतीक है, वहीं शक्ति आत्मविश्वास, ऊर्जा और सृजनशीलता का प्रतिनिधित्व करती है। संस्कृति इन दोनों भावों को परंपराओं, मूल्यों और सामूहिक पहचान से जोड़ती है।
शास्त्रीय नृत्य की विभिन्न विधाएं भारत की क्षेत्रीय विविधताओं के बावजूद देश की साझा सांस्कृतिक चेतना को अभिव्यक्त करती हैं। अलग-अलग राज्यों से आए कलाकारों की सहभागिता ने इस विविधता को एक मंच पर प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह स्पष्ट हुआ कि भाषा, क्षेत्र और शैली में अंतर होने के बावजूद भारतीय कला की मूल भावना लोगों को जोड़ने का सामर्थ्य रखती है।
महोत्सव ने यह संदेश भी दिया कि शास्त्रीय नृत्य की परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए केवल मंचीय कार्यक्रम पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि नियमित प्रशिक्षण, गुरुओं का सम्मान, युवा प्रतिभाओं को अवसर और समाज में कला के प्रति जागरूकता भी आवश्यक है।
आज के दौर में पारंपरिक कला विधाओं को नई पीढ़ी से जोड़ना एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आवश्यकता है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से युवा कलाकारों को अपनी साधना प्रदर्शित करने, अनुभवी कलाकारों से प्रेरणा लेने और व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का अवसर मिलता है। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं कलाकारों में आत्मविश्वास विकसित करने के साथ उन्हें अपनी कला के प्रति अधिक गंभीर और अनुशासित बनने के लिए प्रेरित करती हैं।
‘नृत्यकी सीजन 4’ ने इसी दिशा में एक मंच उपलब्ध कराया, जहां कलाकार अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के साथ भारतीय शास्त्रीय नृत्य की विविध परंपराओं से परिचित भी हो सके। आयोजन ने कला, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक संवाद को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया।
आयोजक टीम ने महोत्सव को सफल बनाने में योगदान देने वाले सभी कलाकारों, गुरुओं, अभिभावकों, अतिथियों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। आयोजकों के अनुसार, सभी का विश्वास, समर्पण और सहयोग ही इस आयोजन की सफलता का आधार है।
कलाकारों की भागीदारी, गुरुओं का मार्गदर्शन, अतिथियों की उपस्थिति और अभिभावकों का प्रोत्साहन किसी भी सांस्कृतिक आयोजन को सार्थक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘नृत्यकी सीजन 4’ ने इन सभी पक्षों को एक साझा मंच पर लाकर भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
राष्ट्रीय शास्त्रीय नृत्य महोत्सव ‘नृत्यकी सीजन 4 – भक्ति, शक्ति और संस्कृति’ ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा, गुरु-शिष्य संबंधों की महत्ता और सांस्कृतिक एकता की शक्ति को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया। इस आयोजन का महत्व केवल प्रस्तुतियों और प्रतियोगिता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने कला के संरक्षण, संवर्धन और अगली पीढ़ी तक उसके हस्तांतरण की आवश्यकता को भी सामने रखा।
भारतीय शास्त्रीय नृत्य हमारी सांस्कृतिक पहचान की अमूल्य धरोहर है। इसे सहेजना, कलाकारों को प्रोत्साहित करना, कला गुरुओं के योगदान को सम्मान देना और नई पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। ‘नृत्यकी सीजन 4’ जैसे आयोजन इसी जिम्मेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हैं, जो परंपरा और नई प्रतिभाओं के बीच सेतु बनाते हुए भारतीय कला-संस्कृति की जीवंतता को बनाए रखने का संदेश देते हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


