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धनबाद में भू-धंसान का कहर! देखते ही देखते 5-6 मकान जमींदोज, एक बच्चे की मौत, कई घायल

  • 8 days ago

धनबाद। झारखंड के धनबाद जिले में मंगलवार सुबह भू-धंसान की एक भयावह घटना ने पूरे इलाके को दहला दिया। कतरास-जोगता थाना क्षेत्र के सिजुआ कोलियरी इलाके के 10 नंबर तीन पाटिया में अचानक जमीन धंसने से पांच-छह मकान इसकी चपेट में आ गए। देखते ही देखते कई घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और कुछ मकान पूरी तरह जमींदोज हो गए।

हादसे के वक्त कई लोग अपने घरों के अंदर मौजूद थे। अचानक जमीन धंसने और मकानों के गिरने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घरों के मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका से आसपास के ग्रामीणों ने बिना देर किए राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे में दो बच्चों समेत चार-पांच लोग घायल हुए हैं। घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। अन्य घायलों का इलाज कतरास के एक निजी अस्पताल में चल रहा है।

सुबह अचानक धंसने लगी जमीन

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक घटना सिजुआ काली मंदिर के आसपास के क्षेत्र में सुबह के समय हुई। अचानक जमीन में हलचल महसूस हुई और देखते ही देखते जमीन धंसने लगी।

कुछ ही देर में जमीन पर गहरी और चौड़ी दरारें दिखाई देने लगीं। लोगों को जब तक कुछ समझ आता, तब तक आसपास बने मकानों पर इसका असर पड़ने लगा। कई घरों की दीवारों में दरारें आ गईं और कुछ मकान देखते ही देखते धराशायी हो गए।

जमीन धंसने की आवाज और मकानों के गिरने से इलाके में चीख-पुकार मच गई। लोग अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे। घटना के बाद कुछ देर तक पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

मलबे में फंसे लोगों को ग्रामीणों ने निकाला

हादसे के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीण मौके पर जुट गए। प्रशासनिक सहायता पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने अपने स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया।

लोगों ने मलबा हटाकर उसके नीचे फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया। घायलों को तत्काल अस्पताल भेजा गया। आसपास के लोगों ने भी बचाव अभियान में सहयोग किया।

भू-धंसान की गंभीरता को देखते हुए लोगों ने आसपास के घरों को भी खाली कराना शुरू कर दिया, क्योंकि जमीन में लगातार दरारें बढ़ने से और मकानों के धंसने का खतरा बना हुआ था।

एक बच्चे की इलाज के दौरान मौत

हादसे में घायल हुए लोगों को उपचार के लिए कतरास के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई। बच्चे की मौत की खबर मिलते ही इलाके में मातम पसर गया।

अन्य घायलों का इलाज जारी है। हादसे में घायल लोगों की स्थिति को लेकर परिजनों और स्थानीय लोगों में चिंता बनी हुई है।

घटना ने एक बार फिर कोयलांचल क्षेत्र में जमीन के नीचे चल रही गतिविधियों और उसके ऊपर बसे आबादी वाले इलाकों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जमीन में बढ़ती दरारों से दहशत

भू-धंसान की घटना के बाद सिजुआ इलाके में दहशत का माहौल है। जमीन पर लगातार दिखाई दे रही दरारों को देखकर स्थानीय लोग अपने घरों में रहने से डर रहे हैं।

कई परिवार अपने बच्चों और जरूरी सामान के साथ घरों से बाहर निकल आए हैं। लोगों को आशंका है कि यदि जमीन धंसने का सिलसिला जारी रहा तो आसपास के अन्य मकान भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

घटना के बाद प्रभावित इलाके में लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोग अपने रिश्तेदारों और पड़ोसियों की मदद से सुरक्षित स्थानों पर जाने का प्रयास कर रहे हैं।

सड़क पर उतरे आक्रोशित ग्रामीण

हादसे के बाद ग्रामीणों का गुस्सा भी फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने कतरास-सिजुआ मुख्य मार्ग को जाम कर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

ग्रामीणों का आरोप है कि कोयलांचल के इस क्षेत्र में भू-धंसान की घटनाएं नई नहीं हैं। इसके बावजूद प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त और स्थायी इंतजाम नहीं किए गए हैं।

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने प्रशासन और संबंधित एजेंसियों से तत्काल प्रभावित परिवारों की मदद करने की मांग की है।

राहत और पुनर्वास की मांग

ग्रामीणों ने प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि जिन मकानों को नुकसान पहुंचा है, वहां परिवारों को दोबारा भेजना जानलेवा साबित हो सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित परिवारों को:

  • तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
  • रहने और भोजन की व्यवस्था की जाए।
  • घायलों के इलाज का पूरा इंतजाम किया जाए।
  • मृतक बच्चे के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए।
  • क्षतिग्रस्त मकानों का आकलन कर आर्थिक सहायता दी जाए।
  • प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।
  • इलाके में भू-धंसान के कारणों की तकनीकी जांच कराई जाए।
  • खतरे वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर लोगों को वहां से हटाया जाए।

अवैध कोयला खनन पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल

स्थानीय लोगों ने भू-धंसान के लिए बीसीसीएल क्षेत्र में कथित अवैध कोयला खनन और भूमिगत गतिविधियों को जिम्मेदार ठहराया है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से जमीन के नीचे गतिविधियों के कारण जमीन कमजोर होने की आशंका बनी हुई है।

हालांकि, भू-धंसान के वास्तविक कारण की पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी। स्थानीय लोगों के आरोपों की भी जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि जमीन धंसने के पीछे प्राकृतिक कारण हैं या भूमिगत खनन गतिविधियों का कोई प्रभाव है।

कोयलांचल में भू-धंसान बना गंभीर खतरा

धनबाद लंबे समय से कोयला खनन के लिए जाना जाता है। खनन क्षेत्र के आसपास आबादी बसने के कारण कई जगह जमीन की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है।

ऐसे क्षेत्रों में भू-धंसान की घटनाएं होने पर सबसे बड़ा खतरा उन परिवारों को रहता है जिनके मकान कमजोर जमीन या खनन प्रभावित क्षेत्र में बने हैं। अचानक जमीन धंसने से लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिलता।

सिजुआ की घटना ने एक बार फिर इस समस्या की गंभीरता को सामने ला दिया है।

घर उजड़ने के साथ रोजी-रोटी का संकट

भू-धंसान से प्रभावित परिवारों के सामने सिर्फ मकान खोने का खतरा नहीं है, बल्कि उनके सामने रोजी-रोटी का संकट भी खड़ा हो गया है। जिन घरों में लोग वर्षों से रह रहे थे, वे अचानक रहने लायक नहीं रह गए।

प्रभावित परिवारों को यदि सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित किया जाता है तो उनके सामने बच्चों की पढ़ाई, रोजगार, रोजमर्रा की जरूरतों और नए स्थान पर जीवन शुरू करने जैसी चुनौतियां भी आएंगी।

ग्रामीणों का कहना है कि केवल तत्काल राहत देने से समस्या का समाधान नहीं होगा। जब तक प्रभावित परिवारों के स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक उनके सामने खतरा बना रहेगा।

प्रशासन के सामने कई बड़ी चुनौतियां

घटना के बाद प्रशासन के सामने तत्काल राहत और बचाव के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती है। सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि भू-धंसान का क्षेत्र कितना बड़ा है और क्या आसपास की जमीन भी अस्थिर है।

यदि जमीन में दरारें लगातार बढ़ रही हैं तो प्रभावित क्षेत्र में लोगों की आवाजाही रोकना और जोखिम वाले मकानों को खाली कराना जरूरी हो सकता है।

इसके साथ ही विशेषज्ञों की मदद से जमीन की स्थिति का तकनीकी सर्वेक्षण और प्रभावित मकानों का निरीक्षण भी महत्वपूर्ण होगा।

लोगों को डर, कहीं फिर न धंसे जमीन

हादसे के बाद स्थानीय लोगों के बीच सबसे बड़ा डर यही है कि कहीं जमीन दोबारा न धंस जाए। कई घरों में दरारें दिखाई देने की बात सामने आ रही है। ऐसे में लोग अपने घरों के अंदर जाने से भी डर रहे हैं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि जब तक जमीन की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक प्रभावित क्षेत्र में लोगों को रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

सिजुआ में हुए इस हादसे ने खनन प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर किसी इलाके में जमीन लंबे समय से कमजोर है या वहां भू-धंसान का खतरा मौजूद है, तो वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए पहले से प्रभावी व्यवस्था होना जरूरी है।

स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल हादसे के बाद राहत देने के बजाय संभावित खतरे वाले इलाकों की पहले से पहचान की जाए और वहां रहने वाले परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर बसाया जाए।

अब जांच पर टिकी नजर

फिलहाल पूरे मामले में भू-धंसान के वास्तविक कारण और प्रभावित क्षेत्र के दायरे को लेकर जांच महत्वपूर्ण होगी। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि राहत एवं बचाव कार्य के दौरान कोई दूसरा हादसा न हो।

सिजुआ की घटना में एक बच्चे की मौत और कई लोगों के घायल होने से इलाके में मातम और दहशत दोनों का माहौल है। वहीं, ग्रामीणों का प्रदर्शन यह संकेत दे रहा है कि वे तत्काल राहत के साथ-साथ स्थायी समाधान और पुनर्वास चाहते हैं।

अब देखना होगा कि प्रशासन और संबंधित एजेंसियां प्रभावित परिवारों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाती हैं और भू-धंसान की वजहों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।




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