यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
बड़ौत। चौधरी मैरिज होम में खिदमत सोसायटी एवं जमीअत उलेमा-ए-हिंद के तत्वावधान में आयोजित सद्भावना सम्मेलन में सर्व समाज की उल्लेखनीय भागीदारी रही। सम्मेलन में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समाज के लोगों ने एक मंच पर उपस्थित होकर आपसी भाईचारा, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय एकता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के दौरान स्वतंत्रता आंदोलन में देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया और उनके साझा संघर्ष को देश की गौरवशाली विरासत बताया गया।
सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि भारत की पहचान उसकी विविधता में निहित है। अलग-अलग धर्मों, जातियों, भाषाओं और समुदायों के लोग सदियों से एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहते आए हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी देश की आजादी के लिए विभिन्न समुदायों के लोगों ने कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष किया। ऐसे में वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह इस साझा विरासत को आगे बढ़ाए और समाज में आपसी विश्वास तथा भाईचारे की भावना को मजबूत करे।
कार्यक्रम में सामाजिक एकता के साथ-साथ नशे के खिलाफ भी सामूहिक अभियान चलाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि नशे की समस्या का असर केवल किसी एक परिवार या समुदाय तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे परिवार, युवा पीढ़ी और पूरे समाज पर प्रभाव पड़ता है। इसलिए नशामुक्त समाज बनाने के लिए सभी वर्गों को मिलकर जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।
सम्मेलन के मुख्य अतिथि छपरौली विधायक डॉ. अजय कुमार ने कहा कि देश की आजादी किसी एक समाज या वर्ग के लोगों के संघर्ष का परिणाम नहीं थी, बल्कि विभिन्न धर्मों और वर्गों के लोगों के साझा संघर्ष तथा बलिदान से देश स्वतंत्र हुआ। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में अनेक ऐसे क्रांतिकारी हुए जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
उन्होंने राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान और रोशन सिंह जैसे क्रांतिकारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन स्वतंत्रता सेनानियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया और देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। काकोरी कांड से जुड़े इन क्रांतिकारियों का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है।
डॉ. अजय कुमार ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास यह संदेश देता है कि जब देशहित सर्वोपरि होता है तो धर्म और जाति की सीमाएं पीछे छूट जाती हैं। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को शहीदों के जीवन, संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा लेकर समाज में भाईचारे और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सामाजिक शांति और सौहार्द केवल किसी एक संगठन या वर्ग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने लोगों से एक-दूसरे के प्रति सम्मान और विश्वास बनाए रखने का आह्वान किया।
सम्मेलन में आचार्य कृष्णा विश्रुतपाणि ने स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख करते हुए मुस्लिम स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान की मित्रता तथा देश की आजादी के लिए उनका साझा संघर्ष हिंदू-मुस्लिम एकता की ऐतिहासिक मिसाल के रूप में देखा जाता है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में अनेक क्रांतिकारी अपने व्यक्तिगत और सामुदायिक हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित के लिए एकजुट हुए। बिस्मिल और अशफाक की मित्रता इस बात का उदाहरण है कि देश के बड़े उद्देश्य के सामने धार्मिक और सामाजिक भेद गौण हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि आज भी समाज को स्वतंत्रता आंदोलन की इस साझा विरासत से सीख लेने की जरूरत है। आपसी विश्वास, संवाद और सहयोग से ही समाज में स्थायी सद्भाव कायम किया जा सकता है।
महंत गुरु बिंदुनाथ महाराज ने आजादी के दौर से जुड़े कई प्रसंग सुनाए। उन्होंने कहा कि देश को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए अलग-अलग समुदायों के लोगों ने एक-दूसरे का साथ दिया था। स्वतंत्रता संग्राम की यही साझा भावना आज भी सामाजिक जीवन में आगे बढ़ाने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि समाज की मजबूती आपसी सहयोग से होती है। यदि लोग एक-दूसरे की समस्याओं को समझें और कठिन समय में साथ खड़े हों तो सामाजिक विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने लोगों से छोटे-छोटे मतभेदों को बातचीत और आपसी समझ के माध्यम से दूर करने का आह्वान किया।
अधिवक्ता सोमेंद्र ढाका ने युवाओं को नशे से बचाने को समाज की बड़ी जिम्मेदारी बताया। उन्होंने कहा कि नशे की लत युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ-साथ परिवारों और सामाजिक व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए नशे के खिलाफ जागरूकता को केवल किसी एक संस्था का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामूहिक सामाजिक अभियान बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता आंदोलन में समाज के विभिन्न वर्ग देशहित के लिए एकजुट हुए थे, उसी तरह आज नशे जैसी सामाजिक बुराई के खिलाफ भी सभी समुदायों को एक साथ आना चाहिए।
उन्होंने ‘नशा छोड़ो अभियान’ को व्यापक स्तर पर चलाने की बात कही और युवाओं, अभिभावकों, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों तथा धार्मिक संस्थाओं से इस दिशा में मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।
सम्मेलन में जमीअत उलेमा-ए-हिंद एवं खिदमत सोसायटी की ओर से इस अभियान को समर्थन देने की घोषणा भी की गई। वक्ताओं ने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए केवल रोकथाम ही नहीं, बल्कि उन्हें शिक्षा, खेल, रोजगार, रचनात्मक गतिविधियों और सकारात्मक सामाजिक वातावरण से जोड़ना भी जरूरी है।
सम्मेलन में अधिवक्ता विनोद कुमार जैन, चौधरी रामकुमार सिंह और अधिवक्ता जयवीर सिंह ने भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख किया। वक्ताओं ने कहा कि देश की आजादी के लिए जिन लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया, उनके योगदान को केवल स्मरण करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि शहीदों की कुर्बानी को याद करने का सबसे सार्थक तरीका यह है कि समाज में आपसी विश्वास, सहयोग और भाईचारे को मजबूत किया जाए। यदि समाज में आपसी सद्भाव बना रहेगा तो देश की एकता और सामाजिक व्यवस्था भी मजबूत होगी।
वक्ताओं ने युवाओं से स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को पढ़ने और उससे जुड़े मूल्यों को समझने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को यह जानना चाहिए कि आजादी केवल राजनीतिक परिवर्तन नहीं थी, बल्कि इसके पीछे लाखों लोगों के संघर्ष, त्याग और बलिदान की लंबी कहानी है।
मा. यामीन आजाद और चौधरी उमरजान ने खिदमत सोसायटी की ओर से किए जा रहे विभिन्न सामाजिक कार्यों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामाजिक सेवा का उद्देश्य समाज के जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाने के साथ-साथ लोगों में सहयोग और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी है।
उन्होंने कहा कि समाज में जब अलग-अलग वर्गों के लोग मिलकर सामाजिक कार्य करते हैं तो आपसी दूरी कम होती है और एक-दूसरे को समझने का अवसर मिलता है। ऐसे कार्यक्रम सामाजिक संवाद का माध्यम बन सकते हैं।
कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता अधिवक्ता विनोद कुमार जैन एवं कारी चौधरी साबिर ने की। कार्यक्रम का संचालन डॉ. इरफान मलिक ने किया। संचालन के दौरान वक्ताओं ने स्वतंत्रता आंदोलन, सामाजिक एकता, भाईचारे और नशामुक्त समाज जैसे विषयों को सम्मेलन की मुख्य विचारधारा से जोड़े रखा।
कार्यक्रम के अंत में अधिवक्ता जयवीर सिंह तोमर ने उपस्थित लोगों को हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई एकता, आपसी भाईचारे, सामाजिक सद्भाव और नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया। उपस्थित लोगों ने सामाजिक शांति और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
सम्मेलन में चौधरी रामकुमार सिंह, सुरेश मलिक, दीपक राणा, डॉ. योगेश जिंदल, डॉ. अनुराग मित्तल, कारी वाजिद, मा. सुरेश राणा, कपिल तोमर, हलीम चौधरी, रेनू तोमर, अंकित वीर तोमर, प्रभात सिंह, विक्रांत तोमर, प्रताप चौहान और सौरभ जैन ने अपने विचार रखे।
वक्ताओं ने कहा कि समाज में किसी भी तरह की दूरी या अविश्वास को बढ़ने से रोकने के लिए निरंतर संवाद जरूरी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव केवल मंचों पर दिए जाने वाले संदेशों तक सीमित न रहकर रोजमर्रा के व्यवहार में भी दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि युवा पीढ़ी समाज में सकारात्मक बदलाव की वाहक बन सकती है। युवाओं को शिक्षा, रोजगार, खेल और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के साथ उन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना भी आवश्यक है।
सम्मेलन में मुफ्ती फुरकान, मौलाना जब्बार, मौलाना इरफान, मौलाना वाजिद, मौलाना गुलफाम, चौधरी हुकुम दीन, मा. समीर हसन, अंकुर जैन प्रधान, मा. धर्मेंद्र अग्रवाल, जावेद प्रधान, हैदर मलिक, आरिफ कुरैशी, हाफिज सलाउद्दीन, हाफिज सुबराती, सावेज कुरैशी, आफताब मलिक, सलीम मुल्तानी, असलम मिर्जा, बिलाल अल्वी, इस्लाम मलिक, अनस कुरैशी, हनी मलिक सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
कार्यक्रम में अलग-अलग सामाजिक और धार्मिक पृष्ठभूमि से आए लोगों की मौजूदगी रही। सम्मेलन में मौजूद लोगों ने सामाजिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और नशामुक्त समाज के निर्माण को लेकर सामूहिक प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
चौधरी मैरिज होम में आयोजित इस सम्मेलन का मुख्य संदेश यही रहा कि समाज की मजबूती आपसी विश्वास, सम्मान और सहयोग से होती है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान विभिन्न समुदायों के लोगों ने जिस साझा भावना के साथ देश के लिए संघर्ष किया, उसी भावना को आज सामाजिक जीवन में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।
सम्मेलन में शहीदों की स्मृति, हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई एकता, सामाजिक सद्भाव और नशामुक्ति जैसे विषयों को एक साथ जोड़ते हुए समाज के विभिन्न वर्गों से सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक एकता किसी एक दिन या एक कार्यक्रम का विषय नहीं है। इसके लिए निरंतर संवाद, परस्पर सम्मान और साझा सामाजिक गतिविधियों की जरूरत होती है। इसी तरह नशे के खिलाफ लड़ाई भी सामूहिक जिम्मेदारी है, जिसमें परिवार, समाज, शिक्षण संस्थान, सामाजिक संगठन और युवा सभी अपनी भूमिका निभा सकते हैं।
सम्मेलन के माध्यम से आयोजकों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि देश की साझा विरासत और सामाजिक भाईचारे को मजबूत करने के लिए समाज के सभी वर्गों को एक-दूसरे के साथ खड़े होकर काम करना होगा। शहीदों के बलिदान की स्मृति को सामाजिक एकता और सकारात्मक सामाजिक बदलाव से जोड़कर आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
वरिष्ठ उप-संपादक,( डॉ योगेश कौशिक )।


