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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है। राष्ट्रपति भवन की ओर से 5 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक डॉ. शर्मा की नियुक्ति उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से प्रभावी होगी।
डॉ. दिनेश शर्मा वर्तमान में उत्तर प्रदेश से भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं और राज्यसभा के उपसभापति के पैनल में भी रह चुके हैं। इससे पहले वह उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री के रूप में करीब पांच वर्ष तक जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अब उन्हें केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के प्रशासन की कमान सौंपी गई है।
वह अंडमान और निकोबार के उपराज्यपाल के रूप में एडमिरल डी.के. जोशी (सेवानिवृत्त) का स्थान लेंगे, जिन्होंने अक्टूबर 2017 से इस पद पर जिम्मेदारी संभाली थी।
राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति डॉ. दिनेश शर्मा को अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का उपराज्यपाल नियुक्त करते हुए प्रसन्न हैं। नियुक्ति उनके कार्यालय का कार्यभार संभालने की तारीख से प्रभावी होगी।
नियुक्ति की घोषणा के बाद डॉ. शर्मा ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी केवल एक पद नहीं, बल्कि संविधान, राष्ट्र और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता है। उन्होंने नई जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ निभाने की बात कही।
डॉ. दिनेश शर्मा का राजनीतिक सफर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू होकर प्रदेश सरकार और फिर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचा। राजनीति में आने से पहले वह शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े रहे और लखनऊ विश्वविद्यालय के वाणिज्य विभाग में प्रोफेसर रहे हैं।
उनका अकादमिक जुड़ाव लंबे समय तक विश्वविद्यालय से रहा। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.कॉम और पीएचडी की पढ़ाई की। राजनीति और संगठन के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में उनकी पृष्ठभूमि ने उन्हें अलग पहचान दिलाई।
इसके बाद उन्होंने लखनऊ की स्थानीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और 2006 में लखनऊ के महापौर बने। इसके बाद उन्होंने दोबारा चुनाव जीतकर लंबे समय तक नगर निगम का नेतृत्व किया। उनका कार्यकाल 2006 से 2017 तक रहा।
महापौर के रूप में लंबे कार्यकाल के दौरान डॉ. शर्मा की पहचान भाजपा के प्रमुख शहरी नेताओं में हुई। इसी दौर में उनका संगठनात्मक प्रभाव भी बढ़ता गया।
डॉ. दिनेश शर्मा का भाजपा संगठन में भी लंबा अनुभव रहा है। उन्होंने छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे। बाद में भारतीय जनता युवा मोर्चा के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली।
भाजपा में संगठनात्मक भूमिका निभाते हुए वह पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंचे। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद पार्टी के राष्ट्रीय स्तर पर उनकी भूमिका और मजबूत हुई।
उनकी संगठनात्मक क्षमता को देखते हुए उन्हें अलग-अलग राज्यों में पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी दी गईं। गुजरात में पार्टी प्रभारी के रूप में काम करने के अलावा कई संगठनात्मक और राजनीतिक चयन प्रक्रियाओं में उन्हें पर्यवेक्षक की जिम्मेदारी भी दी गई।
डॉ. दिनेश शर्मा के राजनीतिक करियर का सबसे बड़ा पड़ाव वर्ष 2017 रहा। उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाया गया। वह 19 मार्च 2017 से 25 मार्च 2022 तक उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री रहे।
सरकार में उन्हें कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई। इनमें माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विभाग शामिल थे।
शिक्षा क्षेत्र की पृष्ठभूमि होने के कारण उनके कार्यकाल में उच्च शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी उनकी सक्रिय भूमिका रही।
उत्तर प्रदेश में 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा ने उन्हें राज्य सरकार में दोबारा उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी नहीं दी। इसके बाद उनका राजनीतिक फोकस राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ा।
वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की एक सीट के उपचुनाव के लिए भाजपा ने उन्हें उम्मीदवार बनाया। वह निर्विरोध निर्वाचित होकर राज्यसभा पहुंचे। इसके बाद संसद में भी उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलीं।
डॉ. शर्मा राज्यसभा के उपसभापति के पैनल में भी शामिल रहे। उनकी राज्यसभा सदस्यता की अवधि नवंबर 2026 तक निर्धारित थी, लेकिन उससे पहले ही उन्हें अंडमान और निकोबार का उपराज्यपाल नियुक्त कर दिया गया।
उपराज्यपाल के रूप में डॉ. दिनेश शर्मा के सामने अब एक अलग तरह की प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश है। बंगाल की खाड़ी में इसकी भौगोलिक स्थिति इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, समुद्री संपर्क और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाती है।
इसके अलावा द्वीप समूह में पर्यटन, बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास से जुड़े मुद्दे भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण हैं। आने वाले समय में डॉ. शर्मा को इन क्षेत्रों में केंद्र सरकार की प्राथमिकताओं के साथ स्थानीय आवश्यकताओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
अंडमान और निकोबार में सड़क, हवाई और समुद्री कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना लंबे समय से प्रशासन की प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है। दूर-दराज के द्वीपों तक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाना भी बड़ी चुनौती है।
नए उपराज्यपाल के सामने यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी होगी कि विकास परियोजनाओं का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचे और द्वीपों की संवेदनशील पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए विकास की प्रक्रिया आगे बढ़े।
अंडमान और निकोबार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, समुद्र तटों, जैव विविधता और ऐतिहासिक महत्व के कारण देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। यहां पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन के लिए अहम होगा।
डॉ. शर्मा के सामने पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने, पर्यटकों के लिए कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं में सुधार तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था में पर्यटन की भूमिका बढ़ाने जैसी चुनौतियां भी रहेंगी।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है। हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और समुद्री निगरानी के संदर्भ में इन द्वीपों की भूमिका महत्वपूर्ण है।
ऐसे में नए उपराज्यपाल के कार्यकाल में प्रशासनिक विकास के साथ सुरक्षा और रणनीतिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
डॉ. दिनेश शर्मा के सामने अब उत्तर प्रदेश की राजनीति से अलग एक नए प्रशासनिक क्षेत्र की जिम्मेदारी होगी। एक ओर द्वीपों की भौगोलिक परिस्थितियां और सीमित संसाधन चुनौती हैं, वहीं दूसरी ओर विकास और कनेक्टिविटी की बढ़ती जरूरतें भी प्रशासन के सामने हैं।
स्थानीय आबादी की जरूरतों, पर्यावरण संरक्षण, पर्यटन विकास, रोजगार के अवसर, स्वास्थ्य एवं शिक्षा सुविधाओं और दूरदराज के द्वीपों तक प्रशासनिक सेवाओं की पहुंच बढ़ाना उनके कार्यकाल की महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है।
डॉ. दिनेश शर्मा की राजनीतिक यात्रा को देखें तो यह छात्र संगठन से शुरू होकर नगर प्रशासन, भाजपा संगठन, उत्तर प्रदेश सरकार, संसद और अब उपराज्यपाल के पद तक पहुंची है।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहने के बाद उन्होंने भाजपा युवा मोर्चा में काम किया। लखनऊ के महापौर बने, भाजपा के राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण पद संभाले, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बने और फिर राज्यसभा पहुंचे। अब राष्ट्रपति की नियुक्ति के बाद उनके राजनीतिक और प्रशासनिक सफर में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है।
डॉ. दिनेश शर्मा की नियुक्ति के साथ अंडमान और निकोबार प्रशासन को नया नेतृत्व मिल गया है। राष्ट्रपति भवन की अधिसूचना के अनुसार वह जिस तारीख को पदभार ग्रहण करेंगे, उसी दिन से उनकी नियुक्ति प्रभावी हो जाएगी।
लखनऊ के महापौर से लेकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य तक का लंबा अनुभव अब अंडमान और निकोबार के प्रशासन में उनके काम आएगा। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वह द्वीप समूह के विकास, कनेक्टिविटी, पर्यटन, पर्यावरण और रणनीतिक महत्व से जुड़े मुद्दों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


