यूपी के सभी 75 जिलों में बनेंगे सरदार पटेल स्किल एंड एम्प्लॉयमेंट जोन, युवाओं को एक ही छत के नीचे मिलेगा प्रशिक्षण और रोजगार: सीएम योगी
- 12h ago
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में तकनीक और डिजिटल व्यवस्था का विस्तार केवल सुविधा बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता, सुशासन, वित्तीय समावेशन और आम नागरिक को सीधे सरकारी सेवाओं से जोड़ने का माध्यम भी बन चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार ने तकनीक के इस्तेमाल से उन व्यवस्थागत खामियों को दूर करने का प्रयास किया है, जिनके कारण पहले सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता था।
प्रधानमंत्री गुरुवार को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण का उद्घाटन करने पहुंचे। सुबह करीब 10 बजे यशोभूमि पहुंचने पर केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उनका स्वागत किया। उद्घाटन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देश के डिजिटल और टेलीकॉम क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए भविष्य की तकनीकों और साइबर सुरक्षा से जुड़ी चुनौतियों पर भी विस्तार से बात की।
उन्होंने कहा कि भारत में मोबाइल फोन और इंटरनेट अब केवल संचार के साधन नहीं रह गए हैं। ये शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, सरकारी सेवाओं, डिजिटल भुगतान, कारोबार और रोजगार के महत्वपूर्ण माध्यम बन चुके हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में एआई, 6जी, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और अन्य नई तकनीकों के साथ डिजिटल इकोसिस्टम और व्यापक होगा।
‘मुफ्त की कमाई बंद हुई तो चीखते रहें, मैं लीकेज रोकता रहूंगा’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी योजनाओं में होने वाली कथित लीकेज पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों की मुफ्त की कमाई बंद हो गई, वे मोदी को प्यार करेंगे क्या? उन्होंने कहा कि ऐसे लोग कितना भी चीखते-चिल्लाते रहें, वह व्यवस्था में लीकेज रोकने का काम करते रहेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर पुरानी व्यवस्था बनी रहती तो करीब पांच लाख करोड़ रुपये लीकेज में चले जाते, लेकिन तकनीक और प्रत्यक्ष लाभ अंतरण जैसी व्यवस्थाओं के माध्यम से इसे रोकने का प्रयास किया गया है। उनके अनुसार, अब यह पैसा सही काम में लगाया जा रहा है।
उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का उदाहरण देते हुए कहा कि योजना के तहत अब तक चार लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में जमा किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह राशि हर चार महीने में किसानों तक पहुंचती है और ऐसे लाभार्थियों तक भी सरकारी सहायता पहुंच रही है, जहां पहले इस तरह का पैसा नहीं पहुंच पाता था।
प्रधानमंत्री ने डिजिटल व्यवस्था को पारदर्शिता का माध्यम बताते हुए कहा कि जब सरकारी सहायता सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचती है तो बिचौलियों की भूमिका कम होती है और लाभार्थी को अपनी राशि प्राप्त करने में अधिक सुविधा होती है।
तकनीक ने बदली सरकारी सेवाओं की पहुंच
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत भाषा और भूगोल के लिहाज से बेहद विविध देश है। देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों के सामने अलग-अलग प्रकार की भौगोलिक और प्रशासनिक चुनौतियां रही हैं। मोबाइल और इंटरनेट ने इन दूरियों को काफी हद तक कम करने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि पहले बैंक, अस्पताल और सरकारी कार्यालय मुख्य रूप से शहरों में केंद्रित थे। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को छोटी-छोटी सेवाओं के लिए भी शहरों की यात्रा करनी पड़ती थी। इससे उनका समय और पैसा दोनों खर्च होता था।
आज सरकारी सेवाओं की बड़ी संख्या मोबाइल फोन के माध्यम से उपलब्ध हो रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए नागरिक कई सेवाओं का लाभ अपने घर से ही उठा सकते हैं। इससे प्रशासन और नागरिक के बीच संपर्क का तरीका भी बदल रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल तकनीक ने भारत में सुशासन की अवधारणा को मजबूत किया है। अब सरकारी योजनाओं, भुगतान और सेवाओं को अधिक तेज और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
डीबीटी से लीकेज रोकने का दावा
प्रधानमंत्री ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण यानी डीबीटी का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके जरिए सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि इससे करीब पांच लाख करोड़ रुपये गलत हाथों में जाने से बचे हैं।
उनके अनुसार, डिजिटल भुगतान और आधार आधारित पहचान जैसी व्यवस्थाओं ने सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान और भुगतान प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि तकनीक का सबसे बड़ा लाभ तब है जब उसका उपयोग सामान्य नागरिक के जीवन को आसान बनाने के लिए किया जाए। डिजिटल इंडिया की दिशा में सरकार का प्रयास यही रहा है कि तकनीक केवल बड़े शहरों और संपन्न वर्ग तक सीमित न रहे, बल्कि देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
मोबाइल फोन ने कंटेंट क्रिएशन को दिया नया विस्तार
प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल फोन ने भारत में कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। पहले कंटेंट निर्माण के लिए बड़े उपकरण, स्टूडियो और महंगे संसाधनों की जरूरत होती थी, लेकिन स्मार्टफोन ने आम व्यक्ति को भी वीडियो, फोटो, ऑडियो और अन्य डिजिटल सामग्री बनाने की सुविधा दे दी है।
आज छोटे शहरों और गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए सामग्री तैयार कर रहे हैं। इससे नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा हुए हैं। स्थानीय भाषा में तैयार होने वाली सामग्री ने डिजिटल दुनिया में क्षेत्रीय भाषाओं की भूमिका भी बढ़ाई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती भूमिका के साथ फोन और नेटवर्क की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। आम नागरिक तकनीकी प्रोटोकॉल की भाषा में नहीं सोचता। उसके लिए जरूरी है कि जब फोन आए तो उसे पता चले कि कौन फोन कर रहा है, भुगतान करते समय उसे भरोसा हो कि उसका पैसा सुरक्षित है और उसका डेटा भी सुरक्षित है।
साइबर फ्रॉड की कोई सीमा नहीं
प्रधानमंत्री ने साइबर अपराध को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि साइबर फ्रॉड सीमाओं को नहीं मानता। एक देश में बैठा व्यक्ति दूसरे देश की मदद से तीसरे देश में अपराध कर सकता है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। केवल किसी एक देश के प्रयासों से साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए विभिन्न देशों के बीच सहयोग और एक वैश्विक फ्रेमवर्क की आवश्यकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया को साइबर फ्रॉड रोकने के लिए मिलकर काम करना होगा। डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाओं का विस्तार तभी पूरी तरह सफल हो सकता है, जब नागरिकों को अपनी डिजिटल पहचान, डेटा और धन की सुरक्षा का भरोसा हो।
मोबाइल-इंटरनेट से सुदूर गांवों तक शिक्षा
प्रधानमंत्री ने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी ने शिक्षा, भुगतान और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सेवाओं को जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विशेष रूप से कोविड काल का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौरान डिजिटल माध्यमों ने शिक्षा की निरंतरता बनाए रखने में मदद की।
उन्होंने बताया कि 2022 तक दीक्षा मंच पर 500 करोड़ से अधिक सीखने के सत्र दर्ज किए गए। उनका कहना था कि सरकार का प्रयास ऑनलाइन शिक्षा के विभिन्न माध्यमों के जरिए गरीब और दूरदराज के परिवारों के बच्चों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल कनेक्टिविटी ने शिक्षा के अवसरों का भौगोलिक विस्तार किया है। अब किसी विद्यार्थी का किसी बड़े शहर से दूर होना उसके लिए गुणवत्तापूर्ण डिजिटल सामग्री तक पहुंच में पहले जैसी बाधा नहीं रह गई है।
5जी नेटवर्क का तेजी से विस्तार
प्रधानमंत्री ने देश में 5जी नेटवर्क के विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि देश में 5जी नेटवर्क को सपोर्ट करने वाले 5.5 लाख से अधिक बेस स्टेशन काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत के टेलीकॉम सेक्टर में तेजी से बदलाव आया है। इंडिया मोबाइल कांग्रेस इस परिवर्तन की यात्रा को लगातार प्रदर्शित करता रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2022 में इसी मंच से देश में आधिकारिक तौर पर 5जी सेवा शुरू की गई थी। इसके बाद भारत ने 5जी को केवल तकनीक के रूप में लॉन्च करने से आगे बढ़कर इसे व्यापक आबादी तक पहुंचाने की दिशा में काम किया।
2022 में मोबाइल कांग्रेस से शुरू हुआ 5जी का सफर
प्रधानमंत्री ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के पिछले आयोजनों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मंच भारत के टेलीकॉम ट्रांसफॉर्मेशन का गवाह रहा है। 2022 में इसी मंच से 5जी सेवा की शुरुआत हुई थी।
उन्होंने कहा कि 2023 में इसी मंच से 5जी रोलआउट से आगे बढ़कर रीच-आउट की दिशा पर जोर दिया गया। इसका उद्देश्य तकनीक को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश के अलग-अलग हिस्सों में 5जी कनेक्टिविटी का विस्तार हो चुका है। उन्होंने इसे भारत की डिजिटल क्षमता और टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर में हुए बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण बताया।
इंडिया मोबाइल कांग्रेस के मंच पर अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ यानी आईटीयू की मौजूदगी का भी प्रधानमंत्री ने उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह इस बात का संकेत है कि भारत वैश्विक टेलीकॉम और डिजिटल चर्चा में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।
‘डाटा और फोन सस्ते कैसे हुए, भारत के फोकस को समझेंगे तो पता चलेगा’
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत में मोबाइल डेटा और मोबाइल फोन की कीमतों में कमी की चर्चा अक्सर होती है, लेकिन इसके पीछे की पूरी प्रक्रिया को समझना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में मोबाइल संचार केवल लोगों को जोड़ने का माध्यम नहीं रहा, बल्कि यह सुशासन का महत्वपूर्ण साधन भी बन गया है। डिजिटल विजन के केंद्र में टेलीकॉम कनेक्टिविटी को रखने से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को व्यापक आधार मिला है।
उन्होंने कहा कि सस्ती कनेक्टिविटी के कारण अधिक से अधिक लोग इंटरनेट से जुड़ पाए। इससे डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शिक्षा, ई-कॉमर्स, डिजिटल मनोरंजन, सोशल मीडिया और सरकारी सेवाओं के इस्तेमाल का दायरा बढ़ा।
देश सेवा के 25 वर्ष पूरे होने का भी किया उल्लेख
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की सेवा करते हुए उनके 25 वर्ष पूरे हुए हैं और उन्होंने इसके लिए लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि इंडिया मोबाइल कांग्रेस के भी 10 वर्ष पूरे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें इंडिया मोबाइल कांग्रेस के कई संस्करणों में लोगों के बीच आने का अवसर मिला है। उनके अनुसार, इस आयोजन ने भारत के टेलीकॉम क्षेत्र में हुए बदलाव को करीब से देखा है और देश के डिजिटल सफर की महत्वपूर्ण झलक दुनिया के सामने रखी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जीएसएमए बोर्ड की बैठक के लिए भारत को चुना जाना भी देश के लिए गर्व की बात है।
नाना पाटेकर को याद कर जताया दुख
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान अभिनेता नाना पाटेकर को भी याद किया। उन्होंने उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वह एक बेहतरीन कलाकार थे और उन्होंने अपने अलग-अलग किरदारों के माध्यम से दर्शकों के दिल में जगह बनाई।
प्रधानमंत्री ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि भारतीय सिनेमा में नाना पाटेकर की अपनी विशिष्ट पहचान रही और उनके अभिनय को लंबे समय तक याद किया जाएगा।
1 जीबी डेटा की कीमत 268 रुपये से घटकर करीब 8 रुपये
उद्घाटन सत्र में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जोर तकनीक को देश के अंतिम गांव और हर नागरिक तक पहुंचाने पर रहा है।
सिंधिया के मुताबिक, वर्ष 2014 में भारत में 1 जीबी डेटा की कीमत करीब 268 रुपये थी, जबकि अब यही डेटा करीब 8 रुपये में उपलब्ध है। उन्होंने इसे दुनिया में डेटा की सबसे कम कीमतों में से एक बताया।
उन्होंने कहा कि कम डेटा कीमतों ने इंटरनेट के इस्तेमाल को व्यापक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही पिछले 12 वर्षों में प्रति यूजर डेटा इस्तेमाल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
सस्ते डेटा और स्मार्टफोन की बढ़ती उपलब्धता ने भारत में डिजिटल सेवाओं के विस्तार को गति दी है। अब इंटरनेट का इस्तेमाल केवल सोशल मीडिया या मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा, बैंकिंग, स्वास्थ्य, सरकारी सेवाओं और कारोबार के लिए भी बड़े पैमाने पर हो रहा है।
6जी की तैयारी में जुटा भारत
सिंधिया ने बताया कि भारत 6जी एलायंस में 90 संस्थान जुड़े हुए हैं। इस प्लेटफॉर्म के जरिए दुनियाभर के संस्थानों के साथ सहयोग और साझेदारी पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि 6जी के लिए अभी से अनुसंधान और तकनीकी क्षमता विकसित करना जरूरी है, ताकि भारत भविष्य की संचार तकनीक में केवल उपयोगकर्ता नहीं बल्कि तकनीक विकसित करने वाला देश भी बने।
सिंधिया के अनुसार, भारत 6जी एलायंस से जुड़े संस्थानों ने अब तक 7,700 पेटेंट हासिल किए हैं, जिनमें 4,400 अंतरराष्ट्रीय पेटेंट शामिल हैं। उन्होंने इसे भारत की बढ़ती तकनीकी और शोध क्षमता से जोड़ते हुए भविष्य के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ है इस बार की थीम
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 की थीम ‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ यानी ‘बिना सीमाओं के विस्तार’ रखी गई है। आयोजन का उद्देश्य भारत के टेलीकॉम, डिजिटल कनेक्टिविटी और तकनीकी क्षेत्र में हुए विकास को दुनिया के सामने रखना है।
इस आयोजन में सरकार, टेलीकॉम कंपनियां, तकनीकी विशेषज्ञ, स्टार्टअप, निवेशक, शोधकर्ता और वैश्विक कंपनियां एक मंच पर आ रही हैं।
थीम के जरिए इस बात पर जोर दिया जा रहा है कि डिजिटल तकनीक की पहुंच अब केवल मोबाइल संचार तक सीमित नहीं है। यह उद्योग, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, स्मार्ट सिटी, मनोरंजन और रोजमर्रा की जिंदगी के लगभग हर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है।
100 से ज्यादा देशों से भागीदारी
आयोजकों के अनुसार, इस बार इंडिया मोबाइल कांग्रेस में 100 से ज्यादा देशों के 1.5 लाख से अधिक प्रतिभागियों के पहुंचने की उम्मीद है। आयोजन में 500 से अधिक साझेदार और प्रदर्शक, 600 से अधिक स्टार्टअप और 900 से ज्यादा विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं।
कार्यक्रम में 2,000 से ज्यादा तकनीकी उपयोग के उदाहरण और 120 से अधिक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इससे प्रतिभागियों को वर्तमान तकनीकों के साथ-साथ भविष्य की तकनीकी संभावनाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
इस बार मोबाइल और इंटरनेट की पारंपरिक चर्चा से आगे बढ़कर स्मार्ट मोबिलिटी, स्टेडियम अनुभव, औद्योगिक रोबोटिक्स और परिवहन तकनीक जैसे क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
700 से ज्यादा निवेशक बैठकें प्रस्तावित
इंडिया मोबाइल कांग्रेस में तकनीकी प्रदर्शनों के साथ निवेश और कारोबार पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान 700 से ज्यादा निवेशक बैठकें प्रस्तावित हैं।
इन बैठकों का उद्देश्य तकनीकी कंपनियों, स्टार्टअप और निवेशकों के बीच सहयोग बढ़ाना है। भारत में तेजी से बढ़ रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए ऐसे आयोजन निवेश, तकनीकी साझेदारी और वैश्विक बाजार तक पहुंच के अवसर उपलब्ध करा सकते हैं।
नई तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप को बड़े उद्योग समूहों और निवेशकों के सामने अपने उत्पाद तथा कारोबारी मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
6जी, एआई और साइबर सुरक्षा की तकनीकें होंगी प्रदर्शित
चार दिन चलने वाले आयोजन में तकनीक के कई नए प्रयोग और उत्पाद प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इनमें 6जी, एआई आधारित नेटवर्क, साइबर सुरक्षा, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, क्लाउड और एज कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर तथा डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी तकनीकें शामिल हैं।
स्टार्टअप और नई तकनीक विकसित करने वाली कंपनियां अपने उत्पाद और विचार प्रदर्शित करेंगी। इससे उद्योग और निवेशकों को भविष्य की तकनीकी दिशा को समझने में मदद मिल सकती है।
एआई से 6जी तक दिखेगी भारत की टेक ताकत
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 में एआई नेटवर्क, 6जी, डिजिटल प्लेटफॉर्म, सेल ब्रॉडकास्ट, सॉवरेन क्लाउड, टेराहर्ज कम्युनिकेशन और इंटीग्रेटेड सेंसिंग जैसी तकनीकों के डेमो प्रस्तुत किए जा रहे हैं।
एआई और टेलीकॉम के बीच तालमेल आने वाले वर्षों में संचार नेटवर्क की क्षमता को बदल सकता है। नेटवर्क को अधिक स्मार्ट, स्वचालित और जरूरत के अनुसार अनुकूल बनाने में एआई की भूमिका बढ़ सकती है।
वहीं 6जी को लेकर अभी से अनुसंधान और परीक्षण पर जोर दिया जा रहा है। इसके जरिए अधिक तेज कनेक्टिविटी, कम लेटेंसी और नई डिजिटल सेवाओं के लिए आधार तैयार करने की कोशिश हो रही है।
स्मार्ट मोबिलिटी और औद्योगिक रोबोटिक्स पर भी फोकस
इस बार इंडिया मोबाइल कांग्रेस में स्मार्ट मोबिलिटी और औद्योगिक रोबोटिक्स को भी शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि टेलीकॉम तकनीक का इस्तेमाल अब केवल फोन और इंटरनेट कनेक्शन तक सीमित नहीं रहने वाला है।
कनेक्टेड वाहन, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट सिस्टम, औद्योगिक ऑटोमेशन और रोबोटिक्स में तेज और विश्वसनीय नेटवर्क की भूमिका बढ़ेगी। भविष्य के कारखानों और परिवहन प्रणालियों में मशीनों के बीच रियल-टाइम कम्युनिकेशन महत्वपूर्ण हो सकता है।
सॉवरेन क्लाउड और डेटा सुरक्षा भी महत्वपूर्ण
डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ डेटा की सुरक्षा और नियंत्रण का सवाल भी महत्वपूर्ण होता जा रहा है। इसी संदर्भ में सॉवरेन क्लाउड और सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी तकनीकों पर ध्यान दिया जा रहा है।
सरकार और उद्योग के सामने चुनौती यह है कि डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ नागरिकों के डेटा की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए। प्रधानमंत्री ने साइबर फ्रॉड और डेटा सुरक्षा का उल्लेख करते हुए इसी व्यापक चुनौती की ओर संकेत किया।
टेलीकॉम से डिजिटल अर्थव्यवस्था तक भारत का विस्तार
इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 की चर्चा से यह स्पष्ट होता है कि भारत का टेलीकॉम क्षेत्र अब केवल मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। यह डिजिटल अर्थव्यवस्था के कई क्षेत्रों का आधार बन चुका है।
सस्ते डेटा, व्यापक 5जी नेटवर्क, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन शिक्षा, ई-गवर्नेंस, एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और स्टार्टअप इकोसिस्टम ने एक-दूसरे से जुड़े डिजिटल वातावरण का निर्माण किया है।
आने वाले वर्षों में 6जी, एआई और सैटेलाइट कम्युनिकेशन जैसी तकनीकों के विस्तार से इस इकोसिस्टम के और व्यापक होने की संभावना है।
कनेक्टिविटी से समावेशन तक
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में बार-बार इस बात पर जोर दिया कि तकनीक का वास्तविक उद्देश्य आम नागरिक के जीवन को आसान बनाना होना चाहिए। भारत जैसे विशाल और विविध देश में डिजिटल कनेक्टिविटी सामाजिक और आर्थिक समावेशन का महत्वपूर्ण साधन बन सकती है।
यदि दूरदराज के गांवों में रहने वाला विद्यार्थी ऑनलाइन शिक्षा प्राप्त कर सकता है, किसान डिजिटल माध्यम से सरकारी सहायता हासिल कर सकता है, ग्रामीण नागरिक मोबाइल के जरिए बैंकिंग सेवा का इस्तेमाल कर सकता है और छोटा व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकता है, तो तकनीक आर्थिक अवसरों का दायरा बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कुल मिलाकर, इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 भारत के डिजिटल और टेलीकॉम परिवर्तन की मौजूदा स्थिति के साथ-साथ भविष्य की तकनीकी दिशा का भी बड़ा मंच बनकर सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जहां डिजिटल कनेक्टिविटी, डीबीटी, सस्ती डेटा सेवाओं, 5जी और साइबर सुरक्षा के महत्व को रेखांकित किया, वहीं केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भारत में डेटा कीमतों में कमी, 6जी अनुसंधान और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार का उल्लेख किया।
‘स्केल विदाउट बाउंड्रीज’ की थीम के तहत आयोजित यह आयोजन यह संदेश देता है कि भारत अब केवल मोबाइल और इंटरनेट के विस्तार की अगली सीढ़ी पर नहीं है, बल्कि एआई, 6जी, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, रोबोटिक्स, स्मार्ट मोबिलिटी और सुरक्षित डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के नए दौर की तैयारी कर रहा है। आने वाले समय में भारत की तकनीकी क्षमता कितनी तेजी से वैश्विक स्तर पर अपनी जगह बनाती है, इसमें ऐसे मंचों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।
विशेष- संवाददाता, (प्रदीप जैन)।


